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शिप्रा की लहरें

* प्रेम की परिकल्पना राधा ,जहाँ कोई भी न भव बाधा !भावना सशरीर, मर्यादा अभौतिक,गहनतम अनुभूति की यह डूब , मग्नता का कहीं ओर न छोर.बिंब औ'प्रतिबिंब दोनों एक , राग की अभिव्यंजना राधा !*विरह पलती  प्रेम  की गाथा ,निविड़ उर- एकान्त ने साधा.सम समर्पण जहाँ दोनों ओर, शेष रह जाता अर...
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  July 8, 2016, 2:14 am
* नहीं, मैं नहीं एकान्त निर्मात्री, इस सद्य-प्रस्फुट जीवन की, रचना मेरी, आधान तुम्हारासँजो कर गढ़ दिया मैंने नया रूप .प्रेय था!पौरुष का माधुर्य छलक उठा जबनयनों में वात्सल्य बन, जैसे चाँदनी में नहाई बिरछ की डाल, स्निग्ध कान्ति से दीप्त तुम्हारा मुख!मुग्ध हो गई मैं .कृतज्ञ ...
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  June 19, 2016, 10:13 pm
(नारी लेखन पर बड़े-बड़े सवाल उठते हैं - चुनौतियों और संभावनाओं की बातें होती हैं . लेकिन कुछ मूल-भूत प्रश्न  हैं जिनके उत्तर कभी नहीं मिलते ,...और समाधान मिले बिना समस्या जहाँ की तहाँ... .)  रचनात्मकता का पर्याय है नारी , प्रकृति ने दिया सृजन का वरदान - नेहामृत से सींच  ,भाव...
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  May 3, 2016, 1:27 pm
* गौरी-शंकर का विवाह संपन्न हो चुका .आगत अतिथि प्रस्थान कर गये .पर हिमगिरि और मैना निवृत्त कहाँ  -कन्या बिदा नहीं हुई अभी .पूरा बरस  बीत चुका .दूल्हा शंकर कोहबर में ऐसा रमा  कि बाहर निकलता ही नहीं  .सारी बरात टिकी है .कैसे हो  प्रस्थान ! पर्वतराज लाचार  ,झींकभरी मै...
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  April 8, 2016, 2:03 pm
*घुट कर रह जाते शब्द, ,व्यक्त नहीं होते मनोभाव -  मैं तुम्हें श्रद्धाञ्जलि कैसे दूँ ?* पल-पल मनाया था - जीत जाओ काल से , तुम - जिसने हाड़ गलाते हिम झंझाओँ में झोंक दिया था जीवन - तन, यौवन सारे सपन ,परिणीता का सुहाग , पुत्री का वत्सल-प्रेम ,जननी-जनक का आसरा . *सिर पर कफ़न बाँधकैस...
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  February 15, 2016, 9:42 pm
साँझ-चिरैया उतरती अपने पंख पसार,जल-थल-नभ में एक सा कर अबाध संचार.मुट्ठी भर-भर कर गगन दाने रहा बिखेर, उड़ जायेगी देखना चुन कर बड़ी सबेर.श्यामल देह पसार कर रचती रूप अपार  सब पर टोना कर रही मूँद दिशा के द्वार.आँखों में भर मोहिनी सभी ओर से घेर,डाली  माया नींद की फैला कर अँध...
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  November 18, 2015, 9:43 pm
*मइया पधारी मोरे अँगना,मलिनिया फूल लै के आवा,*ऊँचे पहारन से उतरी हैं मैया,छायो उजास जइस चढ़त जुन्हैया.रचि-रचि के आँवा पकाये , कुम्हरिया ,दीप लै के आवा.*सुन के पुकार मइया मैया परखन को आई  ,खड़ी दुआरे ,खोल कुंडी रे माई !वो तो आय हिरदै में झाँके ,घरनिया प्रीत लै के आवा ,*दीपक  ...
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  October 14, 2015, 5:43 am
*मइया पधारी मोरे अँगना,मलिनिया फूल लै के आवा,*ऊँचे पहारन से उतरी हैं मैया,छायो उजास जइस चढ़त जुन्हैया.रचि-रचि के आँवा पकाये , कुम्हरिया ,दीप लै के आवा.*सुन के पुकार मइया जाँचन को आई  ,खड़ी दुआरे ,खोल कुंडी रे माई !वो तो आय हिरदै में झाँके ,घरनिया प्रीत लै के आवा ,*दीपक  कुम...
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Tag :उज्जर.
  October 14, 2015, 5:43 am
(यह कविता आप सबसे शेयर करना चाहती हूँ - रचनाकर्त्री को आभार सहित - प्रतिभा.)*    हम भिंचे हैं दो पीढ़ियों के बीच    बुरी तरह ।    पुरानी पीढ़ी की आशाओं को फलीभूत करने में     बिता दी उम्र सारी ।    उनके आदेशों को शिरोधार्य करते रहे ,    जीते रहे ,लगभग जैसा चाहा ...
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  October 6, 2015, 5:26 am
गंध-मुग्ध मृगी एक निज में बौराई,विकल प्राण-मन अधीर भूली भरमाई .कैसी उदंड गंध मंद नहीं होती,जगती जो प्यास ,पल भर न चैन लेती .*भरमाती-भुलाती सभी भान डुबा लेती,विषम वन-भूमि दूर दूर अनदेखी.  मंत्रित-सी भाग चली  ,शूल-जाल घेरे ,कौन दिशा ,कौन दशा कौन पंथ हेरे !*रुक-रुक के टोहती ,ले घ...
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Tag :घ्राण
  September 20, 2015, 8:33 am
*जीवन भर रिश्ते ही तो जिये हैं ! इसी गोरखधंधे में घूमते ,किससे ,कैसे ,कहाँ ,क्यों ,सोचते- समझते ,भूल गई निकलने का रास्ता किधर है .* उत्सुकता भर  कभी झाँक लिया बाहर -कहीं-कहीं वाली खिड़कियों से .रहने-बसने को यही कुठरियाँ -कुछ इधर ,कुछ उधर !*स्त्री है ,उच्छृंखल न हो जाए .धरे र...
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  August 28, 2015, 8:53 am
ओ,चरवाहे ! सँग-सँग मुझे लिए चल.* घंटी गले बाँध दी तूने छन-छन भान दिलाए  ,तेरे आँक छपे माथे पर बाकी कौन उपाए .हेला दे, ले साथ ,कहीं यों रह न जाउँ मैं एकल !*अंकुश बिन ,पगहे बिन, भरमा पशु तेरा मनमानापहुँच वहीं तक गुज़र वहीं पर, तेरी घेर ठिकाना , रेवड़ की गिनती में अपनी,तू ही हाँक ...
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  April 10, 2015, 10:32 pm
*रथ के टूटे पहिये से  कब तक लड़ोगे वसुषेण? *कवच-कुंडल हीन लड़ रहा है वह.हार नहीं मानेगा ! मृत-पुत्र हित मातृत्व  जाग उठा कुन्ती का विक्षत  देह गोद में भर ली .जीवन भर  तरसा था  जिसके लिए मन,  बोधहीन तन को नहीं ग्रहण !*वह नहीं है अब !होता तो कहता - नहीं चाहिये तुम्ह...
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  March 4, 2015, 11:15 am
On Feb 19, 2015, at 12:34 AM, Mcabani wrote: Fwd: A Hindi poem on Modi             67 साल पहले एक गुजराती        ने देश को अंग्रेजों से मुक्त        किया था.....       अब 67 साल बाद एक गुजराती        ने देश को कांग्रेस से मुक्त         किया है......     ...
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  February 20, 2015, 9:56 am
मैं तुम्हारी चेतना का उच्छलित कण-मैं तुम्हारा शंख हूँ !*परम-काल प्रवाह का बाँधा गया क्षणतुम्हीं से होता स्वरित मैं सृष्टि स्वन हूँ !मैं तुम्हारी दिव्यता का सूक्ष्म कण हूँ !महाकाशों में निनादित आदि स्वर का .दश दिशाओं में प्रवर्तित गूँजता रवहो प्रकंपित, दिशा के आवर्तनों...
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  January 24, 2015, 3:28 am
*बड़े दिनों बाद  पंथी आकाश का ,उत्तर की  देहरी-घर  आ गया   रात लग गई  समेटने में सियाह पट  दिनमान ठाठ से गगन पे छा गया .*काँपते दिशा के हाथ-पाँव खुले और कोहरा उतार मुख धो लिये, बहुत दिनन बात अइसा लगन लगा जइस ठिठुरन ने दाँव सभी खो दिये!* धुले-धुले आंगन गमक गये ,सोंध सू...
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  January 16, 2015, 10:04 am
ओ कार्टूनिस्ट !नमन करती हूँ तुम्हारी  दृष्टि को !बड़े गहरे पैठ ,खींच लाती है विसंगतियाँ .सबको सिंगट्टा दिखाती चिढ़ाती ,टेढ़े होंठों मुस्कराते  ,भीतरी तहें तक उघाड़ जाती है !*दुनिया एक व्यंजना है तुम्हारे लिए  . जहाँ बेतुकापन छिपने के बजाय , उभर आता है   कुछ श्व...
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  January 9, 2015, 11:07 am
* गौरा बिदा हुई चललीं  , धूम भइ तिहुँ खण्डा ,नैन भरे माई दिहिले, सुहाग भरि भरि हंडा.फैली खबर, सब हरषीं ,मेहरियाँ दौरि  परलीं,गौरा के चरनन लगि-लगि ,सुहाग पावन लगलीं !* खेतन ते भागीं, पनघट से भगि आईं, घाटन से दौरी  धुबिनियाँ,गोरस बहिल, ऐसी लुढ़की मटकिया तौ हूँ न रुकली बवरिय...
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  November 29, 2014, 5:32 am
* तोरा दुलहा जगत से निराला उमा, मैना कहिलीं,कुल ना कुटुम्व, मैया बाबा, हम अब लौं चुप रहिलीं !कोहबर्# से निकसे न दुलहा ,बरस कुल बीत गइला !सिगरी बरात टिक रहिली  बियाही जब से गौरा.*रीत व्योहार न जाने बसन तन ना पहिरे ,अद्भुत उमा सारे लच्छन, तू कइस पतियानी रे !भूत औ परेत बराती, सब हि...
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  November 13, 2014, 8:21 am
 *ओ, सुरभि -चन्दना,उल्लास की लहर सीआ गई तू !*मेरेमौन पड़े प्रहरों को मुखर करने ,दूध के टूटे दाँतों के अंतराल से अनायास झरतीहँसी की उजास बिखेरती ,सुरभि-चन्दना ,                                                  ...
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  October 28, 2014, 9:25 am
(धन-तेरस  के शुभ-दिवस हेतु  मेरी मित्र  'शार्दुला नोगजा 'ने यह सुन्दर 'धनवंतरि-वंदना 'प्रेषित की है ,ये कल्याणकारी भावनाएँ मेरे सभी मित्र एवं परिजन  आत्मस्थ कर सकें , इसलिए यहाँ  प्रस्तुत कर रही हूँ.मैं (प्रतिभा) आभारी हूँ  प्रिय शार्दुला की,   इन मंगलमय-वचनों  क...
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  October 21, 2014, 2:30 am
तू आ गई ,दूध के विरल दाँतों के अंतराल से अनायास झरती हँसी की उजास बिखेरती,मेरे   मौन  प्रहरों को मुखर करने, उल्लास की लहर सीआ गई तू,*देख रही थी चुपचाप खिड़की से बाहर - तप्त ,रिक्त आकाश को.उत्सुक चितवन ले,  सरस फुहार -सी झरने,शीतल पुरवा के झोंके सीछा गई तू ! *चुप पड़े ...
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  October 14, 2014, 11:07 am
*मेरे बच्चों, दीवाली का पहला दीप वहाँ धर आना...*जिस घर से कोई निकला हो अपने सिर पर कफ़न बाँधकर ,सुख-सुविधा, घर-द्वार छोड़ कर मातृभूमि के आवाहन पर .बच्चों, उसके घर जा कर तुम उन सबकी भी सुध ले लेना खील-बताशे लाने वाला कोई है क्या उनके भी घर.अपने साथ उन्हें भी थोड़ी ,इस दिन तो खुशिय...
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  October 13, 2014, 9:07 am
गूँजी आकुल टेरशोण की , सुन  हियरा काँपे चौंके सारे अपन-पराये  भागे   घबरा के ,माँ की ममता लहर-लहर कर परसे अँसुअन साथ मैखल पितु का हिरदा दरके कइसन धी रुकि जाय!2जुहिला रोवे ,सोनवा पुकारे तोरे पड़ें हम पाँय !रेवा तो  सन्यास लिये, प्रण है - ना करूँ विवाह  पंडित-पुरोहित...
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  October 4, 2014, 6:37 am
* पढ़ सके न खुद,  किताब मांग रहे है,खुद रख न पाए, वे हिसाब मांग रहे है।जो कर सके न साठ साल में कोई विकास देश का, वे सौ दिनों में जवाब मांग रहे है।आज गधे गुलाब मांग रहे है, चोर लुटेरे इन्साफ मांग रहे है।जो लूटते रहे देश को 60 सालों तक,सुना है आज वो 1OO दिन का हिसाब मांग रहे है?जब 3 मही...
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  September 30, 2014, 9:22 am

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  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
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