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रूप-अरूप

बहुत कुछ दूर और ऐसा ही रास्‍ता मि‍ला...वीरान। कब पहुँचेंगे सह सोचकर हम बेसब्र होने लगे। जि‍म्‍मी ने सांत्‍वना दी, बस अगले मोड़ के बाद बाद हम पैंगोंग होंगे। यहाँ से आपलोगों को झील दि‍खेगी। जैसे मोड़ मुड़े, वाह..दूर से दि‍खती झील की पहली झलक ने हमें पागल कर दि‍या। रास...
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  June 8, 2018, 6:04 pm
आज की मंजि‍ल थी पांगोंग झील। चि‍र प्रति‍क्षि‍त, हमारी ही नहीं, बच्‍चों की भी। नीले पानी के झील का आकर्षण हाल-फि‍लहाल के कुछ फि‍ल्‍मों ने बढ़ा दि‍या ,जि‍समें प्रमुख हैं 'थ्री इडि‍यट' और 'जब तक है जान'। हम एक बार फि‍र सिन्धु के कि‍नारे-कि‍नारे चल पड़े बादलों से बात...
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  June 4, 2018, 10:38 pm
आज की मंजि‍ल थी पांगोंग झील। चि‍र प्रति‍क्षि‍त, हमारी ही नहीं, बच्‍चों की भी। नीले पानी के झील का आकर्षण हाल-फि‍लहाल के कुछ फि‍ल्‍मों ने बढ़ा दि‍या ,जि‍समें प्रमुख हैं 'थ्री इडि‍यट' और 'जब तक है जान'। हम एक बार फि‍र सिन्धु के कि‍नारे-कि‍नारे चल पड़े बादलों से बात...
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  June 4, 2018, 10:38 pm
यह ऐसी पहाड़ी है जि‍से मैग्‍नेटि‍क हि‍ल के नाम से जाना जाता है। यहाँ गाड़ी बंद कर छोड़ दीजि‍ए तो वह खुद ब खुद ऊपर की ओर जाने लगती है। हम भी रुके वहाँ। ड्राइवर ने गाड़ी बंद कर दी। गाड़ी अपने आप चलने लगी ऊपर की तरफ। सभी पर्यटक यहाँ रुककर एक बार जरूर परीक्षण करते हैं ...
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  June 3, 2018, 8:33 pm
शाम होने से पहले हम जांस्‍कर-सिन्धु संगम जाना चाहते थे। होटल में अभि‍रूप को छोड़ नि‍कल गए कारगि‍ल वाले रास्‍ते पर। उसी रास्‍ते एयरपोर्ट है और भी कई चीजें हैं देखने के लि‍ए। पर हमें वो संगम देखना था जो लेह से करीब 35 कि‍लोमीटर की दूरी पर है । यह नीमो गाॅँव के ...
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  May 30, 2018, 11:31 am
घंटे भर के सफर के बाद हम लेह महल पहुँचे। एक बार फि‍र शहर हमारे आंखों के आगे था। शहर के मध्य में स्थित इस महल का निर्माण सोलहवीं शताब्दी में सिंगे नामग्याल ने करवाया था। अंदर जाने के लि‍ए टि‍कट लेना पड़ा। बच्‍चों का मन नहीं था मगर हमें देखना था लेह महल। प्रवेश द्वार लकड...
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  May 27, 2018, 10:47 pm
कुछ दूर आगे बढ़ने पर पता लगा कि‍ सड़क बंद है। रास्‍ते में चट्टान गिर जाने से रास्‍ता बंद हो गया है। दूर तक लंबी कतार थी वाहनों की। पर वह एक खूबसूरत जगह थी। ऊँचे पहाड़, हरे-भरे । वहाँ दूर-दूर तक याक चर रहे थे। बगल में श्‍योक नदी बह रही थी। यह जगह खलसर थी।  हमने मजाक भी ...
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  May 25, 2018, 12:56 pm
 हम एक बार फि‍र दि‍स्‍कि‍त मठ की आेर थे। आज कि‍स्‍मत अच्‍छी थी। दलाई लामा थे वहाँ पर आज नीचे उनका सम्‍मेलन था। मठ तक गाड़ी चली गई। मठ दूर से ही बहुत खूबसूरत लग रहा था। मठ समुद्रतल से 10,310 फीट की ऊँचाई पर स्‍थि‍त है। दि‍सकि‍त बौद्ध मठ नुब्रा घाटी में सबसे पुरान...
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  May 23, 2018, 12:46 pm
थोड़ी देर बाद ही हम नुब्रा मेें थे। जि‍म्‍मी का कहना था कि‍ पहले हमें ठहरने का इंतजाम कर लेना चाहि‍ए तब हमलोग ऊँट की सवारी करने चलेंगे। उसकी बात मान हम आबादी की ओर गए। कई जगह टेंट लगे नजर आए। इस जगह का नाम हुण्‍ड़ुर था। पता लगा कि‍ लोग यहाँ भी रात रहते हैं पर हमें कि...
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  May 21, 2018, 2:52 pm
 हम नुब्रा की ओर बढ़ रहे थे। लेह से इसकी दूरी 130 कि‍लोमीटर है। यह समुद्रतल से 10,000फुट की ऊँचाई पर स्‍थि‍त है। इसे लद्दाख का बाग भी कहते हैं।  हमारी बांयी ओर पहाड़ था तो सड़क के दाहि‍नी तरफ चौड़ी नदी। घाटी में बहती नुब्रा नदी सि‍याचि‍न ग्‍लेशि‍यर से नि‍कलती ह...
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  May 19, 2018, 9:36 pm
 हम नुब्रा की ओर बढ़ रहे थे। लेह से इसकी दूरी 130 कि‍लोमीटर है। यह समुद्रतल से 10,000फुट की ऊँचाई पर स्‍थि‍त है। इसे लद्दाख का बाग भी कहते हैं।  हमारी बांयी ओर पहाड़ था तो सड़क के दाहि‍नी तरफ चौड़ी नदी। घाटी में बहती नुब्रा नदी सि‍याचि‍न ग्‍लेशि‍यर से नि‍कलती ह...
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  May 19, 2018, 9:36 pm
सुबह उठकर हमलोग नुुबरा के लि‍ए नि‍कले। रास्‍ते में ही खारदुंगला पड़ता है। सर्पीला रास्‍ता, खि‍ली धूप और हरि‍याली। दूर तक शांति‍ स्‍तूप दि‍खता रहा। बहुत खूबसूरत। रास्‍ते में बहुत से घर भी मि‍ले, जि‍नकी छतों पर, सड़क कि‍नारे, पताकाएँ  लगी हुई थी। इससे पता चल...
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  May 18, 2018, 12:22 pm
जब हम होटल से नि‍कले तो रास्‍ते मेें लेेेह महल मि‍ला। मगर ड्राइवर का कहना था कि‍ लोग ढलती शाम को शांति‍ स्‍तूप देखना पसंद करते हैं। इसलि‍ए शाम होने से पहले वहाँ पहुँचकर हम वापस आ जाएँगे। पहुँचने पर पाया कि‍ अब आसमान का रंग गहरा नीला न होकर आसमानी या कह लें, फि‍रोजी ह...
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  May 17, 2018, 1:47 pm
जहाज से उतरते ही पाया कि‍ यह क्षेत्र सैनि‍क छावनी है। छोटा सा एयरपोर्ट जि‍सका नाम है ' कुशेक बकुला रि‍नपोछे टर्मिनल, लेह'। लेह हवाई अड्डा मुख्यतः सेना के लिए बनाया गया हवाई अड्डा है, जहाँ दिल्ली, चंडीगढ़, जम्मू और श्रीनगर से यात्री तथा मालवाहक विमान आवाजाह...
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  May 15, 2018, 3:11 pm
जहाज से उतरते ही पाया कि‍ यह क्षेत्र सैनि‍क छावनी है। छोटा सा एयरपोर्ट जि‍सका नाम है ' कुशेक बकुला रि‍नपोछे टर्मिनल, लेह'। लेह हवाई अड्डा मुख्यतः सेना के लिए बनाया गया हवाई अड्डा है, जहाँ दिल्ली, चंडीगढ़, जम्मू और श्रीनगर से यात्री तथा मालवाहक विमान आवाजाह...
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  May 15, 2018, 3:11 pm
आज मदर्स डे है। मातृ दि‍वस अर्थात मां के लि‍ए नि‍र्धारि‍त दि‍न। अब हम सब के लि‍ए यह खास दि‍न बन गया है क्‍योंकि‍ हर कि‍सी को अपनी मां से वि‍शेष लगाव और प्‍यार होता है। कुछ पंक्‍ि‍तयां है....''कभी पीठ से बंध, तो कभी लगकर सीने से मुझे फूलों की खुशबू आती है मां के पसीने सेजब होत...
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  May 13, 2018, 12:38 pm
अपने हिस्से का रो लियाचुप के,छुप केसमझा लिया ख़ुद कोकि कहावतें यूँ ही नहीं बनतीजीवन का अनुभव होता है इनमेंसमझते थेजो दिल में रहते हैंवो कहीं भी रहे, दूर नहीं होतेमगर ऐसे तो नहीं कहा होगाकिसी पुरखे नेकि 'आँखों से ओझल तो दिल से दूर'यह बातमाई समझती है सबकीइसलिए ना बिटवा को...
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  May 11, 2018, 12:55 pm
उलझकर रह जा रही इन दिनोंबातें ही बातें हैंइसकी-उसकी, जाने किस-किस की लोग कहते चले जा रहे सुनती हूँ शब्द उनके अर्थ सीधा निकलकर आता हैमगर समझती हूँ वही, जो ख़ुदसुनना चाहती हूँनकार देती हूँ अनचाहे शब्दों कोबीन कर फेंक देती हूँवो काले शब्द जो वाक्य मेंअखरते हैंऔर धान...
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  May 8, 2018, 1:10 pm
''इश्‍क की बात करनी थी जि‍क्र मौसम का ही कर गए होते खाली-खाली सा दि‍ल था आते-जाते हुए ज़रा भर गए होते '' ...
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  May 4, 2018, 3:21 pm
राँची से दि‍ल्‍ली, दि‍ल्‍ली से लेह। जुलाई माह हमारे घूमने के हि‍साब से सही नहीं क्‍योंकि‍ इस वक्‍त बच्‍चों के स्‍कूल खुले होते हैं। मगर कई बरसों से,बल्कि बचपन में जब से पढ़ा था लद्दाख के बारे में, एक बार जरूर जाना है, ऐसी इच्‍छा थी, और यही वक्‍त सही था जब बर्फ ज्‍य...
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  May 3, 2018, 11:39 am
नीला अम्‍बर, नीली झीलखोजती फि‍रती हूंनीले दर्पण मेंझांकती दो चंचल अंखि‍यांउड़ रही यादों की बदलि‍यांहि‍लता नहींझील का पानीपार दुर्गम पहाड़ों केनि‍कल गया कोई गांव-शहरपहाड़, समुंदर, रेगि‍स्‍तानजाने कहां-कहां...
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  April 6, 2018, 5:17 pm
मन की दीवार पर हैंयादें अनगिनतकुछ मिट चलीं, कुछ हैं अमिटकुछ का लिखायाद नहीं आता कुछ इतनी गहरी किउन पर नहीं चढ़ती कोई और यादबाहरी दीवार पर उकेरासबको नज़र आता हैमन की दीवार पर जो खुदा हैउसे किसको दिखाऊँकुरेद-कुरेद कर उकेर गयाजो एक बात कोईकिस तरह उसे भुलाऊँ, उसे मिटाऊँ...
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  April 4, 2018, 12:11 pm
भिंचे होंठों मेंछुपी है जो मुस्कानवो आँखों से बजाहिर हैयूँ न देखा करोप्यार पर बंदिशे नहीं होतींउँगलियाँ मचलतीं हैंसुलझेबाल बिखराने कोशब्दों और आँखों सेअलग बातें न करोकह तो दियाहाँ, गहरी हैंआँखें तुम्हारीपढ़ना मगर हमें भी आता है ।...
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  March 27, 2018, 10:05 pm
पलाश से प्रेम है मुझे...बहुतों को होगा, क्‍योंकि‍ यह है ही इतना खूबसूरत कि‍ सबको अपनी ओर आकर्षित कर लेता है। अभी फाल्‍गुन-चैत के महीने में आप झारखंड में कहीं भी शहर से दूर नि‍कल जाइए, पलाश के फूलों पर आपकी नजरें अटक जाएगी। आप मुरी से रांची आ रहे हों या रांची से जमशेदपुर क...
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  March 24, 2018, 7:45 pm
इस फागुन-चैत के मौसम में आप झारखंड में आसपास कहीं नि‍कल जाइए, ढेरों सफेद फूल की झाड़ि‍यां मि‍ल जाएगी। पांच पंखुड़ि‍यों वाला सफेद फूल, जि‍सके मूल में गुलाबी रंग होता है जि‍ससे भीनी-भीनी खुश्‍बू आती है। यह जंगली फूल है, मगर औषधीय पौधा है। डायरि‍या, लीवर डि‍सआर्डर, पेट में...
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  March 23, 2018, 6:41 pm

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  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
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