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Blog: किरण की दुनिया

Blogger: kiran mishra
हवा में ठंडक है शायद गांव में कांस फूला हैआज धूप का मिजाज़ किसी प्रेमिका सा है जो बार-बार छत पर आती जाती है इंतजारे इश्क में । बाहर हल्का शोर है लेकिन भीतर शून्य है। ये दिल्ली शहर है जहां अक्सर इंसान शून्य  में ही रहता है मानसिक शून्यता,वैचारिक शून्यता। सड़के भरी नहीं&nbs... Read more
clicks 312 View   Vote 0 Like   4:07pm 29 Sep 2018 #
Blogger: kiran mishra
भूख के रूदन कोशांत कराती स्त्री रचती है गीतऔर इस तरहभूख के भय को करती है कमउदगीथ, रचिता को अन्न से कर धन्यचल पड़ता हैगुंजाते गूंजतेतमाम युद्धों, बर्बरता सेसभ्यताओं को सुरक्षितबचाने के लिएकंगूरे पर बंधा उदगीथ*अब निश्चेष्ट है लेकिन निराश नहींवो तोड़ता है छंद ,ललकारता है... Read more
clicks 243 View   Vote 0 Like   10:14am 17 Sep 2018 #
Blogger: kiran mishra
समय के भाल पर न जाने कितनी गीत- संगीत सजे है न जाने जिंदगी ने कितने रूप धरे है ।प्रकृति की सारी थिरकन सिर्फ उसी से हैजिगर की पीर हल्की और दिल से रूह के रिश्ते पुख़्ता सिर्फ उसी से हो जाते है ।जिंदगी की जद्दोजहद, पसोपेश,अंतर्विरोध सब पर अचानक विराम लग जाता है ।कौन है वो जो पल... Read more
clicks 362 View   Vote 0 Like   4:20am 7 Sep 2018 #
Blogger: kiran mishra
🇮🇳 🇮🇳स्वतंत्रता का आलोकहर तरफ फैला ही था किअपनी- अपनी पताका के साथअपने -अपने उदघोष हुएद्वार पर ही स्वतंत्रता ठिठक गईप्रकाश की किरणें धीरे- धीरे काट दी गईस्वतंत्रता का सूर्य खंडित होक्षत विक्षत हो गयाकुछ उत्साही जाग्रत हुएअब सत्ता के शिखरों परअवतार जन्म लेने लगेअव... Read more
clicks 388 View   Vote 0 Like   7:51am 15 Aug 2018 #
Blogger: kiran mishra
रामरती (एक थी रामरती ) अपनी निर्भीकता कई पीढ़ियों में बाँट कर आखिर अपनी कोशिश में कामयाब हो ही जाती  और तैयार कर ही देती है न जाने कितनी मणिकर्णिका।दरवाजे की ओट से झांकती आंखे तो कुछ नीची निग़ाह अचानक तीखी होकर अपने लिए रास्ता बनाती है और पारे उन रास्तों को आसान बनाने का ... Read more
clicks 325 View   Vote 0 Like   4:37pm 1 Apr 2018 #
Blogger: kiran mishra
वो जहाँ हम मिलते थे खेत कितने होते थे हरे पीले और किसान कितने होते थे खुश गुड की मीठी खुशबू हवा में तैरती चिपक जाती थी हमारे चेहरे पर उसका जायका जैसे कच्ची उम्र का हमारा प्रेम खेत के बीचो बीच खड़ा वो बिजूका जिसके न जाने कितने नाम रख छोड़े थे तुमने जिसे देख कर हमारे साथ साथ ध... Read more
clicks 346 View   Vote 0 Like   5:12am 12 Mar 2018 #
Blogger: kiran mishra
पुरुषों के नाम पत्र------------------------एक पत्र जो आप को वो पात्र बना देगा जिसकी कोशिश आप एक युग से कर रहे है....सारी दुनिया औरत के इर्द गिर्दऔरत की दुनिया चूल्हे के इर्द गिर्द।आप श्रेष्ठ है और हम हीन इस भावना से मुक्त हो...जरुरी है बेहतर समाज के लिएश्रम की परिभाषा मानवीय मूल्यों पर आ... Read more
clicks 359 View   Vote 0 Like   6:05am 8 Mar 2018 #
Blogger: kiran mishra
एक अंतहीन रात मेंएक औरत तोडना चाहती है दुस्वप्न के जालों कोवो छाती की दर्दनाक गांठ में दबेउस शून्य को निकाल देना चाहती हैजो हर चीख के साथ बढ़ता जाता हैऔर हटाना चाहती हैइर्द गिर्द जमा डर की बीट कोवो रखना चाहती थी जिंदासत्य, न्याय, प्रेम की कहानियों को भीजो पिछली रात उसन... Read more
clicks 303 View   Vote 0 Like   5:28pm 5 Mar 2018 #
Blogger: kiran mishra
कुछ ठेके पर उठी कविताएंअपने आप पर रश्क़ कर सकती है उनके मालिक कुछ ख़ास किस्म के होते है। दुनिया उन्हें सलाम करती है।वैसे सजदा करते उनकी भी उम्र बीत रही है।कुछ इतनी खुशकिस्मत नहींवो फुटपाथ पर ही जन्म लेकर वही मर जाती है हालाँकि मुझे ख़ुशी है कि वो उनकी तरह नहीं जिनकी रूह तक... Read more
clicks 279 View   Vote 0 Like   2:09pm 12 Feb 2018 #
Blogger: kiran mishra
घनघोर अंधेरे में जो दिखती है,वो उम्मीद है जीवन कीहिंसक आस्थाओं के दौर में प्रार्थनाएं डूब रही हैअन्धकार के शब्द कुत्तों की तरह गुर्रातेभेड़ियों की तरह झपट रहे हैउनकी लार से बहते शब्दलोग बटोर रहे है उगलने कोजर्जर जीवन के पथ पर पीड़ा के यात्रीटिमटिमाती उम्मीद को देखते ह... Read more
clicks 271 View   Vote 0 Like   4:24pm 30 Jan 2018 #
Blogger: kiran mishra
ले चल मुझे भुलावा दे कर मेरे नाविक धीरे-धीरेजिस निर्जन में सागर लहरी, अम्बर के कानों में गहरीनिश्चल प्रेम कथा कहती हो तज कोलाहल की अवनि रे”( जयशंकर प्रसाद) कभी कभी नाविक अकेला ही सागर पर किसी अनजाने गांव का दरवाजा खटखटा देता है💕❤🍁किसी अनजाने गाँव मेंअनजाने घर की कभी ... Read more
clicks 258 View   Vote 0 Like   11:12am 27 Jan 2018 #
Blogger: kiran mishra
बीते बरस बीत गए ये सोच कर की आने वाले बरस कैसे बीतेंगे थोड़ी सी ख़ुशी देकर या बेरुखी से मुह मोड़ कर फिर चल देंगे ,साथ छोड़ कर। ये क्रम यूं ही चलेगा ,ये रहा गुजर रहेंगे हमारी अंतिम घड़ी तक ।लोग बतियाना चाहते है लेकिन बाते नहीं हैं। हालांकि हम वैश्विक हो गए है लेकिन ये हो कर कोलाह... Read more
clicks 261 View   Vote 0 Like   6:42am 1 Jan 2018 #
Blogger: kiran mishra
एक था सरवनपालकी उठाता थाजेठ की लू मेंपूस के जाड़े मेंगीत गाता थाचैता सुनाता थासरवन की पालकी मेंठहर गया एक दिनचुलबुला वसंतप्रीत कुसुंभ के संगफिर प्रेम रंगा, फागुन रंगारंग गया वसंतप्रीत कुसुंभ के संगअब पग फेरा नहींवसंत ठहरा वहीइतिहास हुआ क्रुद्धमौसम हुआ रुद्धइतिहास... Read more
clicks 282 View   Vote 0 Like   12:30pm 29 Dec 2017 #
Blogger: kiran mishra
उसकी पीठ पर बैजनी फूल बंधे थे और हाथ में सपने अभी अभी उगे पंख उसने करीने से सजा रखे थे कुछ जुगनू उसके होठों पर चिपके थे कुछ हँसी बन आसमान मेंवो एक सर्द रात थी जब हम नक्षत्रों के नीचे चल रहे थे और चाँद मेरे साथ हिम खंड के पिघलने तक मैं उसका साथ चाहता था उसे... Read more
clicks 281 View   Vote 0 Like   3:20pm 16 Dec 2017 #
Blogger: kiran mishra
पद्मावतीइतिहास की वीथिका में भटकतीक्या सोच रही हो ,खिलजी चला गया ?देह की राख से शांति के महल मत बनाओठुड्डी पर बने तुम्हारे तिल की चाहत लिएलौटता आदमखोर बांट रहा हैबाल मन को आदम वासना के विचारअब वोजिंदगी के गुजरते कारवां मेंमौत के हरकारा बन घर के आँगन में , आँगन के बहारअक... Read more
clicks 301 View   Vote 0 Like   5:38am 15 Dec 2017 #
Blogger: kiran mishra
मानव समाज जब ताम्रयुग में पहुंचता हैसंस्कृति जब ग्रामीण पृष्ठभूमि पर खडीचरखे से बनाती है सभ्यताओं के विकास के धागेजिन का छोर पकड़प्राचीन जगत की नदीघाटी सभ्यताएंनगरों की स्थापना के लिएकरती है प्रसव लिपियों कातब ग्राम और नगर के बीचएक स्वर धीरे धीरे पनपता हैजो व्यंजन ... Read more
clicks 256 View   Vote 0 Like   6:02am 5 Dec 2017 #
Blogger: kiran mishra
प्रेम की निर्जनता में उदासी हमेशा स्लेटी रंग की क्यों होती है?यही पूछा था न मैं नेऔर तुमने हस कर कहा थाबिना संकट के कुछ भी सार्थक की प्रति संभव कहां,संभव तभी हैजब मन के पथ में दूसरे की गंध भरी होशारदीय धूप का केसरिया रंग किन्हीं अक्षांशो पर खिलाना ही होता है मयूख....सच कहा ... Read more
clicks 227 View   Vote 0 Like   7:07am 9 Oct 2017 #
Blogger: kiran mishra
प्रेम की निर्जनता में उदासी हमेशा स्लेटी रंग की क्यों होती हैयही पूछा था न मैं नेऔर तुमने हस कर कहा थाबिना संकट के कुछ भी सार्थक की प्रति संभव कहांसंभव तभी हैजब मन के पथ में दूसरे की गंध भरी होशारदीय धूप का केसरिया रंग किन्हीं अक्षांशो पर खिलाना ही होता है मयूख....सच कहा ... Read more
clicks 217 View   Vote 0 Like   11:37am 6 Oct 2017 #
Blogger: kiran mishra
जिंदगी मौत भी एक उम्र में मालूम हुआ।मेरा होना था महज़ मेरे न होने के लिए।।स्व. कुंवर रघुवीरसिंह ने सच ही लिखा इस दुनिया में प्रत्येक चीज का मूल्य चुकाना पढता है और जो जीवन उसने दिया है उसका भी मूल्य वो मृत्यु से ले लेता है तभी तो कहा गया है जगत मिथ्या ।स्पिनोजा ने सच लिखा ... Read more
clicks 254 View   Vote 0 Like   5:32am 31 Aug 2017 #
Blogger: kiran mishra
पीड़ा की नीव में दबी वासना सुखी हो उठीजब जब स्त्री करहाई ,चिल्लाईऔर इस तरह बर्बर दंड ने जन्म लिया इस पृथ्वी परहर करहाने के बाद शिकारी बढते गएपहला शिकारी कोई आदि अमानुष थाढेंकुल ने मधुर वचनों के दंड में फरेब घोलाप्रेम की रस्सी से वासना का कूंड़ भराकुइयां अब रीति थीये बु... Read more
clicks 263 View   Vote 0 Like   4:21pm 27 Aug 2017 #
Blogger: kiran mishra
स्वतंत्रता का पौधा शहीदों के रक्त से फलता है लेकिन स्वतंत्रत हुए पौधें को स्वाधीन रहने के लिए किस तरह के हवा, पानी की जरुरत पड़ेगी ये विचार अपने आप में स्वतंत्रता के सही अर्थ को परिभाषित करने के लिए एक कदम साबित हो सकता है।ये विचार अगर हमने स्वतंत्रता के पूर्व ही कर लिया... Read more
clicks 305 View   Vote 0 Like   11:14am 20 Aug 2017 #
Blogger: kiran mishra
दुनिया की सारी चीख़ें मेरे जहान में हैजेहन में रहना कोई अच्छी बात नहींइससे मांगने का डर रहता हैइंसाफ दर्द देता हैमेरे अंदर एक चुप्पी हैजिसे सुनकरखिड़कियां खड़कती हैमैं ने एक हिमाकत कीखिड़कियां खोलने कीउसूलों ने मुझे नेस्तनाबूत कर दियाअब खंडहर भी नहींसिर्फ चौकटे बचे... Read more
clicks 246 View   Vote 0 Like   1:34pm 24 Jul 2017 #
Blogger: kiran mishra
दरवेश से होते है पत्तेयहां वहां बिचरते हुयेबेनियाज़शाखों पर लगे ये करते हैं जुहदअतीत के गुम ये यायावरनिकल आते हैकच्ची दीवारों पुराने खंडहरों सेऔर पहुंच जाते है सर्द रातों मेंदहकते आवा मेंइंतजार करते लोगो कोदेते है दिलासा और करते है गर्म रिश्तों कोइनके दिल पर जो लकी... Read more
clicks 311 View   Vote 0 Like   4:54am 5 Jul 2017 #
Blogger: kiran mishra
स्फटिक की छत कुछ देर पहले की बारिश से धुल कर किसी नायिका की हीरे की लौंग सी चमक रही है । छत के कोने पर रातरानी की डाल जैसे चूमना चाहती है उन सफेद लिहाफ को जो आधे खुले पडे है। अभी अभी हवा के हल्के झोके से लिहाफ का आंचल रातरानी ने भर दिया है। ऊपर अंबर में बड़े से बादलो के समूह स... Read more
clicks 273 View   Vote 0 Like   11:59am 1 Jul 2017 #
Blogger: kiran mishra
इस उनींदे समय मेंशब्द जाग रहे हैवो बना रहे है रास्ताउन के विरुद्धजो जला कर देह कोसुर आत्मा से निकाल रहे हैवो ख़ामोश हो जाते हैउन चुप्पियों के विरुद्धजो उपजी हैगली गली होती हत्या के बादबहरूपिया होते है शब्द,झूठ को लेकरचढ़ाते है उस पर चमकदार मुलम्माफिर उसमें भरते है रंग ,... Read more
clicks 286 View   Vote 0 Like   7:05am 28 Jun 2017 #

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