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Blog: Nayekavi

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(1-7 और 7-1) आरोही अवरोहीजोतुमआँखों सेकह  देतेतो मान जाते।हम भी जुबाँ पेकोई बात ना लाते।अब ना हो सकेगीवापस बात वो।कह जाती हैखामोशियाँना सकेजुबाँजो।*****जोबातनयनकह देतेचुप रह के।वहीं रहे लाखशब्द बौने बन के।जो कभी हुए नहींआँखों से घायल।नैनों की भाषाक्या  समझेवे  रूखे... Read more
clicks 2 View   Vote 0 Like   2:12pm 21 Jun 2020 #वर्ण पिरामिड
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देखिए इंसान की कैसे शराफत मर गई,लंतरानी रह गई लेकिन सदाकत मर गई,बेनियाज़ी आदमी की बढ़ गई है इस कदर,पूर्वजों ने जो कमाई सब वो शुहरत मर गई।आदमी के पेट की चित्कार हैं ये रोटियाँ,ईश का सबसे बड़ा उपहार हैं ये रोटियाँ।मुफलिसों के खून से भरतें जो ज़ाहिल पेट को,ऐसे लोगों के लिये व्या... Read more
clicks 28 View   Vote 0 Like   2:56am 13 Jun 2020 #शब्द विशेष मुक्तक
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मूर्खों की पीठों पर चढ़कर, नित चालाक बनाते काम।मूर्ख जुगाली करते रहते, मग्न भजे अपने ही राम।सिर धुन धुन फिर भाग्य कोसते, दूजों को वे दे कर दोष।नाम कमा लेते प्रवीण जो, रह जाते हैं मूर्ख अनाम।।मूर्खों के वोटों पर करते, नेता सत्ता-सुख का पान।इनके ही चंदे पर चलते, ढोंगी बाबा क... Read more
clicks 5 View   Vote 0 Like   2:28am 9 Jun 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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बह्र:- 2122  2122  2122  212इश्क़ के चक्कर में ये कैसी फ़ज़ीहत हो गयीक्या किया इज़हार बस रुस्वा मुहब्बत हो गयी।उनके दिल में भी है चाहत, सोच हम थे खुश फ़हम,पर बढ़े आगे, लगा शायद हिमाकत हो गयी।खोल के दिल रख दिया जब हमने उनके सामने,उनकी नज़रों में हमारी ये बगावत हो गयी।देखिये जिस ओर नकली ही... Read more
clicks 22 View   Vote 0 Like   4:12am 3 Jun 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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(तर्ज--न जाओ सैंया)12122 अरकान पर आधारित।मैं भर के आहें तकूँ ये राहें,सजन तु आजा सता न इतना, सता न इतना।सिंगार सोलह मैं कर के बैठी,बिना तिहारे क्या काम इनका, क्या काम इनका।।तु ही है मंदिर तु मेरी मूरत,बसी है मन में ये एक सूरत,सजा के पूजा का थाल बैठी,मैं घर की चौखट पे, दर्श अब दे, द... Read more
clicks 17 View   Vote 0 Like   2:53pm 18 May 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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(फारूक अब्दुल्ला के जिन्ना-प्रेम पर व्यंग)भारत का अबदुल्ला, जिन्ना पे पराये आज,हुआ है दिवाना कैसा, ध्यान आप दीजिए।खून का असर है या, गहरी सियासी चाल,देशवासी हलके में, इसे नहीं लीजिए।लगता है जिन्ना का ही, जिन्न इसमें है घुसा,इसका उपाय अब, सब मिल कीजिए।जिन्ना वहाँ परेशान, ये... Read more
clicks 12 View   Vote 0 Like   7:46am 13 May 2020 #मनहरण घनाक्षरी
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देवों की भाषा से जन्मी हिन्दी।हिन्दुस्तां के माथे की है बिन्दी।।दोहों, छंदों, चौपाई की माता।मीरा, सूरा के गीतों की दाता।।हिंदुस्तानी साँसों में है छाई।पाटे सारे भेदों की ये खाई।।अंग्रेजी में सारे ऐसे पैठे।हिन्दी से नाता ही तोड़े बैठे।।भावों को भाषा देती लोनाई।भाष... Read more
clicks 38 View   Vote 0 Like   3:05am 10 May 2020 #शोभावती छंद
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2122/1122   1122   1122   112/22दिल में दरिया-ए- मुहब्बत को उफनता देखो,इसका आँखों की हदें तोड़ उमड़ना देखो।इश्क़ का ऐसा भी होता है असर था न पता,किस कदर बन गये हम सब के तमाशा देखो।जन्नत-ए-दुनिया थी जो पहले कभी,दौर-ए-दहशत ने उसे कैसा उजाड़ा देखो।ले के जायेगी कहाँ होड़ तरक्की की हमें,कितन... Read more
clicks 23 View   Vote 0 Like   4:15am 5 May 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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बह्र:- 2122  1212  22दिल में कैसी ये बे-क़रारी है,शायद_उन की ही इंतिज़ारी है।इश्क़ में जो मज़ा वो और कहाँ,इस नशे की अजब खुमारी है।आज भर पेट, कल तो फिर फाका,हमने वो ज़िंदगी गुज़ारी है।दौर आतंक, लूट का ऐसा,साँस लेना भी इसमें भारी है।जिससे मतलब उसी से बस नाता,आज की ये ही होशियारी है।अब तो ... Read more
clicks 16 View   Vote 0 Like   4:03am 5 May 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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बहर 1222 1222 1222 1222नया आया है संवत्सर, करें स्वागत सभी मिल के;नये सपने नये अवसर, नया ये वर्ष लाया है।करें सम्मान इसका हम, नई आशा बसा मन में;नई उम्मीद ले कर के, नया ये साल आया है।लगी संवत् सत्ततर की, चलाया उसको नृप विक्रम;सुहाना शुक्ल पखवाड़ा, महीना चैत्र तिथि एकम;मिलाएँ हाथ सब से ही, ... Read more
clicks 38 View   Vote 0 Like   3:34am 25 Mar 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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दोस्तो दिल का सदर घर का सदर होने को है,बा-बहर जो थी ग़ज़ल वह बे-बहर होने को है,हम मुहब्बत के असर में खूब पागल थे रहे,जिंदगी की असलियत का अब असर होने को है।(2122×3  212)*********उल्टे सीधे शब्द जोड़ कर, कुछ का कुछ लिख लेता हूँ,अंधों में काना राजा हूँ, मन मर्जी का नेता हूँ,व्हाट्सेप के ग्रूपो... Read more
clicks 31 View   Vote 0 Like   6:35am 12 Mar 2020 #हास्य व्यंग्य मुक्तक
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शक्ति कलम की मत कम आँको, तख्त पलट ये देती है,क्रांति-ज्वाल इसकी समाज को, अपने में भर लेती है,मात्र खिलौना कलम न समझें, स्याही को छिटकाने का,लिखी इबारत इसकी मन में, नाव भाव की खेती है।(ताटंक छंद)*********कलम सुनाओ लिख कर ऐसा, और और सब लोग कहें,बार बार पढ़ कर के जिसको, भाव गंग में सभी ब... Read more
clicks 30 View   Vote 0 Like   6:30am 12 Mar 2020 #साहित्य भाषा मुक्तक
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(करवाचौथ)त्योहार करवाचौथ का नारी का है प्यारा बड़ा,इक चाँद दूजे चाँद को है देखने छत पे खड़ा,लम्बी उमर इक चाँद माँगे वास्ते उस चाँद के,जो चाँद उसकी जिंदगी के आसमाँ में है जड़ा।(2212*4)*********(होली)हर तरु में छाया बसन्त ज्यों, जीवन में नित रहे बहार,होली के रंगों की जैसे,  वैभव की बरसे ... Read more
clicks 33 View   Vote 0 Like   6:25am 12 Mar 2020 #समसामयिक मुक्तक
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आओ करें प्रण और अब आतंक को सहना नहीं,अब मौन ज्यादा और हम सब को कभी रहना नहीं,आतंक में डर डर के जीना भी भला क्या ज़िंदगी,अब कर दिखाना कुछ हमें बस सिर्फ कुछ कहना नहीं।(2212×4)*********किस अभागी शाख का लो एक पत्ता झर गया फिर,आसमां से एक तारा टूट कर के है गिरा फिर,सरहदों के सैनिकों के खून क... Read more
clicks 32 View   Vote 0 Like   6:16am 12 Mar 2020 #शब्द विशेष मुक्तक
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नणँदल नखराँली, नणदोई म्हारो बोळो छेड़ै है,बस में राखो री।।टेर।।सोलह सिंगाराँ रो रसियो, यो मारूड़ो थारो है,बणी ठणी रह घणी धणी नै, रोज रिझाओ री,नणँदल नखराँली।।काजू दाखाँ अखरोटां रो, नणदोई शौकीन घणो,भर भर मुट्ठा मुंडा में दे, खूब खिलाओ री,नणँदल नखराँली।।नारैलाँ री चटणी रो, ... Read more
clicks 28 View   Vote 0 Like   10:57am 10 Mar 2020 #राजस्थानी गीत
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फागुन का मास।रसिकों की आस।।बासंती वास।लगती है खास।।होली का रंग।बाजै मृदु चंग।।घुटती है भंग।यारों का संग।।त्यज मन का मैल।टोली के गैल।।होली लो खेल।ये सुख की बेल।।पावन त्योहार।रंगों की धार।।सुख की बौछार।दे खुशी अपार।।=============निधि छंद विधान:-यह नौ मात्रिक चार चरणों का ... Read more
clicks 31 View   Vote 0 Like   12:04pm 9 Mar 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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होली के सब पे चढ़े, मधुर सुहाने रंग।पिचकारी चलती कहीं, बाजे कहीं मृदंग।।दहके झूम पलाश सब, रतनारे हो आज।मानो खेलन रंग को, आया है ऋतुराज।।होली के रस की बही, सरस धरा पे धार।ऊँच नीच सब भूल कर, करें परस्पर प्यार।।फागुन की सब पे चढ़ी, मस्ती अपरम्पार।बाल वृद्ध सब झूम के, रस की छोड़े ... Read more
clicks 59 View   Vote 0 Like   11:59am 9 Mar 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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सभी हम दीन।निहायत हीन।।हुए असहाय।नहीं कुछ भाय।।गरीब अमीर।नदी द्वय तीर।।न आपस प्रीत।यही जग रीत।।नहीं सरकार।रही भरतार।।अतीव हताश।दिखे न प्रकाश।।झुकाय निगाह।भरें बस आह।।सहें सब मौन।सुने वह कौन।।सभी दिलदार।हरें कुछ भार।।कृपा कर आज।दिला कछु काज।।मिला कर हाथ।चले... Read more
clicks 83 View   Vote 0 Like   1:30pm 7 Mar 2020 #शुभमाल छंद
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चले चलो पथिक।बिना थके रथिक।।थमे नहीं चरण।भले हुवे मरण।।सुहावना सफर।लुभावनी डगर।।बढ़ा मिलाप चल।सदैव हो अटल।।रहो सदा सजग।उठा विचार पग।।तुझे लगे न डर।रहो न मौन धर।।प्रसस्त है गगन।उड़ो महान बन।।समृद्ध हो वतन।रखो यही लगन।।=============लक्षण छंद:-"जभाग"वर्ण धर।सु'शारदी'मुखर।।"... Read more
clicks 33 View   Vote 0 Like   1:27pm 7 Mar 2020 #शारदी छंद
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2*15जीभ दिखा कर यारों को ललचाना वो भी क्या दिन थे,उनसे फिर मन की बातें मनवाना वो भी क्या दिन थे।साथ खेलना बात बात में झगड़ा भी होता रहता,पल भर कुट्टी फिर यारी हो जाना वो भी क्या दिन थे।डींग हाँकने और खेलने में जो माहिर वो मुखिया,ऊँच नीच का भेद न आड़े आना वो भी क्या दिन थे।नहीं क... Read more
clicks 51 View   Vote 0 Like   10:59am 4 Mar 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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बह्र:- 2122   2122   2122   212लग रहा है यार मेरा हमसफ़र होने को है,सद्र जो दिल का था अब तक सद्र-ए-घर होने को है।उनके आने से सँवर जाएगा उजड़ा आशियाँ,घर बदर जो हो रहा था घर बसर होने को है।जो मुहब्बत थी खफ़ा उसने करम दिल पे किया,ऐसा लगता है कि किस्सा मुख़्तसर होने को है।रोज गाएँगे तरा... Read more
clicks 36 View   Vote 0 Like   6:25am 4 Mar 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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221   2121   1221   212पाएँ वफ़ा के बदले जफाएँ तो क्या करें,हर बार उनसे चोट ही खाएँ तो क्या करें।हम ख्वाब भी न दिल में सजाएँ तो क्या करें,उम्मीद जीने की न जगाएँ तो क्या करें।बन जाते उनके जख्म की मरहम, कोई दवा,हर जख़्म-ओ-दर्द जब वे छिपाएँ तो क्या करें।महफ़िल में अज़नबी से वे जब आय... Read more
clicks 35 View   Vote 0 Like   6:13am 4 Mar 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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बह्र: 1212 1212, 1212 1212ये नीति धार के रहो, बुरा न मानो होली है,कठोर घूँट पी हँसो, बुरा न मानो होली है।मिटा के भेदभाव सब, सभी से ताल को मिला,थिरक थिरक के नाच लो, बुरा न मानो होली है।मुसीबतों की आँधियाँ, झझोड़ के तुम्हें रखे,पहाड़ से अडिग बनो, बुरा न मानो होली है।विचार जातपांत का, रिवाज और ... Read more
clicks 32 View   Vote 0 Like   5:57am 4 Mar 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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2*9 (मात्रिक बहर)(पदांत 'गया', समांत 'ओ'स्वर)जिम्मेदारी में बढ़ी उम्र की,बचपन वो सुहाना गुम हो गया।चुगते चुगते अनुभव के दाने,अल्हड़पन मेरा कहीं खो गया।।तब कुछ चिंता थी न कमाने की,और फिक्र ही थी न गमाने की।अब कम साधन औ'अधिक खर्च का,हौवा ये मन का चैन धो गया।।अब तो कुछ भी करने से पह... Read more
clicks 86 View   Vote 0 Like   4:07am 24 Feb 2020 #मात्रिक बहर आधारित
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बहर:-  2122   2122   2122   212(पदांत का लोप, समांत 'अर')जिंदगी जीने की राहें मुश्किलों से हैं भरी,चिलचिलाती धूप जैसा जिंदगी का है सफर।।हैं घने पेड़ों के जैसे इस सफर में रिश्ते सब,छाँव इनकी जो मिले तो हो सहज जाती डगर।।पेड़ की छाया में जैसे ठण्ड राही को मिले,छाँव में रिश्तों के ... Read more
clicks 40 View   Vote 0 Like   3:59am 24 Feb 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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