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नई क़लम - उभरते हस्ताक्षर : View Blog Posts
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नई क़लम - उभरते हस्ताक्षर

बहुत दिन हुए.. कोई हलचल नहीं हुयी यहाँ.. वक़्त भी न हमेशा इंसान को मशरूफ रखता है.. खैर सब छोड़ें -- किताबें जो की इंसान की सबसे प्यारी दोस्त होती हैं-- आज इसी कड़ी में ज़ारा अकरम खानसाहिबा का ये आलेख आपके रूबरू कर रहा हूँ.. आज अपने पसंदीदा सब्जेक्ट किताबों के बारे में कुछ लिखने का म...
नई क़लम - उभरते हस्ताक्षर...
Tag :
  June 28, 2013, 6:28 pm
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नई क़लम - उभरते हस्ताक्षर...
Tag :
  February 7, 2013, 1:28 am
 हम  नहीं जानतें जो हम  करने की सोच रहे हैं,उसमे हमारा  लोग कितना साथ देंगे जब 31 दिसंबर 2012 को सम्पूर्ण विश्व के लोग अपने अपने नशे में चूर होंगे (नशे कई तरह के हो सकते हैं इस पहलू को आप मुझसे अच्छी तरह जानते हैं ) या आप यूँ समझ ले की सब अपने अपने तरीके से नए वर्ष की प्रभात बेला ...
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Tag :
  November 29, 2012, 1:17 am
आप सब को ईद की दिली मुबारकबाद ! साथ में ईदी के तौर पे पिछले दिनों लिखा हुआ आपके हाथों में सौंप रहा हूँ.इसी मोड़ पे लहराता हाथ छोड़ आया था हाथ क्या, यूं समझो ज़िन्दगी का साथ छोड़ आया था शकले आसुओं में मुहब्बत की विरासत दे गयी वरना कब का मैं वो शहर छोड़ आया था अहदे वफ़ा, रंगे मुहब्...
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Tag :
  August 20, 2012, 12:45 pm
माँ मेरी बहुत प्यारी है मुझे डांटती है, मुझे मारती है फिर मुझे खींच के सीने से लिपटा लेती है माँ मेरी बहुत प्यारी है चौका बासन भी करती  है घर का सारा काम वो करती है ग़म मेरे होते हैं ,और उठा वो लेती है माँ मेरी बहुत प्यारी है देर रात मैं खाने को कुछ कह दूं मेरे ऊपर चिल्लाती र...
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Tag :
  July 11, 2012, 12:21 pm
ज्यादातर इस मंच पे प्रेम कवितायेँ या ज़िन्दगी की नज्में प्रकाशित की गयी हैं.. आज  आपको सरिता गुप्ताके प्रकृति प्रेम से रूबरू करता हूँ - #सांझ के उस झुरमुट में,  मैं पाती हूँ अकेला अपने कोन सुमन न भौंरे  न कलरव है इन मीठी सुरों की वादी का मौन खड़े ये वृक्ष समूह छिपा सूर्य ज...
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Tag :प्रकृति
  April 11, 2012, 11:38 pm
वो रूह में मोती जुल्फों में हवा रखता है दरिया होके  समंदर की अदा रखता है दिल में रखके मोहब्बत की रौशनी क्यूँ  निगाहों में अदावत की ज़फ़ा रखता है क्यूँ नहीं रह पाता अजीज़ दिल के पास वक़्त बेरहम है एक फ़ासला रखता है हम आज समझे ग़रीबों की गुमनामियां जिसको देखो रईसों का पता र...
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Tag :
  March 4, 2012, 8:17 pm
 ऐ ... रूचिका तेरी वो बीमार हैं। नविता ने कुटिल मुस्कान बिखेरते हुएकहा। वो कौन... साफ-साफ क्यों नहीं बतलाती? अरे वही तेरी लख्ते जिगर,तेरी रोल माडॅल। उनकी बीमारी की खबर ने रूचिका को झकझोर दिया। अपनी बातपूरी करते हुए नवीता ने कहा कि कल शाम जब मैं बाजार से वापस आ रही थी तोवे अप...
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Tag :एम. अफसर खां सागर
  January 29, 2012, 11:47 am
      विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ, भागलपुर, बिहार के सोलहवें महाधिवेशन में युवा कवयित्री, साहित्यकार एवं चर्चित ब्लागर आकांक्षा यादव को मानद डाक्टरेट (विद्यावाचस्पति) की उपाधि से विभूषित किया गया। आकांक्षा यादव को मानद डाक्टरेट की इस उपाधि के लिए उनकी सुदीर्घ हिंद...
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Tag :आकांक्षा यादव
  January 22, 2012, 3:31 pm
एक बार फिर कौशल सा'ब का कलाम आपकी आँखों  में सरमाया करना चाहता हूँ क़ुबूल करें .. आपकी दुआओं का तलबगार रहूँगा..आधा छूटा हुआ जाम खुली हुई किताब रिन्दों का साथ फिर भी अकेला हूँ याद आती है वो याद जिनमें  मैं जवाँ हुआ          क्या कहूं? उस रात की बात मेरा हबीब मुझसे जुदा हुआ वो हस...
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Tag :कौशल किशोर
  January 12, 2012, 8:20 pm
वो कितनी प्यारी  प्यारी  थीकुछ खुशबू सौंधी  सौंधी थी कुछ हिना के जैसी सुन्दर थी कुछ गुलशन जैसी महकी थीकुछ समीर सी चंचल थीकुछ माखन सी तासीर भी थीवो कितनी प्यारी प्यारी थीएक दिल था भोला  भाला साजिसमे कितनी गहराई थीनैना थे बिलकुल हिरनी सेदुनिया की जिनमे परछाईं थीसीरत तो ...
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Tag :कौशल किशोर
  November 22, 2011, 11:26 pm
आज एक और कलम की इबारत आपके हाथों  में सौंप रहा हूँ. कौशल किशोर जो की एक इंजीनियरिंग कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं. उनकी लिखी एक नज़्म कुछ यूँ हैं - मत उठा मेरे प्यार पे ऊँगली ऐ शाहिद मत करो दूर दो रूंहों को अलग ऐ शाहिद हम भी अल्लाह के बन्दे हैं कुछ तो डर ऐ शाहिद कहीं ऐसा ...
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Tag :नज़्म - कौशल किशोर
  November 12, 2011, 10:01 pm
आज फिर  आपके सुपुर्द आलोक  उपाध्याय "नज़र" के शे'रों को कर रहा हूँ- टूटे इकबारगी,  बिखर रहे हैं आज तक ज़िन्दगी की क़ैद में मर रहे हैं आज तक वो बेबाक़ था, दिल को छलनी  कर गया हम दिल की सुराखें भर रहे हैं आजतक लोग उम्र काट देते है किसी एक के सहारेउसी के याद में दिन गुज़र रहे ...
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Tag :नज़र
  November 1, 2011, 12:21 am
इस पैरोडी का लुत्फ़ उठायें - मेरे जीने का सहारा फेसबुक मेरे मरने का सहारा फेसबुक सुबह हुई फेसबुक दोपहर हुई फेसबुक शाम आई फेसबुक रात होने को है फेसबुक बत्ती गुल, मोबाईल पे चलता है फेसबुक कोई नया बन्दा आया दुनिया में खबर देता है फेसबुक मरने की घड़ी है Status अपडेट करता है फेसबु...
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Tag :फेसबुक - Facebook
  September 18, 2011, 10:26 pm
अपने गुज़रे हुए कल को सोचते- सोचते ऐसी जगह पहुँच गया जहाँ एक नज़्म नमूदार हो गयी। आज वही नज़्म आपके हाथों में सोंप रहा हूँ. आपके प्यारकाइंतजाररहेगा - तंगहालीकी वोआइसक्रीमचन्दरुपयोंकेवोतरबूजकिसीगलीकेनुक्कड़कीवोचाट सुबह- सुबहपूड़ीऔरजलेबीकीतेरीफरमाइशमुझेआजभीयादहैक...
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  June 5, 2011, 10:55 am
कहते हैं नज़्म किसी भी वजह से लिखी जा सकती है कोई इसकी जगह मुक़र्रर नहीं, कोई वक़्त भी तय नहीं। उम्र में सबसे छोटी , इस मंच की कवियत्री और उनकी ये रचना जो उन्होंने सिटी बस में लिखी। आप सुधि पाठकों साथ साझा कर रहा हूँ। आपके प्यार का मुन्तजिर रहूँगा-न कोई अपना है न कोई पराया ह...
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  April 29, 2011, 10:59 pm
1983 के ऐतहासिक वर्ष के बाद 2011 वर्ष एक बार फिर खेल जगत में अपने देश का परचम लहरा कर साबित किया भारत श्रेष्ठ है। भारतीय किसी भी कम नहीं हैं। विश्व विजेता भारत ने एकशानदार पारी खेलकर हमारा ह्रदय गर्व से ऊंचा कर दिया है। इन सभी खिलाडियों के खेल की दाद देनी पड़ेगी क्रिकेट के खेल ...
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  April 5, 2011, 11:52 am
ज़िन्दगीऔरदेशकीचिंतासेओतप्रोतकुछपंक्तियाँलेकरआजहमारेबीचअशरफसाहबहै, जोकीपेशेसेएकजर्नलिस्टहैंआपउनकीपंक्तियोंपरअपनीगहरीनज़रडालेंऔरअपनेप्यारसेइनलायनोंकोनवाजें। आपकीप्रतिक्रियायोंकाहमेंइंतजाररहेगा- भूख लिखूंगा, प्यास लिखूंगाजीवन को संताप लिखूंगा !प...
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  February 16, 2011, 12:31 pm
अभी कल ही प्रेम दिवस बीता , और मुहब्बत की बात किसी ने छेड़ दी. उन चन्द लायनों को आपके साथ बाँटने जा रहा हूँ-राहो मे चलते कई मुसाफिर मिलते है और फिर मिल के जुदा तो हो जाते है लेकिन अपनी यादो का समां कुछ इस तरह से छोड़ जाते है .."मिल के बिछड़ जायेगे फिर मिलेंगे कबतुम न मिले तो तुम...
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  February 15, 2011, 10:25 pm
ये बड़े हर्ष का विषय है की साहित्य को अब आम आदमी भी समझने की कोशिश कर रहा है। पहले केवल हिंदी वाले (हिंदी वालों से मेरा मतलब हिंदी विधा से सम्बद्ध) ही साहित्य में रूचि लेते थे। आज एकअच्छा खासा वर्ग है जो की , इंजीनियरिंग और मेडिकल से वास्ता रखता है और हिंदी से बखूबी जुड़ा हु...
नई क़लम - उभरते हस्ताक्षर...
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  January 26, 2011, 10:08 pm
येकवितामेरेपिताकेलिएहैजिन्होंनेइसमहीनेकी 11 तारिखकोदुनियाछोड़दी!वोछोड़गएअपनीयादेंवोछोड़गएअपनीबातेंउनकाअहसासहैअबतोमेरेसाथक्योंरूठगएहैंआपआजइतनाकिमनानाभीअबनहींकमआएगाआसमानमेंताराबनकेक्यादेखरहेहैंआपआपकेबच्चेबुलातेहैंआपकोपापाआजाईयेएकबारकिहमएकबार...
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  December 31, 2010, 8:53 am
इसमंचकीकवियत्रीशिखावर्मा "परी"नेअपनाग़मसाझाकियाहमारेसाथ, वोग़ममैंअपनेपाठकोंकेसाथसाझाकररहाहूँ-"धूप सी जमी है मेरी साँसों में, कोई चाँद को बुलाये तो रात हों" मुझे नहीं मालूम था कि इतना मजबूर कर देगा मुझे मेरा जीवन कि अपने हाथों से अपने पिता कि चिता को आग दूँगी और अप...
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Tag :
  December 20, 2010, 6:23 pm
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