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Blog: नूतन ( उद्गार)

Blogger: annapurna
( 1 ) दो पुष्प खिले हर्षित हृदय लीं बलैयां ( 2 )धीरे धीरे बढ़ चले राह पकड़ी बचपन डगर ( 3 )मार्ग दुर्गम वे थामे अंगुली आशित जीवन ( 4 )हुये बड़े बीता बचपन डाले गलबहियाँ ( 5 )संस्कार भरे करते मान सम्मान न कभी अपमान ( 6 )जीवन बदला खुशियाँ आईं सुखद क्षण ( 7 ) ... Read more
clicks 230 View   Vote 0 Like   3:55pm 24 Feb 2014 #
Blogger: annapurna
कुछ त्रिपदियाँ ...शिरोमणि कहलाने वाले !!क्या पीड़ा हर लोगे तुम ... क्या व्यथाओं को समझ सकोगे तुम ?इन चिथड़ों मे  जीवन हैचिथड़ों की हो रही चिन्दियाँक्या ये  चिन्दियाँ समेट सकोगे तुम  ?भग्न हो चुका मन प्राण हैखो रही आशाओं की रशमियांक्या रश्मियां प्रेषित कर सकोगे तुम ?पी र... Read more
clicks 201 View   Vote 0 Like   9:24am 20 Feb 2014 #
Blogger: annapurna
ओबीओ लखनऊ चैप्टर का पादप कुछ  अधिक पुष्पित पल्लवित हो  इस आशा के साथ कानपुर की सर जमीं पर इसका आयोजन किया गया । मेरी और कानपुर की ही ओबीओ की सदस्या आ0 मीना जी की  हार्दिक अभिलाषा थी कि एक काव्य गोष्ठी का आयोजन हमारे शहर कानपुर मे भी किया जाय जिसे लखनऊ चैप्टर के संयोजक ... Read more
clicks 229 View   Vote 0 Like   5:37pm 13 Feb 2014 #
Blogger: annapurna
अतुकांतबागों बहारों और खलिहानों मेबांसो बीच झुरमुटों मेमधुवन और आम्र कुंजों मेचहचहाते फुदकते पंछीगाते गीत प्रणय केश्यामल भौंरे और तितलियाँफुली सरसों , कुमुद सरोवरनाना भांति फूल फूलतेप्रकृति की गोद ऐसीफलती फूलती वसुंधरा वैसीक्या कहूँ किन्तु कुम्हलायाहै मन का स... Read more
clicks 199 View   Vote 0 Like   6:21pm 11 Feb 2014 #
Blogger: annapurna
शाख पर लगा अलौकिक सौंदर्य पर इतराता वसुधा को मुंह चिढ़ाता मुसकुराता इठलाता मस्त बयार मे कुलांचे भरता गर्वीला पुष्प !.......... सहसा !!!कपि अनुकंपा से धराशायी हुआ कण कण बिखरा अस्तित्व ढूँढता उसी धरा पर भटकता यहाँ से वहाँ उसी वसुधा की गोद मे समा जाने को आतु... Read more
clicks 195 View   Vote 0 Like   12:30pm 25 Jan 2014 #
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जाग रे मन ! कब तक यूं ही सोएगाजग मे मन भरमाएगा अब तो जाग रे मन !!1)सत्कर्मों की माला काहे न बनाईपाप गठरिया है  सीस  धराई  जाग रे !!!! 2)माया औ पद्मा कबहु काम न आवे नात नेवतिया साथ कबहु न निभावे जाग रे !!!! 3)दिवस निशि सब विरथा ही गंवाई प्रीति की रीति अबहूँ  न निभाई जाग रे !!!!! 4)सारा ... Read more
clicks 197 View   Vote 0 Like   2:15pm 16 Jan 2014 #
Blogger: annapurna
मेरी कविताओं के झरोखे से ................लाड़ली चली !!!बाबा की दहलीज लांघ चलीवो पिया के गाँव चलीबचपन बीता माँ के आंचलसुनहरे दिन पिता का आँगनछूटे संगी सहेली बहना भैयामिले दुलारी को अब सईंयामीत चुनरिया ओढ़ चली बाबा की ...........माँ की सीख पिता की शिक्षादुलार भैया का भाभी की दीक्षासखियों ... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   2:31pm 25 Dec 2013 #
Blogger: annapurna
मै नारी हूँ ................मै दुर्गा , अन्नपूर्णा मै हीमै अपूर्ण  , सम्पूर्णा मै ही ।मै उमा , पार्वती मै ही ,मै लक्ष्मी , सरस्वती मै ही ।मै सृजक , संचालिका मै ही ,मै प्रकृति , पालिका मै ही ।मै रक्षिका , संहारिका मै ही ,मै धारिणी ,   वसुंधरा मै ही ।मै जननी , जानकी मै ही ,मै यशोदा , देवकी मै ... Read more
clicks 179 View   Vote 0 Like   6:15pm 15 Dec 2013 #
Blogger: annapurna
आज पाश्चात्य संस्कृति मे रच बस रहे युवाओं के लिए आजादी का मतलब सिर्फ अपनी आजादी है। वे इस बात से बिलकुल बेखबर हैं की आज यदि हम आजाद है तो उसके पीछे न जाने कितने महान लोगों की शहादत जुड़ी हुई है । कई नाम जिन्हे  हम जानते है वे नेतृत्व कर रहे थे उनही को  नाम मिल गया , जिनको... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   6:04pm 28 Nov 2013 #
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नवयुवा तुम्हें जागना होगा उद्घोष फिर सुनना होगा नींद न ऐसी सोना तुम कर्म न ऐसे करना तुम जिससे मान भंग हो तिरंगे की शान कम हो सूर्य सम चमकना होगा नवयुवा ...............देश की पुकार सुनो माँ की गुहार सुनो समय की ललकार सुनो बुराई का प्रतिकार करो कंधों को मजबूत बनाना होगा उद्घोष फिर ... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   6:03pm 28 Nov 2013 #
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आखेटक !!क्या तुम्हें आभास है ?कि तुम! मृगमरीचिका की   जिजीविषा मेकिसी का आखेट करजीवन यापन की मृगया मेभटकते हुये मदहोश हो !आखेटक !क्या तुम्हें आभास है ?आखेटक को संजीवनी नहीं मिलतीमन की तृष्णा की खातिरअनन्य मार्गदर्शी का भीविसस्मरण कर दिया हैसृजनमाला को विस्फारित ने... Read more
clicks 117 View   Vote 0 Like   2:23pm 23 Nov 2013 #
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अतुकांत कविता - हम आजाद हैं वो पंख फड़फड़ाते पंछी उड़ते विस्तृत आकाश सुंदर जगत विचरते चुपके से कह गए हम आजाद हैं ....माँ का आंचल थामे मचले अंगुली पकड़े तेरा प्यार है मेरा संबल तेरी ममता की छांव बच्चा बोला हम आजाद है...घुमड़ते बादल का टुकड़ा भरे भीतर नीर उड़ता ज... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   7:01am 16 Nov 2013 #
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रेत का घरौंदा  समंदर किनारे रेत पर चलते चलते यूं ही अचानक मन किया चलो बनाए सपनों का सुंदर एक घरौंदा वहीं रेत पर बैठ समेट कर कुछ रेत कोमल अहसास के साथ बनते बिगड़ते राज के साथ बनाया था प्यारा सा सुंदर  एक घरौंदा................ वही समीप बैठ कर बुने हजारों सपनो के ताने बाने जो उसी र... Read more
clicks 129 View   Vote 0 Like   3:54am 15 Nov 2013 #
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नव युवा हे ! चिर युवा तुम उठो ! नव युग का निर्माण करो ।जड़ अचेतन हो चुका जग,तुम नव चेतन विस्तार करो । पथ भ्रष्ट लक्ष्य विहीन होकर न स्व यौवन संहार करो । उठो ! नव युग का निर्माण करो ............... दीन हीन संस्कार क्षीण अब तुम संस्कारित युग संचार करो ।अभिशप्त हो चला है भारत !!उठो ! नव भार... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   5:56pm 9 Nov 2013 #
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दीपोत्सव या दीपावली ,भारतीय परंपरा के अनुसार व्रत ,पर्व एवं उत्सवों को शुभ तिथि शुभ वार और शुभ नक्षत्र मे मनाने का विधान है । इनकी प्रमुखता को मान्यता देते हुए इनको प्रस्तुत किया गया जो आज भी जन मानस मे प्रचिलित है । भारत मे मनाए जाने वाले व्रत पर्व एवं त्योहार दो तरह के ... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   4:09am 2 Nov 2013 #
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घुट घुट के जीता मरता है ये आम आदमी ,अब दिन रात तड़पता है ये आम आदमी । कब तलक यूं ही मरेगा ये आम आदमी ,एक दिन तो जी उठेगा ये आम आदमी ।दर्दे हुकूमत अब जरा मनमोहन से पूछिये ,लगता है गले आ पड़ा है आम आदमी ।तरकस मे तीर है न तलवार म्यान मे ,अब अनशन किए पड़ा है आम आदमी ।लहरातीं खेतियाँ ... Read more
clicks 189 View   Vote 0 Like   3:39pm 30 Oct 2013 #
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मेरे  प्रियवर .............स्नेह सिक्त हृदयतुम रहते  प्राण बनजीवन की अविरल धारातुम रहते अठखेलियाँ बनतुम मेरे प्रियवर.............मद युक्त नयनतुम रहते काजल रेख बनशीश पर चमकतेयों सिंदूरी रेख बनतुम मेरे प्रियवर.....................तुमसे ही है जीवनहर शाम सिंदूरीफूलों सा महके सिंगारसंग तुम्ह... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   4:01pm 24 Oct 2013 #
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मेरे मन मीत तेरा करूँ इंतजार कर सोलह सिंगार । चाँद के आने से पहले तू आना भर मन मे प्यार ॥ मेरी सभी महिला मित्रों को करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनायें । ... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   3:17am 22 Oct 2013 #
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मेरी नई कविता आपकी सेवा मे ।क्या कहूँ ...............आहत मन की व्यथाकैसे सुनाऊँ.................मन की व्याकुलता अश्रु और व्याकुलतासाथी है परस्परआकुल होकर आँख भीजब छलक जाती हैगरम अश्रुओं का लावाकपोलों को झुलसा जाता हैन जाने कब कैसे ...................पीर आँखों की राहचल पड़ती है बिना कुछ कहेआकुल मन ... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   3:30pm 21 Oct 2013 #
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आशीर्वाद !! वह कोई नब्बे के आस पास वृदधा रही होगी जो सामान सहित अपने ही घर के बाहर बैठी थी न जाने क्या अँड बंड बड़बड़ा रही थी । लोग सहनुभूति से देखते और और चल देते किसी ने हिम्मत भी की उससे जानने की तो वह ठीक ठीक नहीं बता पा रही थी । पता नहीं क्रोध की अधिकता थी या ममता और दुःख ... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   7:18pm 10 Oct 2013 #
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एक लघु कविता आपके समक्ष । माँ !!नेह ममता लाड़ दुलार अविस्मरण रूप स्नेह की गागर छलकाती । आँखों मे असंख्य अबूझ स्वप्न स्नेह सिक्त जल धारा बरसाती ।होती ऐसी माँ !!!.................. अन्नपूर्णा बाजपेई... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   2:33pm 4 Oct 2013 #
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स्वच्छ गगन---------------स्वच्छ गगन मेसुवर्ण सी धूपभोर की किरण नेआ जगाया ।अर्ध उन्मीलित नेत्रउनींदा  मानसआलस्य पूरितयह तन मनपंछियों ने राग सुनाया । कामिनी सी कमनीयसौंदर्य की प्रतिमानैसर्गिक छटाफैली चहुं ओरमुसकाते सुमनझूमते  तरुवरनव जोश जगाया ।हुआ प्रफुल्लित ये मनतो... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   7:13pm 3 Oct 2013 #
Blogger: annapurna
बच्चों के जीवन निर्माण मे माता पिता की भूमिका शैशव यौवन का जनक है ,इसलिए बच्चों को सही शिक्षा सही समय पर  मिले इस बात का पूरा दारोमदार माता पिता पर होता है । वे ही अपने बच्चे के मार्ग दर्शक होते है । आज हमारे बच्चों को सुविधाएं सहजता से प्राप्त है जो हम सबके जमाने मे दुर... Read more
clicks 224 View   Vote 0 Like   2:37pm 2 Oct 2013 #
Blogger: annapurna
सपने !!!!!!!सुहाने से सँजोये थे जो मन के भीतर आवरणो की परतों मे सँजोया और सींचा था नव पल्लव देख मन झूम उठा था खुशी के अंकुर भी फूट पड़े थे उड़ान की आकांक्षा मे पंखों को कुछ फड़फड़ा कर ज्यों हुआ उड़ने को आतुर !!!!आह !!पंख कतर दिये किसने ?धराशायी हुआ स्वर भी बाधित हुआ जख्म लगेअभिला... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   6:57pm 27 Sep 2013 #
Blogger: annapurna
जीवन गाथा – आजादी के मूक योद्धा श्री नारायण सिंह जसवाल आज पाश्चात्य संस्कृति मे रच बस रहे युवाओं के लिए आजादी का मतलब सिर्फ अपनी आजादी है। वे इस बात से बिलकुल बेखबर हैं की आज यदि हम आजाद है तो उसके पीछे न जाने कितने महान लोगों की शहादत जुड़ी हुई है । कई नाम जिन्हे  हम जान... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   3:26pm 21 Sep 2013 #जीवन गाथा

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