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Blog: उच्चारण

Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
--पुष्प पुंज रखता सदा, पंखुड़ियों को जोड़।कभी सुमन की पाँखुरी, चटका कर मत तोड़।।--पर्यावरण सुधारना, मानव का दायित्व। बिना पाँखुरी के नहीं, पंछी का अस्तित्व।।--पंखुड़ियों को देखकर, भ्रमर करें गुंजार।करती कोमल पाँखुरी, बिरुओं का शृंगार।।--खुशी सभी को बाँटता, खिलकर हरसिंग... Read more
clicks 3 View   Vote 0 Like   7:30pm 6 Feb 2020 #पंखुड़ियों के रंग
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
सियाह रात है, छाया बहुत अन्धेरा हैअभी तो दूर तलक भी नहीं सवेरा हैअभी तो तुमसे बहुत दिल के राज़ कहने हैंमगर फलक़ पे लगा बादलों का डेरा हैछटेंगी काली घटाएँ तो बोल निकलेंगेगमों के बोझ का साया बहुत घनेरा हैहमारे घोंसलों में जिन्दगी सिसकती हैकुछ दरिन्दों ने आज अपना मुल्क... Read more
clicks 5 View   Vote 0 Like   12:57am 6 Feb 2020 #ग़ज़ल
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
--लगा हुआ ठेले पर ढेर।गली-गली में बिकते बेर।।--रहते हैं ये काँटों के संग।मनमोहक हैं बेरों के रंग।।--जो हरियल हैं, वे कच्चे हैं।जो पीले हैं, वे पक्के हैं।।--ये सबके मन को ललचाते।हम बच्चों को बहुत लुभाते।।--शंकर जी को भोग लगाओ।व्रत में तुम बेरों को खाओ।।-- बेरी कितनी गदरायी ... Read more
clicks 23 View   Vote 0 Like   8:30pm 4 Feb 2020 #बाल कविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
--जीवन से कम हो गया, एक सुहाना साल।क्या खोया क्या पा लिया, करे कौन पड़ताल।।--मना रहे हैं जन्मदिन, इष्ट मित्र परिवार।अपने-अपने ढंग से, लाये सब उपहार।।--जीवन-साथी चल रहा, थाम हाथ में हाथ।चार दशक से अधिक से, हम दोनों हैं साथ।।--धीरे-धीरे कट गये, ये उनहत्तर साल।प्यार और तकर... Read more
clicks 27 View   Vote 0 Like   8:30pm 3 Feb 2020 #जीवन की ये नाव
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
--आँख जब खोली जगत में, तभी था मधुमास पाया।चेतना मन में जगाने, जन्मदिन फिर आज आया।।--हूँ पुराना दीप, लेकिन जल रहा हूँ,मैं समय के साथ, फिर भी चल रहा हूँ,पर्वतों को काट करके, रास्ता मैंने बनाया।चेतना मन में जगाने, जन्मदिन फिर आज आया।।--था कभी शोला, अभी शबनम हुआ,साल मेरी जिन्दगी स... Read more
clicks 24 View   Vote 0 Like   8:30pm 2 Feb 2020 #गीत
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
--आँख जब खोली जगत में, तभी था मधुमास पाया।चेतना मन में जगाने, जन्मदिन फिर आज आया।।--हूँ पुराना दीप, लेकिन जल रहा हूँ,मैं समय के साथ, फिर भी चल रहा हूँ,पर्वतों को काट करके, रास्ता मैंने बनाया।चेतना मन में जगाने, जन्मदिन फिर आज आया।।--था कभी शोला, अभी शबनम हुआ,साल मेरी जिन्दगी स... Read more
clicks 11 View   Vote 0 Like   8:30pm 2 Feb 2020 #गीत
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
फागुन में कुहरा छाया है।सूरज कितना घबराया है।।अलसाये पक्षी लगते हैं।राह उजाले की तकते हैं।।सूरज जब धरती पर आये।तब हम दाना चुगने जायें।।भुवन भास्कर हरो कुहासा।समझो खग के मन की भाषा।।बिल्ली सुस्ताने को आई।लेकिन यहाँ धूप नही पाई।।नीचे जाने की अब ठानी।ठण्डक से है जा... Read more
clicks 23 View   Vote 0 Like   1:39am 2 Feb 2020 #सूरज कितना घबराया है
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
--मधुर पर्यावरण जिसने, बनाया और निखारा है,हमारा आवरण जिसने, सजाया और सँवारा है।बहुत आभार है उसका, बहुत उपकार है उसका,दिया माटी के पुतले को, उसी ने प्राण प्यारा है।।--बहाई ज्ञान की गंगा, मधुरता ईख में कर दी,कभी गर्मी, कभी वर्षा, कभी कम्पन भरी सरदी।किया है रात को ... Read more
clicks 7 View   Vote 0 Like   1:36am 1 Feb 2020 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
--मौसम लेकर आ गया, वासन्ती उपहार।जीवन में बहने लगी, मन्द-सुगन्ध बयार।। --सरदी अब कम हो गयी, बढ़ा धरा का ताप।उपवन में करने लगे, प्रेमी मेल-मिलाप।।खुश हो करके खिल रहे, सेमल और कपास।लोगों को होने लगा, वासन्ती आभास।।सरसो फूली खेत में, गया कुहासा हार।जीवन में बहने लगी, मन्द-सु... Read more
clicks 3 View   Vote 0 Like   2:05am 31 Jan 2020 #मन्द-सुगन्ध बयार
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
--उतरी हरियाली उपवन में,आ गईं बहारें मधुवन में,गुलशन में कलियाँ चहक उठीं,पुष्पित बगिया भी महक उठी, अनुरक्त हुआ मन का आँगन।आया बसन्त, आया बसन्त।१।--कोयल ने गाया मधुर गान,चिड़ियों ने छाया नववितान,यौवन ने ली है अँगड़ाई,सूखी शाखा भी गदराई,बौराये आम, नीम-जामुन।आया बसन्त... Read more
clicks 10 View   Vote 0 Like   7:30pm 29 Jan 2020 #गीत
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
--मैं हूँ निपट भिखारी, कुछ दान माँगता हूँ।झोली पसारकर माँ, मैं ज्ञान माँगता हूँ।।--दुनिया की भीड़ से मैं,बच करके चल रहा हूँ,माँ तेरे रजकणों को,माथे पे मल रहा हूँ,निष्प्राण अक्षरों में, मैं प्राण माँगता हूँ।झोली पसारकर माँ, मैं ज्ञान माँगता हूँ।।--अज्ञान का अन्धेरा,छँट जाय... Read more
clicks 42 View   Vote 0 Like   7:30pm 28 Jan 2020 #वन्दना
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
--आओ माता! सुवासित करो मेरा मन।शारदे माँ! तुम्हें कर रहा हूँ नमन।।--घोर तम है भरा आज परिवेश में,सभ्यता सो गई आज तो देश में,हो रहा है सुरा से यहाँ आचमन।शारदे माँ! तुम्हें कर रहा हूँ नमन।।--दो सुमेधा मुझे मैं तो अनजान हूँ,माँगता काव्य-छन्दों का वरदान हूँ,चाहता हूँ वतन में स... Read more
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
--नहीं भूलना चाहिए, वीरों का बलिदान।सीमाओं पर देश की, देते जान जवान।।--उनकी शौर्य कहानियाँ, गाते धरती-व्योम।आजादी के यजन में, किया जिन्होंने होम।।--आज हमारे देश में, सबसे दुखी किसान।फाँसी खा कर मर रहे, धरती के भगवान।।--अमर शहीदों का जहाँ, होता हो अपमान।सिर्फ कागजों में बन... Read more
clicks 11 View   Vote 0 Like   12:16am 27 Jan 2020 #दोहे
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
--दशकों से गणतन्त्र दिवस पर, राग यही दुहराया है।होगा भ्रष्टाचार दूर, बस मन में यही समाया है।।--सिसक रहा जनतन्त्र हमारा, चलन घूस का जिन्दा है,देख दशा आजादी की, बलिदानी भी शर्मिन्दा हैं,रामराज के सपने देखे, रक्षराज ही पाया है।होगा भ्रष्टाचार दूर, बस मन में यही सम... Read more
clicks 7 View   Vote 0 Like   11:58pm 25 Jan 2020 #गीत
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
--नहीं भूलना चाहिए, वीरों का बलिदान।सीमाओं पर देश की, देते जान जवान।।--उनकी शौर्य कहानियाँ, गाते धरती-व्योम।आजादी के यजन में, किया जिन्होंने होम।।--आज हमारे देश में, सबसे दुखी किसान।फाँसी खा कर मर रहे, धरती के भगवान।।--अमर शहीदों का जहाँ, होता हो अपमान।सिर्फ कागजों में बन... Read more
clicks 11 View   Vote 0 Like   2:41am 25 Jan 2020 #दोहे
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
--अंग्रेजी से ओत-प्रोत,अपने भारत का तन्त्र,मनाएँ कैसे हम गणतन्त्र।मनाएँ कैसे हम गणतन्त्र।।--आजादी के बाद हमारी,मौन हो गई भाषा,देवनागरी के सपनों की,गौण हो गई परिभाषा,सुप्त हो गये छंद-शास्त्र,अभिलुप्त हो गये मन्त्र।मनाएँ कैसे हम गणतन्त्र।।--कहाँ गया गौरव अतीत,अमृत गागर ... Read more
clicks 27 View   Vote 0 Like   6:41am 24 Jan 2020 #मनाएँ कैसे हम गणतन्त्र
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
--नया वर्ष स्वागत करता है,पहन नया परिधान।सारे जग से न्यारा, अपना है गणतंत्र महान॥--ज्ञान गंग की बहती धारा,चन्दा-सूरज से उजियारा।आन-बान और शान हमारी,संविधान हम सबको प्यारा।प्रजातंत्र पर भारत वाले,करते हैं अभिमान।सारे जग से न्यारा, अपना है गणतंत्र महान॥--शीश मुकु... Read more
clicks 34 View   Vote 0 Like   7:30pm 23 Jan 2020 #गीत
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
--तीन रंग का झण्डा न्यारा।हमको है प्राणों से प्यारा।।--त्याग और बलिदानों का वर।रंग केसरिया सबसे ऊपर।।--इसके बाद श्वेत रंग आता।हमें शान्ति का ढंग सुहाता।।--सबसे नीचे रंग हरा है।हरी-भरी यह वसुन्धरा है।।--बीचों-बीच चक्र है सुन्दर।हो विकास भारत के अन्दर।।--गाओ कौमी आज तरान... Read more
clicks 22 View   Vote 0 Like   1:50am 23 Jan 2020 #हो विकास भारत के अन्दर
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
--दुनिया के इतिहास में, दिवस आज का खास।अपने भारत देश में, जन्मा वीर सुभास।।--जीवित मृत घोषित किया, सबको हुआ मलाल।सत्ता पाने के लिए, चली गयी थी चाल।।--क्यों इतने भयभीत हैं, शासन में अधिराज।नहीं उजागर हो सका, नेता जी का राज।।--इस साजिश पर हो रहा, सबको पश्चाताप।नेता जी को दे दिय... Read more
clicks 24 View   Vote 0 Like   12:18am 22 Jan 2020 #यह उपवन आजाद
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
मित्रों! 21 जनवरी मेरे लिए इतिहास से कम नहीं है! क्योंकि आज के ही दिन मैंने ब्लॉगिंग की दुनिया में अपना कदम बढ़ाया था।     आज से ठीक 12 वर्ष पूर्व मैंने उच्चारण नाम से अपना ब्लॉग बनाया था और उस पर अपनी पहली रचना पोस्ट की थी-बुधवार, 21 जनवरी 2009सुख का सूरज उ... Read more
clicks 62 View   Vote 0 Like   2:10am 21 Jan 2020 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
--अंग दिखाने का बढ़ा, कैसा आज जुनून।नयी पौध की है फटी, जगह-जगह पतलून।।--सिने-तारिका कर रहीं, लचर आज परिधान।चलता-फिरता हास्य अब, लगता है इंसान।।--भारतीयता बन गयी, कोरा आज मजाक।भौंडा फैशन देखकर, दुनिया है आवाक।।--लायेगा मधुमास क्या, तन पर नूतन पात।बिन पतझड़ जब हो रहा, नंगा-नंग... Read more
clicks 21 View   Vote 0 Like   7:30pm 19 Jan 2020 #नंगेपन के ढ़ंग
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
--हिमगिरि के शिखरों से चलकर,कलकल-छलछल, बहती अविरल,कुदरत का उपहार कहाँ है?निर्मल गंगा धार कहाँ है??--मैदानों पर रूप निखारा,दर्पण जैसी निर्मल धारा,अर्पण-तर्पण करने वाली,सरल-विरल चंचल-मतवाली,पौधों में भरती हरियाली,अमल-धवल गुंजार कहाँ है?निर्मल गंगा धार कहाँ है??--भवसागर से पा... Read more
clicks 10 View   Vote 0 Like   11:30am 18 Jan 2020 #गीत
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
--चाहे कोई कल्प हो, या हो कोई काल।माता निज सन्तान को, रही प्यार से पाल।।-- सुख-दुख दोनों में रहे, कोमल और उदार।कैसी भी सन्तान हो, माता करती प्यार।। --पीर पराई झेलना, बहुत कठिन है काम।कलियुग में कैसे भला, पैदा होंगे राम।।-- भावनाओं के हृदय में, जब उठते तूफान।उन्हें ... Read more
clicks 7 View   Vote 0 Like   7:41am 17 Jan 2020 #विविध दोहे
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
--कल-कल करती व्यास-विपाशा।मन की बुझती नहीं पिपासा।। --प्यास कहो या आस कहो तुम,तृष्णा-इच्छा, लोभ निराशा,पल-पल राग सुनाता मौसम,जीवन में उगती अभिलाषा।--तन की तृषा भले बुझ जाये,लेकिन मन रहता है प्यासा,कभी अमावस कभी चाँदनी,दोनों करते खेल-तमासा।मन की बुझती नहीं पिपासा।।--पूजा क... Read more
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
--सन-सन शीतल चला पवन,सरदी ने रंग जमाया।ओढ़ चदरिया कुहरे की,सूरज नभ में शर्माया।।--जलते कहीं अलाव, सेंकता बदन कहीं है कालू,कोई भूनता शकरकन्द को, कोई भूनता आलू,दादा जी ने अपने तन पर,कम्बल है लिपटाया।ओढ़ चदरिया कुहरे की,सूरज नभ में शर्माया।।--जितने वस्त्र लपे... Read more
clicks 29 View   Vote 0 Like   7:30pm 15 Jan 2020 #सूर्य भी शीत उगलता है


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