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Blog: मंतव्य

Blogger: kamal k. jain
देश के हर दूसरे गांव जैसा ही एक गांव ये भी था. नाम रहने भी दे तो कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है. इसी गांव में दो लोग थे. दोनों के मजहब अलग दोनों के परिवार अलग.. फिर भी दोनों एक दूसरे से प्रेम करते थे. सयाने कहते थे की ये प्रेम नही केवल उम्र का तकाज़ा है पर उन दोनों का मानना था की उन्ह... Read more
clicks 93 View   Vote 0 Like   6:21am 6 Nov 2012 #प्रेम
Blogger: kamal k. jain
सच कितना मजबूर है मेरा प्रेम... और उतनी ही निष्ठुर तुमजितना मुझसे ये करीब होता जाता है तुम मुझसे उतनी ही दूर चली जाती हो....और मेरे पास रह जाते हैफकत तेरी यादों के साये..चंद अल्फाज़.. और आँखों में ये नमी... Read more
clicks 73 View   Vote 0 Like   10:08am 9 Aug 2012 #यादें...
Blogger: kamal k. jain
जानता था कभी मूर्त रूप ले ही नहीं पाएगा हमारा प्रेम हालाँकि मैंने तुमसे ही जानी थी छुअन प्यार कीगाहे बेगाहे यूँ ही छू लिया करता था तुम्हेमेरी सांसो में अब भी बसी है तुम्हारे बदन की खुशबूअपने तमाम समर्पण के बावजूद जानता था कभी तुम पर कोई हक नहीं जाता पाउँगाक्यूँ की ये ह... Read more
clicks 80 View   Vote 0 Like   11:34am 6 Aug 2012 #प्रेम
Blogger: kamal k. jain
दुनिया की हर कहानी की तरह ही होगाइस कहानी का भीप्रारंभ और अंतबिलकुल सामान्य; संभवतया कुछ उजला कुछ स्याहपरन्तु जो रहेगा सर्वाधिक रोचक और ज्वारीयवो यही होगा.... यही यानि ये "बीच का हिस्सा"इस कहानी का प्रारंभ तुमने रचाअपनी ही तरह अल्हड, उन्मुक्त और निश्छलऔर अंत रचा तुम्हा... Read more
clicks 59 View   Vote 0 Like   8:33am 29 Jul 2012 #
Blogger: kamal k. jain
(तकनीक अपने साथ कुछ नया तो लाती ही है पर वो अपने साथ पुराने को बिरसा भी देती है, टेबलेट, कंप्यूटर और ना जाने क्या क्या... एक छोटे से डिब्बे मे संसार समा लेने का दम भरते लोग... पर एक बात अक्सर भूल जाते है की जो सुख काग़ज़ पे छपे को आँखो से महसूस करके दिल-दिमाग़ में बैठा लेने का सु... Read more
clicks 86 View   Vote 0 Like   11:55am 19 May 2012 #राजेश उपाध्याय
Blogger: kamal k. jain
(तकनीक अपने साथ कुछ नया तो लाती ही है पर वो अपने साथ पुराने को बिरसा भी देती है, टेबलेट, कंप्यूटर और ना जाने क्या क्या... एक छोटे से डिब्बे मे संसार समा लेने का दम भरते लोग... पर एक बात अक्सर भूल जाते है की जो सुख काग़ज़ पे छपे को आँखो से महसूस करके दिल-दिमाग़ में बैठा लेने का सु... Read more
clicks 43 View   Vote 0 Like   11:55am 19 May 2012 #
Blogger: kamal k. jain
(तकनीक अपने साथ कुछ नया तो लाती ही है पर वो अपने साथ पुराने को बिरसा भी देती है, टेबलेट, कंप्यूटर और ना जाने क्या क्या... एक छोटे से डिब्बे मे संसार समा लेने का दम भरते लोग... पर एक बात अक्सर भूल जाते है की जो सुख काग़ज़ पे छपे को आँखो से महसूस करके दिल-दिमाग़ में बैठा लेने का सु... Read more
clicks 50 View   Vote 0 Like   11:55am 19 May 2012 #
Blogger: kamal k. jain
जब माँ साथ हो तो किसी दुआ की ज़रूरत ही नही...जब माँ साथ हो तो फिर से बच्चा बन जाने को जी चाहता है....जब माँ साथ हो तो क्यूँ उसकी गोद में सिर रखकर सो जाने को जी चाहता है...क्यूँ दिल भारी हो तो माँ से लिपट कर रोने को जी चाहता है...क्यूँ उसकी आँखो का एक आँसू परबत सा भारी लगता है...कैसे बि... Read more
clicks 101 View   Vote 0 Like   5:46am 2 May 2012 #ज़ज्बात
Blogger: kamal k. jain
कुछ दिन बीते... अचानक घिर आए बादलो ने अचानक बरसाना भी शुरू कर दिया था. मान कर रहा था की अभी ठीक से गरमी भी नही पड़ी ओर निकम्मे आ मरे फिर से ठंड बढ़ने के लिए... जैसे ही बारिश रुकी मैं छत की और चल दिया. बारिश के बाद की ठंडक को महसूस करना भी अपने आप मे एक सुखद अहसास ही है. तभी अचानक नथ... Read more
clicks 100 View   Vote 0 Like   4:48am 30 Apr 2012 #
Blogger: kamal k. jain
इस बार आप लोगो के लिए पेश है एक बिलकुल नए कवि "राजेशउपाध्याय" की कवितायेँ... राजेश जी का परिचय फ़िलहाल इतना है की वे मेरे साथ ही काम करते है... कवितायेँ लिखने का शौक तो उन्हें अरसे से है, परन्तु अब तक जो भी लिखा वो अपने लिए ही लिखा... ये पहली बार है जब उनका लिखा कुछ किसी सार्वजनीक ... Read more
clicks 76 View   Vote 0 Like   5:59am 7 Mar 2012 #
Blogger: kamal k. jain
(हालाँकि मैं नेरूदा नही.. और मैने उन्हे ज़्यादा पढ़ा भी नही.. पर ये कविता मेरे किसी अपनेको बहुत पसंद है.. ओर उसी ने सबसे पहले मेरा परिचय नेरूदा से करवाया.. पता नही क्यूँ आज जब इस कविता को पढ़ने बैठा तो लगा की इसका एक एक शब्द मेरे मनोभाव को व्यक्त कर रहा है... अत: ये अनुवाद उस खास ... Read more
clicks 66 View   Vote 0 Like   10:18am 30 Nov 2011 #प्रेम
Blogger: kamal k. jain
हिंदी कविता संसार की दुनिया में शायद दुष्यंत कुमार के बाद सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले  कवी अदम गोंडवी जी की सर्वाधिक प्रसिद्ध रचना. भले सरकारे कितने दावे कर ले... भले लोग समानता की कितनी ही बाते कर ले... जब जब गोंडवी जी की ये रचना पढ़ता हूँ... लगता है आज भी यही हकीकत है हमारे गा... Read more
clicks 85 View   Vote 0 Like   6:51am 15 Oct 2011 #समाज
Blogger: kamal k. jain
मेरी जबां पर था उसको भरोसा इतना,मुझसे खुदको भुला देने की दुहाई ले ली,कैसे बयां हो सितमगर के सितम,छीन के हंसी इन लबों की हंसने की दुहाई ले ली.यूँ रो के गुज़र दी शब हमने आँखों ही आँखों में,के बेदर्द कहीं रोने की भी न मनाही कर दे.यूँ बयां हुई गम-ए-दौरान की हकीकत,संग तो रहा सनम, म... Read more
clicks 49 View   Vote 0 Like   2:22pm 13 Oct 2011 #प्रेम
Blogger: kamal k. jain
तुम कहती हो की तुम्हे मुझसे प्यार नहीं है..ठीक ही होगा....क्या हुआ जो मेरा दुःख तुम्हारी पलकें भिगो देता है,क्या हुआ जो मेरी नाराजगी तुम्हे सताती है,क्यूँ फरक पड़ता है तुमको रूठ जाने से मेरे ,क्यूँ मेरी चिंता में पड़ते है पेशानी पर बल तेरे,यूँ ही करती होंगी तुम फ़िक्र मेरी शा... Read more
clicks 57 View   Vote 0 Like   4:27pm 8 Oct 2011 #प्रेम
Blogger: kamal k. jain
(दुष्यंत जी की लिखी ये कविता मेरे साथ मेरे अज़ीज़तम कुछ ओर लोगो को बहुत पसंद है. इसलिए जब उनसे दिल की बात कहने का मोका आया तो इसका सहारा लेने से खुद को रोक नही पाया. कविता का मूल भाव दुष्यंत जी का ही है.... मैने बस अपने मन की बात कहने के लिए उनके शब्दों मे कुछ हेर फेर किया है... जि... Read more
clicks 86 View   Vote 0 Like   10:19am 4 Oct 2011 #प्रेरणा
Blogger: kamal k. jain
आखिर हम लोग क्यूँ निराशा को बुरा मानते है. ये नैराश्य भी तो जीवन का अहम् अंग है. अगर इन्सान की जिंदगी में महज खुशियाँ ही तो शायद उसको इनके मायने भी मालूम न हो... पर अगर किसी इन्सान को लाख गम उठाने के बाद ख़ुशी की एक छोटी सी भी खबर सुने दे तो वो उसे सहरा में पानी की बूँद नजर आती ... Read more
clicks 75 View   Vote 0 Like   5:23am 3 Oct 2011 #ज़ज्बात
Blogger: kamal k. jain
हां तो भाई लोग, देखो जैसा की हमारी हिन्दी फिल्मों में बडे भाई, दोस्त और हितैषी राय देते है, मै भी राय दे रहा हूं कि ईश्क मौहब्बत जैसी फिजूल कि चीज से दूर ही रहों। पर अगर फिर भी तुमने ठान ही लिया है तो आज मैने भी तुमको एक लम्बा चौडा लेक्चर मारने की ठान ली है। सही भी जब बन्दे न... Read more
clicks 66 View   Vote 0 Like   3:32am 2 Oct 2011 #व्यंग्य
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