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Blog: मन पाए विश्राम जहाँ

Blogger: Anita nihalani
जो बरसती है अकारण छू रहा है मखमली सा परस कोई इक अनूठा, बह रहा ज्यों इक समुन्दर आए नजर बस छोर ना !काँपते से गात के कण लगन सिहरन भर रही हो, कोई सरिता स्वर्ग से ज्यों हौले-हौले झर रही हो  !एक मदहोशी है ऐसी होश में जो ले के आती, नाम उसका कौन जाने कौन जो करुणा बहाती !बह रही वह पुण्... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   3:31am 20 Feb 2021 #मन पाए विश्राम जहाँ
Blogger: Anita nihalani
उसे बहने दोवह बहना चाहता है निर्विरोध निर्विकल्प हमारे माध्यम से प्रेम और आनंद बन पाहन बन यदि रोका उसका मार्ग तो वही बहेगा रोष और विषाद बनकर !वह हजार-हजार ढंग से प्रकट होता है यदि राम बनने की सम्भावना न दिखे तो रावण बन सकता है वह उस ऊर्जावान नदी की तरह है जिसे मार्ग न ... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   5:06am 15 Feb 2021 #ज्ञान
Blogger: Anita nihalani
शरण गए बिन बात न बनती अंधकार मन का जो हरता ज्ञान मोतियों से उर भरता उसकी महिमा कही न जाती गुरुद्वार पर भीड़ उमड़ती शरण गए बिन बात न बनती शरण गए बिन बात न बनती !हर पीड़ा का कारण जाने भीतर बाहर वह पहचाने परम सत्य तक खुद ले जाता उसके निकट अभय मन पाता आँखों से शुभ कृपा झलकती शर... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   5:26am 10 Feb 2021 #पीड़ा
Blogger: Anita nihalani
नाविक भी हो मीत पुरानासुख का सागर सभी चाहते दुःख के ग्राह वहीं रहते हैं,नैया एक अगर पा जाएँ उस तट पहुँचें यह कहते हैं !हो नाव में सुराख़ न कोई नाविक भी हो मीत पुराना,लहरों पर उठते-गिरते ही कट जायेगा सफर सुहाना !देह ही तरणि मन है नाविक अब सब जांच परख लें ऐसे, मिले प्रकृति से ... Read more
clicks 129 View   Vote 0 Like   8:48am 8 Feb 2021 #नाविक
Blogger: Anita nihalani
जाने कैसी लीला अद्भुत  भोली सी मुस्कान ओढ़कर सेल्फी तो इक ले डाली,पर दीवाने दिल से पूछा है क्या वह अपने से राजी !जिसने देखे स्वप्न सलोने या जो ख्वाबों में रोया था, उस छलिया से कुछ तो पूछो कब वह चैन से सोया था !‘उसको’ तो बस तकना आता टुकुर-टुकुर देखा करता है, मन बेचारा किसकी ... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   9:32am 5 Feb 2021 #दिल
Blogger: Anita nihalani
अब भी उस का दर खुला है खो दिया आराम जी का खो दिया है चैन दिल का,दूर आके जिंदगी से खो दिया हर सबब कब का !गुम हुआ घर का पता ज्योंभीड़ ही अब नजर आती,टूटकर बैठा सड़क पर घर की भी न याद आती !रास्तों पर कब किसी के फैसले किस्मत के होते, कुछ फ़िकर हो कायदों की हल तभी कुछ हाथ आते !दूर आके अब ... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   9:10am 3 Feb 2021 #किस्मत
Blogger: Anita nihalani
ब्रह्म मुहूर्त का कोरा  पल सोये हैं अभी पात वृक्ष के स्थिर जैसे हों चित्रलिखित से किन्तु झर रही मदिर सुवास छन-छन आती है खिड़की से निकट ही कंचन मौन खड़ा है मद्धिम झींगुर गान गूँजता पूरब में हलचल सी होती नभ पर छायी अभी कालिमा एक शांत निस्तब्ध जगत है ब्रह्म मुहूर्त का कोर... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   4:29am 1 Feb 2021 #पूरब
Blogger: Anita nihalani
बहा करो उन्मुक्त पवन सम अनल, अनिल, वसुधा, पानी से जीवन का संगीत उपजता, मिले-जुले सब तत्व दे रहे संसृति को अनुपम समरसता !हर कलुष मिटाती कर पावनचलती फिरती आग बनो तुम, अपनेपन की गर्माहट भर कोमल ज्योतिर राग बनो तुम !बहा करो उन्मुक्त पवन सम सूक्ष्म भाव अनंत के धारे,  सारे जग क... Read more
clicks 119 View   Vote 0 Like   5:57am 29 Jan 2021 #अनिल
Blogger: Anita nihalani
 आस्था का दीप वक्त पर जो थाम ले गिरते हुए को बढ़े आगे हाथ दे हिलते हुए को,जो गमों की धूप से दिल को बचाएज्ञान वह जो डूबते के काम आये !ज्ञान भरता है उजाला पथ अँधेरे जब मिलें खिला देता पुष्प, पत्थर जब कभी पथ पर मिलें, जब कभी संशय सताये राही कोई पथ न पाए काट देता हर विभ्रम को ज्ञा... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   10:44am 28 Jan 2021 #ज्ञान
Blogger: Anita nihalani
दिल्ली देश की राजधानी बनने की बड़ी ही भारी कीमत चुकाई है अतीत में भी अनेकों बार दिल्ली ने ! एक बार फिर सुबह की शांत दिल्ली दोपहर को बदल गई जैसे एक युद्ध क्षेत्र में ! लालकिले पर नृशंसता से चढ़ती हुई भीड़ और हथियारों का प्रदर्शन खुलेआम ! जैसे कोई दुश्मन सेना चढ़ आयी हो निरंक... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   6:01am 27 Jan 2021 #भारत
Blogger: Anita nihalani
गणतन्त्र दिवस पर शुभकामनायें गणपति के देश में फलता-फूलता रहा है गणतन्त्र शताब्दियों से इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं उन गणराज्यों की अनेक गाथाएं जहाँ भारत ने विकास के चरम को छुआ था लोकतान्त्रिक गणतन्त्र यह देश बना है मिसाल दुनिया के लिए जहाँ जनता सर्वोपरि है जिसक... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   2:45am 25 Jan 2021 #इतिहास
Blogger: Anita nihalani
हवा का सागर हवा की सरगोशियाँ गर कोई सुन सके पल भर भी तन्हा छोड़ती न रब हो जैसे लिपट जाती परस उसका फूल जैसा जिंदगी को राह देती श्वास बनकर झूमते वट, वृक्ष, जंगल, लता, पादप, फूल सारे लहर दरिया, सिंधु के तन पर उठातीसरसराती सी कभी कानों को छूले सुनो ! कहती मत कहो, तुम हो अकेले ! वह ... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   10:08am 24 Jan 2021 #मन पाए विश्राम जहाँ
Blogger: Anita nihalani
कुछ ख्याल ‘कुछ’ होने से ‘कुछ नहीं’ हो जाना  इश्क का इतना सा ही तो फ़साना  चुप रहकर ही यह बयां होता है आवाजों में बस रुसवा होता है सुनो, सुनो और कुछ न कहोउसी धारा में चुपचाप बहो उससे बढ़कर न कुछ था न होगा जमाने में उसी को आने दो हर बात, हर तराने में लाख पर्दों में छिपा हो हीरा... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   9:40am 20 Jan 2021 #ख्याल
Blogger: Anita nihalani
बस इतना सा ही सरमायागीत अनकहे, उश्ना उर की बस इतना सा ही सरमाया ! काँधे पर जीवन हल रखकर धरती पर जब कदम बढाये कुछ शब्दों के बीज गिराकर  उपवन गीतों से महकाए ! प्रीत अदेखी, याद उसी की बस इतना सा ही सरमाया ! कदमों से धरती जब नापीअंतरिक्ष में जा पहुँचा मन कुछ तारों के हार पिरोय... Read more
clicks 108 View   Vote 0 Like   9:19am 19 Jan 2021 #गीत
Blogger: Anita nihalani
 कोई जानता हैमन के ‘परदे’ पर यादों की फिल्म चलती है ‘वह’ उसी तरह रहता है अलिप्त जैसे आँख के पर्दे पर चित्र बने अग्नि का तो जलती नहीं न ही भीगती समुन्दर की लहरों को घंटों देखते हुए स्मृतियों के बीज हमने संभाल कर रखे हैं वर्तमान और अनेक जन्मों के उन्हें स्वयं ही बोते है... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   5:37am 18 Jan 2021 #फिल्म
Blogger: Anita nihalani
तुम यदि  तुम यदि बन जाओ सूत्रधार तो सँवर ही जायेगा जीवन का हर क्षण  मुस्कान झरेगी जैसे झरते हैं फूल शेफाली के अनायास ही हवा के हल्के से झोंके की छुअन से या सूरज की पहली किरण आकर जगाती है  तो हो जाते हैं समर्पित अस्तित्त्व को सहज ही !तुम यदि बनो जीवन आधारतो निखर ही जायेग... Read more
clicks 245 View   Vote 0 Like   9:59am 17 Jan 2021 #आशंका
Blogger: Anita nihalani
सहज है जीवन भूल गए जग को जहाँ सँवारा हमने मन पर धूल गिरी थी आकर, जग पानी पी-पी कर धोया मन का प्रक्षालन भूल गए !नाजुक है जो जरा ठेस से आहत होता किरच चुभे गर, दिखता आर-पार भी इसके कांच ही है यह भूल गए !तुलना करना सदा व्यर्थ है दो पत्ते भी नहीं एक से, व्यर्थ स्वयं को तौला करते स... Read more
clicks 100 View   Vote 0 Like   5:59am 15 Jan 2021 #जीवन
Blogger: Anita nihalani
जब नया साल आने को है  हर भोर नयी हर दिवस नया हर साँझ नयी हर चाँद नया,हर अनुभुव भी पृथक पूर्व से हर स्वप्न लिए संदेश नया !हम बंधे  हुए इक लीक चलें प्रतिबिम्ब कैद ज्यों दर्पण में,समय चक्र आगे बढ़ता पर ठिठक वहीं रह जाते तकते !नयी चुनौती, नव उम्मीदें करें सामना नई ललक से, बीता क... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   5:48am 22 Dec 2020 #नया साल
Blogger: Anita nihalani
 जाता हुआ साल कोरोना का महाआतंक छाया रहा पूरे साल शताब्दी की प्रथम महामारी से आज भी दुनिया है बेहाल !करोड़ों हुए संक्रमित, लाखों ने जान गंवायीअर्थव्यवस्थाएं पटरी से उतरीं न जाने कैसी आफत आयी !उम्मीद टिकी है वैक्सीन पर राजनीतिक उठापटक चलती रही बदस्तूर ट्रम्प हुए विदा ... Read more
clicks 71 View   Vote 0 Like   10:32am 19 Dec 2020 #जलवायु
Blogger: Anita nihalani
ध्यान में  ज्यों बेदखल कर देता है कोई पिता नाकारा संतति को अपनी वसीयत से कई बार समझाने पर  राह पर न आना चाहे जो वैसे ही नादां मन जब तक नहीं किया जाता बेदखल चैन नहीं मिलता पल भर अतीत की स्मृतियों को उभारेगानए-नए सुझाव और विचार देगा उन्नति के पूर्वाग्रहों और धारणाओं से ... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   10:12am 15 Dec 2020 #ध्यान
Blogger: Anita nihalani
ऊँघता मधुमास भीतर अनसुनी कब तक करोगे टेर वह दिन-रात देता,ऊँघता मधुमास भीतर कब खिलेगा बाट तकता !विकट पाहन कन्दरा में सरिता सुखद इक बह रही, तोड़ सारे बाँध झूठे राह देनी है उसे भी !एक है कैलाश अनुपम प्रकृति पावन स्रोत भी है,  कुम्भ एक अमृत सरीखा क्षीर सागर भी वहीं है !दृष्ट... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   10:17am 3 Dec 2020 #प्रकृति
Blogger: Anita nihalani
पल-पल है चेतना नई सीग्रह - नक्षत्र, धरा,रवि, चाँद पादप, पशु, नदिया, चट्टान,  पवन डोलती तूफ़ां उठते सृष्टि पूर्ण मानव अनजान !बंधी एक नियम, ऋत, क्रम में नित नूतन यह पुनर्नवा सी, अंतर घिरा अतीत धूम्र से पल-पल है चेतना नई सी !सुख की चाह रहे भरमाती पीड़ा के वन में ले जाए, जितनी दौड़ लग... Read more
clicks 102 View   Vote 0 Like   5:12am 2 Dec 2020 #चेतन
Blogger: Anita nihalani
 लो फिर आयी विमल दीवाली जगमग दीप जले पंक्ति में बन्दनवार लगे हर द्वारे सजी दिवाली महके जन पथ तोरण सजे गली चौबारे उठी सुगन्ध गुजिया, मोदक की वस्त्र नए देहों पर सरसरलगी झालरें जली बत्तियां थाल सजे पूजा के मनहर सजे विनयाक, धान्य लक्ष्मी राग जगाती सुख बरसाती लो फिर आयी ... Read more
clicks 220 View   Vote 0 Like   11:08am 12 Nov 2020 #पूजा
Blogger: Anita nihalani
समय या भ्रम   समय जो निरंतर गतिमान है क्या वाकई गति करता है? या घटनाएं ही ऐसा प्रतीत कराती हैं दिन और रात माह और वर्ष जन्म और मृत्यु के मध्य समय बहता सा लगता है  पर देखने वाला सदा एक सा रहता है ! रेत पर धँसे पाँव ज्यों कहीं जाते से प्रतीत होते हैं लहर आकर चली जाती है ... Read more
clicks 78 View   Vote 0 Like   5:41am 5 Nov 2020 #जन्म
Blogger: Anita nihalani
स्वधर्म – परधर्मस्वधर्म – परधर्म यह सारी कायनात भिन्न नहीं है हमसे झींगुर बोलता बाहर है पर हम भीतर सुनते हैं पेड़ पर गाती कोकिल की गूंज भीतर कुछ स्पंदन जगा जाती है सूरज बाहर है या भीतर ? हमारी आँखें उसी से नहीं देखती क्या   बाहर बहती हवा प्राण भीतर भरती  है भीतर व बाहर का भ... Read more
clicks 119 View   Vote 0 Like   5:11am 29 Oct 2020 #कायनात

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