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Blog: नई क़लम - उभरते हस्ताक्षर

Blogger: नई क़लम- उभरते हस्ताक्षर
बहुत दिन हुए.. कोई हलचल नहीं हुयी यहाँ.. वक़्त भी न हमेशा इंसान को मशरूफ रखता है.. खैर सब छोड़ें -- किताबें जो की इंसान की सबसे प्यारी दोस्त होती हैं-- आज इसी कड़ी में ज़ारा अकरम खानसाहिबा का ये आलेख आपके रूबरू कर रहा हूँ.. आज अपने पसंदीदा सब्जेक्ट किताबों के बारे में कुछ लिखने का म... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   12:58pm 28 Jun 2013 #
Blogger: नई क़लम- उभरते हस्ताक्षर
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clicks 153 View   Vote 0 Like   7:58pm 6 Feb 2013 #
Blogger: नई क़लम- उभरते हस्ताक्षर
 हम  नहीं जानतें जो हम  करने की सोच रहे हैं,उसमे हमारा  लोग कितना साथ देंगे जब 31 दिसंबर 2012 को सम्पूर्ण विश्व के लोग अपने अपने नशे में चूर होंगे (नशे कई तरह के हो सकते हैं इस पहलू को आप मुझसे अच्छी तरह जानते हैं ) या आप यूँ समझ ले की सब अपने अपने तरीके से नए वर्ष की प्रभात बेला ... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   7:47pm 28 Nov 2012 #
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आप सब को ईद की दिली मुबारकबाद ! साथ में ईदी के तौर पे पिछले दिनों लिखा हुआ आपके हाथों में सौंप रहा हूँ.इसी मोड़ पे लहराता हाथ छोड़ आया था हाथ क्या, यूं समझो ज़िन्दगी का साथ छोड़ आया था शकले आसुओं में मुहब्बत की विरासत दे गयी वरना कब का मैं वो शहर छोड़ आया था अहदे वफ़ा, रंगे मुहब्... Read more
clicks 134 View   Vote 1 Like   7:15am 20 Aug 2012 #
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माँ मेरी बहुत प्यारी है मुझे डांटती है, मुझे मारती है फिर मुझे खींच के सीने से लिपटा लेती है माँ मेरी बहुत प्यारी है चौका बासन भी करती  है घर का सारा काम वो करती है ग़म मेरे होते हैं ,और उठा वो लेती है माँ मेरी बहुत प्यारी है देर रात मैं खाने को कुछ कह दूं मेरे ऊपर चिल्लाती र... Read more
clicks 170 View   Vote 0 Like   6:51am 11 Jul 2012 #
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ज्यादातर इस मंच पे प्रेम कवितायेँ या ज़िन्दगी की नज्में प्रकाशित की गयी हैं.. आज  आपको सरिता गुप्ताके प्रकृति प्रेम से रूबरू करता हूँ - #सांझ के उस झुरमुट में,  मैं पाती हूँ अकेला अपने कोन सुमन न भौंरे  न कलरव है इन मीठी सुरों की वादी का मौन खड़े ये वृक्ष समूह छिपा सूर्य ज... Read more
clicks 202 View   Vote 0 Like   6:08pm 11 Apr 2012 #प्रकृति
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वो रूह में मोती जुल्फों में हवा रखता है दरिया होके  समंदर की अदा रखता है दिल में रखके मोहब्बत की रौशनी क्यूँ  निगाहों में अदावत की ज़फ़ा रखता है क्यूँ नहीं रह पाता अजीज़ दिल के पास वक़्त बेरहम है एक फ़ासला रखता है हम आज समझे ग़रीबों की गुमनामियां जिसको देखो रईसों का पता र... Read more
clicks 179 View   Vote 0 Like   2:47pm 4 Mar 2012 #
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 ऐ ... रूचिका तेरी वो बीमार हैं। नविता ने कुटिल मुस्कान बिखेरते हुएकहा। वो कौन... साफ-साफ क्यों नहीं बतलाती? अरे वही तेरी लख्ते जिगर,तेरी रोल माडॅल। उनकी बीमारी की खबर ने रूचिका को झकझोर दिया। अपनी बातपूरी करते हुए नवीता ने कहा कि कल शाम जब मैं बाजार से वापस आ रही थी तोवे अप... Read more
clicks 202 View   Vote 0 Like   6:17am 29 Jan 2012 #एम. अफसर खां सागर
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      विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ, भागलपुर, बिहार के सोलहवें महाधिवेशन में युवा कवयित्री, साहित्यकार एवं चर्चित ब्लागर आकांक्षा यादव को मानद डाक्टरेट (विद्यावाचस्पति) की उपाधि से विभूषित किया गया। आकांक्षा यादव को मानद डाक्टरेट की इस उपाधि के लिए उनकी सुदीर्घ हिंद... Read more
clicks 160 View   Vote 0 Like   10:01am 22 Jan 2012 #आकांक्षा यादव
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एक बार फिर कौशल सा'ब का कलाम आपकी आँखों  में सरमाया करना चाहता हूँ क़ुबूल करें .. आपकी दुआओं का तलबगार रहूँगा..आधा छूटा हुआ जाम खुली हुई किताब रिन्दों का साथ फिर भी अकेला हूँ याद आती है वो याद जिनमें  मैं जवाँ हुआ          क्या कहूं? उस रात की बात मेरा हबीब मुझसे जुदा हुआ वो हस... Read more
clicks 187 View   Vote 0 Like   2:50pm 12 Jan 2012 #कौशल किशोर
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वो कितनी प्यारी  प्यारी  थीकुछ खुशबू सौंधी  सौंधी थी कुछ हिना के जैसी सुन्दर थी कुछ गुलशन जैसी महकी थीकुछ समीर सी चंचल थीकुछ माखन सी तासीर भी थीवो कितनी प्यारी प्यारी थीएक दिल था भोला  भाला साजिसमे कितनी गहराई थीनैना थे बिलकुल हिरनी सेदुनिया की जिनमे परछाईं थीसीरत तो ... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   5:56pm 22 Nov 2011 #कौशल किशोर
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आज एक और कलम की इबारत आपके हाथों  में सौंप रहा हूँ. कौशल किशोर जो की एक इंजीनियरिंग कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं. उनकी लिखी एक नज़्म कुछ यूँ हैं - मत उठा मेरे प्यार पे ऊँगली ऐ शाहिद मत करो दूर दो रूंहों को अलग ऐ शाहिद हम भी अल्लाह के बन्दे हैं कुछ तो डर ऐ शाहिद कहीं ऐसा ... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   4:31pm 12 Nov 2011 #नज़्म - कौशल किशोर
Blogger: नई क़लम- उभरते हस्ताक्षर
आज फिर  आपके सुपुर्द आलोक  उपाध्याय "नज़र" के शे'रों को कर रहा हूँ- टूटे इकबारगी,  बिखर रहे हैं आज तक ज़िन्दगी की क़ैद में मर रहे हैं आज तक वो बेबाक़ था, दिल को छलनी  कर गया हम दिल की सुराखें भर रहे हैं आजतक लोग उम्र काट देते है किसी एक के सहारेउसी के याद में दिन गुज़र रहे ... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   6:51pm 31 Oct 2011 #नज़र
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इस पैरोडी का लुत्फ़ उठायें - मेरे जीने का सहारा फेसबुक मेरे मरने का सहारा फेसबुक सुबह हुई फेसबुक दोपहर हुई फेसबुक शाम आई फेसबुक रात होने को है फेसबुक बत्ती गुल, मोबाईल पे चलता है फेसबुक कोई नया बन्दा आया दुनिया में खबर देता है फेसबुक मरने की घड़ी है Status अपडेट करता है फेसबु... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   4:56pm 18 Sep 2011 #फेसबुक - Facebook
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अपने गुज़रे हुए कल को सोचते- सोचते ऐसी जगह पहुँच गया जहाँ एक नज़्म नमूदार हो गयी। आज वही नज़्म आपके हाथों में सोंप रहा हूँ. आपके प्यारकाइंतजाररहेगा - तंगहालीकी वोआइसक्रीमचन्दरुपयोंकेवोतरबूजकिसीगलीकेनुक्कड़कीवोचाट सुबह- सुबहपूड़ीऔरजलेबीकीतेरीफरमाइशमुझेआजभीयादहैक... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   5:25am 5 Jun 2011 #
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कहते हैं नज़्म किसी भी वजह से लिखी जा सकती है कोई इसकी जगह मुक़र्रर नहीं, कोई वक़्त भी तय नहीं। उम्र में सबसे छोटी , इस मंच की कवियत्री और उनकी ये रचना जो उन्होंने सिटी बस में लिखी। आप सुधि पाठकों साथ साझा कर रहा हूँ। आपके प्यार का मुन्तजिर रहूँगा-न कोई अपना है न कोई पराया ह... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   5:29pm 29 Apr 2011 #
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1983 के ऐतहासिक वर्ष के बाद 2011 वर्ष एक बार फिर खेल जगत में अपने देश का परचम लहरा कर साबित किया भारत श्रेष्ठ है। भारतीय किसी भी कम नहीं हैं। विश्व विजेता भारत ने एकशानदार पारी खेलकर हमारा ह्रदय गर्व से ऊंचा कर दिया है। इन सभी खिलाडियों के खेल की दाद देनी पड़ेगी क्रिकेट के खेल ... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   6:22am 5 Apr 2011 #
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ज़िन्दगीऔरदेशकीचिंतासेओतप्रोतकुछपंक्तियाँलेकरआजहमारेबीचअशरफसाहबहै, जोकीपेशेसेएकजर्नलिस्टहैंआपउनकीपंक्तियोंपरअपनीगहरीनज़रडालेंऔरअपनेप्यारसेइनलायनोंकोनवाजें। आपकीप्रतिक्रियायोंकाहमेंइंतजाररहेगा- भूख लिखूंगा, प्यास लिखूंगाजीवन को संताप लिखूंगा !प... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   7:01am 16 Feb 2011 #
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अभी कल ही प्रेम दिवस बीता , और मुहब्बत की बात किसी ने छेड़ दी. उन चन्द लायनों को आपके साथ बाँटने जा रहा हूँ-राहो मे चलते कई मुसाफिर मिलते है और फिर मिल के जुदा तो हो जाते है लेकिन अपनी यादो का समां कुछ इस तरह से छोड़ जाते है .."मिल के बिछड़ जायेगे फिर मिलेंगे कबतुम न मिले तो तुम... Read more
clicks 170 View   Vote 0 Like   4:55pm 15 Feb 2011 #
Blogger: नई क़लम- उभरते हस्ताक्षर
ये बड़े हर्ष का विषय है की साहित्य को अब आम आदमी भी समझने की कोशिश कर रहा है। पहले केवल हिंदी वाले (हिंदी वालों से मेरा मतलब हिंदी विधा से सम्बद्ध) ही साहित्य में रूचि लेते थे। आज एकअच्छा खासा वर्ग है जो की , इंजीनियरिंग और मेडिकल से वास्ता रखता है और हिंदी से बखूबी जुड़ा हु... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   4:38pm 26 Jan 2011 #
Blogger: नई क़लम- उभरते हस्ताक्षर
येकवितामेरेपिताकेलिएहैजिन्होंनेइसमहीनेकी 11 तारिखकोदुनियाछोड़दी!वोछोड़गएअपनीयादेंवोछोड़गएअपनीबातेंउनकाअहसासहैअबतोमेरेसाथक्योंरूठगएहैंआपआजइतनाकिमनानाभीअबनहींकमआएगाआसमानमेंताराबनकेक्यादेखरहेहैंआपआपकेबच्चेबुलातेहैंआपकोपापाआजाईयेएकबारकिहमएकबार... Read more
clicks 195 View   Vote 0 Like   3:23am 31 Dec 2010 #
Blogger: नई क़लम- उभरते हस्ताक्षर
इसमंचकीकवियत्रीशिखावर्मा "परी"नेअपनाग़मसाझाकियाहमारेसाथ, वोग़ममैंअपनेपाठकोंकेसाथसाझाकररहाहूँ-"धूप सी जमी है मेरी साँसों में, कोई चाँद को बुलाये तो रात हों" मुझे नहीं मालूम था कि इतना मजबूर कर देगा मुझे मेरा जीवन कि अपने हाथों से अपने पिता कि चिता को आग दूँगी और अप... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   12:53pm 20 Dec 2010 #
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