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Blog: "मेरे भाव मेरी कविता"

Blogger: अखिलेश रावल
आज खबर हमको हुई,क्या विराम का अर्थ है,क्या पीछे मुड़ने का महत्व,कैसे जुड़े है अतीत भविष्य,खुद ही की बनाई दुनिया में ,बढ़ते हुए आगे राहों पर,मंजिल का महज़ आभास है,भूलते मकसद मंजिल का  ,खो जाता  खुद का सपना ,कितना अजब सफ़र है ये ,आज हमको खबर हुई,क्या विराम का अर्थ है।ठहराव... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   8:25am 1 Aug 2012 #
Blogger: अखिलेश रावल
कोई मुझे मसखरा कहता है,कोई खुशमिजाज़ कहता है,कोई घमंडी तो कोईनिष्ठूर कहता है |अलग हूँ मैं सबकी निगाहों में,किसी की आँखों का कांटा भी हूँ ,किसी की राह का पत्थर भी हूँ ,बन हर किसी की जिंदगी का हिस्सा,आने होने का अहसास कर रहा हूँ |मेरी पहचान क्या है,यह सवाल लिए जहन में,ज़माने क... Read more
clicks 139 View   Vote 0 Like   11:30am 27 Jul 2012 #
Blogger: अखिलेश रावल
खुद के मन पर ना,अब कोई बस रहा,उनकी एक झलक को व्याकुल हो रहा,इस कदर तो कभी राह से भटका ना था,मगर अब राहों की मंजिलो की फ़िक्र नहीं,भूल दुनियां की हर ज़िम्मेदारी को ,बस सच और सपनो का जहाँ जोड़ रहा,कोई शिकायत नहीं मुझको बहकने से,मगर स्वप्न सदैव आँखों में ठहरता नहीं,जाग फिर जीवन ... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   5:49am 26 Mar 2012 #
Blogger: अखिलेश रावल
आज वो चेहरा ज़हन में आ गया,मेरे मुश्कुराते चेहरे से हंसी ले गया,मन मुझसे आज पूछता है,क्यूँ तू इतना इठलाता है,अपनी कामयाबी के ऊपर,क्या चूका पाया तू अब तक,उस एक ग्लास पानी की कीमत,क्या है आज तुझमे वो साहस,पूरी कर सके  उसकी ज़रूरत,उस याद के आते ही अब,खुशियों के संसार में घायल ख... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   5:05pm 18 Jan 2012 #
Blogger: अखिलेश रावल
ख्वाबो की दुनिया में रहने दो,कुछ पल गमो से दूर ले जाती है,सच का  भयावह चेहरे कोभूलने की महज एक यहीराह मुझको नज़र आती है,कुदरत कितनी खूबसूरत है,इसका अहसास मुझको कराती है,मुझको तुम जगाना नहीं बड़ी मुश्किल से नींद आती है|यहाँ इंसान की कीमत है,दिल के घावों का मरहम भी है,यहाँ श... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   6:00pm 17 Jan 2012 #
Blogger: अखिलेश रावल
छोड़ सपनो की दुनिया,हकीकत में आने का दर्द,सबको है खबर मगर,कोई ज़िक्र करता नहीं,मगर उस दुनिया की छायायहाँ लाने की सबको चाहत है,नहीं कुछ भी असम्भव,बस एक बार पाने का,यत्न करने की देरी है|है यही इस दुनिया खूबी,हर कोई व्यस्त है अपनी,जिंदगी की खोज में,और बेखबर इससे की ,आखिर खोजत... Read more
clicks 100 View   Vote 0 Like   6:11am 16 Jan 2012 #
Blogger: अखिलेश रावल
हो गयी ज्वाला शांत भले,लहू मगर अब भी लाल है,बहता रगों में यह लावा ,उतना ही विकराल है|दहशत पर दया का दान कब तक दे पाएंगे,गुनाह को गलती समझ,कब तक भुलायेंगे,अभी दिखी है थोड़ी हलचल,अब तमाशा शुरू होने को है|एक हाथ धनुष,दूजे में गीता,बुद्ध कब तक रोक पाएंगे,सब्र का इम्तिहान लेने वा... Read more
clicks 126 View   Vote 0 Like   9:22pm 14 Jan 2012 #
Blogger: अखिलेश रावल
आखिरी मुलाकात अब भी याद है,कर खुद को राज़ी किया फैसला,इज़हार इश्क का उनसे हम करेंगे,आज दिल को खुली किताब बना देंगे,हर ख्वाब हर ख्वाहिश हर अरमान,हर खता का ज़िक्र कर देंगे|जाने कितनी शायरी करो बेकार है,कर नहीं सकती वे उनको ज़रा भी बयां,मेरे अलफ़ाज़ लडखडा कर टूट जाते है,महज़... Read more
clicks 99 View   Vote 0 Like   6:16am 13 Jan 2012 #
Blogger: अखिलेश रावल
जब हम बीच दरिया में थे,तो किनारों की ख्वाहिश थी,थपेड़े खाती कश्ती से रंजिश थी,देख नीर अपार नैनो में नीर था,पर इरादा कुछ और था तक़दीर का,आज धरा पर है कदम मेरे ,हर ओर हरियाली की चादर ओढ़े,खुशियों के मृदंग बज रहे है ,फूलो से आशियाँ सज रहे है,मगर तन्हाई का आलम है,सब कुछ है फिर भी,क... Read more
clicks 93 View   Vote 0 Like   5:15am 12 Jan 2012 #
Blogger: अखिलेश रावल
अश्को की सलामी देकर हम,उनकी राहों से विदा हो जाते,फिर ना कोई राह मिला दे,इस खातिर चलना छोड़ देते,उनके एक अश्क मोती से कम,कीमत है इस जान की ,मांग कर तो देखते एक बार,मुश्कुराते हुए अर्थी पर लेट जातेबेशक हमे प्यार जताना आता नहीं,मगर वे हमारे आसूं ही पढ़ लेते|... Read more
clicks 98 View   Vote 0 Like   6:53am 11 Jan 2012 #
Blogger: अखिलेश रावल
मेरे परो की क्षमता को,मापदंडो से ना परखो तुम,मेरे ख्वाबो की उड़ान को,मेरे कृत्यों से ना नापो तुम,मैं पंछी  मतवाला हूँतुम्हारी परिधि का दास नहीं,प्रेम परिधि से बंधा हूँ,पर यह ना समझो मुझे,मेरी परिधि की पहचान नहीं|अभी खामोश हूँ मैं ,नहीं कोई हरकत है परो में,लगता हिम सा शीत अ... Read more
clicks 76 View   Vote 0 Like   4:17pm 7 Aug 2011 #
Blogger: अखिलेश रावल
कभी जिंदगी मुस्कुराती थीकभी जिंदगी रुलाती थीकभी धुप-छाँव से खेलाती थीपार आज एक ख़ामोशी हैतन्हाई के आगोश मेंखुद सहारे को तरसतीरेत के घरोंदे को तकतीकुछ नहीं बस इन्तेज़ारकब बदलते मौसम मेंयह पलकें नैनो कापर्दा करना बंद कर दे|यादों के सागर में खोयी खुद  ही के  भंवर में ग... Read more
clicks 75 View   Vote 0 Like   5:10pm 6 Aug 2011 #
Blogger: अखिलेश रावल
सोच कर देखो तो यारोलहू किस काम आया है,धमनियों  में बहते लावा में किस बात से उफान आया है प्रेम के भावो की जगह क्यूँ द्वेष की काली छाया है आज मुस्कुराती कुदरत में क्यूँखमोशी का मौसम आया हैसोच कर देखो यारो लहू किस कम आया है|बह रहा लहू राहों परबन नफरत की कहानी सूख गया आँखों मे... Read more
clicks 73 View   Vote 0 Like   8:53am 28 May 2011 #
Blogger: अखिलेश रावल
उलझे है सभी अपनी ही बेड़ियोंमें, दूजोकीबेड़ियोंसेफिरभीखफाहै,डालबेड़ियाँदूजो केकदमोमें,हरकोईदेखोमुश्कुरारहाहै,लेकिन भूल  सब गए की  दूसरा छोर खुद से बंधा है  आसमांपानेकी आतुरता में, दूजोको बेड़ियों में जकड़ दिया,पंखफडफडाकर देखोयारों,खुदतुम्हारेपैरोंमेंकितनीबेड... Read more
clicks 77 View   Vote 0 Like   3:27am 20 May 2011 #
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