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Blog: हिमालय की गोद से

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                               भगीरथ                           (हंसोड्या , चुनगेर ,चबोड़्या -चखन्यौर्या - गीतेश सिंह नेगी ,Mumbai)धरती बल ७१ % पाणिळ ढकीं च ,समोदर बी ९६.५ % खारु पाणि लेकि उछ्ल्णु च ,जाणकार लोग ब... Read more
clicks 98 View   Vote 0 Like   6:17am 15 Jun 2014 #
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                                                                       जुगाड                                             &nbs... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   7:22am 8 Jun 2014 #
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    विश्व प्रसिद्ध कवियों की कविताओं का गढ़वाली भाषा अनुवाद श्रृंखला  "दुष्यंत कुमार "को सादर समर्पित उनकी एक कविता का गढ़वाली भाषा अनुवाद                     अनुवादक : गीतेश सिंह नेगी ,मुम्बईधर्म / दुष्यंत कुमारतेज़ी से एक दर्दमन में ज... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   10:09am 24 May 2014 #
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     विश्व प्रसिद्ध कवियों की कविताओं का गढ़वाली भाषा अनुवाद श्रृंखला  "अटल बिहारी वाजपेयी  "जी को सादर समर्पित उनकी एक कविता का गढ़वाली भाषा अनुवाद                                 अनुवादक : गीतेश सिंह नेगी ,मुम्बई       ... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   6:16pm 22 May 2014 #
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विश्व प्रसिद्ध कवियों की कविताओं का गढ़वाली भाषा अनुवाद श्रृंखला "कतील शफ़ाई "को सादर समर्पित उनकी एक शायरी  का गढ़वाली भाषा अनुवाद                     अनुवादक : गीतेश सिंह नेगी ,मुम्बईमेहरबानी से अगर पेश बी अैंय कुछ लोग घाम मा लिबटयूँ छैल सी... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   5:20pm 22 May 2014 #
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विश्व प्रसिद्ध कवियों की कविताओं का गढ़वाली भाषा अनुवाद श्रृंखला "कतील शफ़ाई "को सादर समर्पित उनकी एक शायरी  का गढ़वाली भाषा अनुवाद                     अनुवादक : गीतेश सिंह नेगी ,मुम्बईमेहरबानी से अगर पेश बी अैंय कुछ लोग घाम मा लिबटयूँ छैल सी... Read more
clicks 106 View   Vote 0 Like   5:20pm 22 May 2014 #
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अदम गोंडवी उर्फ रामनाथ सिंह को सादर समर्पित उनकी एक कविता का गढ़वाली भाषा अनुवाद          अनुवादक : गीतेश सिंह नेगी ,मुम्बई                                         (1)काजू भुने पलेट में, विस्की गिलास मेंउतरा है रामराज विधाय... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   7:13pm 21 May 2014 #
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                                             घपरोल                     (चबोड़्या -चखन्यौर्या -गीतेश सिंह नेगी ,मुम्बई ) देश मा जक्ख द्याखा तक्ख घपरोल मच्युं च ,संसद से लेकि सड़क तक गौं ... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   5:35pm 4 Mar 2014 #
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                                                    "परपंच  "                                                            (चबोड़्या -... Read more
clicks 117 View   Vote 0 Like   3:24pm 2 Mar 2014 #
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                                                                     घंग्तोल                                             ... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   3:03pm 2 Mar 2014 #
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गढ़वाली में अनुदित साहित्य परम्परा (साभार : भीष्म कुकरेती ) भीष्म कुकरेती    किसी भी भाषा के साहित्य में अनुवाद का महत्वपूर्ण स्थान होता है। अनुवाद से साहित्य को नये नये विषय, नई शैली, नये विचार, नई संस्कृति , अनुभव मिलते हैं।अनुवाद विषयी साहित्य में कई धार... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   3:33pm 6 Sep 2013 #
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        बाँध की विभीषिका पर आधारित गढ़वाली कविता :  त्राहि माम                                  (BY : Geetesh Singh Negi )A Poem based on dam catastrophe   ;  A Poem based on dam catastropheby an Asian poet ; A Poem based on dam catastrophe by a south Asian poet ;  A Poem based on dam catastrophe by an SAARC countries poet ; A Poem based on dam catastrophe by an Indian subcontinent ... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   7:46pm 24 Jul 2013 #
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                                      "सखी री याद पिया की आये " सखी री याद पिया की आये सावन बिता  ,भादो बिता   यौवन  बिता जाये सखी री  याद पिया की आये बैरन हो गई घडी मिलन की पल पल युग  सा जाये सखी री  याद पिया की आये फूल खिले हैं आँगन उपवन गीत पपीहा  गाये सखी री  याद पिया की आयेअंखिया बरसत  बा... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   8:14pm 16 Mar 2013 #
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             "आखिर कुछ त बात  होलि  "लग्युं  च ह्युं  हिवालियुं  या फिर  लग्गीं कुयेडी बस्गाल होलि  मुछियला फिर बागी बण्या छीं  आखिर कुछ त बात  होलि मनु जब सच  किटकतली  खित हैसणु च झूठ मुख खोलीकिल्लेय कुई  फिर भी चुपचाप च बैठ्युं आखिर कुछ त बात  होलि सुलगणा छीं  लोग जक्... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   2:51pm 13 Jan 2013 #
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                 अलविदा जिंदगी ! गमो को सुर बना लिया यादों को तेरी साज  बना लिया तंग थी जिंदगी सो ख्वाबौं  को तेरी पनाहगाह बना लिया यु तो अब आलम है रोज ख़ामोशी का और नया कुछ नहीं   लब्ज़ लगे होठों को तेरे सोच मैने अपनी  आवाज बना लिया क़दम मेरे अक्सर ठिठक जाते  है आज भी  उस राह पर ज... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   12:00pm 6 Jan 2013 #
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घुप्प अंधेरों  मे कटता  है तन्हा  सफ़र    कुछ तो बचा  के उम्मीदों  के उजाले रखो बहुत उडेंगी सुर्ख फिजाओं में खामोश बातें जितना हो सके कम हमसे अब फासला रखो यू  आसां नहीं  मुस्कुराना इस जमाने में प्यार बिन अक्सर अकेले में भी रोने का  कभी   हौसला रखो बहुत आयेंगी कयामतें राह... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   8:37am 6 Jan 2013 #
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       " फर्क "मेरी तन्हाईयाँ  अब दिल उदास  नहीं करती खामोश आती हैं तेरी यादें चुपचाप लौट जाती हैं अश्कों  की वो अब वो हरपाल बरसात नहीं करती मेरी तन्हाईयाँ  अब दिल उदास  नहीं करती मेरे घर अब  भी आते हैं परिंदे प्यार के मानिदबस खतों  की उनसे हम तुम्हारे अब फ़रियाद नहीं होती... Read more
clicks 93 View   Vote 0 Like   8:27pm 5 Jan 2013 #
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              " खुदा "वक्त गुजरता रहा क्या से क्या हो गयाहमने जब भी जिसे चाहा वही  खुदा हो गयाचाहत एय इश्क में  क़त्ल हो गयीं आँखेंफिर कुछ नहीं देखा जब भी जिसको देखा वही बस फरिश्ता हो गयागम की स्याह रातौं में रोने से अब क्या फ़ायदावक्त की करवटों के रुख से मैं  खुद ही बे-जिया हो ग... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   7:31pm 5 Jan 2013 #
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          " हिसाब "उम्र कट्टी ग्याई जग्वाल मा ,जोडिक खैरि कु मेरी हिसाब रख्याँतुमल कब्भी कुछ ब्वालू निच ,ना कुछ मी ही  बोल साकू बगत आलू  बौडिक फिर ,सोचिक इत्गा ही तुम ऐथिरअफ्फु फर   हौसला बाच रख्याँजौं बाटों मा छुट दगडू तुम्हरू ,आज तलक  भी वू सुनसान ही छीं  कभी ता व्होली ... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   1:05pm 5 Jan 2013 #
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                        विश्व प्रसिद्ध  कविताओं / रचनाओं  का गढ़वाली  भाषा  अनुवाद श्रृंखला :7                        वो रुलाकर हँस न पाया देर तक (नवाज़ देवबंदी , सहारनपुर )विश्व प्रसिद्ध कवियौं क़ि कविताएँ; विश्व प्रसिद्ध कवियौं क़ि कविताओं का एशियाई अनुवादक का अनुवाद ; विश्व प्र... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   6:14am 5 Jan 2013 #
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                      " महाभारत "   हिमाद्री की इस  धरा पर ,घायल  है कब से गंगा    सरस्वती विलुप्त है सदियौं से  , निशब्द अभिशप्त है  यमुना    पदमा  है  शोकाकुल ,है   मुरझाई सी स्वर्णरेखा    आहत है सरयू सारी , नग्न  आँखौं से ... Read more
clicks 84 View   Vote 0 Like   9:54am 30 Dec 2012 #
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                      " महाभारत "   हिमाद्री की इस  धरा पर ,घायल  है कब से गंगा    सरस्वती विलुप्त है सदियौं से  , निशब्द अभिशप्त है  यमुना    पदमा  है  शोकाकुल ,है   मुरझाई सी स्वर्णरेखा    आहत है सरयू सारी , नग्न  आँखौं से मैने खुद रोते कोसी को देखा   है क्रोध  भरा  कृष्णा में  आज... Read more
clicks 97 View   Vote 0 Like   9:54am 30 Dec 2012 #
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                      "महाभारत "   हिमाद्री की इस  धरा पर ,घायल  है कब से गंगा    सरस्वती विलुप्त है सदियौं से  , निशब्द अभिशप्त है  यमुना    पदमा  है  शोकाकुल ,है   मुरझाई सी स्वर्णरेखा    आहत है सरयू सारी , नग्न  आँखौं से म... Read more
clicks 67 View   Vote 0 Like   9:54am 30 Dec 2012 #
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        "आखिर कब तक " ?   अर्जुन का गांडीव आज खंडित है   फिर  स्तब्ध है  महाबली का बल   शून्य उद्घोष  है आज पांचजन्य फिर से   चक्र रहित है फिर सुदर्शन हस्त    पुरुषोतम  को है शायद वनवास  अभी तक भारत में   और  क्यूँ  धृत-राष्ट्र     मौन  ह... Read more
clicks 92 View   Vote 0 Like   2:09pm 29 Dec 2012 #
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        "आखिर कब तक " ?   अर्जुन का गांडीव आज खंडित है   फिर  स्तब्ध है  महाबली का बल   शून्य उद्घोष  है आज पांचजन्य फिर से   चक्र रहित है फिर सुदर्शन हस्त    पुरुषोतम  को है शायद वनवास  अभी तक भारत में   और  क्यूँ  धृत-राष्ट्र     मौन  है सदियौं  से     अट्टहास कर रहा दुर्योधन द... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   2:09pm 29 Dec 2012 #

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