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Blog: Kusum's Journey (कुसुम की यात्रा)

Blogger: Kusum Thakur
(आज जब मेरे पोते का जन्म हुआ है तब मैं समझ पाई हूँ कि लोग क्यों कहते हैं "मूल से सूद लोगों को ज्यादा प्यारा होता है". उद्गार के चंद शब्द मन में आए, वह मैं व्यक्त कर रही हूँ.)" भाव कुसुम यह कैसे छुपाए"आज दर्श आया आँगन में,ले अनंत खुशियाँ जीवन में, किलकारी से गूँजे कोना,चाँद ... Read more
clicks 124 View   Vote 1 Like   12:34pm 10 Aug 2012 #कविता
Blogger: Kusum Thakur
मुझे अपने बचपन की बहुत कम बातें ही याद हैं, पर कुछ बातें जिसे माँ बराबर दुहराती रहती थी और हमेशा सबको बताती थी, वह मानस पटल पर इस तरह बैठ गए कि अब शायद ही भूल पाऊँ । उनमें कुछ हैं मेरे और मेरे भाई के बीच का प्रेम। मेरे बाबूजी उस समय भूटान में थे , मैं और मेरा भाई दोनों ही बहुत ... Read more
clicks 117 View   Vote 1 Like   7:43am 3 Aug 2012 #एक अनवरत यात्रा
Blogger: Kusum Thakur
मुझे अपने बचपन की बहुत कम बातें ही याद हैं, पर कुछ बातें जिसे माँ बराबर दुहराती रहती थी और हमेशा सबको बताती थी, वह मानस पटल पर इस तरह बैठ गए कि अब शायद ही भूल पाऊँ । उनमें कुछ हैं मेरे और मेरे भाई के बीच का प्रेम। मेरे बाबूजी उस समय भूटान में थे , मैं और मेरा भाई दोनों ही बहुत ... Read more
clicks 154 View   Vote 1 Like   7:43am 3 Aug 2012 #
Blogger: Kusum Thakur
"कहती है नैना, हसूँ अब मैं कैसे"बयाँ हाले दिल का करूँ अब मैं कैसेखलिश को छुपाकर रहूँ अब मैं कैसे बुझी कब ख्वाहिश नहीं इल्म मुझकोहै तन्हाइयाँ भी सहूँ अब मैं कैसे चिलमन से देखी बहारों को जातेहिले होठ मेरे कहूँ अब मैं कैसे हो उल्फत की चाहत ये मुमकिन नहींजो दूर चेहरा प... Read more
clicks 158 View   Vote 1 Like   2:39am 28 Jul 2012 #ग़ज़ल
Blogger: Kusum Thakur
किसी ने सच ही कहा है :"लेखन एक अनवरत यात्रा है  - जिसका न कोई अंत है न मंजिल ", और यह सच भी है। निरंतर अपने भावों को कलम बद्ध करना ही इस यात्रा की नियति होती है। अपने भावों को कलम बद्ध कर व्यक्ति को संतुष्टि के साथ ख़ुशी का अनुभव भी प्राप्त होता है। यह एक ऐसी यात्रा है जहाँ ... Read more
clicks 105 View   Vote 1 Like   9:22am 20 Jul 2012 #एक अनवरत यात्रा
Blogger: Kusum Thakur
किसी ने सच ही कहा है :"लेखन एक अनवरत यात्रा है  - जिसका न कोई अंत है न मंजिल ", और यह सच भी है। निरंतर अपने भावों को कलम बद्ध करना ही इस यात्रा की नियति होती है। अपने भावों को कलम बद्ध कर व्यक्ति को संतुष्टि के साथ ख़ुशी का अनुभव भी प्राप्त होता है। यह एक ऐसी यात्रा है जहाँ ... Read more
clicks 181 View   Vote 1 Like   9:22am 20 Jul 2012 #एक अनवरत यात्रा
Blogger: Kusum Thakur
मेरी आज की रचना उस ख़ास व्यक्ति के लिए जिसने मुझे इस काबिल बनाया कि मैं मन में आये भावों को आज शब्दों में अभिव्यक्त कर सकूँ ."और एक प्यास है मन"ऐ चाँद तुमसे पूछूं, फिर क्यूँ उदास है मन कहने को दूर तन से, पर उनके पास है मनकिस हाल में है प्रीतम, सन्देश कैसे भेजूंदिल में तड़प म... Read more
clicks 178 View   Vote 1 Like   6:31pm 12 Jul 2012 #ग़ज़ल
Blogger: Kusum Thakur
हमारे देश की न्याय पालिका कितनी निकम्मी है वह हम सबको मालूम है.  पैसा और ताकत के बलपर यहाँ कितने भी बड़े जुर्म से बाहर निकला जा सकता है.  बड़े से बड़ा जुर्म करके भी गुनहगार आराम से बरी हो जाते हैं . वहीँ बिना किसी गुनाह के किसी को सज़ा मिल जाती है. हमारा न्याय प्रणाली ऐसा है ... Read more
clicks 199 View   Vote 1 Like   5:00pm 21 Jun 2012 #आलेख
Blogger: Kusum Thakur
पेट्रोल के दाम में 2 रुपये प्रति लीटर की कटौती कर दी गई है। ये घटी हुई कीमतें आज आधी रात के बाद से लागू होंगी। इस नई कीमत के बाद अब दिल्ली में पेट्रोल 69.72 रुपये प्रति लीटर हो जाएगी। दिलचस्प है कि तेल विपणन कंपनियों ने गुरुवार को बैठक के बाद दाम घटाने का निर्णय लिया था। लागू ... Read more
clicks 150 View   Vote 1 Like   4:05pm 2 Jun 2012 #देश 
Blogger: Kusum Thakur
"क्या पाया यह मत बोल"कल-कल करती निशदिन नदियाँ, अंक में अपने भर लेती हैं,चाहे पत्थर हो या फूल,क्या पाया यह मत बोल ।काँटों में रहकर मुस्काना ,मुरझाकर भी काम में आना,कुसुम न हो कमजोर,क्या पाया यह मत बोल ।दिन तो प्रतिदिन ही ढलता है ,फिर भी तेज़ कहाँ थमता हैयह राज न पाओ खोल ,क... Read more
clicks 137 View   Vote 1 Like   6:00pm 30 May 2012 #कविता
Blogger: Kusum Thakur
"उसे तोड़ खुश होता क्यूँ है"जो आता है जाता क्यूँ है ?और इतने हम बेबस क्यूँ हैं ?  सज़ा मिले सत्कर्मों की यह सोच हमें सताता क्यूँ है ? सच्चाई की राह कठिन है उसपर चलकर रोना क्यूँ है ? है राग वही रागनी भी वही फिर गीत नया भाता क्यूँ है ? ममता तो अनमोल है फिर   वंचित उससे होता क्यू... Read more
clicks 137 View   Vote 2 Like   9:35pm 16 May 2012 #कविता
Blogger: Kusum Thakur
"धोखा सगा दिया"कसूर था क्या मेरा, फिर क्यूँ  सजा दियासोई थी आस क्यों फिर, उसको जगा दिया कहने को कुछ न था, सोहबत नसीब थी जब साथ ढूँढती हूँ तनहा बना दिया जो ढूँढती निगाहें, उजड़ा हुआ चमन हैसूखा हुआ गुलाब जैसे, मुझको चिढ़ा दिया चाहत किसे कहें हम, समझी नही थी तब चाहत जगी तो यार... Read more
clicks 138 View   Vote 1 Like   11:45am 9 May 2012 #ग़ज़ल
Blogger: Kusum Thakur
"वक्त भी कब वक्त देता" आज कहने को बहुत, जो अश्क में ही बह गए अपनी खुशियाँ कह न पाऊँ, उलझनों में रह गए  गम को सींचें क्यों भला, जब दूर थीं खुशियाँ खड़ीं वक्त तो अब है मेरा जो, सारे गम को सह गए वक्त भी कब वक्त देता, मात दो उस वक्त को बढ़ गई तब तिश्नगी, जब वक्त कहता यह गए   डूबना हो ... Read more
clicks 177 View   Vote 1 Like   5:08pm 17 Apr 2012 #ग़ज़ल
Blogger: Kusum Thakur
" ऐसा भी मन पावन देखा "  कैसे कह दूँ ख्वाब न देखाआज करूँ कैसे अनदेखान वो बातें, न वो रिश्तेफिर भी लगता है मन देखातन्हाई भी साथ रहे जबऐसा क्यूँ लगता घन देखासाथ चले थे बरसों पहले ऐसा भी मन पावन देखाहरियाली का पता नहीं हैकिस्मत से वह सावन देखा  -कुसुम ठाकुर- ... Read more
clicks 160 View   Vote 1 Like   4:02am 20 Mar 2012 #ग़ज़ल
Blogger: Kusum Thakur
(आज की रचना उस प्रिय व्यक्ति के लिए है जिन्होंने मुझे इस काबिल बनाया कि आज मैं अपने भावों को लिख पाऊं)"नैनो से बरसात क्यों"कह सकूं मैं आज फिर भी न कहूँ वह बात क्योंछलक रहा जब आज खुशियाँ नैनो से बरसात क्यों इंसानियत की बात करते , इंसान तो पहले बनो  यदि  ख़ुशी तुम दे न पाओ दे र... Read more
clicks 174 View   Vote 2 Like   7:47pm 4 Feb 2012 #ग़ज़ल
Blogger: Kusum Thakur
 "लोकतंत्र बीमार है"लोकतंत्र बीमार अब, है जनता में रोष।इक दूजे पर थोपते, अपना अपना दोष।।बातें जन-हित की करें, स्वार्थ न करते दूर।आम लोग सच जानते, साथ चले भरपूर।। जागो देश निवासियों, नहीं हुई है देर  ।बनी रहे बस एकता, दुश्मन होंगे ढेर।।नहीं गुलामी देश में, फिर भी है सं... Read more
clicks 150 View   Vote 1 Like   5:52am 31 Dec 2011 #दोहा
Blogger: Kusum Thakur
 "तेरा दिया ही लाई हूँ" हूँ तो माँ इक तुच्छ उपासक,द्वार पे तेरे आई हूँ। कैसे कहूँ लोभ नहीं है,सब तेरा दिया ही लाई हूँ। । न मैं जानूँ आरती वंदन,स्वर में भी कम्पन मेरे।  दर्शन की प्यासी हूँ मैया,इसी उद्देश्य वश आई हूँ।। बीच भंवर में नाव है मेरी,खेवनहार तुम्ही हो कहूं।  शरण... Read more
clicks 106 View   Vote 1 Like   7:31am 23 Nov 2011 #देवी वंदना
Blogger: Kusum Thakur
"मैं न उसमे बही सही"मैंने मन की कही सही जो सोचा वह सही-सही भूली बिसरी यादें फिर भी आज कहूँ न रही सही  कितना भी दिल को समझाऊँ  आँख हुआ नम यही सही वह रूठा न जाने कब से प्यार अलग सा वही सही रंग अजब दुनिया की देखी मैं न उसमे बही सही - कुसुम ठाकुर- ... Read more
clicks 180 View   Vote 1 Like   7:43am 5 Nov 2011 #मुक्तिका
Blogger: Kusum Thakur
"भय हरण कालिका"जय जय जग जननि देवीसुर नर मुनि असुर सेवीभुक्ति मुक्ति दायिनी भय हरण कालिका।जय जय जग जननि देवी।मुंडमाल तिलक भाल शोणित मुख लगे विशाल श्याम वर्ण शोभित, भय हरण कालिका।जय जय जग जननि देवी ।हर लो तुम सारे क्लेश मांगूं नित कह अशेष आयी शरणों में तेरी, भय हरण कालि... Read more
clicks 121 View   Vote 1 Like   2:50pm 24 Oct 2011 #भगवती स्त्रोत
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