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सुरेश यादव सृजन

अपनी बातमित्रो, मेरे इस ब्लॉग का विलम्ब से प्रकाशित होना लगता है, इसकी नियति हो गई है। ऐसे में यही ठीक है कि जब फुरसत मिले, तभी अपनी कविताओं को लेकर आपके सामने उपस्थित हो जाऊँ और विश्वास रखूँ कि आप को भी अच्छा लगेगा।     मानसून की देरी और तपते दिन-रातों के बीच की तड़प मुझे म...
सुरेश यादव सृजन...
Tag :कविता
  June 23, 2012, 11:02 pm
अपनी बातआदमी को अपनी जड़ों से उखाड़ने में जिन विपत्तिओं का हाथ होता है, उनमें गरीबी महत्वपूर्ण स्थान रखती है. उखड़ा हुआ पेड़ और उखड़ा हुआ आदमी, दोनों ही अपने अस्तित्व से जूझते हैं. जैसे पेड़ दूसरी ज़मीन पर जड़ें प्राप्त कर लेता है, आदमी का हाल भी ऐसा ही होता है. संघर्ष का यह ...
सुरेश यादव सृजन...
Tag :सुरेश यादव की कविताएं
  April 2, 2012, 4:21 pm
अपनी बातप्रकृति ने मनुष्य को जो कुछ सिखाया है उसमें सर्वाधिक महत्वपूर्ण है - आस्था और विश्वास।सूरज तपकर रोशनी देता हो या फिर नदी बहकर जीवन का पोषण करती हो। अंकुराने की चाहत हो या फिर जिजीविषा का संघर्ष…कविता सही अर्थ में जीवन संघर्ष है। इसलिए आस्था का रूप है और प्रकृत...
सुरेश यादव सृजन...
Tag :सुरेश यादव की कविताएं
  December 18, 2011, 10:41 am
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