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साथी

दुनिया की आबोहवा में जहर बहुत है,चलो अब मुठ्ठी भर ताजी हवा चुन लें!!मजहब तो नफ़रत बंटता है आजकल,चलो अब कोई नया खुदा चुन लें!!कì...
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  March 28, 2017, 8:17 am
जिंदगी में जख्मों का हिसाब मत रख।गम के पन्ने हो, वैसी किताब मत रख।।बच्चों की तरह जीता चल जिंदगी।चेहरे पे कोई भी नकाब मत र...
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  March 27, 2017, 7:26 am
यूपी के बौराल होली(अरुण साथी)यूपी वाला पे फगुआ केचढ़लो ऐसन उमंग,दबा दबा के ईवीएम केकैलक खूब हुड़दंगजोगीरा सारा रा रा...मोदी &#...
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  March 11, 2017, 12:38 pm
(अरुण साथी)आंय जी, प्रेम विवाह के दो दशक हुए आपने मुझे कभी वेलेंटाइन विश नहीं किया..!मैंने कहा, बंदरीआजकल के लौंडेकई को विश क...
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  February 14, 2017, 3:32 pm
वजूद**तेज ताप सेखौल उठता हैवजूद...और उधियाने लगता हैतभी कोई अपनापानी का छींटा देकरसंभल लेता है..उधियाते वजूद को..(तस्वीर को ...
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  January 31, 2017, 6:45 pm
मौत से पहले...बहुत भचर-भचर करते होमार दिए जाओगेएक दिनउन्हीं लोगों की तरह..लगी होगी एक-आध गोलीपीठ में, सीने मेंया कनपट्टी के आसपास कहीं..बीच सड़क पेबिखर जायेगा तुम्हारी रगो का खौलता हुआ खूनऔर लहू का लाल रंगकाली तारकोल से मिलकर गडमड रंग का हो जायेगा...हाँ, कुछ लोग आएंगे सहानु...
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  January 30, 2017, 7:50 am
महुआ महके तोर अंगना में,सूरजमुखी खिल जाये।बेला, जूही, हरसिंगार सन,जीवन खुशबु  से भर जाये।।सरसों फूलो, मांजर महके,धान, गेì...
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Tag :मगही कविता
  January 1, 2017, 7:35 am
भागमभागउठापटककभी उधरकभी इधरसपने-हकीकतघर-परिवारदोस्ती-यारीदेश-समाजदाल-रोटीकी जद है जिंदगी..**घिसे चप्पलसिले जूतेचिê...
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  December 27, 2016, 6:56 am
जब भी वह मिलती हैहौले से मुस्कुरा,आहिस्ते से मचलती है!वैसे ही जैसे,सूरज की लाली सेसूर्यमुखी खिलती है!वैसे ही जैसे,भौरे की गुनगुन सेकली की पंखुड़ी खुलती है!वैसे ही जैसे,चाँद की चांदनी सेचकोर मचलती है!वैसे ही जैसे,मोर नृत्य सेमोरनी पिघलती है!वैसे ही जैसे,प्रेमपुलकगजगामि...
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  December 1, 2016, 8:47 am
झूठ की खेती(अरुण साथी)वह बंजर जमीन होया कि होमरूभूमिया होपठार-पर्वतकुछ लोगबड़े कुशल उद्यमीहोते हैऔर वे बंजर जमीन पे भीझ...
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  November 2, 2016, 6:44 am
परिवार**माँ-बाबु जी कागलतियों पे डाँटना,उदासी का कारण पूछदुःख बाँटना है।अच्छा लगता है..2दोपहर को खाने कामिसकॉल आना,देर र...
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  September 30, 2016, 7:57 am
दासी लोकतंत्र**साथी उवाच"क्योंजनतंत्र मेंमालिक जनताभूखी और प्यासी है?राजा के घर क्रंदनक्यों है?क्यों मुख पेछाई उदासी &...
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  September 27, 2016, 1:51 pm
भूख और माँ(सोशल मीडिया पे वायरल इस तस्वीर को देखकर साथी के शब्द.. निःशब्द..)**जिंदगी हैमौत हैऔर है मौत से भीभयावहक्रूरबर्बर&...
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  September 18, 2016, 10:55 am
"भक्त"**"अच्छे दिन"और"काला धन"को जुमलाकहे जाने पर भीजो आसक्त रहते है,हे तातकली काल मेंउसे हीभक्त कहते है..----#साथी के #बकलोल वचन...
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  September 15, 2016, 12:28 pm
यह एक प्रहसन हैलोकतंत्र का प्रहसनयहाँ लिखी गयी पटकथा पेअभिनय करते हैलोगतभी तो वही लोगजो कल तकरावण को मानते थेराक्षस,आ&...
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  September 12, 2016, 6:13 am
कातिल को कातिल कहो, रवायत नहीं है।फ़क़त मुर्दों से ज़माने को शिकायत नहीं है!!मुर्दों के शहर में रहकर भी शोर क्यों करते हो,यह कब्र में सोये हुए बंदों से अदावत नहीं है?बस्ती है यह चोरों का, जयकारा उसका होगा,सच कहना क्या इस दौर में कयामत नहीं है?जब नक्कारखाने में मुनादी है खामो...
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  September 9, 2016, 9:55 am
जिंदगी अब कहाँ किसीसिरहाने टिकती है।हर एक रिश्तों की अबधुंधली सी तस्वीर दिखती है।।◆कोई होकर भी अपना,कभी अपना न हुआ।कि&...
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  August 4, 2016, 5:39 am
आईये यूँ नागपंचमी मनाते है..*अरुण साथी*कुछ तथाकथित दोस्तों कोआदर सहित घर बुलाते हैऔर उनकोभरपेट दूध पिलाते है..**आईये यूँ नागपंचमी मनाते है..**कुछ तथाकथित सेकुलरों के घर जाते हैऔर उनको दूध पिलाकरआस्तीन का सांप होने का अर्थ समझाते है..**आईये यूँनागपंचमी मनाते है...
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  July 24, 2016, 12:19 pm
छिछियैनी दुर्गन्ध (अरुण साथी)बोन चाइना कीकशीदाकारी प्लेट मेंजब गोश्त का टुकड़ा डालातो अजीब सी छिछियैनीदुर्गन्ध आई...पांच सितारा भव्यतालेज़र लाइटिंग की चकाचौंधह्रदय गति कोस्तंभित करतीडीजे की धूम-धड़ाक में भीयह छिछियैनी सी दुर्गन्धजानी पहचानी सी लगी..ओह,यह तो वही छि...
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  July 13, 2016, 7:48 am
नहींअभी हारा नहीं हूँ मैं..गिरा भर हूँमुँह के बल ही सहीगिर जानाहारना नहीं होता..फिर उठ कर चलूँगाएक एक कदम ही सहीमंजिल की ओ&#...
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  June 15, 2016, 5:18 pm
मैं जागो मांझी बोल रहा हूँ, हाँ मैं भूख से नहीं मरा..(अरुण साथी)हाँ मैं जागो मांझी ही बोल रहा हूँगलत है कि मैं मर गया हूँमैं म...
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  March 31, 2016, 7:11 am
उल्टी करता आदमी..पता नहीं क्योंदूसरों की वनिस्पतकुछ आदमी में बड़ी कमी होती?दूसरेहजम कर जाते हैबहुत कुछकई तो सबकुछजैसे व...
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  March 22, 2016, 7:18 am
रोज डे पे साथी के बकलोल वचन(अरुण साथी)🌹🌹🌹रोज डे पे श्रीमती जी कोजब गुलाब दियातो उसके चेहरे पेप्रेम का भाव नहीं पाया,मैं अत्यधिक घबराया,मन में संशय आया,कहीं किसी नेमुझसे पहले तोगुलाब नहीं थमाया!🌹🌹🌹पूछा,"प्रिय, अपनी शादी केसिल्वर जुबली बर्ष पे भीमैंने तुम्हें ही गुला...
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  February 7, 2016, 11:19 am
उनको अब मुझसे शिकायत नहीं है,शायद अब पहली सी मोहब्बत नहीं रही।दुश्मनों से भी हंस-बोल लिया करते थे,शायद अब पहली सी अदावत नहीं रही।इन्कारे-ए-मोहब्बत पर तेजाब फेंक देते हैं,शायद अब पहली सी इश्के-रवायत नहीं रही।...
साथी...
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  February 6, 2016, 6:10 am
स्वर्ण देश काप्रजापालक था वह..स्वर्ग में सीढ़ी लगाने,समुन्द्र जल मीठा करने काराष्ट्रवादी स्वप्नद्रष्टा था वह..वह प्रकांड ब्राह्मणऔर ब्रह्मपुत्र था...वह भक्त था,महाभक्त,महाकाल का..सर्वगुण सम्पन्न था वह..बस,वह अहंकारी थाऔररावण कहलाया..!...
साथी...
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  February 1, 2016, 8:45 am
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