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Blog: परिचर्चा

Blogger: rashmi prabha
सम्मान क्या है ? ........... कई तरह के सम्मान होते हैं , जिनसे हम अनभिज्ञ भी होते हैं और प्राप्य से दूर भी . तो ? कई लोगों को इन्टरनेट की सुविधा नहीं , कई लोगों को आता नहीं - तो क्या वे लिखनेवाले नहीं ? हम जिन्हें चाव से पढ़ते हैं , या जिनको चाहनेवाले अधिक होते हैं , या जिनकी लेखनी झकझोर... Read more
clicks 66 View   Vote 0 Like   6:47am 9 Jul 2012 #सर्वाधिकार सुरक्षित
Blogger: rashmi prabha
चलो एक कप चाय के संग थोड़ी बकवास करें दिमागी बातों से दिमाग थक जाता है कोई किसी की नहीं सुनता न समझता है निष्कर्ष आखिर में यही निकलता है - ओह ! यह कितना बोलता है अपने को काबिल का कनस्तर समझता है ! तो काबिल रास्तों से बाहर निकल हम कुछ बकवास करें ...जैसे ,आज कौन सी शैतानी की जाए श... Read more
clicks 78 View   Vote 0 Like   1:51pm 14 Jun 2012 #सर्वाधिकार सुरक्षित
Blogger: rashmi prabha
अपमान क्या है ? मान लो तो हर बात में है , समझो तो यह एक वृहद् शब्द है , अर्थ भी वृहद् . ' IDIOT ' शब्द अपमानजनक है , पर हम हर बात में सहज भाव से इसका इस्तेमाल करते हैं , और एक आदत सी हो जाती है . तो क्या हम अपमानित करने के लिए कहते हैं ? पर कई बार आदतन कहे इस शब्द का कहर झेलना पड़ता है . हम कब ... Read more
clicks 82 View   Vote 0 Like   3:40am 26 May 2012 #सर्वाधिकार सुरक्षित
Blogger: rashmi prabha
आज लिखते लिखते मैं कर्ण कवच के बारे में अपने बच्चों से बातें करने लगी ... दरअसल मैंने पूछा कि इन्द्र ने ही माँगा न कवच तो बड़ी बेटी ने कहा - हाँ , वही न थे अर्जुन के पिता . फिर कहानी की धार मुड़ गई . छोटीवाली की तरफ मुड़कर मैंने कहा - तभी न दुर्योधन ने कहा था कि तुम सब बताओ न किसक... Read more
clicks 100 View   Vote 0 Like   6:08am 11 May 2012 #
Blogger: rashmi prabha
काफ़ी समय पहले "सच में"पर लिखी यह कथा फ़िर से सुनाता हूँ:आज शाम प्राइम टाइम पर हिन्दी खबरो का एक मशहूर खबरी चैनल जो सबसे तेज़ तो नहीं है,पर TRP में शायद आगे रहता हो, एक सनसनी खेज खबर दिखा रहा था। शायद! क्यों कि मैं,खुद कभी ये TRP और उसका असली खेल समझ नहीं पाया,क्यों कि शायद मेरी खु... Read more
clicks 74 View   Vote 0 Like   3:29am 29 Apr 2012 #जीवन
Blogger: rashmi prabha
कोई दृश्य सामने से गुजरे , तो उपदेश इतने पुख्ता होते हैं कि खुद के अन्दर गुरु नज़र आने लगता है ! पलभर को लगता है - एक आश्रम खोल ही लिया जाए .... गरजते दृढ़ प्रतिज्ञ शब्द , लगता है - जो सुनेगा वह नतमस्तक हो जायेगा ... पर दृश्य का रुख जब अपनी चौखट पार करता नज़र आता है तो क्या पढ़ा था प... Read more
clicks 76 View   Vote 0 Like   10:39am 22 Apr 2012 #
Blogger: rashmi prabha
जब एक स्त्री पत्नी से माँ बनती है तो सिर्फ मातृत्व की ज़िम्मेदारी नहीं होती पूरा घर उसके जिम्मे होता है ... इधर से पुकार उधर से पुकार , खाना , मेहमान आने की सूचना , ऑफिस का टाइम ....ऐसे में जब बच्चा बार बार रोता है या शोर करता है या कोई फरमाइश तो प्यार से कहते कहते माँ झुंझला उठत... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   11:33am 11 Apr 2012 #
Blogger: rashmi prabha
स्त्री की पूर्णता जब जब बताई जाएगी - वह शोध होगा जब जब उसकी दुर्दशा बताई जाएगी - वह धब्बा होगा . ! एक स्त्री एक स्त्री के दर्द को यदि उकेरती है , उसकी चुनौतियों को शब्द देती है तो इसे मात्र समसामयिक विषय नहीं कह सकते . इसे समझना है , क्या हुआ क्या होना चाहिए था का प्रश्न अहम् नह... Read more
clicks 70 View   Vote 0 Like   11:02am 5 Apr 2012 #
Blogger: rashmi prabha
हिंदी ब्लॉगर्स ने चैत्र मास से आरंभ होने वाले नवसमवत्सर पर लेख लिखे। हमने भी इस विषय पर लेख लिखा।चैत्र मास से आरंभ होने वाला यह कैलेंडर हिंदू वैज्ञानिकों ने दिया है। यह कौन सा तरीक़ा है कि देन से तो लाभ उठाया जाए और देने वाले को भुला दिया जाए ?अक्सर ब्लॉगर्स ने यही किया ह... Read more
clicks 77 View   Vote 0 Like   4:09am 29 Mar 2012 #'brahma abraham ibrahim brahman'
Blogger: rashmi prabha
वृक्ष हों भले खड़े,हों घने हों बड़े,एक पत्र छांह भी,मांग मत, मांग मत, मांग मत,अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथतू न थकेगा कभी,तू न रुकेगा कभी,तू न मुड़ेगा कभी,कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ,अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथयह महान दृश्य है,चल रहा मनुष्य है,अश्रु श्वेत रक्त से,लथपथ लथपथ लथपथ,अग्निपथ अ... Read more
clicks 80 View   Vote 0 Like   11:22am 27 Jan 2012 #
Blogger: rashmi prabha
देश में आज अंग्रेज़ी राज नहीं है और उनके क़ानून में कुछ घटा बढ़ाकर हमने उसे अपना भी बना लिया है लेकिन हमें देखना होगा कि इस क़ानून का लाभ देश के ग़रीबों को कितना मिल रहा है ?दहेज उत्पीड़न के एक मुक़ददमे को लड़ते हुए आज एक लड़की को चार साल हो गए हैं। हमने देखा है कि उसे अब तक न तो उसके ... Read more
clicks 95 View   Vote 0 Like   5:24pm 25 Jan 2012 #'DR. ANWER JAMAL'
Blogger: rashmi prabha
न नारी मुक्त है न पुरुष - दोनों आधार हैं , पूरक हैं - सृष्टि का आरम्भ ही दोनों के साथ है . पुरुष सुरक्षा , नारी अन्नपूर्णा .... पर आतंक तो कहीं भी होता है अति का . पहले नारियों की संख्या अधिक थी , आज पुरूषों की है . व्यथा दोनों की एक सी है .... 'नारी की समझदारी ' और ' नारी मुक्ति ' के अर्थ अ... Read more
clicks 71 View   Vote 0 Like   6:44am 25 Jan 2012 #
Blogger: rashmi prabha
स्वराज्य करूं ब्लॉग पर एक दिल दुखाने वाली ख़बर देखीकृष्ण कन्हैया की धरती पर यह कैसा कलंक ?खबर  आयी है कि भगवान कृष्ण कन्हैया की पवित्र भूमि वृन्दावन में संचालित सरकारी आश्रय गृहों की अनाथ विधवाओं के मरने के बाद उनके शरीर के टुकड़े -टुकड़े करके स्वीपरों द्वारा जूट की थ... Read more
clicks 97 View   Vote 0 Like   3:47pm 10 Jan 2012 #'DR. ANWER JAMAL'
Blogger: rashmi prabha
फेस बुक पर मनीषजी पूछते हैं ...‎"प्रेम जब ये चाहने लगे कि मैं अपने प्रिय को एक नए आकार में ढाल लूँ, प्रेम जब ये कल्पना करने लगे कि वह जो मेरा प्रिय है, मिट्टी का बना है ओर मैं उसे मनचाही आकृति दे सकता हूँ...अलग अलग कोणों से मिट्टी सने हाथों वाले किसी क्षण परम संतोष को प्राप्त ह... Read more
clicks 88 View   Vote 0 Like   4:17am 9 Jan 2012 #चर्चा
Blogger: rashmi prabha
जब हम हँसते हैं तो हंसने का मात्र वही कारण नहीं होता , जो उस क्षण होता है . कुछ लोग बेवजह हँसते हैं , कुछ लोग मन रखने के लिए , कुछ लोग हुई बात पर हँसते हँसते रो देते हैं , इसके पीछे भी अनगिनत कारण होते हैं . जन्म , मृत्यु , नामकरण , विवाह - कई संबोधन , तलाक , अविवाहित , युद्ध, शान्ति ...... ... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   4:57am 6 Jan 2012 #
Blogger: rashmi prabha
लोग विपरीत विचार सामने आते ही या तो पलायन का रूख़ इख्तियार कर लेते हैं या फिर फ़र्ज़ी आईडी से अपमानजनक टिप्पणियां करने लगते हैं ताकि विपरीत विचार वाले का हौसला तोड़ा जा सके। यह प्रक्रिया विचार विमर्श के अनुकूल नहीं है। जो लोग विचार विमर्श का दंभ भरते हैं वे भी ऐसी असभ्य ट... Read more
clicks 88 View   Vote 0 Like   4:57am 6 Jan 2012 #'अच्छा माहौल'
Blogger: rashmi prabha
http://zindagikhwaabhai.blogspot.com/दुःख बहेलिए के किये का करें,या चिड़िया के मासूमियत पे?क्षमा करें, पर अक्सर हम शब्दों का, मन मुताबिक अर्थ निकाल लेते हैं....हमारा प्रश्न होना चाहिए,मासूमियत, किस हद तक?बहेलिये सरीके को, कहाँ तक?मासूम होना और बेवकूफ होने में,अंतर करना ही होगा.वर्ना मासूमियत बद... Read more
clicks 82 View   Vote 0 Like   10:17am 5 Jan 2012 #
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