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मन पाए विश्राम जहाँ

लहर उठी सहज तरंगित उच्छल ऊर्जित लहर उठी विराट सागर में, लक्ष्य नहीं है कोई जिसका गिर जाती विलीन हो पल में ! छूता कोई दृश्य गगन का कभी धरा हँसती अंतर में, निज सृष्टि शुभा देख-देख ही मुग्ध हो रहा कोई जग में ! कर वीणा तारों को झंकृत हर्षित हो निनाद उपजाता, सहज जगे जब प...
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Tag :गगन
  January 31, 2018, 11:50 am
एक अजाना मौन कहीं है कभी उत्तंग नभ को छूतीं कभी क्लांत हो तट पे सोतीं, सागर को परिभाषित करतीं  उन लहरों का स्रोत कहीं है ! कभी बुद्ध करुणानिधि बनता रावण सा भी व्यर्थ गर्जता, दुनिया जिसके बल पर चलती उस मानव का अर्थ कहीं है ! अंतर को मधु से भर जाते जोश बाजुओं में भर ...
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Tag :बुद्ध
  January 29, 2018, 3:51 pm
गणतन्त्र दिवस पर हार्दिक शुभकामनाओं सहित  जैसे चन्द्र चमकता नभ में भूमंडल पर देश सैकड़ों भारत की है बात निराली, जैसे चन्द्र चमकता नभ में दिपदिप भारत की फुलवारी ! जिओ और जीने दो’ का यह    मन्त्र सिखाता सारे जग को, योग शक्ति से खुद को पायें राह दिखाता हर मानव को ! प्...
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Tag :भारत
  January 26, 2018, 3:02 pm
आज छोटी बहन के विवाह की वर्षगांठ है, यह कविता उन सभी को समर्पित है जिनके विवाह की वर्षगांठ इस हफ्ते है. विवाह की वर्षगांठ पर शुभकामनाओं सहित  बरसों से ज्यों चल रहे, लिए हाथ में हाथ राज खोलते हैं यही, जन्म-जन्म का साथ इक दूजे का हौसला, इक दूजे का मान बन सदा दिखलाया है, द...
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Tag :मन पाए विश्राम जहाँ
  January 25, 2018, 3:11 pm
सारा आकाश मिला है शब्दों के पंख मिले हैं सारा आकाश मिला है, दिल में इक विरह अनोखा रब में विश्वास मिला है ! पलकों में मोती पलते नयनों में दीप संवरते, अधरों पर गीत मिलन के राहों में रहे बिखरते ! अंतर में अभिलाषा है खिलने की शुभ आशा है, बाहर आने को आतुर बचकानी सी भाष...
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Tag :पंख
  January 23, 2018, 9:01 am
कदमों में भी राहें हैं अभी जुम्बिश भुजाओं में कदगों में भी राहें हैं, अभी है हौसला दिल में गंतव्य पर निगाहें हैं ! परम  दिन-रात रचता है जगती नित नूतन सजती, नींदों में सपन भेजे जागरण में धुनें बजतीं ! चलें, हम थाम लें दामन इसी पल को अमर कर लें, छुपा है गर्भ में जिसके उस...
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Tag :कदम
  January 12, 2018, 4:46 pm
जो कहा नहीं पर सुना गया शब्दों में ढाल न पाएँगे जो जाम पिलाये मस्ती के, कुदरत बिन बोले भर देती मृदु मौन झर रहा अम्बर से ! मदमस्त हुआ आलम सारा कुछ गमक उठी कुछ महक जगी, तितली भँवरों के झुंड बढ़े कुसुमों ने पलकें क्या खोलीं ! नयनों से कोई झाँक रहा जाने किस गहरे अन्तस् ...
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Tag :गीत
  December 19, 2017, 2:04 pm
जो कहा नहीं पर सुना गया शब्दों में ढाल न पाएँगे जो जाम पिलाये मस्ती के, कुदरत बिन बोले भर देती मृदु मौन झर रहा अम्बर से ! मदमस्त हुआ आलम सारा कुछ गमक उठी कुछ महक जगी, तितली भँवरों के झुंड बढ़े कुसुमों ने पलकें क्या खोलीं ! नयनों से कोई झाँक रहा जाने किस गहरे अन्तस् ...
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Tag :गीत
  December 19, 2017, 2:04 pm
कितनी धूप छुए बिन गुजरी कितना नीर बहा अम्बर से कितने कुसुम उगे उपवन में, बिना खिले ही दफन हो गयीं कितनी मुस्कानें अंतर में ! कितनी धूप छुए बिन गुजरी कितना गगन न आया हिस्से, मुंदे नयन रहे कर्ण अनसुने बुन सकते थे कितने किस्से ! कितने दिवस डाकिया लाया कहाँ खो गये बिन...
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Tag :गीत
  December 15, 2017, 5:27 pm
 अभी समय है नजर मिलाएं नया वर्ष आने से पहले नूतन मन का निर्माण करें, नया जोश, नव बोध भरे उर नये युग का आह्वान करें ! अभी समय है नजर मिलाएं स्वयं, स्वयं को जाँचें परखे, झाड़ सिलवटों को आंचल से नयी दृष्टि से जग को निरखे ! रंजिश नहीं हो जिस दृष्टि में नहीं भेद कुछ भले-बुर...
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Tag :दृष्टि
  November 15, 2017, 10:45 am
एक निपट आकाश सरीखा नयन खुले हों या मुँद जाएँ जीवन अमि अंतर भरता है, मन सीमा में जिसे बांधता वह उन्मुक्त सदा बहता है ! चाह उठे उठ कर खो जाये दर्पण बना अछूता रहता, एक निपट आकाश सरीखा टिका स्वयं में कुछ ना कहता ! अकथ कहानी जिसने बाँची चकित ठगा सा चुप हो जाता, जाने कितन...
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Tag :दर्पण
  November 9, 2017, 2:02 pm
एक दीप बन राह दिखाए अंतर दीप जलेगा जिस पल तोड़ तमस की कारा काली, पर्व ज्योति का सफल तभी है उर छाए अनन्त उजियाली ! एक दीप बन राह दिखाए मन जुड़ जाए परम् ज्योति से, अंधकार की रहे न  रेखा जगमग पथ पर बढ़े खुशी से ! माटी का तन करे उजाला आत्मज्योति शक्ति बन चमके, नयन दीप्त हों स्म...
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Tag :ज्योति
  October 22, 2017, 6:12 pm
जिन्दगी हर पल बुलाती किस कदर भटके हुए से राह भूले चल रहे हम, होश खोया बेखुदी में लुगदियों से गल रहे हम ! रौशनी थी, था उजाला पर अंधेरों में भटकते, जिन्दगी हर पल बुलाती अनसुनी हर बार करते ! चाहतों के जाल में ही घिरा सा मन बुने सपना, पा लिये जो पल सुकूं के नहीं जाना मोल ...
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Tag :उजाला
  October 13, 2017, 2:31 pm
लीला एक अनोखी चलती  सारा कच्चा माल पड़ा है वहाँ अस्तित्त्व के गर्भ में.... जो जैसा चाहे निर्माण करे निज जीवन का ! महाभारत का युद्ध पहले ही लड़ा जा चुका है अब हमारी बारी है... वहाँ सब कुछ है ! थमा दिये जाते हैं जैसे खिलाडियों को उपकरण खेल से पूर्व अब अच्छा या बुरा खेल...
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Tag :कामना
  October 9, 2017, 2:46 pm
एक पुहुप सा खिला है कौन  एक निहार बूँद सी पल भर किसने देह धरी, एक लहर सागर में लेकर किसका नाम चढ़ी ! बिखरी बूँद लहर डूब गयी  पल भर दर्श दिखा,   जैसे घने बादलों में इक चपला दीप जला ! एक पुहुप सा खिला है कौन  जो चुपचाप झरे,   एक कूक कोकिल की गूँजे इक निश्वास भरे ! एक राज ...
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Tag :निहार
  September 25, 2017, 3:24 pm
अब नया-नया सा हर पल है अब तू भी याद नहीं आता अब मस्ती को ही ओढ़ा है, अब सहज उड़ान भरेगा मन जब से हमने भय छोड़ा है ! वह भीति बनी थी चाहों से कुछ दर्दों से, कुछ आहों से, अब नया-नया सा हर पल है अब रस्तों को ही मोड़ा है ! हर क्षण मरना ही जीवन है गिन ली दिल की हर धड़कन है, पल में ही पाया ह...
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Tag :अलस
  September 22, 2017, 10:23 am
एक कलश मस्ती का जैसे बरस रहा सावन मधु बन कर या मदिर चाँदनी मृगांक की, एक कलश मस्ती का जैसे भर सुवास किसी मृदु छंद की ! जीवन बँटता ही जाता है अमृत का एक स्रोत बह रहा, लहराता सागर ज्यों नाचे अंतर में नव राग उमगता ! टूट गयी जब नींद हृदय की गाठें खुल-खुल कर बिखरी हैं, एक अजा...
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Tag :जीवन
  September 18, 2017, 3:05 pm
हिंदी दिवस पर उन अनगिनत साहित्यकारों को विनम्र नमन के साथ समर्पित जिनके साहित्य को पढ़कर ही भीतर सृजन की अल्प क्षमता को प्रश्रय मिला है. जिनके शब्दों का रोपन वर्षों पहले मन की जमीन पर हुआ और आज अंकुरित होकर वाक्यों और पदों के रूप में प्रकटा है. स्मृतियों का एक घना अर...
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Tag :भाषा
  September 14, 2017, 5:25 pm
जाने कब वह घड़ी मिलेगी    तुमको ही तुमसे मिलना है  खुला हुआ अविरल मन उपवन,  जब जी चाहे चरण धरो तुम सदा गूंजती मृदु धुन अर्चन !  न अधैर्य से कंपतीं श्वासें  शुभ्र गगन से छाओ भीतर,  दिनकर स्वर्ण रश्मि बन छूओ कुसुमों की या खुशबू बनकर !  कभी न तुमको बिसराया है  जगते-सोते या...
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Tag :गगन
  September 13, 2017, 3:12 pm
एक अजब सा खेल चल रहा इक ही धुन बजती धड़कन में इक ही राग बसा कण-कण में, एक ही मंजिल,  रस्ता एक इक ही प्यास शेष जीवन में ! मधुरम धुन वह निज हस्ती की एक रागिनी है मस्ती की, एक पुकार सुनाई देती दूर पर्वतों की बस्ती की ! मस्त हुआ जाये ज्यों नदिया पंछी जैसे उड़ते गाते, डोलें ...
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Tag :धुन
  September 8, 2017, 11:31 am
गीत अंतर में छिपा है शब्द कुछ सोये हुए से भाव कुछ-कुछ हैं अजाने, गीत अंतर में छिपा है सृजन की कुछ बात कर लें ! बीज भीतर चेतना का फूल बनने को तरसता, बूंद कोई कैद भीतर मेघ बन चाहे बरसना ! आज दिल से कुछ रचें हम मन नहीं यूँ व्यर्थ भटके, तृषा आतुर तृप्त होगी ललक जब अंतर से प्...
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Tag :दिल
  August 30, 2017, 10:35 am
किसका रस्ता अब जोहे मन तू गाता है स्वर भी तेरे लिखवाता नित गान अनूठे, तू ही गति है जड़ काया में सहज प्रेरणा, उर में पैठे ! किसका रस्ता अब जोहे मन पाहुन घर में ही रहता है, हर अभाव को पूर गया जो निर्झर उर में वह बहता है ! तू पूर्ण हमें पूर्ण कर रहा नहीं अज्ञता तुझको भाती, हर...
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Tag :ज्योतिर्मय
  August 27, 2017, 10:28 am
अमृत बन कर वह ढलता है उससे परिचय होना भर है कदम-कदम पर वह मिलता है, उर का मंथन कर जो पाले परम प्रेम से मन खिलता है ! भीतर के उजियाले में ही सत्य सनातन झलक दिखाता, कण-कण में फिर वही छिपा सा  साँस-साँस  में भीतर आता ! पहले आँसू जगत हेतु थे अब उस पर अर्पित होते हैं अंतर भ...
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Tag :ज्योति
  August 23, 2017, 3:03 pm
स्वप्न देखे जगत सारा  झिलमिलाते से सितारे झील के जल में निहारें, रात की निस्तब्धता में उर उसी पी को पुकारे ! अचल जल में कीट कोई कोलाहल मचा गया है, झूमती सी डाल ऊपर खग कोई हिला गया है ! दूर कोई दीप जलता राह देखे जो पथिक की, कूक जाती पक्षिणी फिर नींद खुलती बस क्षणिक सी ...
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Tag :दीप
  August 18, 2017, 4:09 pm
फूल ढूँढने निकला खुशबू पानी मथे जाता संसार बाहर ढूँढ रहा है प्यार, फूल ढूँढने निकला खुशबू मानव ढूँढे जग में सार ! लगे यहाँ  राजा भी भिक्षुक नेता मत के पीछे चलता, सबने गाड़े अपने खेमे बंदर बाँट खेल है चलता ! सही गलत का भेद खो रहा लक्ष्मण रेखा मिटी कभी की. मूल्यों की फ़िक...
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Tag :प्यार
  August 16, 2017, 5:55 pm

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  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
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