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Blog: कलम कवि की

Blogger: Rajeev Sharma
कल मैंने एक सपना देखा जी हाँ मैंने सपना देखा सपना कुछ अपना सा ना था सपने ने सुख चैन छीना था रह रह कर बदबू आती थी नाक स्थान छोड़ना चाहती थी उठा छोड़ अपनी चारपाई खोजने बदबू कहाँ से आईबदबू घराना जे जे बस्ती गरीबी यूँ रहना हक समझती ना बदबू वहाँ नहीं कोई जात भाई भौच्चकी आँखे इतनी ... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   1:59am 16 Oct 2014 #
Blogger: Rajeev Sharma
 मुझे याद क्यूँ ना कुछ रहाभूल गया क्यूँ कल का सहापानी मे वो प्रतिबिम्ब थाप्रतिबिम्ब मुझसे कहाजो तुझमे है वो उड़ेल देहर्फों के सबको खेल देतेरी वेदना या चेतनाउसमे हो तेरा लिखा सनाजो पाया मैंने संचय कियालिखने बैठा जो था सहापर हाय रे यह क्या हुआफिर भूल गया कल का सहा एक ... Read more
clicks 100 View   Vote 0 Like   2:46am 10 Oct 2014 #
Blogger: Rajeev Sharma
आज भीतर जब झाँकाधूल पुस्तकें दबा रही थीउनमे छपी हर व्याख्या डरी सहमी सी पड़ी थीबाबा पुस्तकें पुरानी है मै चौंका, आवाज़ सहम गई माँ कहती है, धीमे स्वर बोलाबात संभाली और समझाई बिलकुल नई बस थोड़ी धुल तले सोयी भीतर छपे ज्ञान की परिभाषा न खोई   कबाड़ी वाला इसका बस रुपैया देत... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   6:32pm 8 Oct 2014 #
Blogger: Rajeev Sharma
तुम भरे भरे से रहते होबिन बोले सब कहते हो खुश होते तब भी बहते हो दुःख में भी संग रहते हो सागर से लगे रिश्ता गहराछलके लगे मोती है ठहरा कभी मिलाई कभी जुदाईबिन तुम्ह्रारे कभी न आई     भोले भाले नयन हमारेकभी कुछ न कहते हो निकलते और बहते हो भीड़ है तन्हा रहते हो नयन बसे... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   2:48pm 7 Oct 2014 #
Blogger: Rajeev Sharma
नित खोजूं आने का कारणपर जाने का समय निकट दुविधा विकटरिश्ते थे हम जग मेंचलते हमारे उनपर संकट दुविधा विकटबना बनाया सब छुटेगासंग क्या जाये ये कटकट दुविधा विकटभेजा था भेजा न भेजाभेजे में भरते रहा मै चिरकुटदुविधा विकट ... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   10:16am 6 Oct 2014 #
Blogger: Rajeev Sharma
चिंगारी नफरत की भीतर लिये फिरते रहे  रिश्ते खाक कर दोष रिश्तों पर मढ़ते रहे तुम तो सदा तुम थे हम समझ ना सके आइना समझा और अस्क हम ढूढ़ते रहेसंभल कर चले उम्रभर कहीं गिर न जाएँगिरे तो उठाने को तुम्हे खुदा समझते रहेतुम संग थे फिर क्यों जुदाई का अहसासदिल की अनसुनी कर दिमाग र... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   3:02pm 4 Oct 2014 #
Blogger: Rajeev Sharma
मुखड़ा क्यूँ फेरते हो मुखड़ा क्यूँ फेरते होइतने बुरे ना हम हैंजीवन में कम ना गम हैंऐसे में तुम भी हमारादुखड़ा ना देखते होमुखड़ा क्यूँ फेरते हो मुखड़ा क्यूँ फेरते होतुम्हारा था हमको सहाराअब कर गये क्यूँ किनाराअपने हो फिर भी तुमबेगाने से लगते होमुखड़ा क्यूँ फेरत... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   4:32am 24 Sep 2014 #
Blogger: Rajeev Sharma
आखरी साँस आने को है पर कोई अपना न आया गुनाह इतने किये रहा उम्रभर अकेलेपन का सायाहर तत्व इस शरीर का अपने अपने में जा मिलापर माटी को माटी ने अब तक ना था अपनाया अहसास कुछ होने लगा माँ का दिल था दुखाया  निर्जीव जीव पड़ा रहा बिन माता पिता का सायाअपने किये हर गुनाह की सजा को तैय... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   4:08am 18 Sep 2014 #
Blogger: Rajeev Sharma
ताबूत से पहले बुत लिये चला चलन बुत खड़ा निहारे बुत बुत का काटे कफन बुत तराश धरा से लेकर उसके संचयन यूँ चलावे हाथ ज्यूँ बुत बोले वचनप्राण संग बुत बुत रहे जगा ताबूत में ओढ़े कफ़न ... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   6:11am 12 Jan 2014 #
Blogger: Rajeev Sharma
मुझको न समझाया किसी ने ना ही था बतलाया चढा मै घोड़ी अंतिम हंसी संग बीबी रोती लाया रास्ते भर सोचता आया संगनी क्यूँ थी रोती सबको गले लगाती चलती मुझे देख चुप होती पूछा सबसे है पहली शादी वजह मुझे बतलाओ सबने दी सांत्वना कहा समय पर जग जायो धीरे धीरे समय चला समझ मुझे सब आया स्वंम... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   3:54am 8 Jan 2014 #
Blogger: Rajeev Sharma
देखो मेरीभौरहो गयी एक डाली पर चिडिया चहकेदिवार सहारे तुमना चहकना वो भूलतीना हीचहकनातुमउसके सुरया तुम्हारे सुरना कुछ अंतर विशेष है बस तुम दोनों कीचहकमेरा हर दिवस में प्रवेश है मौसम बांध सके ना दोनोंना दोनों की मीठी बोली उठ जा अब न तोड़ चारपाई देख धूप चहुँ ओर ... Read more
clicks 121 View   Vote 0 Like   3:24am 4 Jan 2014 #
Blogger: Rajeev Sharma
एक ख्वाब सा देखा था छोटे से घरोंदे काजीवन जीता जिसमे उन्मुक्त परिंदे साजहान मुझको नाही जाने ना मै जहान को जानू तुमको ही देखू हर पल अपना जहान मै मानू मौसम सिमटते जायें तुमको यूँ अंग लगाएंनशा ऐसा छाए मुझ पर बस तेरे होने का    एक ख्वाब सा देखा था छोटे से घरोंदे काएक ख... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   7:12am 3 Jan 2014 #
Blogger: Rajeev Sharma
छुपाना पड़े जो चेहरा कुछ ना हो ऐसा वैसा दागी ना हो वस्त्र कभी जो लगे ऐसा वैसा मिलजुल सब लोग रहे लगे एक परिवार जैसाएक जगह सर्वधार्मिक काम लगे संसार जैसा पहनावा कुछ ऐसा हो बट ना सके जात जैसा खाना सबको मिले सदा मिले दाल भात ऐसामस्तिषक में भर प्रभु सब के कुछ एक जैसा देख एक ... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   3:32am 29 Dec 2013 #
Blogger: Rajeev Sharma
शक़ ना करो हम पर तुम जब से है देखा इन आँखों ने तुमको ना जाना किसी को ना चाहा किसी को बस रहती हैं ये गुमसुम, शक़ ना करो हम पर तुम तुम्हारा वो हँसना, हँस कर लज्जानामहफिल में आना आ कर सताना गैरों  से बातें और हमको जलाना बस हो गया अब छुपना छुपानाइतना करो न सितम, शक़ ना करो हम पर तुम ... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   5:57am 28 Dec 2013 #
Blogger: Rajeev Sharma
कोई पा कर मरेगाकोई खो  कर मरेगाकोई तन से मरेगा कोई मन से मरेगा कोई लूट से मरेगा कोई टूट से मरेगा कोई सर्वस्व पाकर मरेगाकोईसर्वस्वखोकर मरेगाक्यूँ न ऐसा कर जायेंमरेगा पर न वो मरेगा... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   6:56am 20 Dec 2013 #
Blogger: Rajeev Sharma
कैसा निगोड़ा कलयुग ये आयाकलम दवात कागद सब खाया ... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   4:51am 15 Dec 2013 #
Blogger: Rajeev Sharma
साकी और मैखाना, एक जाम और पैमानाये साथी हैं जीने के बिन इनके मर जानादुनिया वालों सुन लो अफसाना ये दिल का यार दिल में छुपा बैठा अब उसे बुलाना नाइश्क में इस कदर डूबे ख़ामोशी का दरिया गम हो उससे जुदा खुशियाँ तुम बरसानाहर कुचे हर गली से जा पहुंचोगे उसके दरपता तुमको हमको सबको&n... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   7:24pm 25 Nov 2013 #
Blogger: Rajeev Sharma
खर्चा पानी मिले अगर  तब ही  मैं गा पाता हूँ बीते कलमकार पाते थे रीता मै रह जाता  हूँ देसी कलम विदेशी लेखनी चलती दोनों समलिखा उनका गहरा जमता मेरा  समझें कमशब्द वही उस युग के अर्थ ना उनसा पाते हैंचले गये याद आवें मैं हूँ कौन यह पुछवाते हैं बट वृक्ष युग बतलावें कलयुगी ... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   2:56pm 20 Nov 2013 #
Blogger: Rajeev Sharma
आज इक बार फिर याद हो आया नही किया जिसके लिए था आया तेरा मेरा लगा रहा चलने तकउसे ना तेरा ना मेरा ही पाया आज सभी वो साथ दिख रहे मीलों पीछे जिन्हें छोड़ आयाकश्ती में छेद पर सरपट दौड़तीपानी का भेद समझ ना आया तुम ही तुम मस्तिष्क पर जमे तुम तुम हो चला समझ आया वो अहसास जो लबालब भरे द... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   10:54pm 19 Nov 2013 #
Blogger: Rajeev Sharma
आज इक बार फिर याद हो आया नही किया जिसके लिए था आया तेरा मेरा लगा रहा चलने तकउसे ना तेरा ना मेरा ही पाया आज सभी वो साथ दिख रहे मीलों पीछे जिन्हें छोड़ आयाकश्ती में छेद पर सरपट दौड़तीपानी का भेद समझ ना आया तुम ही तुम मस्तिष्क पर जमे तुम तुम हो चला समझ आया वो अहसास जो लबालब भर... Read more
clicks 71 View   Vote 0 Like   10:54pm 19 Nov 2013 #
Blogger: Rajeev Sharma
आसमान संग चलता मेरे धरती मुझे थकाती है पवन थपेड़े दे दे करसारे घाव सुखाती हैबदली बेसमय घिर कर अंतर्मन मचलाती है  अपना ना सब गैर यहाँ चल मंजिल तुझे बुलाती है ... Read more
clicks 95 View   Vote 0 Like   11:32am 17 Nov 2013 #
Blogger: Rajeev Sharma
आसमान संग चलता मेरे धरती मुझे थकाती है पवन थपेड़े दे दे करसारे घाव सुखाती हैबदली बेसमय घिर कर अंतर्मन मचलाती है अपना ना सब गैर यहाँ चल मंजिल तुझे बुलाती है ... Read more
clicks 70 View   Vote 0 Like   11:32am 17 Nov 2013 #
Blogger: Rajeev Sharma
समझना चाहा समझ ना सका समय के स्वाभाव को सब कुछ है पर मुझे जोत रहा किसके वो अभाव को खेल खेलता सदा जीतता हर अपने वो दाव पर मलहम तक ना मलने दे हारे हमरे घाव पर तृष्णा हमरी और भडकती लगता उसकी दया हुई हँसता हुआ वो चलता जाता छोड़ खेलन गोट धरी हुई ... Read more
clicks 100 View   Vote 0 Like   2:49am 13 Nov 2013 #
Blogger: Rajeev Sharma
कैसा निगोड़ा कलयुग ये आयाकलम दवात कागद सब खाया ... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   5:54pm 12 Nov 2013 #
Blogger: Rajeev Sharma
साकी और मैखाना, एक जाम और पैमानाये साथी हैं जीने के बिन इनके मर जानादुनिया वालों सुन लो अफसाना ये दिल का यार दिल में छुपा बैठा अब उसे बुलाना नाइश्क में इस कदर डूबे ख़ामोशी का दरिया हर गम हो उससे जुदा खुशियाँ तुम बरसानाहर कुचे हर गली से जा पहुंचोगे उसके दरपता तुमको हमको है ... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   3:49am 9 Nov 2013 #

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