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अविनाश वाचस्पति : View Blog Posts
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अविनाश वाचस्पति

##जानलेवाबीमारीहेपिटसइटिससी से इश्‍कलेखक - अविनाश वाचस्‍पति की आत्‍मकथा भगवतगीता के अध्‍यायअप्रिय सत्‍य मतलब सच्‍चे एवं कड़वे अनुभवों पर आधारित। जिससे 90 प्रतिशत आम लोग जो पुस्‍तक पढ़ते और सुनते हैं तथा इंटरनेट सेे जुड़े 10 प्रतिशत लोगों में से नहीं हैं हेपिटाइटिस स...
अविनाश वाचस्पति...
Tag :Hepititis C
  January 11, 2016, 10:48 pm
##Dilwaleन बाजी जीती न है वो राव वह तो है देखो शाहरूख खान कह रहा है चिल्‍ला रहा है अखबारों की सुर्खियां बना हुआ है शाहरूख पागल हो गया है तो पहले क्‍या अक्‍लमंद था बुद्धि का द्वार उसका बंद था तब भी तो लोग कहेंगे या लोग कहें कि शाहरूख पागल हो गया है मस्‍त मस्‍त मस्‍तानी पागल हुई ज...
अविनाश वाचस्पति...
Tag :कविता
  December 19, 2015, 7:28 am
#‪#‎HardCold‬कड़ाके की ठंडपढ़ रही हो जहांनाम काट दोउस क्‍लास सेसर्दी भरे दिन रात का।गला काट रही हैजान से मार रही हैठिठुरा ठिठुरा करगरीबों को औरउनको भी जोसोते हैं फुटपाथ पर।बदल दो सारेफुटपाथों कोढके हुए नालों मेंया बिछा दोसीमेंट के गोलबड़े पाइपसड़को के किनारे। जो बेघरों ...
अविनाश वाचस्पति...
Tag :कड़ाके की ठंड
  December 17, 2015, 8:12 am
#‪#‎छिलके‬सब्जियों और फलों के छिलके पाचनक्रिया के लिए बहुत उपयोगी हैं, इनका उपयोग करें, इन्‍हें न फेकें। जहां तक कि आलू, चुकंदर, मूली, गाजर, केले, सेब, अनार, अमरूद के छिलके भी बेकार नहीं हैं।मोबाइल 09560981946...
अविनाश वाचस्पति...
Tag :चिकित्‍सा
  December 8, 2015, 6:34 am
#‪#‎Health‬सब्जियां हरी तबीयत के लिए भलीलगती हैं गुड़ की मिठास भरी डली।शरीर की खिल जाती है हरेक कलीजिस्‍मानी ताकत बनाती है बली।- अविनाश वाचस्‍पतिमोबाइल 9560981946...
अविनाश वाचस्पति...
Tag :गुड़ की मिठास भरी डली
  December 5, 2015, 5:39 am
मेरा जिगर नहीं सुलगता है अब चाहे सुलगाऊं बीड़ी या सिगरेट जिगर मेंं नहीं होता है दर्प ऐसा मर्द हो गया हूं मैं। दर्पीला मर्द एक दिन मर जाएगा मगर मालूम नहीं चलेगा किसी को इस मर्द के जिगर में दर्प लबालब भरा था। जिगर को हेपिटाइटिस था ए, बी, सी, डी अथवा ई दर्प भी था यह कहा जांच मे...
अविनाश वाचस्पति...
Tag :मुखिया से दुखिया
  November 28, 2015, 3:27 am
##FutureGenerallyआप सबने अविनाश वाचस्‍पति का देखा है बुरा हाल बीमारी ने क्‍या जकड़ा, सबने उन्‍हें काबू कर लिया पकड़ा गर होते उनके पास कुछ लाख रुपये या एश्‍योरेंस यानी इंश्‍योरेंस से प्राप्ति की होती आस दसियों बीसियों पचासों लाख उनके खाते में होते या इंश्‍योरेंस से मिलने वाले ह...
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Tag :Avinash Vachaspati
  November 8, 2015, 3:18 am
#‪#‎अंतिमसमय‬ऐसा प्रतीत हो रहा है कि स्‍वजनों का शाप फलीभूत हो रहा है। अभी पन्‍द्रह मिनिट पहले मैं डाईंग रूम में टीवी पर एक कॉमेडी कार्यक्रम देख रहा था और साथ ही सोते समय पिए जाने वाले दूध के ठण्‍डा होने का इंतजार कर रहा था। तभी एकाएक मेरी दायीं ओर के पैर की मांसपेशी में ...
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Tag :
  October 19, 2015, 1:57 am
लिवर की सत्यकथा : हेपिटाइटिस सी जैसे रोग से पीडि़त अविनाश वाचस्‍पति की स्‍वानुभूतिPosted on  by  नुक्‍कड़ in -    अविनाश वाचस्‍पतिएक हूं पर मैं कई रूपों में आता जाता हूं, मैं हूं रूप नेक, पर अनेक। जो आत्‍माएं इस तथ्‍य से परिचित हैं कि टीम वर्क की क्‍या महत्‍ता है और पर...
अविनाश वाचस्पति...
Tag :असाध्‍य रोग
  May 25, 2015, 12:05 pm

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अविनाश वाचस्पति...
Tag :
  March 20, 2015, 5:35 am
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अविनाश वाचस्पति...
Tag :
  December 13, 2014, 7:34 am
तुमने किसी को मीठा खाकर मरते हुएदेखा है देखो वह डरकर मीठे सेकर रहा है परहेज खा रहा है मीठा रात को फ्रिज खोलकर फिर भी हैजिंदा इै इसी धरतीका बाशिन्‍दा नहीं खा रहा है मीठा इसलिए मीठी चीजों की देख लो जान जा रही है हलवाई डर रहा है सोच रहा है खोलूं नमकीन की दुकान पर नमकीन पकवान ...
अविनाश वाचस्पति...
Tag :
  November 13, 2014, 2:41 am
कवितापहल- अविनाश वाचस्‍पति पहल खुद पहलकारक होतो अच्‍छा लगता हैपर पहेली का न बनेन पैदा हो पहले सेपहल ही रहता हैपहल का हलसदा विचारों की फसलउपजाता हैशून्‍य से खुद कोभीतर तक जलाया हैझुलसाया हैसच बतलाऊंभीतर तक तपाया हैपहल पर्याय का होकविता, कहानी, उपन्‍यासनाटिका, नौंटं...
अविनाश वाचस्पति...
Tag :कविता
  November 6, 2014, 4:49 am
नाउम्‍मीदी में खुशियों की ईद हैजो कल गई है वापिस वो दीवाली हैमन में मिलने की हरियाली हैसबसे प्‍यारे हैं इंतजार के क्षणजल्‍दी भंग नहीं होते, भंगर नहीं होतेइंतजार में होता है सुकूनजब होता है सुकूनतब और कुछ नहीं होतान होती है चिंतानहीं होता है तनावमिलने की आब मन मेंबसी ...
अविनाश वाचस्पति...
Tag :
  October 24, 2014, 8:16 am
चलने वाले दो पैर परअचरज नहीं होतान मुझे, न तुझे औरन किसी अन्‍य को।धरती पर मौजूदइंसान से गिनें तोउपकरणों पर रुकेंपक्षी भी मिलेंसंतुलन का पर्यायसाइकिल से शुरू करेंटू व्‍हीलर तक सबसंतुलन धर्म निबाह रहे हैं।जानवर चलते-दौड़तेचार पैरों पर तेज गति सेगति से होकर मुक्‍तदु...
अविनाश वाचस्पति...
Tag :इंसान
  October 11, 2014, 3:20 pm
फाइंडिंग फेनी हिंदी फिल्‍म का असली आनंद लेने के लिए गोवा निवासी अथवा गोवा का पर्यटक होना बहुत जरूरी है। पर्यटन कम से कम एक सप्‍ताह भर का रहे तो समंदर के नमकीन पानी से शर्बत की मिठास का आनंद मिल सकता है। ऐसे मुक्‍तभोगी ही फिल्‍म का सही लुत्‍फ ले सकते हैं। गोवा की गांव सं...
अविनाश वाचस्पति...
Tag :
  October 4, 2014, 7:27 am
मुखोटे, नकाब, जोकर का चेहरा और पुतले एक ही जाति, धर्म इत्‍यादि के अंर्तसंबंधों को जाहिर करते हैं। इनका लुत्फ नए-नए फिल्मी प्रयोग और टीवी चैनल के धारावाहिकों में रोजाना प्रसारित हो रहा है। इन सबको अलग नाम देने के क्‍या कारण रहे होंगे। मुखोटे मुख को ओट कर भी खोटे साबित हो ...
अविनाश वाचस्पति...
Tag :फेसबुक
  July 7, 2014, 5:10 am
फिल्‍मों के संवाद और गानों की भाषा के प्रयोग में भी बाजारवाद हावी हो गया है जिसके कारण सिनेमा में भी राजनीति का वर्चस्‍व बढ़ रहा है। वैसे इसे राजनीति नहीं धन बटोरने का जुनून कहा जाएगा। परदे के पीछे को अगर पिछवाड़ा कहा जाए तो ठीक भी है पर पिछवाड़े का आशय पाठकगण बखूबी समझ...
अविनाश वाचस्पति...
Tag :बिगड़ना
  July 1, 2014, 10:40 pm
एक कटहल अपनी कटहलनी के साथ अपने-अपने ‘क’ को छोड़कर वीआईपी इलाके में रात के रोमांस की मस्तियां देखने के लिए पेड़ से उतरकर बंगले के बाहर टहलने चले गए। सिने माध्यम से एकदम अपरिचित कटहल लटक कर लंबे नहीं हो पाए थे तो उनके मन में विचार आया कि टहल कर अपनी लंबाई बढ़ा लें। उन्हें ...
अविनाश वाचस्पति...
Tag :bcr
  June 28, 2014, 6:21 am
मेरी इच्‍छा थी कि  खूब  मुकाबला चला है मेरा, मेरी अपनी बीमारी हेपिटाइटिस सी के साथ, सो वह अब घुटने टेक दे पर उसकी यू्. के. की सरकार का साथ वाला हाथ  मिलाने वाली मिलीभगत सक्रिय है। माना कि दुनिया  गोल  है पर यह गोल फुटबाल वाला नहीं है। हरेक गोल के अलग मायने और अल...
अविनाश वाचस्पति...
Tag :जनवाणी
  June 17, 2014, 1:58 am
जीवन चलने का नाम, चलते रहो सुबह-ओ-शाम और दोपहर को क्या करें,आराम करें लेकिन यह फिलॉसफी फिल्मकारों पर ठीक नहीं बैठती। उनके लिए तो ‘आराम हराम है’ और प्रख्यात हास्य.व्यंग्य कवि गोपाल प्रसादव्यास जी ने अपनी एक फेमस कविता में कहा है कि ‘आराम जिंदगी की कुंजी है, इससे न तपेदिक ...
अविनाश वाचस्पति...
Tag :नेता
  June 9, 2014, 4:26 pm
आप कोई स्‍वार्थी हैं जो अपने हित की बात करेंगे। आप सदा तंबाकू उगाने, बेचने वाले सौदागरों का भला चाहते हैं। इंसान वही जो सदा इंसान के काम आए। यह क्‍या कि अपनी जान के लालच में सामने वाले के पेट पर लात मारता चले।अगर तंबाकू नहीं उपजेगा, नहीं बेचा जाएगा तो इससे जुड़े कितने ही ...
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Tag :
  June 2, 2014, 12:57 am
जीत को जनता का आदेश मानकर स्‍वीकारना जीत को महाजीत बना देता है। गंगा की सेवा को अपने भाग्‍य से जोड़ लेना सुकर्म, उस पर गंगा मैया से आशीर्वाद लेना और आरती करना आस्‍था का गंगाकुभ है। पर इस बार इससे चुनावों में देश मुखिया पद की प्राप्ति हुई है। यह दौर निश्चित ही अचंभित करत...
अविनाश वाचस्पति...
Tag :कटी पतंग
  June 1, 2014, 3:56 am
हिंदुस्‍तान के नए-नवेले प्रधानमंत्री जी की इच्‍छा है कि जनता दरबार लगाए जाएं पर पब्लिक चाहती है कि उनका हश्र केजरीवाल जैसे दरबारों जैसा न हो, जिसमें उन्‍हें  अपने घरों के दरवाजे लॉक करने पड़े थे।  दरवाजे लॉक करना यूं तो एक विशेष कला है जिसमें आयोजक लॉक दरवाजों के ...
अविनाश वाचस्पति...
Tag :जनता दरबार
  May 31, 2014, 1:38 am
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