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Blog: वन्दे मातरम

Blogger: surya prakash
रूह से खून रिसे, आँख से आँसू बरसे,कभी यह सोचा न था, यूं बिछड़ जाओगे हमसे।वक़्त बेरहम ने कर दी दूरियाँ इस कदर,कि अब दिल बहलाते हैं तेरी तहरीरों से।                      कुछ वक़्त का सितम कुछ तेरा ग़म सनम,                      कि अब नींद आए हो गए हैं अरसे।                      तेरी फिक्र में जाना नैनों... Read more
clicks 184 View   Vote 0 Like   5:40pm 25 Apr 2013 #
Blogger: surya prakash
4 फरवरी को दुनिया की सबसे बड़ी सोशल नेटवर्किंग साइटफेसबुकने अपने जीवन का नौवां वसंत देखा। हार्वर्ड विश्वविद्यालय के छात्र मार्क जुकरबर्ग ने 4 फरवरी, 2004 को फेसबुककी शुरूआत फेसमैश के नाम से   की थी। शुरू में यह हार्वर्ड के छात्रों के लिए ही अंतरजाल का काम कर रही थी, लेकिन ... Read more
clicks 195 View   Vote 0 Like   12:28pm 20 Apr 2013 #सोशल मीडिया
Blogger: surya prakash
हिंदी पत्रकारिताको शिखर तक पहुंचाने में हिंदी साहित्य और साहित्यकारों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। भारतीयता, भारतीय संस्कृति और सनातन संस्कृति के प्रवाह को जीवंत बनाए रखने में हिंदी साहित्य एवं पत्रकारिता ने अपना अथक योगदान दिया है। आज के दौर में हिंदी पत्रकारित... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   12:07pm 20 Apr 2013 #
Blogger: surya prakash
जीवन सीमित, सपने अनंत,कुछ हुए साकार, कुछ हुए खंड-खंड।मानव जीवन की यही परिभाषा है,मिला न कुछ फिर भी आशा है।              कुछ दूर चलूं, फिर राह भटकूं,              कोई एक दिशा न पाऊं मैं।              कैरियर, शिक्षा, रोजगार,              बस इनमें उलझा जाऊं मैं।सोचता हूं, जब उलझना इनमें था,तो क्या प... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   4:40pm 6 Apr 2013 #
Blogger: surya prakash
सोशल मीडिया बीते कुछ वर्षों में सामाजिक, राजनीतिक एवं अन्य प्रमुख विषयों पर सोशल नेटवर्किंग के निर्माण और उसके माध्यम से जनमत तैयार करने के माध्यम के रूप में उभरा है। तहरीर चैक और न्यूयार्क के वाल स्ट्रीट घेरो आंदोलन से लेकर दिल्ली के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनों एवं ... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   6:25pm 16 Feb 2013 #
Blogger: surya prakash
लुटती लाज बेटियों की, चौराहों  पर होता चीरहरण,21वीं सदी के दुशासन, करते नारियों का मानहरण।                      दिल्ली, मुंबई, हरियाणा रोज होते प्रकरण,                      द्रौपदी बन गई अबला नारी,                      अपराधी और व्यवस्था सताते बारी-बारी,                      सत्ता है खामोश, कहती है लेंगे ए... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   6:12pm 16 Feb 2013 #
Blogger: surya prakash
यह रात, यह तन्हाई और कुछ न खटकना.तू, तेरी याद और ख्वाबों में भटकना.                              तन्हां हुआ हूँ, शायद तुझे याद करने के लिए,                              कब तुझसे मैं मिलूँगा यह फ़रियाद करने के लिए,                              ऐसे ही शायद मुझे पड़ेगा तड़पना,                              तू तेरी याद और ख्वाब... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   6:41pm 15 Feb 2013 #
Blogger: surya prakash
न्यू-मीडियाके योगदान और उसकी संभावनाओं के बारे में पिछले कुछ दिनों में बहुत चर्चाएं हुई हैं। मीडिया के नए अवतार को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सामाजिक जागरूकता में सहायक एवं मुख्यधारा की मीडिया का बेहतर विकल्प बताया जा रहा है। यह सही भी है कि न्यू-मीडियाने नागरिक पत्र... Read more
clicks 201 View   Vote 0 Like   11:26am 23 Sep 2012 #न्यू-मीडिया
Blogger: surya prakash
भारत में पत्रकारिता और राष्ट्रवाद एक ही धारा में प्रवाहित होने वाले जल के समान हैं। भारतीय पत्रकारिता ने सदैव राष्ट्रवाद को ही मुखरित करने का कार्य किया है। पत्रकारिता के इसी राष्ट्रवादी प्रवाह को गति देने वाले पत्रकारों में एक महत्वपूर्ण नाम पं. दीनदयाल उपाध्याय ... Read more
clicks 180 View   Vote 0 Like   6:26am 22 Sep 2012 #
Blogger: surya prakash
क्रांति, आंदोलन एवं किसी अभियान की सफलता में पत्रकारिता का महत्वपूर्ण योगदान रहता है। विचारधाराओं के प्रसारण एवं उसके स्थापन में भी पत्रकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। भारतीय पत्रकारिता के संदर्भ में यह और भी अधिक दावे से कहा जा सकता है कि पत्रकारिता ने राष्ट्... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   3:32am 27 Aug 2012 #
Blogger: surya prakash
Ekaq’kh izsepan dh dgkfu;ksa us Hkkjr dh leL;kvksa dks mdsjk FkkA vke Hkkjeh; ds nnZ ds eeZ dks le>kus dk iz;kl fd;k FkkA izsepan us NwvkNwr] lkaiznkf;drk ,oa fdlkuksa dh cngky fLFkfr ds ckjs esa yksxksa dks le>kus dk dke fd;k FkkA D;k mUgksaus bu eqn~nksa dks lkfgR; ds ek/;e ls gh mBk;k Fkk \ izk;% gekjs eu esa dgkuhdkj iszepan ds fy, gh LFkku curk gSA i=dkj izsepan ds fy, ughaA ’kk;n izsepan dh i=dkfjrk ds igyw gekjs lkeus ugha vk ik, gSaA ;gh dkj.k gS fd ge mudks i=dkj ds :Ik esa tku&le> Hkh ugha ik,AIkzsepan dh e`R;q 1936 esa gqbZ Fkh] fdarq vktknh ds lkr n’kd chrus ds ckn Hkh izsepan us ftu leL;kvksa ds izfr gekjk /;ku vkd`"V fd;k Fkk os leL;k,a vkt Hkh ;Fkkor tku iM+... Read more
clicks 193 View   Vote 0 Like   6:24am 11 Aug 2012 #
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लोकमान्य, अर्थात वह व्यक्ति जिसे लोग अपना नेता मानते हों। यह उपाधिबाल गंगाधर तिलकको भारत के स्वाधीनता प्रेमियों ने दी थी। लोकमान्यने बंग-भंग आंदोलनके दौरान भारत के स्वाधीनता संग्राम को मुखर रूप प्रदान किया था। अंग्रेजों की विभाजन नीति ने सबसे पहले बंगाल को ही सांप... Read more
clicks 235 View   Vote 0 Like   5:59am 11 Aug 2012 #
Blogger: surya prakash
भारतीय पत्रकारिता के इतिहास में 19वीं सदी का अंतिम दशक एवं बीसवीं सदी का पहला दशक मील का पत्थर साबित हुए। यह समय देश में राजनीतिक, साहित्यिक एवं पत्रकारीय सुदृढ़ता के दशक माने जाते हैं। यह वह दौर था जब भारत की सुप्त चेतना जाग्रत हो रही थी, जागरण का यह काम कर रहे थे देशभक्... Read more
clicks 194 View   Vote 0 Like   12:53pm 22 Jun 2012 #
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भारतीय पत्रकारिता के इतिहास में 19वीं सदी का अंतिम दशक एवं बीसवीं सदी का पहला दशक मील का पत्थर साबित हुए। यह समय देश में राजनीतिक, साहित्यिक एवं पत्रकारीय सुदृढ़ता के दशक माने जाते हैं। यह वह दौर था जब भारत की सुप्त चेतना जाग्रत हो रही थी, जागरण का यह काम कर रहे थे देशभक... Read more
clicks 86 View   Vote 0 Like   12:53pm 22 Jun 2012 #
Blogger: surya prakash
भारतीय पत्रकारिता के इतिहास में 19वीं सदी का अंतिम दशक एवं बीसवीं सदी का पहला दशक मील का पत्थर साबित हुए। यह समय देश में राजनीतिक, साहित्यिक एवं पत्रकारीय सुदृढ़ता के दशक माने जाते हैं। यह वह दौर था जब भारत की सुप्त चेतना जाग्रत हो रही थी, जागरण का यह काम कर रहे थे देशभक... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   12:53pm 22 Jun 2012 #
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भारतीय लोकतंत्र एक चैराहे पर खड़ा है। भारतीय लोकतंत्र स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी चुनाव तथा विशाल लोकतांत्रिक प्रक्रिया को संपन्न कराने का दावा करता है। किंतु, इसी लोकतंत्र में आम आदमी अब सत्ता के केन्द्रों एवं रोजमर्रा की जिंदगी के बीच बढ़ती दूरी से कुंठित होता ज... Read more
clicks 206 View   Vote 0 Like   8:21am 14 Jun 2012 #
Blogger: surya prakash
हिंदी भाषा के विकास के साथ ही हिंदी पत्रकारिता का भी विकास हुआ है। कह सकते हैं किहिंदी भाषा को परिष्कृत करने और आम लोगों तक पहुंचाने में हिंदी पत्रकारिता की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। हिंदी भाषा ने राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है एवं उ... Read more
clicks 160 View   Vote 0 Like   9:47am 17 May 2012 #
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राजेन्द्र माथुर हिंदी पत्रकारिता में अमिट हस्ताक्षर के समान हैं। मालवा के साधारण परिवार में जन्मे राजेन्द्र बाबू ने हिंदी पत्रकारिता जगत में असाधारण प्रतिष्ठा प्राप्त की। उनका जन्म 7 अगस्त, 1935 को मध्य प्रदेश  के धार जिले में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा धार, मंदस... Read more
clicks 160 View   Vote 0 Like   9:45am 17 May 2012 #
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जल ही जीवन है। जीवन को बनाए रखने के लिए अपरिहार्य जल की उपलब्धता निरंतर कम हो रही है। बढ़ती जनसंख्या एवं शहरीकरण के प्रसार ने जल संकट को गहराने का काम किया है। भारत जैसे अधिक आबादी वाले देश के लिए जल संकट बढ़ना खतरे की घंटी है। भारत में विश्व की 17 प्रतिशत आबादी निवास ... Read more
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30 मई, 1826 हिंदी पत्रकारिताके इतिहास की महत्वपूर्ण तारीख है। इसी दिन हिंदी के सर्वज्ञात प्रथम समाचार पत्र उदन्त मार्तण्डका प्रकाशन प्रारंभ हुआ था।उदन्त मार्तण्डका शाब्दिक अर्थ है ‘समाचार-सूर्य‘। अपने नाम के अनुरूप ही उदन्त मार्तण्डहिंदी की समाचार दुनिया के सूर्य के... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   7:07am 15 Apr 2012 #
Blogger: surya prakash
भारतीय सिनेमाकी शुरूआत बीसवीं सदी के दूसरे दशक के पूर्वार्ध में हुई थी। बीसवीं सदी के भारतीय सिनेमा ने एक लंबा सफर तय किया। भारत में विभिन्न विधाओं की शुरूआत गुलामी के उस दौर में हुई, जब क्रांतिकारी परिवर्तनों की अधिकतम आवश्यकता थी। सिनेमा भी उस दौर से अछूता नहीं है। ... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   12:07pm 13 Apr 2012 #
Blogger: surya prakash
परमाणु ऊर्जा एवं सुरक्षा दोनों पहलू आपस में संबद्ध हैं। ऊर्जा के लिए परमाणु संयंत्रों के प्रयास शुरू होते ही परमाणु सुरक्षा को लेकर चिंता भी परवान चढ़ जाती है। फुकुशिमा की दुर्घटना ने भी इस चिंता को वाजिब ठहराने का काम किया है। जिसका असर था कि विश्व की प्रमुख परमाणु श... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   12:05pm 30 Mar 2012 #
Blogger: surya prakash
रोजगार और पलायन आपस में उत्प्रेरक के समान हैं। यदि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की उपलब्धता होती है तो पलायन कम होता है। इसके उलट यदि रोजगार की उपलब्धता नहीं होती है तो बड़ी आबादी शहरों की ओर पलायन करती है। ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के कम अवसर होने के कारण ग्रामीण भा... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   10:34am 28 Mar 2012 #
Blogger: surya prakash
दिल्ली का जंतर-मंतर। एक ऐसा स्थान जिसे देश भर में धरना-प्रदर्शनों के आयोजन स्थल के रूप में जाना जाता है। जंतर-मंतर प्रतिदिन कई धरना प्रदर्शनों का गवाह बनता है। इन प्रदर्शनों में विभिन्न सामाजिक एवं राजनैतिक संगठनों की सक्रियता रहती है, जो अपनी मांगों को लेकर अनशन अथव... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   10:49am 22 Mar 2012 #
Blogger: surya prakash
भारत में पत्रकारिता का क्षेत्र राजनीति, अर्थव्यवस्था और वैश्विक उथल-पुथल की जानकारी देने तक ही सीमित नहीं है। भारत वह संस्कृति है जो विभिन्न आघातों और संक्रमण के बाद भी अपने मूल रूप में विद्यमान है। भारत की महान संस्कृति के यशोगान के लिए पत्रकारिता ने भी अपना योगदान ... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   10:45am 22 Mar 2012 #

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