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यूं तो कहने को महिला दिवस हैलेकिन क्या फायदा ऐसे दिवस का जो महज़ कहने को आता हैऔर आकर यूं ही चला जाता हैना नारी ही नारी का सम्मान करती है यहाँऔर न ही पुरुष ही करता हैसब भक्षण ही करना चाहते हैकोई संरक्षण करना नहीं चाहता कभीवैसे तो मैं, अर्थात मैं नारी अपने आप में ही सम्पूर...
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  March 9, 2013, 3:04 pm
न जाने माँ इतनी हिम्मत रोज़ कहाँ से लाती हैके हों कितने ही गम पर वो सदा मुसकुराती हैहर रोज़ कड़ी धूप के बाद चूल्हे की आग में तपती  हैमगर सुबह खिले गुलाब सी नज़र आती हैन जाने माँ इतनी हिम्मत हर रोज़ कहाँ से लाती हैखुद पानी पीकर गुज़र करती है, मगर हमें खिला के सुलाती हैअगर न...
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  January 29, 2013, 10:41 pm
लो हर बार की तरह बीत गया एक और साल,फिर एक बार आया है नया साल मगर कुछ भी तो नहीं बदला मेरी ज़िंदगी में, नया जैसा तो कुछ हुआ ही नहीं कभी,यूं लगता है जैसे बस एक वही साल आकर ठहर सा गया है, मेरी ज़िंदगी में कहींकि जिसमें हम मिले थे कभीतब से अटकी हूँ मैं बस उसी एक साल में, पता है क्य...
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  January 20, 2013, 5:20 pm
क्यूँ रिश्ता मुझसे अपना तुमने रेत सा बनाया क्यूँ आते हो तुम लौट-लौटकर मेरी ज़िंदगी में गये मौसम की तरह जानते हो ना, कभी-कभी खुश गवार मौसम भी जब लौटकर आता है तो कुछ शुष्क हवायें भी अपने साथ लाता है जो लहू लुहान कर दिया करती है न सिर्फ तन बल्कि मन भी  और तब तो तुम्हारे प्यार...
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  January 5, 2013, 5:56 pm
कभी कभी यह ज़िंदगी इतनी तन्हा लगती है की जैसे इसे किसी की आरज़ू ही नहींयूं लगता है कि जैसे किसी को मेरी जरूरत ही नहींन दोस्तों के पास समय है ना अपनों के पास कोई विषय, बात करने के लिएसब अपनी ही दुनिया में मस्त है किसी को किसी की जरूरत ही नहींढलते हुए सूरज की लालिमा के साथ त...
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  December 14, 2012, 8:00 pm
यूं तो हूँ मैं तुमसे जन्मी हूँ माँ मगर तुमने मुझे कभी अपना समझा ही नहीं माँ क्या सिर्फ इसलिए कि मैं एक लड़की थी या मेरा रंग ज़रा काला थाया फिर  मेरी त्वचा ज़रा जरूरत से ज्यादा ही रूखी सुखी सी थी दिखने में शायद बहुत कुरूप थी मैं उस वक्त लेकिन क्या यह सब कारण एक माँ की ममत...
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  November 16, 2012, 5:19 pm
एक लंबी सड़क सी ज़िंदगी एक ऐसी सड़क जिसे तलाश है अपनी मंज़िल की वो सड़क जिसे अपने आप में ऐसा लगता है कि कभी तो खत्म होगा यह सफर ज़िंदगी का कभी तो मिलेगी मंज़िल मगर वक्त का पहिया हरपल यह एहसास दिलाया करता है कि एक बार जो चला जाऊन मैं  तो लौटकर फिर कभी वापस नहीं आता पर क्य...
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  November 6, 2012, 1:10 am
कभी कहीं पढ़ा था कि बारिश में इन्द्र धनुष के रंग ही तो बरसते हैवरना यूं तो सारी धरती रंग हीन ही नज़र आती हैसच ही तो है,ज़िंदगी का भी तो कुछ ऐसा ही फलसफ़ा हैआखिर बदलाव ही तो दूसरा नाम है ज़िंदगी काजो कभी एक सी ना रहकर, हर पल बदलती रहती हैकभी बहा करती है किसी नदी की तरहतो कभी ब...
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  October 5, 2012, 4:11 pm
यूं तो आज तुमसे मिले बिछड़े कई साल होने को आए मगर आज भी ऐसा लगता है जैसे आज की ही बात हो यूं होने को तो बात तुमसे आज भी होती है, रोज़ जब कभी भी मैं तन्हा होती हूँ उस वक्त तुमसे बात क्या मैं तो तुम्हें देख भी सकती हूँ और छू भी सकती हूँ क्यूंकि तुम कोई मेरा गुज़रा हुआ कल नहीं ...
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  September 26, 2012, 11:23 pm
यूं तो ज़िंदगी ने बहुत कुछ दिया है हमें इसलिए तो आज सभी ने दिलोजान से चाहा है हमें  यह मेरी ज़िंदगी का दिया हुआ कोई तौहफा ही है जो आज    तूने भी अपने गले से लगाया है हमें,यही काफी न था शायद चाहत के लिए उनकी इसलिए उन्होने अपने सपनों में बसाया है हमें  वरना यूं तो ना जाने कितन...
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  September 14, 2012, 4:04 pm
सागर किनारे साहिल की रेत पर न जाने कितनी बार लिखा मैंने तुम्हारा नाम मगर हर बार उसे कोई न कोई सगार की लहर आकर मिटा गयी मगर मैंने हार ना मानी कभी, मैं हर बार लिखती गयी और वो हर बार मिटाती गयी उसी तरह तुमने भी शायद मेरे नाम को अपने ज़ेहन से मिटाने की एक नाकाम कोशिश की है मगर ...
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  September 3, 2012, 6:42 pm
कभी यूं भी होता है कि अक्सर किसी नदी किनारे शाम के वक्तउस नदी के निर्मल जल में पैरों को डालकर बैठनामुझे बहुत अच्छा लगता हैन सिर्फ बैठना बल्किघर लौटते हुए परिंदो के करलव के साथ    देखना उस सूर्य को अस्त होते हुए,ना जाने क्यूँ उस अस्त हुए सूर्य को देख  अठखेलियाँ करता है मे...
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  August 22, 2012, 7:35 pm
दिन भर की भागा दौड़ी और किसी न किसी काम में उलझे रहने के कारण जब रात को थक कर जा लेटता है यह शरीर तब अक्सर वो मन के जागने का समय होता है उस वक्त जाने कैसे सारा दिन की थकान के बाद भी शरीर भले ही शिथिल सा निढाल हो जाये मगर मन, उसको तो जैसे उसी वक्त रात का आकाश मिलता है खुल कर ख़...
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  July 12, 2012, 4:35 pm
कब तक तुम अपनी चाहत का वास्ता दे-देकरअपने प्यार का यह रंग चढ़ाते रहोगे मुझ पर...कब तक ? आखिर क्यूँ, किस लिए दिखाते हो तुम मुझे अपने प्यार का यह रंग, यह हक क्या सिर्फ इसलिए कि हमने प्यार किया है क्या सिर्फ इसलिए हक की बात किया करते हो तुम हर रात मगर सच तो यह है कि प्यार में कोई ...
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  July 3, 2012, 2:44 pm
यूं तो ज़िंदगी हर लम्हा, हर पल करवटें बदलती ही रहती है  जिसकी एक करवट कभी रातों का जागरण दे जाती है तो कभी उस ही ज़िंदगी की दूसरी करवट पर सुकून की नींद आ जाती है और तब उस मीठी नींद से जागने का कभी मन नहीं होताबिलकुल किसी हसीन ख़्वाब की तरह.....तो कभी सागर की लहरों सी मुसकुरात...
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  June 26, 2012, 6:14 pm
सुबह की पहली किरण के मेरे कक्ष में पदार्पण के साथ ही उदय होता है मेरी उम्मीदों का सूरज भी मेरे मन के किसी कोने में कहीं उस पर दूर मंदिर से आती शंख नाद और मंत्र उच्चारण की सुमधुर ध्वनिजिन्हें सुनते ही ही मेरे कदम स्वतः ही चल पड़ते है एक आस और उम्मीद का दामन थामे उस मंदिर क...
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  June 20, 2012, 1:46 pm
कितना कुछ छुपा है न इस एक शब्द में, नहीं ? कहने को नफरत को भी प्यार से जीता जा सकता है इसलिए शायद यह कहावत बनी होगी कि,"प्यार और जंग में सब जाएज़ है" अर्थात जब कोई इंसान प्यार में होता है, तो वो सही या गलत नहीं होता सिर्फ प्यार होता है मगर कमाल की बात तो यह है कि एक तरफ जहा...
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  June 13, 2012, 6:51 pm
मन में बसे समंदर के साहिल की रेत परजब कुछ बातें कुछ यादें दस्तक दे जाती हैतो अक्सर मन उदास हो जाता हैऔर क्यूँ न हो आखिर उदासी भीतो कभी-कभी बहुत खूबसूरत हुआ करती हैंरोज़ की भागदौड़ से परेजब ज़िंदगी अक्सर तन्हाइयों में मिला करती हैएक ऐसी तन्हाई जहां दूर-दूर तक फैला एकां...
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  May 25, 2012, 3:38 pm
ज़िंदगी एक ऐसा शब्द जिसके हर नज़र में एक अलग ही मायने है कोई कहता है ज़िंदगी एक किताब है तो कोई कहता है बारिश का पानी कोई कहता है आग का दरियातो कोई कहता है सागर का पानी कोई सागर की लहरें तो कोई तेरी मेरी कहानी जैसे इस ज़िंदगी को देखने के लिए परखने के लिए जितनी आँखें उतने...
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  April 29, 2012, 7:34 pm
कभी सोचा है प्रकृति और इंसान के साथ के गहरे रहस्य कोजैसे एक ही सिक्के के दो पहलुओं सा साथ एक के बिना दूजा अधूराजैसे मन के भाव वैसा प्रकृति का स्वभाव  क्यूंकि एक प्रकृति ही तो है जो इंसान के साथ सदा होती हैवो कहते हैं ना "ज़िंदगी के साथ भी, ज़िंदगी के बाद भी"    कभी महसू...
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  March 30, 2012, 10:07 pm
क्या तुमने कभी देखा हैकिसी सागर को रंग बदले हुए क्या सच में ऐसा ही होता है, या ब्रह्म है ये मेरे अंतस का..... सुबह सवेरे जब सूरज आता है अपनी लालिमा लिए तब बिखर जाती  हैएक सुनहरी सी चादर समंदर के लहरों पर और जैसे-जैसे दिन चढ़ता जाता है......तब जैसे सूरज की तपिश से पिघलता जाता ह...
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  December 22, 2011, 10:07 pm
साहिल को छुने की चाह मेंमचलती सागर की लहरेंजैसे मन की तरंगों नेओढ़ लिया होलहर नुमा कोई आवरणन जाने ऐसी कितनी तरंगें है हमारे मन कीजो मचलती हैसब कुछ पाने के लिएक्यूंकि जो आज है, क्या पताकल हो न होफिर क्या पता एक टुकड़ा साहिलभी शायद इन लहरों में कटकर न घुले,न मिलेक्यूंकि ...
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  December 21, 2011, 10:08 pm
ज़िंदगी की तप्ति धूप में तप-तप कर जब थोड़ा सी ठंडक पाने की चाह में,  कभी निकलती हूँ घर से तो सबसे पहले याद आता हैसमंदर का वो किनारा जिसकी नम और ठंडी रेतपर चलकर किए थे हमने  कुछ वादे, वो इरादेजिनमें गहराई थी कभी समंदर की तरहजिसमें प्यार और विश्वास भी था समंदर की तरह जहां ...
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  December 20, 2011, 12:43 am
कहते है, अतीत सभी का होता है  किसी का अच्छा तो किसी का बुरा अतीत के आईने से झाँकती यादें जैसे हिलते हुए पानी में  धीरे-धीरे उतरता हुआ सा कोई प्रतिबिंबजो, आहिस्ता-आहिस्ता साफ होता चला जाता है जैसे दर्पण हो कोई अतीत यदि मधुर हो  तो अनायास ही उभर आती है उस प्रतिबिंब पर एक ...
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  December 17, 2011, 5:19 pm
इंतज़ारभला क्या होता है इंतज़ार वो जो कभी ख़त्म ही न हो वही होता है न इंतज़ार ........जो कभी किसी का ख़त्म न हुआ है, न होगा कभी वही होता है, ना इंतज़ार  कभी मीठा, तो कभी खट्टा लगता है,इंतज़ार,जैसे नदी को सागर से मिलने का इंतज़ार, सूखी धरती को, बारिश का इंतज़ार,जैसे भूखे को रोटी ...
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  December 14, 2011, 4:03 pm


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