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डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा के पास) गुजरात

ग़ज़लअब पकोड़ों को बनाओ लोगो.खुद भी खाओ व खिलाओ लोगो.हाथ धर सर पे यूँ रोते क्यों हो,और सर हमको बिठाओ लोगो.सीख लो चाय बनाने का हुनर,बाद में सबको  बनाओ लोगो.आम चाहे हो बबूलों से तुम ,    होश अब यूँ ना गंवाओ लोगो.तुम अगर रोशनी के हामी हो,मिल अँधेरों को भगाओ लोगो.भेड़िये दू...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  February 3, 2018, 5:18 am
ग़ज़लऔर क्या आग लगाओगे बताओ तो सही.फिर मुझे छोड़ के जाओगे बताओ तो सही. आँसू बनकर जो उमड़ा मैं कभी आँखों में,हँस के पलकों पे छिपाओगे बताओ तो सही.हमसे बिछुड़े तो हमसा ना दुबारा पाया,दास्तां अपनी सुनाओगे बताओ तो सही.तुम सा प्यारा नहीं दुनियां में हमारा कोई,झूट सर की कसम खाओ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  February 1, 2018, 8:15 pm
ग़ज़लअश्कों को इन आँखों से बर्बाद किया जाये.उस बेवफ़ा को फिर से अब याद किया जाये.टूटे जो मकां कोई आबाद करें उसको,टूटा हुआ ये दिल ना आबाद किया जाये.सूरत ही नहीं मिलती अब तेरी किसी से भी,फिर  कैसे कहो दूजा इर्शाद किया जाये.हम लाख करें कोशिश उस शै को भुलाने की,पर मोम सा ये दि...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  January 29, 2018, 6:32 pm
ग़ज़लदिल का ये ज़ख़्म है गहरा नहीं भरने वाला. तेरा शैदाई ये ज़ल्दी नहीं मरने  वाला.मैं जहां भी गया यादें भी तेरी साथ रहीं,ये नशा अब न मुहब्बत का उतरने वाला.पास आये तो वो मौजों की रवानी समझे, दूर ही दूर समन्दर से गुज़रने वाला .तू परेशान बहुत है तू परेशान न हो,वो संग दिल ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  January 28, 2018, 7:00 pm
ग़ज़लतेरी यादें कहां तक अब भला मुझको संभालेंगी.मेरी तन्हाईयाँ लगता है मुझको मार डालेंगी.तुम्हें शिकवे बहुत थे ये कि ज़्यादा बोलता हूँ मैं,मेरी ख़ामोशियां ही अब मेरा ये दम निकालेंगी.कहां किस्मत थी मैं सोऊं तेरे ज़ानूं पे सर रखकर,समन्दर की ये ख़ाराशें मुझे ऐसे लुभालें...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  January 10, 2018, 10:35 pm
ग़ज़लकभी जो नाता था तुझसे, वो कब का तोड़ दिया.तेरी गली तो क्या, तेरा शहर भी छोड़ दिया .क़फ़स में सांस भी लेने में दिक्कतें थी बहुत,अना ने हमको भी अंदर से फिर झिंझोड़ दिया. दिखाया अक्श जो उसको, तो ये सज़ा दी मुझे,जुनूं में हाथ से आईना, उसने फोड़ दिया.परों को काट, वो ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  January 2, 2018, 10:48 pm
ग़ज़लचेहरे की चमक, होटों की मुस्कान ले गया.जीने के मेरे सारे ,वो अरमान ले गया .सिगरिट, शराब, अश्क, तन्हाई, व बेकली,किन रास्तों पे मेरा, महरबान ले गया.अब लोग पूछते हैं, बताओ तो कौन था ?जो जिस्म छोड़कर, के मेरी जान ले गया.अब मेज़बां के पास, तो कुछ भी बचा नहीं,दिल की तमाम हसरतें, म...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  December 31, 2017, 7:54 pm
ग़ज़लघर मेरे उसने जो आना चाहा.रास्ता सबने भुलाना चाहा.और भी सर पे चढ़ गये अपने,हमने उनको जो मनाना चाहाऐब गिनवाके मेरे मुहसिन ने,दूर जाने का बहाना चाहा.तोड़ने का रहा जुनूं उसको,हमने नाता तो निभाना चाहा.एक तेरी थी तमन्ना हमको,कब भला हमने ख़ज़ाना चाहा ?हम बियांबा में भटकते...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  December 30, 2017, 10:57 pm
ग़ज़लहाथ में जब भी जाम लेते हैं.बेवफ़ाओं का नाम लेते हैं.हमसे रखते हैं फ़ासले अक्सर,सबका झुक झुक सलाम लेते है.तुझको रुस्वा नहीं होने देंगे,सब गुनाह अपने नाम लेते हैं.फूल से ख़ार ही लगे बेहतर,बढ़ के दामन को थाम लेते हैं.दिल लगाने का शौक है जिनकोआँसुओं का इनाम लेते हैं.डॉ. ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  December 29, 2017, 9:30 pm
ग़ज़लमिल जायें अगर जो राहों में झट से वो किनारा करते हैं.तस्वीर हमारी जो चुपके चुपके से निहारा करते हैं.ठंडी ठंडी रातों की चुभन उस पर ग़ज़ब की तन्हाई,यादों की रजाई पर तेरी, मुश्किल से गुज़ारा करते है.ये बात कहां वो समझेंगे, ये बात कहां वो मानेगे,हम रात को अक्सर उठ उठ कर उन...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  December 26, 2017, 7:05 pm
ग़ज़लमोम से फिर पिघलने लगते हैं.और अरमां मचलने लगते हैं.कौन देता है दस्तकें फिर से,दिल के दरवाज़े जलने लगते हैं.यादें जब तेरी घेर लेती हैं,घर से बाहर निकलने लगते है.और क्या तेरे ग़मगुसार करें,जाम से फिर बहलने लगते हैं.चाँद ख़्वाबों में मुस्कराता है,फिर से करवट बदलने लगत...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  December 21, 2017, 6:10 pm
ग़ज़लजानेमन यूँ ना दिल को दुखाया करो.ख़्वाब में ही सही आप आया करो.रूठ लो, रूठ लो, हक़ दिया ये तु्म्हें,जब मनाये तो फिर मान जाया करो.मेरे दिल की भी बतियाँ सुनो गौर से,और अपने भी दिल की सुनाया करो.राज़दां हैं तुम्हारे यकीं तो करो,राज़ अपने ना हमसे छुपाया करो.शौक़ से जान ले लो ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  December 16, 2017, 1:12 pm
ग़ज़लहम ग़ज़ल कह रहे हैं तुम्हारे लिये.मुस्कराओ ज़रा तुम हमारे लिये.एक हम थे जो तूफ़ान से भिड़ गये,लोग बैठे रहे सब किनारे लिये.बात क्या फिर कोई हम खरी कह गये,लोग फिरते हैं सब क्यों दुधारे लिये.हों मुबारक तुम्हें फूल की वादियाँ,क्या करेंगे इसे दिल के मारे लिये.ये अलग बात ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  December 15, 2017, 3:17 pm
ग़ज़लजान देकर के शान रखते हैं.हम अजब आन बान रखते हैं.शब्दभेदी हैं हमको पहिचानो,दिल में तीरों कमान रखते हैं.दोस्तों पे तो जां छिड़कते हैं,दुश्मनों का भी मान रखते हैं.वैसे तो हम जमी पे रहते हैं,आँख में आसमान रखते हैं.यूँ तो हम हर अदब से वाकिफ़ हैं,हम भी मुँह में ज़बान रखते ह...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  December 6, 2017, 4:35 pm
ग़ज़लअब भेष धरो लाखों, चुंगल में फँसाने के.इस बार तो गुजराती, नहीं हाथ में आने के.कभी गंगा बुलाती है, कभी बाबा बुलाते हैं,आने को हैं दिन अब तो, धूनी के रमाने के.झोले को सिला करके तैयार फकीरा हो ,सेल्फी की जगह आये, दिन चिमटा बजाने के.हमने तो तुम्हें साहब, पलकों पे बिठाया था,हम ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  October 28, 2017, 3:03 pm
ग़ज़लये कैसा उजाला है ये कैसी दिवाली है.सब्जी भी हुई गायब खाली मेरी थाली है.हमने तो कटोरी में डुबकी को लगा देखा,है दाल बहुत मंहगी और जेब भी खाली है.लोगों की लुगाई ने घर ऐसे संभाला है,शक्कर न मिली गुड़ की फिर चाय बनाली है.अब ताज संभालों तुम, मुश्किल है बहुत मुश्किल,सड़कों प...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  October 15, 2017, 8:11 pm
ग़ज़लट्रेन बुल्लट चलाने का वादा करें, पुल बनाने की जिनको न फ़ुर्सत मिली.हादसा हो कहीं भी मेरे मुल्क में, मुझको ऐसा लगे गाज़ मुझपे गिरी.आइनो पे ना पत्थर उछालो बहुत, वक्त है साब इनकी हिफाज़त करो,नोट बंदी से पहले परेशान थे, मर गये और जी.एस. टी है जब से लगी.उड़ रहे आसमां ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  September 30, 2017, 11:39 am
ग़ज़लफेसबुक पर ही मिल लीजिये.फूल बन कर के खिल लीजिये.जान भी देंगे फिर बाद में,पहले टूटा सा दिल लीजिये.आँख से सब समझ जायेंगे,आप होटों को सिल लीजिये.रफ़्ता रफ़्ता करीब आयेंगे,चाहे जितने उछल लीजिये.ज़िन्दगी तो संभलने को है,आज थोड़ा मचल लीजिये.वो न बदलेगा ज़ालिम कभी,आप अपने...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  September 29, 2017, 7:28 pm
ग़ज़लअच्छे दिनों का हमको,कोई जवाब दे दो.नज़रें तरस रही हैं, कुछ तो हिसाब दे दो.हम गदहे, कुत्ते, बिल्ली, मुर्गें हैं आपके ही ,हिस्से के कुछ हमारे टुकड़े ही साब दे दो.ये क्या सितम की लाठी, गोली है उनकी  किस्मत,बेटी के हाथ तुमने कहा था किताब दे दो.सच को कहेंगे हम तो, हो दौर झूट क...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  September 25, 2017, 5:14 pm
ग़ज़लबेटा विकास तुमने क्या काम कर दिया है.पापा का और चाचा का नाम कर दिया है.खेतों में लोटा ले के, जाते थे जो कभी वे,हगने का उनको घर में, आराम कर दिया है.पटरी के जो किनारे, आते थे जो नज़ारे,आँखों को अब हमारी, निष्काम कर दिया है.रोटी व दाल को भी , तरसे हैं, अम्मा घर में,इस बेरुख़ी ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  September 20, 2017, 8:21 pm
ग़ज़लअब तू ही बता तेरा ग़म ऐसे मिटायें क्या.तेरी ही सहेली को, अब फिर से पटायें क्या.दीदार तेरे हमको हों सुब्ह- शाम हरदम,गलियों में तेरी बुल्लट, अब ट्रेन चलायें क्या.कोई ताज़ नया सर पे आ जायें हमारे भी,वादों का कहो चूरन हम सब को चटायें क्या.घर तेरे फिर आने का कोई तो बहाना हो,...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  September 19, 2017, 9:34 am
ग़ज़लकभी इसने मार ली तो,  कभी उसने मार ली.लुच्चों ने मेरे मुल्क की चड्ड़ी उतार ली.हिन्दू या मुसलमान मरें उनको क्या पड़ी,गीधों ने भेड़ियों ने तो किस्मत संवार ली.मज़्बूरियां ना पूछ ओ, जीने की सितमगर,बच्चों की फीस बेंक से हमने उधार ली.तुम अपनी अपनी ख़ैर मनइयो अय दोस्तो,रो ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  September 17, 2017, 7:53 pm
ग़ज़लजिनमें जान होती है, वो ही डूब जाते हैं.मुर्दे बैठे साहिल पे,शोर ही मचाते हैं.खूँन के निशां मेरे, धोयेंगे भला किस तरह,और भी नज़र आयें, जितना वो छिपाते हैं.सच को हमने कहने का, ये इनाम पाया है,लाश पर मेरी देखो, गिद्ध मुश्कराते हैं.मौत की करें परवाह, और लोग होंगे वे,हम तो जा...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  September 10, 2017, 9:01 pm
गुरू महिमा.हमको गुरू घंट मिले ऐसे. अँधों को बटेर मिले जैसे.हमको दुत्कारत थे हर दम, वे प्रीत करत थे छोरिन ते.हम द्वार पे ठाड़े राह तकें वे इश्क़ करे कुलबोरन ते.पंछी वे हमाये उड़ाये सदा, फिर फाँसत थे बलजोरिन ते.हमको तलफत वे छोड़ गये वे जाय फँसे हैं औरन ते.हमरी वो पंतग को काटत ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  September 5, 2017, 4:39 pm
ग़ज़लताज़ा ताज़ा है ये ज़ख़्म गहरा नहीं.अब ख़यालों पे है उसका पहरा नहीं.दिल भी भूतों का डेरा था अपना कोई,जो भा आया यहाँ ज़्यादा ठहरा नहीं.वो सुनी अनसुनी कर गया सब मेरी,मुझको मालूम था वो था बहरा नहीं.छोड़ दे, छोड़ दे तेरी मर्ज़ी है ये,टूटा खंडहर हूँ मैं, घर सुनहरा नहीं.जाते ...
डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा ...
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  August 23, 2017, 11:22 am

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  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
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