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उच्चारण

गीत-ग़ज़ल, दोहा-चौपाई, सिसक रहे अमराई मेंभाईचारा तोड़ रहा दम, रिश्तों की अँगनाई मेंफटा हुआ दामन अब तक भी सिलना नहीं हमें आयासारा जीवन निकल गया है, कपड़ों की कतराई मेंरत्नाकर में अब भी होता, खारे पानी का मन्थनउथल-पुथल सी मची हुई है, सागर की गहराई मेंकेशर की क्यारी को किसने...
Tag :प्रकाशन
  June 1, 2018, 7:34 am
बात-बात में निकलते, साला-साली शब्द।देवनागरी हो रही, देख-देख निःशब्द।।अगर मनुज के हृदय का, मर जाये शैतान।, फिर से जीवित धरा पर, हो जाये इंसान।।कमी नहीं कुछ देश में, भरे हुए गोदाम।खास मुनाफा खा रहे, परेशान हैं आम।।बढ़ते भ्रष्टाचार को, देगा कौन लगाम।जनसेवक ...
Tag :परेशान हैं आम
  May 31, 2018, 7:42 am
स्वार्थ भरे इस जगत में, जब तक है परमार्थ।तब-तब जग में जन्म ले, वीर धनुर्धर पार्थ।।उसको मिलती सफलता, जो करता पुरुषार्थ।लक्ष्य भेदने के लिए, बनना पड़ता पार्थ।।रखो खेल की भावना, पास-फेल के संग।चाहे जो परिणाम हो, तजना नहीं उमंग।।सुन्दरता को देखकर, मत होना मदहोस।पत्तों ...
Tag :दोहे
  May 30, 2018, 5:30 am
सवाल पर सवाल हैं, कुछ नहीं जवाब है।राख में दबी हुई, हमारे दिल की आग है।।गीत भी डरे हुए, ताल-लय उदास हैं.पात भी झरे हुए, किन्तु शेष आस हैं,दो नयन में पल रहा, नग़मग़ी सा ख्वाब है।राख में दबी हुई, हमारे दिल की आग है।।ज़िन्दगी है इक सफर, पथ नहीं सरल यहाँ,मंजिलों को खोजता, पथिक यह...
Tag :गीत
  May 28, 2018, 3:31 pm
सबके मन को मोहते, अमलतास के फूल।शीतलता को बाँटते, मौसम के अनुकूल।१।सूरज झुलसाता बदन, बढ़ा धरा का ताप।अमलतास तुम पथिक का, हर लेते सन्ताप।२।मौन तपस्वी से खड़े, सहते लू की मार।अमलतास के पेड़ से, बहती सुखद बयार।३।पीले झूमर पहनकर, तन को लिया सँवार।किसे रिझाने के लिए, करते हो...
Tag :सहते लू की मार
  May 28, 2018, 7:54 am
अपने-अपने पेंच हैं, अपने-अपने दाँव।दल-दल में सबके यहाँ, धँसे हुए हैं पाँव।।बिना बुलाये आ रहे, वोट माँगने लोग।दुखती रग को पकड़कर, बढ़ा रहे हैं रोग।।चार साल से पूर्व जो, दिखते थे सम्पन्न।महँगाई कर दिया, उनको आज विपन्न।।गंगू भाई बन गया, जब से राजा भोज।सुरसा के मुख सी ब...
Tag :मोह सभी का भंग
  May 27, 2018, 8:34 am
वाक्शक्ति हमको मिली, ईश्वर से अनमोल।सोच समझकर बात को, तोल-तोलकर बोल।।कुछ लोगों के तंज की, करना मत परवाह।आगे बढ़ते जाइए, मिल जायेगी राह।।चिकनी-चुपड़ी बात से, होता जग अनुकूल।खरी-खरी जो बोलता, उसके सब प्रतिकूल।।खाली पड़ी जमीन पर, बने हुए हैं कक्ष।दिखलाई देते नहीं, अब आ...
Tag :दोहे
  May 26, 2018, 7:02 am
दोहों में ही निहित है, जीवन का भावार्थ।गरमी में अच्छे लगें, शीतल पेय पदार्थ।।ज्यादा मीठे माल से, हो जाता मधुमेह।कभी-कभी तो चाटिए, कुछ तीखा अवलेह।।हमने दुनिया को दिया, कविताओं का ढंग।किन्तु विदेशों का चढ़ा, आज हमीं पर रंग।।राम और रहमान को, भुना रहे हैं लोग।जनता दुष्प...
Tag :दोहे
  May 25, 2018, 7:34 am
काले अक्षर कभी-कभी, तो बहुत सताते है।कभी-कभी सुख का, सन्देशा भी दे जाते हैं।।इनका दर्द मुझे बिल्कुल, अपना जैसा लगता है।कभी बेरुखी कभी प्यार से, सीधी बातें करता है।।अक्षर में ही राज भरे हैं, छिपे बहुत से रूप।जख्म जिन्दगी में दे जाते, अक्षर बड़े अनूप।।जीवन के दो...
Tag :कविता
  May 24, 2018, 6:00 am
गीत सुनाती माटी अपने, गौरव और गुमान की।दशा सुधारो अब तो लोगों, अपने हिन्दुस्तान की।।खेतों में उगता है सोना, इधर-उधर क्यों झाँक रहे?भिक्षुक बनकर हाथ पसारे, अम्बर को क्यों ताँक रहे?आज जरूरत धरती माँ को, बेटों के श्रमदान की।दशा सुधारो अब तो लोगों, अपने हिन्दुस...
Tag :गीत
  May 23, 2018, 1:16 pm
करके सभी प्रयास अब, लोग गये हैं हार।काशी में उलटी बहे, गंगा जी की धार।।पूरी ताकत को लगा, चला रहे पतवार।लेकिन फिर भी नाव तो, नहीं लग रही पार।।एक नीड़ में रह रहे, बोल-चाल है बन्द।भाई-भाई की उन्हें, सूरत नहीं पसन्द।।पुत्र पिता को समझता, बैरी नम्बर एक।मतलब तक ही हैं यहाँ,...
Tag :वृद्ध पिता मजबूर
  May 22, 2018, 11:30 am
हरी, लाल और पीली-पीली!लीची होती बहुत रसीली!! गायब बाजारों से केले।सजे हुए लीची के ठेले।। आम और लीची का उदगम।मनभावन दोनों का संगम।। लीची के गुच्छे हैं सुन्दर।मीठा रस लीची के अन्दर।। गुच्छा बिटिया के मन भाया!उसने उसको झट कब्जाया!! लीची को पकड़ा, दिखलाया!भइया ...
Tag :बालकविता
  May 21, 2018, 9:28 am
रास न आयी दलों को, महामहिम की चाल।करनाटक में कमल का, सूख गया है ताल।।न्यायालय ने कर दिये, सपने चकनाचूर।ढाई दिन में हो गये, वो सत्ता से दूर।।नहीं किसी के पक्ष में, आया जन आदेश।नूरा कुश्ती का बना, करनाटक प्रादेश।। कल तक उनको थी नहीं, उनकी तो दरकरार।मिल कर दोनों आज वो, बना रहे...
Tag :दोहे
  May 20, 2018, 11:58 am
बिकते हैं बाजार में, जिनके रोज जमीर।छल-बल से होते यहाँ, वो ही अधिक अमीर।।फाँसी खा कर रोज ही, मरते जहाँ किसान।बोलों किस मुँह से कहें, अपना देश महान।।माना है प्यारी धरा, जीवन का आधार।लेकिन पौधों से नहीं, करता कोई प्यार।।सजते हों गुलदान में, जब कागज के फूल।उजड़ा गुलशन हो भ...
Tag :वो ही अधिक अमीर
  May 19, 2018, 10:25 am
जो पीड़ा में मुस्काता है, वही सुमन होता हैनयी सोच के साथ हमेशा, नया सृजन होता हैजब आतीं घनघोर घटायें, तिमिर घना छा जाताबादल छँट जाने पर निर्मल, नीलगगन होता हैभाँति-भाँति के रंग-बिरंगे, जहाँ फूल खिलते होंभँवरों का उस गुलशन में, आने का मन होता हैकिलकारी की गूँज ...
Tag :बड़ा वतन होता है
  May 18, 2018, 10:51 am
पहले काम तमाम करें।फिर थोड़ा आराम करें।।आदम-हव्वा की बस्ती में,जीवन के हैं ढंग निराले।माना सबकुछ है दुनिया में,पर न मिलेगा बैठे-ठाले।नश्वर रूप सलोना पाकर,काहे का अभिमान करें।पहले काम तमाम करें।फिर थोड़ा आराम करें।।सागर है जलधाम कहाता,लेकिन स्वाद बहुत है खारा।प्या...
Tag :रिश्ते ना बदनाम करें
  May 17, 2018, 11:48 am
नेकी और खुलूस है, मौला का फरमान।मौमिन को सन्देश ये, देते हैं रमजान।।पाँचों वक्त नमाज पढ़, कहता पाक कुरआन। बुरा किसी का मत करो, सिखलाते रमजान।।नाम इबादत के अलग, देश-काल अनुरूप।लेकिन मक़सद एक है,अलग भले हों “रूप”।।जर्रे-जर्रे में बसा, राम और रहमान।सिखलाते इंसानियत, पूजा ...
Tag :रमजान
  May 16, 2018, 7:15 am
बाहर खाने में नहीं, आता कोई स्वाद।होटल में जाकर सदा, होता धन बरबाद।।फूली-फूली रोटियाँ, सजनी रही बनाय।बाट जोहती है सदा, कब साजन घर आय।।फूली रोटी देखकर, होते सब अनुरक्त।मगर काटते तो नहीं, हँसी-खुशी से वक्त।।घर के खाने में भरा, घरवाली का प्यार।सजनी खाने के लिए, करती ह...
Tag :रोटी है तकदीर
  May 15, 2018, 4:30 am
होते गीत-अगीत हैं, कविता का आधार।असली लेखन है वही, जिसमें हों उदगार।।--मंजिल पर हर कदम का, रखना सम अनुपात।स्वारथ से बनती नहीं, जग में कोई बात।।--जो भूखा हो ज्ञान का, दो उसको उपदेश।जितने से जीवन चले, उतना करो निवेश।।--तालाबों की पंक में, खिले कमल का फूल।वो ही तो परिवेश है, जो ह...
Tag :
  May 14, 2018, 6:50 am
ममता की मूरत माता की,हरदम याद सताती है।कष्ट-क्लेश दुख की घड़ियों में,याद बहुत माँ आती है।।जीव-जन्तुओं को भी होते,बच्चे प्राणों से प्यारे।सुत हों या हो सुता,जननि की आँखों के होते तारे।नजर-टोक का लगा डिठोना,माँ कितना सुख पाती है।कष्ट-क्लेश दुख की घड़ियों में,याद...
Tag :याद बहुत माँ आती है
  May 13, 2018, 9:11 am
मातृदिवस पर विशेष-0-माँ ने वाणी को उच्चारण का ढंग बतलाया है,माता ने मुझको धरती पर चलना सिखलाया है,खुद गीले बिस्तर में सोई, मुझे सुलाया सूखे में,माँ के उर में ममता का व्याकरण समाया है,माता शब्द की व्यापकता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है किदुख-दर्द के समय अन्तर्मन स...
Tag :मातृदिवस पर विशेष
  May 12, 2018, 12:03 pm
शूद्र-ब्राह्मण या बणिक, या हों ठाकुर-वीर। इन सबसे मिलकर बना, अपना सौम्य शरीर।१। लालच में जो बेंचता, अपना यहाँ जमीर। उसको तो कहता नहीं, कोई कभी अमीर।२। मग़ज़ चाटने जब लगें, कुछ ज्ञानी नादान। ज्ञान बाँटना तब करो, बन्द उन्हें श्रीमान।३। दुष्टों को ...
Tag :दोहे
  May 11, 2018, 11:38 am
सूरज अब करने लगा, दुनिया को बेहाल।गरमी के कारण हुआ, जीना बड़ा मुहाल।।सिर पर रख कर तौलिया, चेहरे पर रूमाल।ढककर बाहर निकलिए, अपने-अपने गाल।।आग बरसती धरा पर, धूप हुई विकराल।विकल हो रहे प्यास से, वन में विहग मराल।।दूर-दूर तक जल नहीं, सूखे झील-तड़ाग।पानी की अब खोज में, उड़ते न...
Tag :धूप हुई विकराल
  May 10, 2018, 5:07 pm
मदहोश निगाहें हैं, खामोश तराना हैमासूम परिन्दों को, अब नीड़ बनाना हैसूखे हुए शजरों ने, पायें हैं नये पत्तेबुझती हुई शम्मा को, महफिल में जलाना हैकुछ करके दिखाने का, अरमान हैं दिलों मेंउजड़ी हुई दुनिया को, अब फिर से बसाना हैहिंसा की चल रहीं हैं, चारों तरफ हव...
Tag :मक़्तल की जरूरत क्या
  May 10, 2018, 5:00 am
 फिरकों में अब बँट गये, सारे रीति-रिवाज।मत-मजहब की जेल में, बन्दी हैं सब काज।।भूख मिटाने के लिए, होता है आहार।खान-पान में किन्तु अब, बना मजहब आधार।।बैर-भाव के खेल में, गयी मनुजता हार।बात-बात पर हो रही, आपस में तकरार।।केसर-क्यारी में बने, अब अपने ही गैर।सेना के बल पर वहाँ, ...
Tag :दोहे
  May 9, 2018, 6:00 am

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  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
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