POPULAR ENGLISH+ SIGNUP LOGIN

Blog: कभी-कभार

Blogger: Jaydeep Shekhar
        ये दोनों तस्वीरें कल की हैं। हमारे यहाँ के बिन्दुधाम की। दोनों के बीच फासला सौ मीटर से ज्यादा का नहीं होगा। एक ओर पूरे ताम-झाम एवं आडम्बर के साथ महाशतचण्डी यज्ञ की पूर्णाहुति चल रही है, तो दूसरी तरफ धरतीपुत्र "साफा होड़" (आदिवासियों का वह समुदाय, जिसने ईसा... Read more
clicks 53 View   Vote 0 Like   2:55am 14 Apr 2019 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
राजन जी के साथ, जो कभी होली की सुबह 'स्वांग'रचा करते थे... हमारे इलाके में होली को दो भागों में मनाते हैं- पहले भाग में सुबह से दोपहर तक पानी वाले रंग से होली खेलते हैं और दूसरे भाग में शाम को गुलाल से। ऐसी परम्परा देश के किन-किन हिस्सों में है, यह नहीं पता। जाहिर है कि पहले भा... Read more
clicks 88 View   Vote 0 Like   4:20pm 21 Mar 2019 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
चित्र में सरसों के पीले फूलों से ढका खेत का एक टुकड़ा दिखायी पड़ रहा होगा। ध्यान से देखने पर पता चलेगा कि उसके बाद खेतों का एक विशाल रकबा वीरान पड़ा है- यानि परती। हमारे इलाके में आजकल यह दृश्य आम है। धान की फसल के बाद करीब 90 प्रतिशत खेत परती रह जाते हैं। मुश्किल से दस प्रतिश... Read more
clicks 56 View   Vote 0 Like   3:52pm 17 Jan 2019 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
     विजयादशमी के दिन शस्त्र-पूजन की परम्परा है। अब एक किसान या खेतीहर मजदूर के लिए अस्त्र-शस्त्र क्या है? बेशक, कुदाल (फावड़ा), हँसिया, तराजू इत्यादि। दूसरी जगहों के बारे में हम नहीं जानते, पर हमारे पैतृक गाँव में इन्हीं शस्त्रों की पूजन की परम्परा है। ऊपर जो दो छाया... Read more
clicks 96 View   Vote 0 Like   11:41am 19 Oct 2018 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
      तस्वीर खींचते समय एक होता है- 'इधर देखिये, मुकुराईये'कह कर (अँग्रेजी में- 'Say Cheese') तस्वीर खींचना और एक होता है- जब कोई किसी काम में या बातचीत में, या फिर किसी भी एक्टिविटि में मशगूल हो, तब तस्वीर खींच लेना। पहले तरीके से तस्वीर खींचने पर आम तौर पर एक "कृत्रिम"हँसी कै... Read more
clicks 94 View   Vote 0 Like   5:43am 26 Aug 2018 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
      कल जाने क्या सूझा, हम शाम ढलने के बाद 'शिवगादी'के लिए रवाना हुए। उद्देश्य- सावन की पहली सोमवारी पर शिव की पूजा-अर्चना। योजना जयचाँद की थी। मेरा पाषाणयुगीन स्कुटर (बजाज- लीजेण्ड) कुछ समय से पंगु खड़ा है। जयचाँद ने ही अपने मित्र की स्कुटी की व्यवस्था की मेरे लिए। ... Read more
clicks 259 View   Vote 0 Like   5:22pm 31 Jul 2018 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
हमारे इलाके का  "ब्लिस" . छाया-  जयचाँद        "ब्लिस"का हिन्दी हुआ- परमानन्द!       "ब्लिस"उस तस्वीर का शीर्षक है, जो कभी Windows XP का डिफॉल्ट वालपेपर हुआ करता था। इसके छायाकार हैं- चार्ल्स ओ'रियर। वे नेशनल जियोग्राफिक के मशहूर छायाकार हैं। इस तस्वीर को उन्होंन... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   3:30pm 9 Jun 2018 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
अभी तक जरुरत नहीं पड़ी थी; मगर पिछ्ले दिनों जब एक करीबी की चिकित्सा जाँच में गुर्दे की खराबी की समस्या सामने आयी, तो हमें (इण्टरनेट पर) गुर्दे के सम्बन्ध में थोड़ा अध्ययन करना पड़ा। पता चला कि खराब गुर्दों को फिर से स्वस्थ बनाने के लिए कोई इंजेक्शन या दवा होती ही नहीं है! डॉक... Read more
clicks 96 View   Vote 0 Like   2:58pm 13 May 2018 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
       वर्ष 2002 या 03 की बात है। हम 'बिहटा'में थे- पटना और आरा के बीच यह कस्बा है। वहाँ वायु सेना का एक स्टेशन है। बीस वर्षों की सेवा की अन्तिम पोस्टिंग थी हमारी- 2005 में घर लौटना था।        'सिगनल सेक्शन'से बाकी सभी सेक्शनों को खबर मिलती है- जिन्हें "सिम"चाहिए, उनके ... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   12:34pm 24 Mar 2018 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
       हमारे इलाके के एक झील का नाम है- पतौड़ा। बरहरवा से सात-आठ किलोमीटर दूर- उधवा कस्बे के पास। इस पर पहले से मेरा एक आलेख है इस ब्लॉग पर।       अभी खबर है कि इस बार सबसे अधिक प्रजाति के प्रवासी पक्षी इसी पतौड़ा झील में आये थे।Bird Watching अपने आप में एक शौक है। चिड़ियों ... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   1:53pm 20 Mar 2018 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
       कुछ दिनों पहले अभि ने कोलकाता से फोन पर अपनी माँ से कहा कि वह गिटार सीखना चाहता है। वह अनुमति माँग रहा था। हमदोनों ने तुरन्त सहमति दे दी।       हमें याद आया कि जब हम अभि की उम्र के थे, तब हम भी गिटार सीखना चाहते थे। तब हम आवडी में थे। 1986-87 की बात है। पता च... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   1:10pm 20 Mar 2018 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
जगन्नाथ मंदिर           पुरी गये हुए तीन महीने से ज्यादा हो गये,पर अब तक इस यात्रा पर लिखना नहीं हो पाया था।       *         हुआ यूँ कि कई साल पहले जब हम पुरी गये थे (शायद 2007 में),तब हमने पड़ोस के रेलवे स्टेशन पाकुड़ से ‘गौहटी-पुरी एक्सप्रेस’ट्रेन पकड़ी थी... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   9:02am 20 Mar 2018 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
       आज फेसबुक पर वरिष्ठ मित्र नारायण प्रसाद शर्माजी ने उन गीतों की याद दिलायी,जिन्हें हम अपने बचपन में विभिन्न खेल खेलते समय दुहराया करते थे। उनकी पोस्ट निम्न प्रकार से है:       ***    बच्चों का अपने खेलों में टॉस करने का मनोरंजक एवं रचनात्मक तरीका।उ... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   12:24pm 24 Feb 2018 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
       बंगाल- बेशक,बाँग्लादेश सहित- की एक गायन शैली है- "बाउल"। यह लोकगीत की एक शैली है। इसे गाने वाले आम तौर पर यायावर सन्यासी होते हैं,जो विचारधारा से वैष्णव होते हैं। जानकारी मिलती है कि सूफी फकीर भी इसे गाते हैं- हो सकता है,बाँग्लादेश में ये पाये जाते हों। अपने ... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   9:35am 28 Jan 2018 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
      साहेबगंज और मनिहारी के बीच जो स्टीमर सेवा (इसे एल.सी.टी.,लाँच,या जहाज कहते हैं) चलती है,उससे हमने कई बार यात्रायें की हैं। कई अनुभवों का जिक्र इस ब्लॉग पर है। आज एक और अनुभव का जिक्र कर रहे हैं- आज के अखबार में प्रकाशित एक खबर को पढ़कर उस अनुभव की याद आ गयी है।वाकया ऐस... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   1:19pm 18 Jan 2018 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
        कल के अखबार में एक दुःखद समाचार प्रकाशित हुआ था- हमारे इलाके में कुछ ग्रामीण एक “सोंस” को मारकर खा गये।       “सोंस” एक मछली का नाम है,जो गंगा में पायी जाती है। जब नदियाँ मुक्त होकर बहती थीं,यानि जब बाँध आदि नहीं बने थे और जब नदियाँ प्रदूषित नहीं हुआ ... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   2:49am 11 Jan 2018 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
       आज टॉमी गुजर गया।       बहुत अफसोस हो रहा है। नन्हा-सा पिल्ला था वह। कुछ ही रोज पहले हमारे परिवार का सदस्य बना था। छोटा भाई लेकर आया था उसे। बता रहा था, अच्छी नस्ल का था। उसका स्वभाव था भी बहुत अच्छा। हर वक्त खेलने के मूड में रहता था। सबके साथ खेलता था, सब... Read more
clicks 129 View   Vote 0 Like   2:38pm 9 Jan 2018 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
एक जमाने में ‘सकरीगली’ एक प्रसिद्ध ‘जहाज घाट’ हुआ करता था। यहाँ ‘जहाज’ कहा जा रहा है स्टीमर को। दूर-दराज से यात्रीगण रेल द्वारा सकरीगली स्टेशन तक आते थे, ‘घाट गाड़ी’ (स्टेशन और गंगाघाट के बीच चलने वाली ट्रेन) से घाट तक जाते थे और फिर यहाँ से स्टीमर में बैठकर या तो बहाव के ... Read more
clicks 215 View   Vote 0 Like   2:50am 13 Nov 2017 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
       तस्वीर में जो वृद्ध महिला दिख रही हैं, उसे हमारे परिवार तथा आस-पास की रिश्तेदारी में "कोकी बूढ़ी"कहते हैं। इनका असली नाम हम नहीं जानते हैं। बरहरवा जंक्श्न से जो रेल लाईन फरक्का की ओर जाती है, उधर ही कहीं 'करला' (बँगला उच्चारण- कोरला) नामक छोटा-सा गाँव है, वहीं क... Read more
clicks 205 View   Vote 0 Like   3:33am 12 Nov 2017 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
       ऊपर तस्वीर में अँग्रेजी में जो हस्ताक्षर है (Jaydeep), उसे किया भले हम्हीं ने है, मगर वह मेरा हस्ताक्षर नहीं है। हम यह हस्ताक्षर कभी नहीं करते, कहीं नहीं करते। हमने इसकी खोज या इसका आविष्कार भी नहीं किया। मेरा खुद का हस्ताक्षर हिन्दी, यानि देवनागरी में होता है, ज... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   11:39am 22 Oct 2017 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
 गुफा में रह रहे- बाबा, जो पहाड़िया समुदाय से हैं.        पहले ही स्पष्ट कर दूँ कि इस गुफा में देखने लायक कुछ नहीं है। यह बस एक पहाड़ी गुफा है। यह प्राकृतिक है या मानव-निर्मित- पता नहीं। यह कितना प्राचीन है- इसकी भी जनकारी नहीं। वैसे, "रोमांच"के लिए हम यह कल्पना कर सकत... Read more
clicks 196 View   Vote 0 Like   6:54am 15 Oct 2017 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
              मेरे ख्याल से, हर व्यक्ति को अपने कैशोर्य एवं नवयौवन में "नास्तिक"एवं "बागी"होना ही चाहिए! जो ऐसे होते हैं, वही आगे चलकर "धर्म"के "मर्म"को, "परम्पराओं"के "निहितार्थ"को समझ सकते हैं। बचपन से ही धर्मपरायण होना कोई शुभ लक्षण नहीं है- खासकर, "कर्मकाण्ड... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   1:44pm 20 Sep 2017 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
राजमहल की पहाड़ियों में जंगली जानवर तो कुछ बचे नहीं, ले-देकर थोड़े-से हाथी बचे हैं। हमारे साहेबगंज जिले में अक्सर कुछ हाथी तालझारी के आस-पास के गाँवों के पास आ जाते हैं। कुछ बिगड़ैल हाथी फसलों को नुकसान पहुँचाते हैं, कच्चे घरों को तोड़ डालते हैं और कई बार तो मानव-हत्या भी कर ... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   2:05pm 18 Sep 2017 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
       चित्रों में आप जो बड़े-बड़े पत्ते देख रहे हैं, ये कच्चू, अरबी का घुईयाँ के नहीं हैं, बल्कि (सम्भवतः) उसी प्रजाति की एक अन्य वनस्पति के हैं। हमारे यहाँ इसे "मान"कहते हैं। इसका यह नाम क्यों है, इसका जरा भी अन्दाजा हमें नहीं है।        साल भर इस जंगली वनस्पत... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   2:14pm 13 Sep 2017 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
               बहुत पहले घर में दो फोल्डिंग आरामकुर्सियाँ हुआ करती थीं, जो समय के साथ टूट-फूट कर इधर-उधर हो गयीं।        दो-तीन साल पहले मन में आया कि वैसी ही एक आरामकुर्सी ला दूँ पिताजी के लिए, मगर पता चला, अब ऐसी आरामकुर्सियाँ बनती नहीं हैं। नेट पर खोज... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   10:58am 27 Aug 2017 #

Share:

Members Login

    Forget Password? Click here!
  • Latest
  • Week
  • Month
  • Year
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3972) कुल पोस्ट (190673)