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Blog: पंखुड़ियाँ

Blogger: अर्चना तिवारी
अलसुबह गुमटी पर चाय-बिस्कुट खाते महेश जी को उनके दो मित्रों ने देख लिया।“भाई, ये महेश सुबह-सुबह गुमटी पर चाय पी रहा है, आखिर मामला क्या है?” एक मित्र ने कहा।“अरे यही नहीं एक दिन बंदे को सट्टी से सत्तू खरीदते हुए भी देखा था, पूछने पर बोला, भाई रिटायर्मेंट के मजे ले रहा हूँ।”... Read more
clicks 317 View   Vote 0 Like   2:25pm 10 Apr 2017 #
Blogger: अर्चना तिवारी
गुलाब के पौधे पर कलियों के बीच एक फूल को झूमते देख मार्था के गुलाबी होठ लरज़ उठे। वह उसे बरबस निहारने लगी। तभी एक लड़का जो मार्था के यहाँ पेइंगगेस्ट था वहाँ आ पहुँचा।“मैडम, क्या मैं यह गुलाब ले सकता हूँ?” मार्था अचकचा गई। उसने लड़के को ऊपर से नीचे तक देखा। फिर शरारत भरे अंदा... Read more
clicks 361 View   Vote 0 Like   6:26pm 4 Mar 2017 #
Blogger: अर्चना तिवारी
आज निक्की की हल्दी है। कमरे में साड़ियों के पैकेट बिखरे पड़े हैं। कुछ औरतें उन पर नामों की पर्चियाँ लगा रही हैं कि कौन सी साड़ी किसे देनी है। कुछ औरतें जो रिश्ते से निक्की की भाभी लगती हैं वे बीच-बीच में उसको ससुराल के नाम से छेड़ती भी जा रही हैं।एक ने निक्की के गाल पर हल्दी ल... Read more
clicks 357 View   Vote 0 Like   11:43am 6 Feb 2017 #
Blogger: अर्चना तिवारी
कोहरा छंट गया था। वातावरण में ठण्ड की चुभन बरकरार थी। रफ़्ता-रफ़्ता नुक्कड़ पर लोगों की आवा-जाही शुरू हो गई थी। हमेशा की तरह भोला के ढाबे पर चाय के तलबगारों का जमावड़ा जुटने लगा था। उसके सामने लैंपपोस्ट के खम्भे के नीचे बेरवाली भी आकर बैठ गई थी। अपने आस-पास पड़े रैपरों व पोली... Read more
clicks 320 View   Vote 0 Like   10:30am 22 Jan 2017 #
Blogger: अर्चना तिवारी
तुषार ने अचानक एलान किया कि इस बार न्यू इयर पार्टी के लिए उसने अपने बॉस को सपत्नीक निमंत्रित किया है।“अंकिता, मैं बताना भूल गया था, खाना मैंने होटल से ऑर्डर कर दिया है।’’ सुबह-सुबह तुषार ने कहा।अंकिता ने उसकी ओर प्रश्नवाचक दृष्टि डाली, जैसे पूछ रही हो, ‘क्यों?’“वो क्या ... Read more
clicks 363 View   Vote 0 Like   7:22pm 7 Jan 2017 #
Blogger: अर्चना तिवारी
“दीपा, हमें कल गाँव जाना होगा, अपने खेतों का हिस्सा-बाँटा करने के लिए।‘’ ‘’क्यों ?’’‘’पता चला है कि बड़े भैया ने हमारे हिस्से वाले खेतों की मिट्टी ईंट के भठ्ठे वालों को बेच रहे हैं।” मीता आवेश में बोली।“ये तो गलत बात है, इससे तो हमारे खेत बंजर हो जाएँगे!” यह सुनकर दीपा भी... Read more
clicks 284 View   Vote 0 Like   2:18pm 13 Dec 2016 #
Blogger: अर्चना तिवारी
“दीपा, हमें कल गाँव जाना होगा, अपने खेतों का हिस्सा-बाँटा करने के लिए।‘’ ‘’क्यों ?’’‘’पता चला है कि बड़े भैया ने हमारे हिस्से वाले खेतों की मिट्टी ईंट के भठ्ठे वालों को बेच रहे हैं।” मीता आवेश में बोली।“ये तो गलत बात है, इससे तो हमारे खेत बंजर हो जाएँगे!” यह सुनकर दीपा भी... Read more
clicks 235 View   Vote 0 Like   2:18pm 13 Dec 2016 #
Blogger: अर्चना तिवारी
“दीपा, हमें कल गाँव जाना होगा, अपने खेतों का हिस्सा-बाँटा करने के लिए।‘’‘’क्यों ?’’‘’पता चला है कि बड़े भैया हमारे हिस्से वाले खेतों की मिट्टी ईंट के भठ्ठे वालों को बेच रहे हैं।” मीता आवेश में बोली।“ये तो गलत बात है, इससे तो हमारे खेत बंजर हो जाएँगे!... सच दीदी, पिताजी ने ता... Read more
clicks 129 View   Vote 0 Like   2:18pm 13 Dec 2016 #
Blogger: अर्चना तिवारी
“देखिये ये बच्चों की तस्वीरों का कोलाज उनके कमरों के लिए बनवाया है!’“बहुत अच्छा है।”“और ये हमारी तस्वीरों का कोलाज, अपने बेडरूम के लिए।”“अरे वाह, ये वाली तब की है ना जब ईशा होने वाली थी?”“नहीं, ये हमारी शादी की पहली सालगिरह की है।”“अरे हाँ याद आया, तुम साल भर में एकदम गोल... Read more
clicks 202 View   Vote 0 Like   3:15pm 5 Dec 2016 #
Blogger: अर्चना तिवारी
“देखिये ये बच्चों की तस्वीरों का कोलाज उनके कमरों के लिए बनवाया है!’“बहुत अच्छा है।”“और ये हमारी तस्वीरों का कोलाज, अपने बेडरूम के लिए।”“अरे वाह, ये वाली तब की है ना जब ईशा होने वाली थी?”“नहीं, ये हमारी शादी की पहली सालगिरह की है।”“अरे हाँ याद आया, तुम साल भर में एकदम गोल... Read more
clicks 280 View   Vote 0 Like   3:15pm 5 Dec 2016 #
Blogger: अर्चना तिवारी
“अरे, आपने अभी तक कुछ नहीं खाया?” घर आते ही जया ने डाइनिंग टेबल पर निगाह डालते हुए आरना से पूछा।“-------------““आरना, मम्मा कुछ पूछ रही हैं न।”“-------------“ आरना अनसुना कर रिमोट के बटन दबाती रही।“ओ-ओ ! मेरी बेबी नाराज़ हो गई क्या ?” आरना को बाँहों में भरते हुए जया ने पुचकारा।“मैं आपसे बात... Read more
clicks 289 View   Vote 0 Like   6:09am 27 Nov 2016 #
Blogger: अर्चना तिवारी
“शाल, नी कैप, बाम, हेल्थ ड्रिंक्स, बिस्किट्स ये सब चीज़ें तो दिल्ली में भी मिलती हैं। फिर यहाँ से लाद कर ले जाने की क्या ज़रूरत है ?” स्नेहा को चीज़ें बैग में डालते देख शिखर ने पूछा।“मिलती हैं, लेकिन ऑफिस में काम के बाद मैं ये सब चीज़ें खरीदने लगूँगी तो आधा दिन बर्बाद हो जाएगा। ... Read more
clicks 217 View   Vote 0 Like   2:43pm 17 Sep 2016 #
Blogger: अर्चना तिवारी
******************************************************पंडित बब्भन शास्त्री और सेठ सूदामल अपने परिवार के साथ शिमला जा रहे थे। वे जैसे ही प्‍लेटफार्म पर दाखिल हुए। इंजन ने सीटी दे दी। ट्रेन आहिस्ता-आहिस्ता रेंगने लगी। सामने जनरल डिब्बा था, जिसमें मज़दूर रैली का बैनर लगा था।गिरते-पड़ते दोनों परिवार उसी ... Read more
clicks 258 View   Vote 0 Like   10:43am 12 Sep 2016 #
Blogger: अर्चना तिवारी
फ़ोटोग्राफ़ी और कहानी लिखना सोनाक्षी का सबसे पसंदीदा शौक था। यह शौक उसकी रोजी-रोटी का सहारा भी था। सोनाक्षी जब भी अपनी एक्टिवा पर निकलती तो उसकी निगाहें सड़कों पर कुछ तलाशती चलतीं। शायद कोई कहानी। कोई ऐसी कहानी, जो मास्टरपीस बन जाए। मोनालिसा की तरह।आज भी वह इसी धुन में च... Read more
clicks 207 View   Vote 0 Like   10:44am 7 Sep 2016 #
Blogger: अर्चना तिवारी
इधर तीन-चार रोज़ से अखबार का फ्रंट पेज गायब रहता था। समझ नहीं आ रहा था कि आखिर माज़रा क्या है ? इत्तेफ़ाक से अखबारवाला बिल लेकर आ गया। उसे देखते ही मेरा पारा हाई हो गया।“क्या बात है, तीन-चार रोज़ से तुम आधा अखबार डाल रहे हो?” मैने उसे हड़काया।“आधा अखबार ! ऐसा कैसे हो सकता है बाबूज... Read more
clicks 188 View   Vote 0 Like   3:01pm 8 Aug 2016 #
Blogger: अर्चना तिवारी
उत्तर पुस्तिका में अंग्रेज़ी के कम अंक देखकर रत्ना परेशान हो उठी थी। उसने रोहन की अंग्रेज़ी सुधारने के लिए क्या कुछ नहीं किया। दो-दो ट्यूशन। यहाँ तक कि घर में अंग्रेज़ी का माहौल बना रहे इसलिए उसने हिंदी बोलने, पढ़ने और टीवी पर हिंदी कार्यक्रम देखने पर भी कर्फ्यू लगा रखा था... Read more
clicks 205 View   Vote 0 Like   5:45pm 17 Jul 2016 #
Blogger: अर्चना तिवारी
चिलचिलाती धूप। पारा सैंतालिस पार कर चुका था। लगभग नौ-दस साल का एक लड़का थर्मोकोल के बक्से में पानी की थैलियाँ रखकर बेच रहा था। जब भी कोई ऑटो या बस बाईपास पर रूकती तो वह हाथों में थैलियाँ लिए ‘पानी ! पानी !’ की आवाज़ लगाता हुआ उनकी ओर दौड़ पड़ता। लोग पानी की थैलियों के बदले उसक... Read more
clicks 252 View   Vote 0 Like   12:52pm 28 Jun 2016 #
Blogger: अर्चना तिवारी
उस दिन आँगन में किलकारी गूँजते ही तुम्हें अपने विशाल कन्धों का एहसास हुआ था। जब तुमने एक कपड़े में लिपटे नन्हे धड़कते दिल को अपने सीने से पहली बार लगाया था। बरबस ही तुमने उससे दुनिया भर की खुशियाँ देने का वादा किया था।शाम को काम से लौटते समय प्यास से हलकान गले को तर करना च... Read more
clicks 293 View   Vote 0 Like   9:30am 19 Jun 2016 #
Blogger: अर्चना तिवारी
उस दिन आँगन में किलकारी गूँजते ही तुम्हें अपने विशाल कन्धों का पहली बार एहसास हुआ था। जब तुमने एक कपड़े में लिपटे नन्हे धड़कते दिल को अपने सीने से पहली बार लगाया था। बरबस ही उसका माथा चूमते हुए तुमने उससे दुनिया की हर ख़ुशी देने का वादा किया था।शाम को काम से लौटते समय प्या... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   9:30am 19 Jun 2016 #
Blogger: अर्चना तिवारी
विद्यालय में वार्षिक परीक्षाएँ चल रहीं थीं। मैं स्टाफ़ रूम में उत्तर पुस्तिकायें जाँच रही थी। कुछ समय बाद पास के कक्ष से सहकर्मी सुमन की ज़ोर-ज़ोर से बोलने की आवाज़ आयी। मै सुनने की कोशिश करने लगी किन्तु कुछ स्पष्ट नहीं हुआ। मैं स्टाफ़ रूम से बाहर आ गई। मैंने देखा कि सुमन ए... Read more
clicks 219 View   Vote 0 Like   8:20am 10 Jun 2016 #
Blogger: अर्चना तिवारी
प्यारे बच्चों,**ये पत्र उन सभी बच्चों के नाम है जो मेरे विद्यार्थी हैं और रहे हैं। ये पत्र उन बच्चों के भी नाम है, जिन्होंने मुझसे पढ़ा तो नहीं किन्तु वे किसी न किसी विद्यालय के विद्यार्थी हैं।बोर्ड के परीक्षा परिणाम घोषित किये जा रहे हैं। कुछ के घोषित हो गए हैं और कुछ के ... Read more
clicks 220 View   Vote 0 Like   2:16pm 29 May 2016 #
Blogger: अर्चना तिवारी
अक्सर सुबह-सुबह नन्हीं पारुल, अपनी बहन पिंकी के साथ आ जाती। पिंकी बर्तन धोती, झाड़ू-पोछा करती। पारुल मुझसे बतियाती। कभी कॉलोनी के किस्से तो कभी अपने भाई-बहनों की बातें। सात-आठ साल की उम्र और दुनियादारी की बातें, जैसे दादी-अम्मा हो। एक लगाव सा हो गया था उससे।पिंकी को बेटी ... Read more
clicks 165 View   Vote 0 Like   2:34pm 3 Feb 2016 #
Blogger: अर्चना तिवारी
अक्सर सुबह-सुबह नन्हीं पारुल, अपनी बहन पिंकी के साथ आ जाती। पिंकी बर्तन धोती, झाड़ू-पोछा करती। पारुल मुझसे बतियाती। कभी कॉलोनी के किस्से तो कभी अपने भाई-बहनों की बातें। सात-आठ साल की उम्र और दुनियादारी की बातें, जैसे दादी-अम्मा हो। एक लगाव सा हो गया था उससे।पिंकी को बेटी ... Read more
clicks 306 View   Vote 0 Like   2:34pm 3 Feb 2016 #
Blogger: अर्चना तिवारी
तुषार ने अचानक एलान किया कि इस बार न्यू इयर पार्टी के लिए उसने अपने बॉस को सपत्नीक निमंत्रित किया है।“अंकिता, मैं बताना भूल गया था, खाना मैंने होटल से ऑर्डर कर दिया है।’’ सुबह-सुबह तुषार ने कहा। अंकिता ने उसकी ओर प्रश्नवाचक दृष्टि डाली, जैसे पूछ रही हो, ‘क्यों?’ “वो क्या ... Read more
clicks 243 View   Vote 0 Like   5:32pm 7 Jan 2016 #
Blogger: अर्चना तिवारी
कोई भी मौसम हो, भोर के ठीक 5:00 बजे नहीं कि रमानाथ जी के योगासन की चटाई पार्क में बिछ जाती। मजाल है जो कभी घड़ी की सुई एक सेंकेड भी आगे गई हो। फिर पूरे घंटे भर तक उनका योग कार्यक्रम चलता। उसके बाद वे पार्क के कोने में बनी बेंचों पर विराजमान हमउम्र साथियों के साथ पंद्रह मिनट हा... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   4:25am 26 Dec 2015 #

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