Hamarivani.com

रूप-अरूप

घंटे भर के सफर के बाद हम लेह महल पहुँचे। एक बार फि‍र शहर हमारे आंखों के आगे था। शहर के मध्य में स्थित इस महल का निर्माण सोलहवीं शताब्दी में सिंगे नामग्याल ने करवाया था। अंदर जाने के लि‍ए टि‍कट लेना पड़ा। बच्‍चों का मन नहीं था मगर हमें देखना था लेह महल। प्रवेश द्वार लकड...
रूप-अरूप...
Tag :
  May 27, 2018, 10:47 pm
कुछ दूर आगे बढ़ने पर पता लगा कि‍ सड़क बंद है। रास्‍ते में चट्टान गिर जाने से रास्‍ता बंद हो गया है। दूर तक लंबी कतार थी वाहनों की। पर वह एक खूबसूरत जगह थी। ऊँचे पहाड़, हरे-भरे । वहाँ दूर-दूर तक याक चर रहे थे। बगल में श्‍योक नदी बह रही थी। यह जगह खलसर थी।  हमने मजाक भी ...
रूप-अरूप...
Tag :
  May 25, 2018, 12:56 pm
 हम एक बार फि‍र दि‍स्‍कि‍त मठ की आेर थे। आज कि‍स्‍मत अच्‍छी थी। दलाई लामा थे वहाँ पर आज नीचे उनका सम्‍मेलन था। मठ तक गाड़ी चली गई। मठ दूर से ही बहुत खूबसूरत लग रहा था। मठ समुद्रतल से 10,310 फीट की ऊँचाई पर स्‍थि‍त है। दि‍सकि‍त बौद्ध मठ नुब्रा घाटी में सबसे पुरान...
रूप-अरूप...
Tag :
  May 23, 2018, 12:46 pm
थोड़ी देर बाद ही हम नुब्रा मेें थे। जि‍म्‍मी का कहना था कि‍ पहले हमें ठहरने का इंतजाम कर लेना चाहि‍ए तब हमलोग ऊँट की सवारी करने चलेंगे। उसकी बात मान हम आबादी की ओर गए। कई जगह टेंट लगे नजर आए। इस जगह का नाम हुण्‍ड़ुर था। पता लगा कि‍ लोग यहाँ भी रात रहते हैं पर हमें कि...
रूप-अरूप...
Tag :
  May 21, 2018, 2:52 pm
 हम नुब्रा की ओर बढ़ रहे थे। लेह से इसकी दूरी 130 कि‍लोमीटर है। यह समुद्रतल से 10,000फुट की ऊँचाई पर स्‍थि‍त है। इसे लद्दाख का बाग भी कहते हैं।  हमारी बांयी ओर पहाड़ था तो सड़क के दाहि‍नी तरफ चौड़ी नदी। घाटी में बहती नुब्रा नदी सि‍याचि‍न ग्‍लेशि‍यर से नि‍कलती ह...
रूप-अरूप...
Tag :
  May 19, 2018, 9:36 pm
 हम नुब्रा की ओर बढ़ रहे थे। लेह से इसकी दूरी 130 कि‍लोमीटर है। यह समुद्रतल से 10,000फुट की ऊँचाई पर स्‍थि‍त है। इसे लद्दाख का बाग भी कहते हैं।  हमारी बांयी ओर पहाड़ था तो सड़क के दाहि‍नी तरफ चौड़ी नदी। घाटी में बहती नुब्रा नदी सि‍याचि‍न ग्‍लेशि‍यर से नि‍कलती ह...
रूप-अरूप...
Tag :
  May 19, 2018, 9:36 pm
सुबह उठकर हमलोग नुुबरा के लि‍ए नि‍कले। रास्‍ते में ही खारदुंगला पड़ता है। सर्पीला रास्‍ता, खि‍ली धूप और हरि‍याली। दूर तक शांति‍ स्‍तूप दि‍खता रहा। बहुत खूबसूरत। रास्‍ते में बहुत से घर भी मि‍ले, जि‍नकी छतों पर, सड़क कि‍नारे, पताकाएँ  लगी हुई थी। इससे पता चल...
रूप-अरूप...
Tag :
  May 18, 2018, 12:22 pm
जब हम होटल से नि‍कले तो रास्‍ते मेें लेेेह महल मि‍ला। मगर ड्राइवर का कहना था कि‍ लोग ढलती शाम को शांति‍ स्‍तूप देखना पसंद करते हैं। इसलि‍ए शाम होने से पहले वहाँ पहुँचकर हम वापस आ जाएँगे। पहुँचने पर पाया कि‍ अब आसमान का रंग गहरा नीला न होकर आसमानी या कह लें, फि‍रोजी ह...
रूप-अरूप...
Tag :
  May 17, 2018, 1:47 pm
जहाज से उतरते ही पाया कि‍ यह क्षेत्र सैनि‍क छावनी है। छोटा सा एयरपोर्ट जि‍सका नाम है ' कुशेक बकुला रि‍नपोछे टर्मिनल, लेह'। लेह हवाई अड्डा मुख्यतः सेना के लिए बनाया गया हवाई अड्डा है, जहाँ दिल्ली, चंडीगढ़, जम्मू और श्रीनगर से यात्री तथा मालवाहक विमान आवाजाह...
रूप-अरूप...
Tag :
  May 15, 2018, 3:11 pm
जहाज से उतरते ही पाया कि‍ यह क्षेत्र सैनि‍क छावनी है। छोटा सा एयरपोर्ट जि‍सका नाम है ' कुशेक बकुला रि‍नपोछे टर्मिनल, लेह'। लेह हवाई अड्डा मुख्यतः सेना के लिए बनाया गया हवाई अड्डा है, जहाँ दिल्ली, चंडीगढ़, जम्मू और श्रीनगर से यात्री तथा मालवाहक विमान आवाजाह...
रूप-अरूप...
Tag :
  May 15, 2018, 3:11 pm
आज मदर्स डे है। मातृ दि‍वस अर्थात मां के लि‍ए नि‍र्धारि‍त दि‍न। अब हम सब के लि‍ए यह खास दि‍न बन गया है क्‍योंकि‍ हर कि‍सी को अपनी मां से वि‍शेष लगाव और प्‍यार होता है। कुछ पंक्‍ि‍तयां है....''कभी पीठ से बंध, तो कभी लगकर सीने से मुझे फूलों की खुशबू आती है मां के पसीने सेजब होत...
रूप-अरूप...
Tag :
  May 13, 2018, 12:38 pm
अपने हिस्से का रो लियाचुप के,छुप केसमझा लिया ख़ुद कोकि कहावतें यूँ ही नहीं बनतीजीवन का अनुभव होता है इनमेंसमझते थेजो दिल में रहते हैंवो कहीं भी रहे, दूर नहीं होतेमगर ऐसे तो नहीं कहा होगाकिसी पुरखे नेकि 'आँखों से ओझल तो दिल से दूर'यह बातमाई समझती है सबकीइसलिए ना बिटवा को...
रूप-अरूप...
Tag :
  May 11, 2018, 12:55 pm
उलझकर रह जा रही इन दिनोंबातें ही बातें हैंइसकी-उसकी, जाने किस-किस की लोग कहते चले जा रहे सुनती हूँ शब्द उनके अर्थ सीधा निकलकर आता हैमगर समझती हूँ वही, जो ख़ुदसुनना चाहती हूँनकार देती हूँ अनचाहे शब्दों कोबीन कर फेंक देती हूँवो काले शब्द जो वाक्य मेंअखरते हैंऔर धान...
रूप-अरूप...
Tag :
  May 8, 2018, 1:10 pm
''इश्‍क की बात करनी थी जि‍क्र मौसम का ही कर गए होते खाली-खाली सा दि‍ल था आते-जाते हुए ज़रा भर गए होते '' ...
रूप-अरूप...
Tag :
  May 4, 2018, 3:21 pm
राँची से दि‍ल्‍ली, दि‍ल्‍ली से लेह। जुलाई माह हमारे घूमने के हि‍साब से सही नहीं क्‍योंकि‍ इस वक्‍त बच्‍चों के स्‍कूल खुले होते हैं। मगर कई बरसों से,बल्कि बचपन में जब से पढ़ा था लद्दाख के बारे में, एक बार जरूर जाना है, ऐसी इच्‍छा थी, और यही वक्‍त सही था जब बर्फ ज्‍य...
रूप-अरूप...
Tag :
  May 3, 2018, 11:39 am
नीला अम्‍बर, नीली झीलखोजती फि‍रती हूंनीले दर्पण मेंझांकती दो चंचल अंखि‍यांउड़ रही यादों की बदलि‍यांहि‍लता नहींझील का पानीपार दुर्गम पहाड़ों केनि‍कल गया कोई गांव-शहरपहाड़, समुंदर, रेगि‍स्‍तानजाने कहां-कहां...
रूप-अरूप...
Tag :
  April 6, 2018, 5:17 pm
मन की दीवार पर हैंयादें अनगिनतकुछ मिट चलीं, कुछ हैं अमिटकुछ का लिखायाद नहीं आता कुछ इतनी गहरी किउन पर नहीं चढ़ती कोई और यादबाहरी दीवार पर उकेरासबको नज़र आता हैमन की दीवार पर जो खुदा हैउसे किसको दिखाऊँकुरेद-कुरेद कर उकेर गयाजो एक बात कोईकिस तरह उसे भुलाऊँ, उसे मिटाऊँ...
रूप-अरूप...
Tag :
  April 4, 2018, 12:11 pm
भिंचे होंठों मेंछुपी है जो मुस्कानवो आँखों से बजाहिर हैयूँ न देखा करोप्यार पर बंदिशे नहीं होतींउँगलियाँ मचलतीं हैंसुलझेबाल बिखराने कोशब्दों और आँखों सेअलग बातें न करोकह तो दियाहाँ, गहरी हैंआँखें तुम्हारीपढ़ना मगर हमें भी आता है ।...
रूप-अरूप...
Tag :
  March 27, 2018, 10:05 pm
पलाश से प्रेम है मुझे...बहुतों को होगा, क्‍योंकि‍ यह है ही इतना खूबसूरत कि‍ सबको अपनी ओर आकर्षित कर लेता है। अभी फाल्‍गुन-चैत के महीने में आप झारखंड में कहीं भी शहर से दूर नि‍कल जाइए, पलाश के फूलों पर आपकी नजरें अटक जाएगी। आप मुरी से रांची आ रहे हों या रांची से जमशेदपुर क...
रूप-अरूप...
Tag :
  March 24, 2018, 7:45 pm
इस फागुन-चैत के मौसम में आप झारखंड में आसपास कहीं नि‍कल जाइए, ढेरों सफेद फूल की झाड़ि‍यां मि‍ल जाएगी। पांच पंखुड़ि‍यों वाला सफेद फूल, जि‍सके मूल में गुलाबी रंग होता है जि‍ससे भीनी-भीनी खुश्‍बू आती है। यह जंगली फूल है, मगर औषधीय पौधा है। डायरि‍या, लीवर डि‍सआर्डर, पेट में...
रूप-अरूप...
Tag :
  March 23, 2018, 6:41 pm
एक दि‍न पहले साल में रसम की तरह फि‍र से गाैरैया दि‍वस की के तौर पर गायब होते प्‍यारे पक्षी गौरैया के लि‍ए फि‍क्र जता ली गई। इसके बाद अब हम सब अपनी-अपनी रोजमर्रा की जि‍ंदगी को सुवि‍धाजनक बनाने में लग जाएंगे। उसमें गौरैया की याद भी शायद नहीं हो। पि‍छले दि‍नों मैं नानी क...
रूप-अरूप...
Tag :
  March 21, 2018, 1:38 pm
त्‍योहार उल्‍लास का प्रतीक है। एक ऐसा अवसर जि‍समें परि‍वार के अलावा संगी-साथी और कई बार अनजाने लोगों के साथ मि‍लकर सौहार्दपूर्वक खुशी मनाई जाती है, जीवन का सुख लि‍या जाता है दैनि‍क कामों के अलग हटकर। और सरहुल एक ऐसा त्‍योहार है जि‍समें केवल उत्‍साह है, उमंग है और नृत्...
रूप-अरूप...
Tag :
  March 20, 2018, 12:00 pm
अक्सर लताओं की तुलना स्त्री से की जाती है। पर क्या आप जानते हैं कि यह पीली लता जो आपको आसपास किसी बेर , कीकर या बबूल पर लिपटी हुई दिखती है, यह कितनी ख़तरनाक होती है उस पेड़ के लिए ?इसका नाम आकाशबेल, अमरबेल या आकाशवल्लरी, आलोकलता है। स्वर्णलता भी इसे ही कहते हैं। सुनने में बड...
रूप-अरूप...
Tag :
  March 19, 2018, 12:48 pm
चैत आ गया फि‍र से..केवल आया ही नहीं, पूर्ण यौवन पा इठला रही है हवा। कोमल कुसुम की ललछौहीं पत्‍ति‍यां मोह रही मन को। रक्‍तपलाश से दहक रहा गांव-जंगल। सुबह-सवेरे पलाश की नारंगी चादर बि‍छी है धरती पर।  पीले महुए से पटी गई है जमीन भोर में।मंद-मंद बहती है बयार सुबह सवेरे चैत म...
रूप-अरूप...
Tag :
  March 18, 2018, 9:43 pm
तुम दुःखी हो !नहीं लगता मुझे बिल्कुल ऐसाईश्वर का दिया सब हैपास तुम्हारेतुमने जो अर्जित किया उसका भी सुख भोग रहे होदुःख क्या होता हैदरअसल तुमने जाना नहींदेखो अपने आसपास किसीतन-धन से लाचार वृद्ध कोऔर महसूस करो दर्द उसकाऐसी पीड़ा जो तन से अधिकमन को व्यथित करेऔर उसे प्...
रूप-अरूप...
Tag :
  March 16, 2018, 11:25 am

Share:
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3801) कुल पोस्ट (179769)