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Blog: "प्रेम ही सत्य है"

Blogger: मीनाक्षी
सन 2007 का शिक्षक दिवस नहीं भूलता , उसी दिन त्यागपत्र देकर अपने प्रिय शिष्यों से अलविदा ली थी , यह कह कर कि जल्दी लौटूँगी लेकिन वह दिन नहीं आया. एक शिक्षक के लिए शिक्षा और शिष्य ही अहम होते हैं और जब उन्हें त्याग दिया जाए तो शिक्षक की अपनी आभा भी उनके साथ ही चली जाती है. बस यादो... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   8:46am 5 Sep 2014 #शिक्षा
Blogger: मीनाक्षी
मेरे घर के गमले में खुश्बूदार फूल खिला हैसफ़ेद शांति धारण किए कोमल रूप से मोहता मुझे .... छोटे-बड़े पत्थर भी सजे हैं सख्त और सर्द लेकिनधुन के पक्के हों जैसे अटल शांति इनमें भी है मुझे दोनों सा बनना है महक कर खिलना फिर चाहे बिखरना हो सदियों से बहते लावे में ... Read more
clicks 274 View   Vote 0 Like   2:09pm 24 Aug 2014 #फूल
Blogger: मीनाक्षी
ना लफ़्ज़ खर्च करना तुम ना लफ़्ज़ खर्च हम करेंगे  --------- ना हर्फ़ खर्च करना तुमना हर्फ़ खर्च हम करेंगे -------- नज़र की स्याही से लिखेंगे तुझे हज़ार चिट्ठियाँ  ------  काश कभी ऐसा भी हो कि बिना लफ़्ज़ खर्च किए कोई मन की बात सुन समझ ले. लेकिन कभी हुआ है ऐसा कि हम जो सोचें वैसा ही ... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   2:00am 16 Jul 2014 #बर्फी
Blogger: मीनाक्षी
हर नया दिन सफ़ेद दूध साधुली चादर जैसे बिछ जाता सूरज की  हल्दी का टीका सजा केदिशाएँ भी सुनहरी हो उठतीं  सलोनी शाम का लहराता आँचलपल में स्याह रंग में बदल जाता  वसुधा रजनी की गोद में छिपती चन्दा तारे जगमग करते हँसते मैं मोहित होकर मूक सी हो जाती जब बादल चुपके से उत... Read more
clicks 237 View   Vote 0 Like   9:03am 30 Jun 2014 #मेरी कविताएँ
Blogger: मीनाक्षी
आसमान की ऊँचाइयों को झूने की चाहत पिछले महीने बड़े बेटे वरुण का जन्मदिन था. आज छोटे बेटे विद्युत का जन्मदिन है. अपनी डिजिटल डायरी में विद्युत का ज़िक्र दिल और दिमाग में उठती प्यार की तरंगों को उसी के नाम जैसे ही बयान करने की कोशिश कर रही हूँ .....कल दोपहर  विजय रियाद से... Read more
clicks 211 View   Vote 0 Like   1:03pm 28 Jun 2014 #दुबई
Blogger: मीनाक्षी
समाज से जुड़ी पोस्ट को लेकर अक्सर हम दोनों पति-पत्नी में बहस और कभी तल्खी हो जाती है, जिसके लिए समय चुनते हैं शाम की सैर का...पति जितनी शांति से बात करते हैं मुझे उतना ही गुस्सा आता है. जैसे कि विभाजी की पोस्ट को पढ़ने के बाद हुआ.. सुबह पोस्ट पढ़ने के बाद दोनों ही जड़ से हो गए थे..वि... Read more
clicks 247 View   Vote 0 Like   5:15am 19 May 2014 #my readings
Blogger: मीनाक्षी
सुबह उठते ही हम पति-पत्नी में से कोई न कोई लैपटॉप ऑन कर देता है. सवेरे के संगीत में या तो श्लोक-मंत्र होते हैं या कोई वाद्य यंत्र, हर रोज़ के मूड के साथ यह भी बदलता रहता है.उसके बाद ही दिनचर्या शुरु होती है जिसके साथ-साथ लैपटॉप पर जीमेल, फेसबुक, यूटयूब और टिवटर के चार पन्ने खु... Read more
clicks 218 View   Vote 0 Like   2:00am 18 May 2014 #लेख
Blogger: मीनाक्षी
सुबह उठते ही हम पति-पत्नी में से कोई न कोई लैपटॉप ऑन कर देता है. सवेरे के संगीत में या तो श्लोक-मंत्र होते हैं या कोई वाद्य यंत्र, हर रोज़ के मूड के साथ यह भी बदलता रहता है.उसके बाद ही दिनचर्या शुरु होती है जिसके साथ-साथ लैपटॉप पर जीमेल, फेसबुक, यूटयूब और टिवटर के चार पन्ने खु... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   2:00am 18 May 2014 #लेख
Blogger: मीनाक्षी
 ट्रैफिक लाइट पर रुक कर अजनबी बंजारन से नज़र मिलना और उसकी मुस्कान से सुकून पा जाना...ऐसे अनुभव याद रह जाते हैं. सड़क के किनारे टिशुबॉक्स एक तरफ किए बैठी उस खूबसूरती को देखती रह गई थी, फौरन कैमरा निकाल कर क्लिक किया ही था कि उसकी नज़र मुझसे मिली....पल भर के लिए मैं डर गई लगा जैस... Read more
clicks 211 View   Vote 0 Like   1:30am 16 May 2014 #
Blogger: मीनाक्षी
  भूली बिसरी यादों की महकके साथ बेटे का जन्मदिन मनाना भी अपने आप में एक अलग ही अनुभव है...जैसे माँ पर लिखते वक्त कुछ नहीं सूझता वैसे ही बच्चों पर लिखना भी आसान नहीं... माँ और बच्चे का प्यार बस महसूस किया जा सकता है.  जैसे अभी कल की ही बात हो , नन्हा सा गोद में था फिर उंगली प... Read more
clicks 208 View   Vote 0 Like   1:30am 14 May 2014 #
Blogger: मीनाक्षी
ऊँची ऊँची दीवारों के उस पार से विशाल आसमान खुले दिल से मेरी तरफ सोने की गेंद उछाल देता है लपकना भूल जाती हूँ मैं  टकटकी लगाए देखती हूँनीले आसमान की सुनहरीं बाहें और सूरज की सुनहरी गेंद जो संतुलन बनाए टिका मेरी दीवार पर    पल में उछल जाता फिर से आसमान की ... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   5:23am 12 May 2014 #सुबह का सूरज
Blogger: मीनाक्षी
तुम बहुत नाज़ुक हो कोमल होबला की खूबसूरत हो तुमचेहरा ढक कर रखो हमेशाबुर्के में रहो बिना मेकअप केआँखों पर भी हो जालीदार पर्दा काजरारी आँखें लुभाती हैं ............मर्द मद में अंधा हो जाता हैग़र कोई मर्द फिसल गयाअपराधी कहलाओगीतुम बहुत नाज़ुक हो कोमल होतुम घर के अंदर महफ़ूज़ हो तु... Read more
clicks 248 View   Vote 0 Like   12:30am 8 May 2014 #मेरी कविताएँ
Blogger: मीनाक्षी
रोज़ की तरह पति को विदा किया दफ़तर के बैग के साथ कचरे का थैला भी दिया दरवाज़े को ताला लगायाफिर देखा आसमान को लम्बी साँस लेकर सूरज की बाँहें गर्मजोशी से फैली हैं बैठ जाती हूँ वहीं उसके आग़ोश में..  जलती झुलसती है देह फिर भी सुकूनदेह है यूँ बाहर बैठनाचारदीवारी की कैद से बाहर&nbs... Read more
clicks 221 View   Vote 0 Like   1:30am 5 May 2014 #छन्दमुक्त
Blogger: मीनाक्षी
खिड़की के उस पार अचानक नज़र चली गई दीवार पर खड़ी थी स्याह चेहरे वाली चिमनी सिसकती सी काला धुआँ उगलती तनी खड़ी तिकोनी टोपी पहने देर तक काला गहरा धुआँ उगलती फिर एक खूबसूरत एहसास जैसे अनदेखी खुशबू फैला देती चारों ओर महकती रोटियाँ जन्म लेतीं उसकी कोख से जीवनदान देती, भूख मि... Read more
clicks 221 View   Vote 0 Like   1:00am 29 Apr 2014 #स्याह चिमनी
Blogger: मीनाक्षी
पर कैसे... कैसे होगा पूरा खुली आँखों से देखा गया यह सपना ... घर के अन्दर पसरी हुई ख़ामोशी ने मुझे अपनी बाँहों में जकड़ रखा है... छिटक कर उससे आज़ाद होना चाहती हूँ घबरा कर घर के बाहर भागती हूँ .वहाँ भी धूप सहमी सी है आँगन में सूरज भी खड़ा है बड़ी अकड़ में मजाल नहीं हवा की एक सिसकी भी ... Read more
clicks 187 View   Vote 0 Like   5:30am 24 Apr 2014 #
Blogger: मीनाक्षी
बहुत दिनों के बाद...अपने शब्दों के घर लौटी...बहुत दिनों के बाद .......फिर से मन मचल गया...बहुत दिनों के बाद... फिर से कुछ लिखना चाहा....बहुत दिनों के बाद...कुछ ऐसा मन में आया.... फिर इक बारनए सिरे से शुरु करूँ मैं लिखना ...अपने मन की बात !!सोचती हूँ ब्लॉग पर नियमित न हो पाना या जीवन को अनि... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   2:03pm 22 Apr 2014 #
Blogger: मीनाक्षी
'प्रेम ही सत्य है 'ब्लॉग के आज छह साल पूरे हुए. छह साल में 2190 दिन बनते हैं जिनमें सिर्फ 319 पोस्ट लिखीं गईं. बहुत कम है लेकिन फिर भी कोई गिला नहीं .... मन ने जब चाहा तब लिखा .... आज बस यूँ ही मन किया कि कुछ दिन के लिए प्रेम जो जीवन का अटल सत्य है , उसे दिल के कमरे में बन्द कर लूँ....  जाने क... Read more
clicks 121 View   Vote 0 Like   7:35pm 27 Aug 2013 #
Blogger: मीनाक्षी
गूगल के सौजन्य से सुधा अपने आप को अपनों में भी अकेला महसूस करती है इसलिए अपने परिचय को बेनामी के अँधेरों में छिपा रहने देना चाहती है.... मुझे दीदी कहती है...अपने मन की हर बात मुझसे बाँट कर मन हल्का कर लेती है लेकिन कहाँ हल्का हो पाता है उसका मन.... बार बार अतीत से अलविदा कहन... Read more
clicks 189 View   Vote 0 Like   11:28am 17 Jul 2013 #अकेलापन
Blogger: मीनाक्षी
गूगल के सौजन्य से सुधा अपने आप को अपनों में भी अकेला महसूस करती है इसलिए अपने परिचय को बेनामी के अँधेरों में छिपा रहने देना चाहती है....  मुझे दीदी कहती है...अपने मन की हर बात मुझसे बाँट कर मन हल्का कर लेती है लेकिन कहाँ हल्का हो पाता है उसका मन.... बार बार अतीत से अलविदा कहने प... Read more
clicks 224 View   Vote 0 Like   5:58am 22 Jun 2013 #प्रेम
Blogger: मीनाक्षी
गूगल के सौजन्य से सुधा अपने आप को अपनों में भी अकेला महसूस करती है इसलिए अपने परिचय को बेनामी के अँधेरों में छिपा रहने देना चाहती है....  मुझे दीदी कहती है...अपने मन की हर बात मुझसे बाँट कर मन हल्का कर लेती है लेकिन कहाँ हल्का हो पाता है उसका मन.... बार बार अतीत से अलविदा कहने प... Read more
clicks 170 View   Vote 0 Like   10:30pm 16 Jun 2013 #
Blogger: मीनाक्षी
चित्र गूगल के सौजन्य से सुधा अपने आप को अपनों में भी अकेला महसूस करती है इसलिए अपने परिचय को बेनामी के अँधेरों में छिपा रहने देना चाहती है....  मुझे दीदी कहती है...अपने मन की बात हर मुझसे बाँट कर मन हल्का कर लेती है लेकिन कहाँ हल्का हो पाता है उसका मन.... बार बार अतीत से अलविदा ... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   10:30pm 9 Jun 2013 #
Blogger: मीनाक्षी
मोबाइल से खींची गईं तस्वीरें पिछले साल के कुछ यादगार पल..2012 मार्च की बात है, देर रात निकले मैट्रो स्टेशन के नीचे के स्टोर से दूध और मक्खन खरीदने के लिए... पैदल का रास्ता होने पर भी गली के कुत्तों से डर के कारण रिक्शा पर जाने की सोची वैसे रिक्शे पर हम कम ही बैठते हैं. इस बात का ... Read more
clicks 197 View   Vote 0 Like   10:30pm 4 Jun 2013 #प्यार
Blogger: मीनाक्षी
चित्र गूगल के सौजन्य से सुधा अपने आप को अपनों में भी अकेला महसूस करती है इसलिए अपने परिचय को बेनामी के अँधेरों में छिपा रहने देना चाहती है....  मुझे दीदी कहती है...अपने मन की बात हर मुझसे बाँट कर मन हल्का कर लेती है लेकिन कहाँ हल्का हो पाता है उसका मन.... बार बार अतीत से अलविदा ... Read more
clicks 244 View   Vote 0 Like   2:20pm 30 May 2013 #अत्याचार
Blogger: मीनाक्षी
चित्र गूगल के सौजन्य से आज जब चारों ओर इंसान इंसान को हैवान बन कर निगलते देखती हूँ तो बरबस इस कविता की याद आ जाती है जो शायद सन 2000 से भी पहले की लिखी हुई है जो 'अनुभूति' में तो छप चुकी थी लेकिन जाने कैसे ब्लॉग पर  पोस्ट न हो पाई. दुनिया के किसी भी कोने में होती जंग दिल और दि... Read more
clicks 209 View   Vote 0 Like   9:30pm 28 May 2013 #युद्ध

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