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Blog: 'दि वेस्टर्न विंड' (pachhua pawan)

Blogger: pawan kumar mishra
                                  नोटबंदी  को लेकर रिज़र्व बैंक की रिपोर्ट आने के बाद जिस तरह का देश में माहौल बनाया जा रहा है वह विघटनकारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह के कड़े और साहसिक फैसले लिए उससे पारम्परिक राजनीति बुरी तरह तिलमिलाई हुयी ... Read more
clicks 21 View   Vote 0 Like   9:11am 8 Nov 2019 #नोटबंदी
Blogger: pawan kumar mishra
हम बचपन में जो कुछ पढ़ते सुनते हैं उसका असर पूरी उम्र तक बना रहता है. इस दुनिया को वही व्यक्ति बेहतर बना सकता है जिसके अंदर बचपने का भाव बना हुआ है. वाल्ट डिज्नी के बनाए कार्टून चित्र से लेकर हैरी पॉटर की लोकप्रियता केवल बच्चों तक ही सीमित नही है बल्कि इसे बड़े भी बढ़ चढ़ कर दे... Read more
clicks 66 View   Vote 0 Like   5:56pm 2 Jan 2019 #मेरा भाई नेवला
Blogger: pawan kumar mishra
नरेंद्र मोदी ने लोमड़ी का गुण अपनाना चाहा जिसका परिणाम उन्हें मिल गया है. जब शेर अपनी चाल और खाल बदल देता है तो उसका मुंह कुत्ते भी चाटने लगते हैं. भारत की जनता बहुरूपियों से परशान थी इसलिए उसे ऐसे नेता की तलाश थी जो जैसा दीखता है वैसा ही होने में कोई फर्क नही रखता है पर मोद... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   5:33pm 11 Dec 2018 #election december 2018
Blogger: pawan kumar mishra
तुम्हे छोड़ कर जाऊं कैसे ?बंधन यदि यम का यह होता तो भी उसे तोड़ मैं देता,अनुबंधन वचनों के होते पल भर नही निर्वहन करता ।किन्तु नेह के कच्चे धागेउसे तोड़ कर जाऊं कैसे,मेरे एकमात्र अधिकारी, तुम्हे छोड़ कर जाऊं कैसे?मन पत्थर है पर विह्वल है एक तुम्हारी सुधियों से,सिद्ध और समृद्ध ... Read more
clicks 99 View   Vote 0 Like   5:05am 22 Nov 2018 #हर सिंगार
Blogger: pawan kumar mishra
तुम्हारी ज़ुल्फ़ से गिरती मेरे कंधे भिगोती है,बिना बादल बिना मौसम के ये बरसात कैसी है।सियाही ख़त्म होती है मगर पन्ने नही भरते,तुम्हे पाकर तुम्हे खोना कहानी बस ज़रा सी है।उधर होंटों पे पाबन्दी इधर अल्फाज़ रूठे से ,हमारे बीच खामोशी की इक दीवार उठती है ।बना कर बाँध क्या करते न... Read more
clicks 63 View   Vote 0 Like   8:56am 14 Nov 2018 #बारिश
Blogger: pawan kumar mishra
The tradition of reconsidering and recasting characters from Indian epics in(to) contemporary genric forms, and considering contemporary problems through them is hardly a new phenomenon. Not only do Indian epics form the source material for a wide range of texts in premodern India, but literature and other media during the pre- and post-Independence periods have also relied on these characters to grapple with and express contemporary questions.  Dr. Pawan Vijay’s novel is located within this pre-existing tradition. Taking a sympathetic view towards Mahābhārata characters generally portrayed as a darker grey than the others (there is hardly any black or white in the Mahābhārata) ha... Read more
clicks 170 View   Vote 0 Like   9:36am 31 Jan 2018 #Tarinee
Blogger: pawan kumar mishra
व्याख्या और पुनर्व्याख्या की सुस्थापित भारतीय परम्परा में एक और प्रस्तुति हमारे हाथ में है। पाठ और प्रघटना की व्याख्या-पुनर्व्याख्या सहज मानवीय स्वभाव है, किन्तु अपने सर्वाधिक सुव्यवस्थित एवं सहज स्वीकार्य रूप में इसे भारतीय परम्परा में ही देखा जा सकता है। भारती... Read more
clicks 183 View   Vote 0 Like   5:13am 5 Jan 2018 #
Blogger: pawan kumar mishra
'बोलो गंगापुत्र!'डॉ पवन विजय‘अंत में धर्म की विजय होती है।’, ऐसा इसलिए कहा जाता है ताकि अन्तिम परिणाम को न्यायोचित ठहराया जा सके। वस्तुत: राजनीति में ‘विजय ही धर्म’ है। राजकुल में सत्ता ही सत्य, धर्म और नैतिकता है। जब हम इसका अवलोकन, महाभारत के सन्दर्भ में देखते हैं, तो स... Read more
clicks 305 View   Vote 0 Like   3:54pm 18 Dec 2017 #
Blogger: pawan kumar mishra
                सामान्यतः हम जिस परिवेश में रहते हैं उसी के हिसाब से हमारे तौर तरीके विकसित हो जाते हैं जिसके अनुसार  हम ताउम्र व्यवहार करते हैं या सोचते हैं।  मनुष्य की आदतें उसके सीखने और सामंजस्य करने पर आधारित होती हैं।  जो एक बार सीख गया या जीवन में जहा... Read more
clicks 194 View   Vote 0 Like   7:02am 1 Sep 2017 #किन्नर
Blogger: pawan kumar mishra
मैं पत्थर हूँ न देखता हूँ न सुनता हूँ न ही कोई संवेदना महसूस करता हूँ किसी के दुःख निवारण  की बात तो दूर मैं इतना असहाय हूँ कि पड़ा हुआ हूँ सदियों से एक ही  जगह बारहों मौसम सोचो मुझे पूजने वालों अगर मैं कहने सुनने समझने और  करने वाला होता तो पत्थर  ... Read more
clicks 183 View   Vote 0 Like   4:16pm 13 Aug 2017 #
Blogger: pawan kumar mishra
जो रचे थे स्वप्न सारे चित्र उनको तोड़ आया।देह केवल शेष है मैं प्राण नगरी छोड़ आया।उम्र  भर  की वेदना  श्वांसों  में  हैबांसुरी अपनी कथा किससे कहेगीमोर  पंखों  ने  समेटा  चन्द्रमा  कोवृंदावन  में राधिका  पागल फिरेगीपूर्णिमा को युग युगांतर अमावस से जोड़ ... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   1:07am 3 Jul 2017 #प्राण
Blogger: pawan kumar mishra
आदमी लेथन फैलाने से बाज नहीं आता।  अगर आ गया तो उसकी कोटि बदल जाती है।  चाहे धरतीलोक पर रहे या चंद्र लोक पर या कल्पनालोक किसी भी लोक में रहे अपनी खुराफात से बराबर सिद्ध किये  रहता है कि वो आदमी ही है।  हमारे मास्साब बाबू लालमणि सिंह अक्सर कहते थे कि गलती कर सुधरने व... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   10:03am 1 Jul 2017 #
Blogger: pawan kumar mishra
ख्वाब देखने की जिद थी लेकिन आँखों में नींद नहीउन्ही  सवालों पर दिल  हारे  उत्तर  की उम्मीद नही ।मुझको भी तो इश्क हुआ था पर कैसे साबित कर दूँचिट्ठी जो तुम तक भेजी थी उसकी कोई रसीद नही।ये रानाई  जलसे  महफ़िल  मंगल  ग्रह की बातें सबचाँद  फुलाकर  मुंह  बैठा  ... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   12:45am 1 Jul 2017 #
Blogger: pawan kumar mishra
पूरब में  घुमड़ते बादल गहराते जा रहे थे। गंगा का कछार अभी खत्म नही हुआ था कि हल्की हल्की बूंदे तेज बहती हवाओं के साथ मेरे चेहरे पर पड़ने लगीं। बाइक की रफ़्तार तेज थी। तुम्हारे काले बाल खुलकर हवा में लहराने लगे। एक्सीलेटर पर दबाव बढ़ाने के अनुपात में ही मेरी कमर पर तुम्ह... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   5:47pm 28 Jun 2017 #बाइक
Blogger: pawan kumar mishra
ये कैसी दुनिया होती जा रही है? विकास, प्रगति, बेहतरी आदि आदि का कौन सा पैमाना बन रहा मेरी समझ में क्यों नही आता।  हर तरफ आशंका और भय  का माहौल है।  टीवी पर ऐड, क्राइम पेट्रोल, समाचार डराते हैं।  ऐड कहता है आपकी खाल अच्छी नही,आपकी चाल अच्छी नही,आपके बाल अच्छे नहीहैं।  ... Read more
clicks 121 View   Vote 0 Like   5:00pm 24 May 2017 #
Blogger: pawan kumar mishra
दिल्लीमेट्रोरेलकारपोरेशनद्वाराबढाएगयेकिराएकीदरनेयहसुनिश्चितकरदियाहैकिइसदेशमेंनीतिनिर्माणऔरक्रियान्वयनमेंकोईसामंजस्यनहीहैअथवाकोईफ्रांसकीरानीजैसाशख्सनिर्णयलेरहाहैऔरकोईहिटलरजैसाउसेकार्यान्वितकररहाहै।दिल्लीमेट्रोपूरीतरहसेराजधानीकीलाइफलाइ... Read more
clicks 170 View   Vote 0 Like   2:43pm 11 May 2017 #Fare Hike of Delhi Metro
Blogger: pawan kumar mishra
जम्मूकश्मीरकीमूलसमस्याऔरउसकानिवारणजम्मू कश्मीर की समस्या कहने से ऐसा बोध होता है कि यह सम्पूर्ण कश्मीर की समस्या है जबकि यदि हम कश्मीर के तीनों भागों को देखें तो न तो जम्मू में किसी किसिम की अशांति है और न ही लद्दाख में।  कश्मीर में अशांति है लेकिन वह भी एक सीमित स... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   5:31am 7 May 2017 #
Blogger: pawan kumar mishra
जम्मूकश्मीरकीमूलसमस्याऔरउसकानिवारणजम्मू कश्मीर की समस्या कहने से ऐसा बोध होता है कि यह सम्पूर्ण कश्मीर की समस्या है जबकि यदि हम कश्मीर के तीनों भागों को देखें तो न तो जम्मू में किसी किसिम की अशांति है और न ही लद्दाख में।  कश्मीर में अशांति है लेकिन वह भी एक सीमित स... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   5:31am 7 May 2017 #
Blogger: pawan kumar mishra
फिर शेरों की बलि दी गयी दुमकटे सियारों के आगे। फिर से जुगनू थूक रहा है सूरज के माथे पे आके। घात लगाकर वार किया है छुपे हुए मक्कारों ने। हाय कलेजा चीर दिया पापी बर्बर हत्यारों ने। कितने ज्वान परोसोगे तुम पाकिस्तानी श्वानों को। कितने दिन तक फूकोंगे बस निंदा के ... Read more
clicks 188 View   Vote 0 Like   3:30pm 3 May 2017 #
Blogger: pawan kumar mishra
पत्रकारिता के संदर्भ में दो शब्द अक्सर सुनने को मिलते हैं राष्ट्रीय पत्रकार और क्षेत्रीय पत्रकार, राष्ट्रीय समाचार पत्र और क्षेत्रीय समाचार पत्र, नेशनल चैनल और रीजनल चैनल।   सवाल यह उठता है कि राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दोनों के मापदंड क्या हैं ?  एक कच्चा पक्का जवा... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   1:06pm 29 Apr 2017 #
Blogger: pawan kumar mishra
मैं धर्म को जीने के तरीके के रूप में देखता हूँ। आप जितने सरल तरीके से हिंदुत्व को समझना चाहते हैं उतने सरल रूप में समझ सकते हैं। परहित सरिस धरम नहि भाई। परपीड़ा सम नहि अधमाई।  आपको जटिल पांडित्य में जाने की भी छूट है पर सनद रहे पंडित जी पिंडदान  तक पीछा नहीं छोड़ेंगे। ... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   8:27am 9 Apr 2017 #
Blogger: pawan kumar mishra
मैं धर्म को जीने के तरीके के रूप में देखता हूँ। आप जितने सरल तरीके से हिंदुत्व को समझना चाहते हैं उतने सरल रूप में समझ सकते हैं। परहित सरिस धरम नहि भाई। परपीड़ा सम नहि अधमाई।  आपको जटिल पांडित्य में जाने की भी छूट है पर सनद रहे पंडित जी पिंडदान  तक पीछा नहीं छोड़ेंगे। ... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   8:27am 9 Apr 2017 #
Blogger: pawan kumar mishra
गंगा में मिलिहें डूब कर नहइहें...अम्मा से मिलिहें त खुलकर बतिअइहें...।गोआ की राज्यपाल आदरणीय मृदुला सिन्हा जी मात्र राजनीतिक ही नही उनका मन मस्तिष्क में देसी बोली बानी  से ओत प्रोत है। उनके अनुसार सच में हिन्दी हमारी अम्मा और गंगा की श्रेणी में है। हिन्दी भले ही राष्ट... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   2:20am 2 Apr 2017 #
Blogger: pawan kumar mishra
सामान्यत : "इतिहास "शब्द से राजनीतिक व सांस्कृतिक  इतिहास का ही बोध होता है ,किन्तु वास्तविकता यह है कि सृष्टि की कोई भी वस्तु ऐसी नहीं है जिसका इतिहास से सम्बन्ध न हो । अत : साहित्य भी इतिहास से असम्बद्ध नहीं है ।साहित्य के इतिहास में हम प्राकृतिक  घटनाओं व मानवीय क... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   8:09am 31 Mar 2017 #
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