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स्पंदन SPANDAN

मेट्रो के डिब्बे में मिलती हैतरह तरह की जिन्दगी ।किनारे की सीट पर बैठी आन्नाऔर उसके घुटनों से सटा खड़ा वान्या    आन्ना के पास वाली सीट केखाली होने का इंतज़ार करताबेताब रखने को अपने कंधो परउसका सिरऔर बनाने को घेरा बाहों का।सबसे बीच वाली सीट परवसीली वसीलोविच,जान ...
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shikha varshney
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  February 12, 2014, 3:43 pm
जीवन में छोटी छोटी  खुशियाँ कितनी मायने रखती हैं इसे किसी को समझना हो तो उसके जीने के ढंग से समझा जा सकता था। कोई भी हालात हो या समस्या अगर उसका हल चाहिए तो बैठकर रोने या अपनी किस्मत को कोसने से तो कतई नहीं निकल सकता । हाँ ऐसे समय में सकारात्मकता से सोचा जाये तो जरूर कुछ ...
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shikha varshney
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  February 6, 2014, 3:44 pm
जब से सोचने समझने लायक हुई, न जाने कितने सपने खुली आँखों से देखे. कभी कोई कहता कोरे सपने देखने वाला कहीं नहीं पहुंचता तो कभी कोई कहता कोई बात नहीं देखो देखो सपने देखने के कोई दाम पैसे थोड़े न लगते हैं.पर उनमें ही कुछ बेहद पोजिटिव और मित्र किस्म के लोग भी होते जो कहते कि अरे ...
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shikha varshney
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  January 30, 2014, 12:20 pm
मुझसे एक बार जिंदगी ने कहा था पास बैठाकर।चुपके से थाम हाथ मेरा समझाया था दुलारकर।सुन ले अपने मन की, उठा झोला और निकल पड़।  डाल पैरों में चप्पल और न कोई फिकर कर।   छोटी हैं पगडंडियां,पथरीले हैं रास्ते,पर पुरसुकून है सफ़र.मान ले खुदा के वास्ते।और मंजिल ?पूछा मै...
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shikha varshney
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  January 20, 2014, 7:05 pm
हमारी भारतीय संस्कृति में "दान"हमेशा छुपा कर करने में विश्वास किया जाता रहा है.कहा भी गया है कि दान ऐसे करो कि दायें हाथ से करो तो बाएं हाथ को भी खबर न हो. ऐसे में अगर यह दान "शुक्राणु दान "हो तो फिलहाल हमारे समाज में इसे छुपाना लगभग अनिवार्य ही हो जाता है.हालांकि हाल में ही ...
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  January 13, 2014, 10:37 pm
(कार्टून गूगल से साभार )हम भारतीय लोग स्वभाव से बड़े ही जल्दबाज होते हैं. झट से फैसले लेते हैं और झट से ही फैसला सुना देते हैं. हर काम , हर बात में जल्दबाजी। दूसरों की होड़ में जल्दबाजी , फिर उसमें कमियां निकालने में जल्दबाजी, फिर खुद को कोसने में जल्दबाजी, राय बनाने में जल्दब...
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  January 3, 2014, 7:59 pm
मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है. और आपस में मिलजुल कर उत्सव मनाना उसकी जिंदगी का एक अहम् हिस्सा है। जब से मानवीय सभ्यता ने जन्म लिया उसने मौसम और आसपास के परिवेश के अनुसार अलग अलग उत्सवों की नींव डाली, और उन्हें आनंददायी बनाने के लिए तथा एक दूसरे से जोड़ने के लिए अन...
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  December 16, 2013, 5:58 pm
 ये भगवान भी न इंसानो की ही तरह हबड़ दबड़ में रहता है आजकल। ठीक से सुनता समझता भी नहीं बात पहले...पूरी बात सुनिये यहाँ -...
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  December 10, 2013, 6:02 pm
कहते हैं, गरजने वाले बादल बरसते नहीं पर यहाँ तो गर्जन भी है और बौछार भी जैसे रो रहे हों बुक्का फाड़ कर. चीर कर आसमान का सीना धरती पर टपक पड़ने को तैयार. बताने को अपनी पीड़ा. कि भर गया है उनका घर उस गहरे काले धुएं से जो निकलता है धरती वालों की फैक्ट्रियों से. ...
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  December 3, 2013, 3:53 pm
यूँ सामान्यत: लोग जीने के लिए खाते हैं परन्तु हम भारतीय शायद खाने के लिए ही जीते हैं. सच पूछिए तो अपने खान पान के लिए जितना आकर्षण और संकीर्णता मैंने हम भारतीयों में देखी है शायद दुनिया में किसी और देश, समुदाय में नहीं होती। एक भारतीय, भारत से बाहर जहाँ भी जाता ह...
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shikha varshney
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  November 18, 2013, 3:44 pm
लंदन में इस साल अब जाकर मौसम कुछ ठंडा हुआ है. वरना साल के इस समय तक तो अच्छी- खासी ठण्ड होने लगती थी, परन्तु इस बार अभी तक हीटिंग ही ऑन नहीं हुई है. ग्लोबल वार्मिग का असर हर जगह पर है. वैसे भी यहाँ के मौसम का कोई भरोसा नहीं।शायद इसलिएइस देश में हर बात मौसम से ही शुरू ह...
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  November 7, 2013, 8:50 pm
ऐसा भी होता है आजकल ... चलिए सुन ही लीजिये.. :)आवाज ....??,  हमारी ही है. अब हमारे ब्लॉग पर अपनी आवाज देने का और कौन रिस्क लेगा :) .दोस्तो!!! लन्दन का मौसम आजकल बहुत प्यारा है ऐसे में टूरिस्टों का बोलबाला है इसी दौरान हमारी एक मित्र भी भारत से पधारी उनके स्वागत में हमने की सार...
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Tag :सस्वर (audio)
  October 24, 2013, 11:07 pm
जबसे होश संभाला तब से ही लगता रहा कि मेरा जन्म का एक उद्देश्य घुमक्कड़ी भी है. साल में कम से कम १ महीना तो हमेशा ही घुमक्कड़ी के नाम हुआ करता था और उसमें सबसे ज्यादा सहायक हुआ करती थी भारतीय रेलवे. देखा जाए तो ३० दिन के टूर में १५  दिन तो ट्रेन के सफ़र में निकल ही जाया करते ...
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  October 21, 2013, 10:03 pm
मन उलझा ऊन के गोले सा कोई सिरा मिले तो सुलझाऊं.दे जो राहत रूह की ठंडक को, शब्दों का इक स्वेटर बुन जाऊं.बुनती हूँ चार सलाइयां जो फिर धागा उलझ जाता है सुलझाने में उस धागे को ख़याल का फंदा उतर जाता है.चढ़ाया फिर ख्याल सलाई पर कुछ ढीला ढाला फिर बुना उसे जब तक उसे ...
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  October 16, 2013, 4:39 pm
भाषा - मेरे लिए एक माध्यम है अभिव्यक्ति का. अपनी बात सही भाव में अधिक से अधिक दूसरे  तक पहुंचाने का. अत: मैं यह मानती हूँ कि जितनी भी भाषाओं का ज्ञान हो वह गर्व की बात है परन्तु तब तक, जब तक किसी भाषा को हीन बना कर वह गर्व न किया जाये। यूँ जरुरत के वक़्त भाषा को किसी भी रू...
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  September 27, 2013, 8:42 pm
 रूस के गोर्की टाउन से कर इंग्लैण्ड के स्टार्ट फोर्ड अपोन अवोन तक और मास्को के पुश्किन हाउस  से लेकर लन्दन के कीट्स हाउस तक। ज़ब जब किसी लेखक या शायर का घर , गाँव सुन्दरतम तरीके से संरक्षित देखा हर बार मन में एक  हूक उठी कि काश ऐसा ही कुछ हमारे देश में भी होता। का...
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  September 22, 2013, 1:48 pm
 http://shikhakriti.blogspot.co.uk/2013/09/blog-post_15.html  यहाँसे आगे। अब तक यह तो विजया की समझ में आने लगा था कि घर की तीसरी मंजिल पर रहने वाले निखिल के सगे भैया, भाभी क्यों अजनबियों की तरह रहते हैं, क्यों उन्होंने घर में आने जाने का रास्ता भी बाहर से बना लिया है, और क्यों त्योहारों पर भी वह एक ...
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  September 17, 2013, 5:30 pm
जब से लिखना शुरू किया, हमेशा ही मेरे मित्र मुझे कहानी भी लिखने को कहते रहे. परन्तु मुझे हमेशा ही लगता रहा कि its not my cup of tea.फिर लगातार कुछ दोस्तों के दबाब के कारण और कुछ अपनी क़ाबलियत आजमाने के स्वाभाव के चलते यह पहला प्रयास किया .. और यह मेरी पहली कहानी इस माह (सितम्बर) की "बिंद...
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  September 15, 2013, 8:45 pm
"क्या आपके कारोबार में घाटा हो रहा है?,या आपके बच्चे आपका कहा नहीं मानते और उनका पढाई में मन नहीं लगता , या आपकी बेटी के शादी नहीं हो रही ? क्या आप पर किसी ने जादू टोना तो नहीं किया ? यदि हाँ तो श्री .....जी महाराज आपकी समस्या का समाधान कर सकते हैं। यदि आप पर किसी ने का...
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  September 9, 2013, 3:31 pm
 दिल्ली पुस्तक मेले का परिसर, खान पान में व्यस्त जनता।किसी भी मेले का अर्थ मेरे लिए होता है, कि वहां वह सब वस्तुएं देखने, खरीदने को मिलें जो आम तौर पर बाजारों और दुकानों में उपलब्ध नहीं होतीं। और यही उत्सुकता मुझे पिछले महीने के,भारत में प्रवास के आखिरी दिन की व्यस...
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  September 4, 2013, 8:42 pm
लन्दन में मौसम की खूबसूरती अपने चरम पर है , स्कूलों की छुट्टियां शुरू हो गई हैं और नया सत्र सितम्बर से आरम्भ होने वाला है. ऐसे में हम जैसे के माता पिता के लिए (जिनके बच्चे स्कूल जाते हैं ) यही समय होता है जो भारत जाकर इन छुट्टियों का सदुपयोग कर आयें. तो हम जा रहे हैं एक महीन...
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shikha varshney
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  July 25, 2013, 6:18 pm
लन्दन में मौसम की खूबसूरती अपने चरम पर है , स्कूलों की छुट्टियां शुरू हो गई हैं और नया सत्र सितम्बर से आरम्भ होने वाला है. ऐसे में हम जैसे के माता पिता के लिए (जिनके बच्चे स्कूल जाते हैं ) यही समय होता है जो भारत जाकर इन छुट्टियों का सदुपयोग कर आयें. तो हम जा रहे हैं एक महीन...
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  July 25, 2013, 6:18 pm
सामान्यत: मैं धर्म से जुड़े किसी भी मुद्दे पर लिखने से बचती हूँ। क्योंकि धर्म का मतलब सिर्फ और सिर्फ साम्प्रदायिकता फैलाना ही रह गया है। या फिर उसके नाम पर बे वजह एक धर्म को बेचारा बनाकर वोट कमाना या फिर खुद को धर्म निरपेक्ष साबित करना। परन्तु आजकल जिस तरह मीडिया मे...
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  July 18, 2013, 4:16 pm
 "एक अनुचित और नियम के विरुद्ध स्थानांतरण में,मैंने शासन के कड़े निर्देश का उल्लेख करते हुये ऐसा करने से मना कर दिया। तो महाशय जी ने कलेक्टर से दबाव डलवाया तो मैंने डाँट खाने के बाद लिखा - “कलेक्टर के मौखिक निर्देश के अनुपालन में .... अब मुझे पता है फिर मुझे बहुत बुरी लत...
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  July 14, 2013, 3:08 pm
मुझे नफरत है नम आँखों से मुस्कुराने वालों से मुझे नफरत है दिल के छाले छिपा जाने वालों से।मुझे नफरत है ऍफ़ बी पर गोलगप्पे से सजी प्लेट की तस्वीर लगाने वालों से नफरत है मुझे रोजाना चाट उड़ाने वालों से। मुझे नफरत उनसे भी है जो पानसिंह तोमर देखने के बाद ...
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shikha varshney
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  July 9, 2013, 2:39 pm
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