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समय से संवाद

प्रणव प्रियदर्शीसरकार कौन बनाती है, जनता। सरकार किसके लिए बनती है जनता के लिए। सरकार किसके द्वारा संचालित होती है, जनता के द्वारा। जब नेताओं को विरोधी दल पर हमला करना होता है तो वे जनता का ही सहारा लेते हैं। जब उन्हें बोलने के लिए कुछ भी नहीं सूझता तो जनता के कंधे पर ही ह...
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  July 30, 2013, 12:49 am
प्रणव प्रियदर्शीबोधगया में सात जुलाई को हुआ शृंखलाबद्ध बम विस्फोट कई मायने में अलग है। बिहार में यह अपने तरह की पहली घटना है। वहीं, दुनिया में किसी बौद्ध मंदिर पर हुए हमले में भी इसतरह की यह पहली घटना है। इसने यह साबित कर दिया है कि अब निर्मम समय की धार बांधना एक फरेबे-आ...
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  July 22, 2013, 7:04 pm
कुछ जज्ब-ए-सादिक हो, कुछ इखलासो इरादतहमें इससे क्या बहस वह बुत है कि खुदा हैप्रणव प्रियदर्शीरांची :एक तरफ अजान के स्वर, दूसरी तरफ बौद्ध मंदिर से आती मृदंग की आवाज और कुछ ही देर बाद शिव मंदिर से उठती घंटे की ध्वनि। हर स्वर और ध्वनि में एक तारतम्यता, एक संदेश, फिर भी एक-दूसरे...
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  July 16, 2013, 8:22 pm
प्रणव प्रियदर्शीकल रात अचानक जिंदगी ने दिया था मेरे हाथों में अपने हाथ। कहा था उसने यूं ही नहीं है जिंदगी में स्वर और साज। तू क्यों परेशान हुआ जाता है, देख कर सरोकारों का वीभत्स अंदाज। मैं हैरान रह गया, सुन कर बातें उसकी। हतप्रभ था यह सोच कर कि कितने दिनों से मेरी आहटों म...
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  July 16, 2013, 7:13 pm
बिहार : 11 जुलाई, 1996 को भोजपुर में हुआ था बथानी टोला नरसंहारपाश ने कहा है-सबसे खतरनाक वह चांद होता है/ जो हर हत्याकांड के बाद/ वीरान हुए आंगनों में चढ़ता है/ पर आपकी आंखों में/ मिर्ची की तरह नहीं गड़ता है। बिहार का र्चिचत बथानी टोला नरसंहार कुछ ऐसे ही मंजर को परिभाषित करता है...
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  July 16, 2013, 6:36 pm
बिहार : 11 जुलाई, 1996 को भोजपुर में हुआ था बथानी टोला नरसंहारपाश ने कहा है-सबसे खतरनाक वह चांद होता है/ जो हर हत्याकांड के बाद/ वीरान हुए आंगनों में चढ़ता है/ पर आपकी आंखों में/ मिर्ची की तरह नहीं गड़ता है। बिहार का र्चिचत बथानी टोला नरसंहार कुछ ऐसे ही मंजर को परिभाषित करता है...
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  July 16, 2013, 6:36 pm
जीवन में कुछ चीजें हमारे चाहने से नहीं घटती, बस घटती हैं । कब, कैसे, किसतरह कुछ कहा नहीं जा सकता। इसकी भविष्यवानी नहीं की जा सकती। इसलिए इसका अहसास ही अलौकिक होता है। इसकी संजीदगी बहुत ही निर्दोष एवं निर्निमेषपूर्ण होती है, बिलकुल अनछुए हाथों का अविस्मरणीय स्पर्श जैस...
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  May 13, 2013, 12:17 am
जीवन में कुछ चीजें हमारे चाहने से नहीं घटती, बस घटती हैं । कब, कैसे, किसतरह कुछ कहा नहीं जा सकता। इसकी भविष्यवानी नहीं की जा सकती। इसलिए इसका अहसास ही अलौकिक होता है। इसकी संजीदगी बहुत ही निर्दोष एवं निर्निमेषपूर्ण होती है, बिलकुल अनछुए हाथों का अविस्मरणीय स्पर्श जैस...
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  May 13, 2013, 12:17 am
इंडियन स्कूल आफ माइन्स के दाखिले की परीक्षा में पूरे भारत में प्रथम स्थान इंडियन इंस्टिट्यूट आफ टेक्नोलॉजी, खड़गपुर में अपनी व्यापार नीति का लोहा मनवा‘किसिंग आस्कर‘ नाम की वैज्ञानिक किताब 2012 में बेस्ट सेलर चुनी गयीप्रणव प्रियदर्शीरांची : प्रतिभा राहों की पहचान में ...
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  May 5, 2013, 11:58 pm
झारखंड हिंदी साहित्य विचार मंच ने किया कवि गोष्ठी का आयोजन‘झारखंड के शब्द शिल्पी’ पुस्तक के प्रकाशन के संबंध में चर्चा की गईगीतकार राम कृष्ण उन्नयन के निधन पर मौन रख कर श्रद्धा सुमन अर्पित किया गयामंच की कुछ मांगों पर सरकार का ध्यान आकृष्ट कराने की कोशिश की जाएगीसंव...
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  May 5, 2013, 11:18 pm
(पुत्र पुष्कर के प्रति)माघ की मध्य रात्रिपछवाँ बयारबिजली तड़क रही थीऔर उमड़ता-घुमड़ता बादल कर रहा था अट्टहासइधर मेरी पत्नी के भीतर भीकुछ उमड़ने-घुमड़ने लगा थाघर से अस्पताल की दूरी जितनी थीउससे कई गुना बढ़ गई थीहुई बारिशऔर हमें हुई पुत्र रत्न की प्राप्तिकिसी ने कहा कृष्ण ह...
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  March 22, 2013, 5:49 pm
इजहारे मुहब्बत :इसबार वेलेंटाइन डे पर युवा प्रेम निमंत्रण में कम, पूजा की तैयारी में ज्यादा व्यस्त दिखेयुवाओं का अंतर्द्वंद्व और कसमसाहट उनके भीतर की सुप्त परतें उघाड़ कई बातें कह गईं प्रणव प्रियदर्शीरांची : प्रेम का मुखर संदेश देने का सुअवसर वेलेंटाइन डे और एक दिन ब...
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  February 21, 2013, 5:33 pm
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  December 1, 2012, 12:26 am
तथाकथित सभ्य समाज में महिलाओं के प्रति भेदभाव, प्रताड़ना और हिंसा की लंबी कहानी है। युग प्रवाह में इन्होंने अपनी अपरिमित सहनशीलता के बल पर चुपचाप हर अनैतिक यातना सही है। पर, परिवेश में अब नयी बयार दस्तक दे चुकी है। महिलाओं के न्यायोचित हक में हजारों कानून बन चुके हैं। ...
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  December 1, 2012, 12:10 am
तथाकथित सभ्य समाज में महिलाओं के प्रति भेदभाव, प्रताड़ना और हिंसा की लंबी कहानी है। युग प्रवाह में इन्होंने अपनी अपरिमित सहनशीलता के बल पर चुपचाप हर अनैतिक यातना सही है। पर, परिवेश में अब नयी बयार दस्तक दे चुकी है। महिलाओं के न्यायोचित हक में हजारों कानून बन चुके हैं। ...
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  December 1, 2012, 12:10 am
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  November 28, 2012, 1:12 am
प्रणव प्रियदर्शीरांची : झुंड में चंगेरा के साथ सामा की मूर्ति लिये मिथिलानियों की चहलकदमी और झारखंड मैथिली मंच के पारंपरिक आयोजन से मंगलवार को हरमू मैदान दमक उठा था। नारी मुक्ति व भाई-भहन के अटूट प्रेम का लोक पर्व सामा-चकेवा भातृ द्वितिया से प्रारंभ होकर मंगलवार को स...
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  November 28, 2012, 1:10 am
एक कृत्रिम और भौंडी सभ्यता का शिकार आज सबसे अधिक हमारे किशोर ही हो रहे हैंशिक्षा तो दुनिया को दिखाने के लिए महज एक दिखावा है, चरित्र और चिंतन से उसका कोई सामंजस्य नहींकिशोरावस्था में आधे प्रश्नों का उत्तर मिलता है, पर आधा प्रश्न...प्रश्न बन कर ही मन में तैरता रह जाता हैप...
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  November 23, 2012, 5:21 pm

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  November 23, 2012, 5:19 pm
दिल मांगे मोर... पर हम जा रहे जा रहे किस ओरएक कृत्रिम और भौंडी सभ्यता का शिकार आज सबसे अधिक हमारे किशोर ही हो रहे हैंशिक्षा तो दुनिया को दिखाने के लिए महज एक दिखावा है, चरित्र और चिंतन से उसका कोई सामंजस्य नहींकिशोरावस्था में आधे प्रश्नों का उत्तर मिलता है, पर आधा प्रश्न......
समय से संवाद...
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  November 23, 2012, 5:19 pm
सभी सीमाओं को तोड़, घटता है संयोगजीवन में कुछ चीजें हमारे चाहने से नहीं घटती, बस घटती है। कब, कैसे, किसतरह कुछ कहा नहीं जा सकता। इसकी भविष्यवानी नहीं की जा सकती। इसलिए इसका अहसास ही अलौकिक होता है। इसकी संजीदगी बहुत ही निर्दोष एवं निर्निमेषपूर्ण होता है, बिल्कुल अनछुए हा...
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  November 22, 2012, 10:12 pm
 एक सचनादनगी में दिवानगी मेंऔर सादगी मेंमैं जब कभीलोगों के पास होता हूँमुझपर सभीहँस लिया करते हैं।भावुकता मेंसरलता मेंऔर सहजता में मैं जब-कभी पारदर्शी हो जाता हूँमुझमें सभी  देख लिया करते हैं।हिफाजत मेंहैसियत मेंऔर हकीकत मेंमैं जब कभीखुली किताब हो जाता हूँमुझे स...
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  November 11, 2012, 8:06 pm
 नादनगी में दिवानगी मेंऔर सादगी मेंमैं जब कभीलोगों के पास होता हूँमुझपर सभीहँस लिया करते हैं।भावुकता मेंसरलता मेंऔर सहजता में मैं जब-कभी पारदर्शी हो जाता हूँमुझमें सभी  देख लिया करते हैं।हिफाजत मेंहैसियत मेंऔर हकीकत मेंमैं जब कभीखुली किताब हो जाता हूँमुझे सभी  पढ़...
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  November 11, 2012, 8:06 pm


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