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Blog: तेताला

Blogger: अविनाश वाचस्पति
#‪#‎Name‬?निर्भया नाम दिया था जिसकोउसकी मां ने बतलाया है किउसका असली नाम और पहचानज्‍योति सिंह थीज्‍योति की तरह सिंह गर्जना की उसनेथर्रा दिया गैंगरेप कोउसका असल मकसद पूरा हुआज्‍योति प्रज्‍वलित की उसनेसिंह की हुंकार सेन कि आरोपियों के अहंकार सेतोड़ दिया उस दर्प को जोदर... Read more
clicks 245 View   Vote 0 Like   3:03am 17 Dec 2015 #कविता
Blogger: अविनाश वाचस्पति
 राजनीती की एक रोटीपहले से गोलाई को तड़पती मौसम दर मौसम सिकुड़तीकब पकेगी कैसे पकेगी कौन पकाएगा हर पल सोचती...बस सोचती... और सोचती...कल तक थे कुछ साथ बिना किसी शर्त के मगर आज लगी एक अजीब नजर है किसी की ब्रेकअप - पैचअप प्रपोजल - डाईवार्स सब कुछ होने लगा है इनके बीचआज की सी विनाश्... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   7:35am 20 Jan 2015 #
Blogger: अविनाश वाचस्पति
क्या तुम्हे माँ याद नहीं आई,जो तुमने इन बच्चो पर गोली चलाई,एक माँ तुम्हारी भी तो होगी,जो रोने पर खुद रो पड़ती थीआंसुओ को तुम्हारे खुद पोछते पोछते,और जिसने न जाने कितने दर्द छिपतीबिना कुछ बताये बिना चिल्लाये,उस माँ के बच्चो पर तुमने गोली चलाईक्या तुम्हे माँ याद नहीं आई...ख... Read more
clicks 189 View   Vote 0 Like   7:38am 19 Dec 2014 #
Blogger: अविनाश वाचस्पति
देश, दिशा और दशा हर जगह एक फौजी होता है, मरने के बाद शहीद होता है ! मगर उसके लिए हम आप क्या करते है ? सिनेमा घर में राष्ट्र गान के समय याद कर लिया, या फिर १५ अगस्त और २६ जनवरी को याद कर लिया या कारगिल दिवस और शहीद दिवस में याद कर लिया ! हमारे लिए वो सैनिक बस एक कैलेण्डर की तारी... Read more
clicks 218 View   Vote 0 Like   2:37pm 6 Dec 2014 #
Blogger: अविनाश वाचस्पति
बात चौंकने की नहीं कुत्‍तों के भौंकने की हैआप सही पढ़ रहे हैंजो लिखा है वहीअविनाश वाचस्‍पति कोनाम के आगे मुन्‍नाभाईचस्‍पां करने का दोषीपाया गया है अतएवहिंदी ब्‍लॉग जगत समुदायने सजाए फांसी का फैसलामुकर्रर किया हैजिस किसी कोहो आपत्तिवह अपनी गर्दनभी पेश करेवरना य... Read more
clicks 240 View   Vote 0 Like   10:03pm 6 Nov 2014 #दफा 302
Blogger: अविनाश वाचस्पति
मान्यवर,दिनांक 18-19 अक्टूबर को खटीमा (उत्तराखण्ड) में बाल साहित्य संस्थान द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय बाल साहित्य सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है।जिसमें एक सत्र बाल साहित्य लिखने वाले ब्लॉगर्स का रखा गया है।हिन्दी में बाल साहित्य का सृजन करने वाले इसमें प्रतिभाग करने ... Read more
clicks 260 View   Vote 0 Like   4:41pm 1 Oct 2014 #
Blogger: अविनाश वाचस्पति
एक चेहरा बस स्टाप के एक कोने पर नीचे की और कुछ देखता हुआ खड़ा था, न जाने कितनी बसे उसके सामने से गुजर चुकी थी कईयो ने पूंछा भी.... कहा चलना है मैडम...? मगर कोई जबाब नहीं था ! बस खड़ी थी शांत... बिल्कुल शांत... जमीन पर पड़े कई टिकट उसके पैरो से टकरा टकराकर खेल रहे थे ! कुछ ऑटो वाले सामने खड़... Read more
clicks 206 View   Vote 0 Like   8:12pm 30 Sep 2014 #ankur mishra
Blogger: अविनाश वाचस्पति
शाम को शर्मा जी की दुकान की चाय न मिले तो ऐसा लगता था कुछ न कुछ मिस हो रहा हूँ,  साथ में दोस्त होते थे तो हंसी मजाक भी हो जाता था, मन को शांति मिलती थी और ख़ुशी के ठहासे सुनकर आसपास वाले भी हंसाने लगते थे ! उन दिनों की सभी यादे यादगार है ! फेसबुक और इंटरनेट के होने के बावजूद इनक... Read more
clicks 195 View   Vote 0 Like   4:24pm 26 Aug 2014 #ankur mishra
Blogger: अविनाश वाचस्पति
शाम हो चुकी थी, नजरे घडी पर थी...सात बजते ही मै अपना लैपटाप का बैग उठाकर बाहर निकलने लगा तभी किसी कोने से एक आवाज आयी और उसे सुनकर उस केबिन में पंहुचा जहाँ से आवाज आई थी ! “कानपुर जाना है, कल सुबह जरुरी है, ‘बहुत जरुरी’....”एक आदेश भरी आवाज आयी, और साथ में ही ट्रेन के टिकट हाथो मे... Read more
Blogger: अविनाश वाचस्पति
सात तारिख थी, आफिस में काम ज्यादा था इसलिए वो बिना घडी देखे काम करता रहा, तभी अचानक से घडी में नजर पहुची तो देखा रात के दस बज गए है टाइम देखकर वो फिर से जल्दी जल्दी काम में लग गया ! काम ११ बजे ख़त्म हुआ, काम ख़त्म होते ही उसने तुरंत बैग उठाया... और जल्दी जल्दी कंप्यूटर बंद करके ऑट... Read more
clicks 210 View   Vote 0 Like   2:42pm 28 Jul 2014 #...वो आखिरी मेट्रो
Blogger: अविनाश वाचस्पति
आज काफी दिनों बाद घर जाना हुआ, बदलाव बदलते-बदलते यहाँ भी पहुच चुका है ! घरो का झुण्ड गाँव में तो पहले ही बदल गया था अब गाँव क़स्बा बन गया है ! बैलगाड़ी की जगह मोटर गाड़ी चलने लगे है, इतवार की जगह सन्डे होने लगा है, बुजुर्ग लोग पहले टहलने जाते थे मगर अब 'वाक्'पर जाने लगे है, शहर से क... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   8:56am 26 Jul 2014 #ankur mishra
Blogger: अविनाश वाचस्पति
आज फिर मजाक बना है, उसके गाँव का एक किसान मरा है, कल तक जब कड़-कडाती धूप,थर-थराती सर्दी,गड-गड़ाती बरसातमें बिना गमझे, बिना छाताबिना चप्पल बिना कम्बल पैदल उस खेत में जाता था,जहाँ की दाल और अनाज से तुम्हारी थाली में खाना सजता है,आज फिर उसका मजाक बना है...जब तक वो ... Read more
clicks 193 View   Vote 0 Like   10:03am 12 Jul 2014 #ankur mishra
Blogger: अविनाश वाचस्पति
वैसे तो रोजाना सैकड़ो मांगने वाले दिख जाते थे, जो मेट्रो में जाते वक्त और निकलते वक्त हमेशा एक ही जगह पर मिलते थे ! उनमे कुछ महिलाएं होती थी, कुछ बूढ़े होते थे, कुछ अपाहिज होते थे जो अपनी जीविका के लिए कुछ न कुछ मंगाते रहते थे !मगर सब के साथ कोई बच्चा या मांगने कारण होता था जिस... Read more
clicks 189 View   Vote 0 Like   4:02pm 25 Jun 2014 #
Blogger: अविनाश वाचस्पति
मित्रों।फेस बुक पर मेरे मित्रों में एक श्री केवलराम भी हैं। उन्होंने मुझे चैटिंग में आग्रह किया कि उन्होंने एक ब्लॉगसेतु के नाम से एग्रीगेटर बनाया है। अतः आप उसमें अपने ब्लॉग जोड़ दीजिए। मैेने ब्लॉगसेतु का स्वागत किया और ब्लॉगसेतु में अपने ब्लॉग जोड़ने का प्रय... Read more
clicks 192 View   Vote 0 Like   5:32am 24 Jun 2014 #
Blogger: अविनाश वाचस्पति
विकास महाराज भी पीएम जी से खौफ खाए हुए चक्‍कर काट रहे हैं। विकास को विशेष अवकाश समझने  और मानने की गलती मत कर लीजिएगा। अच्छे दिन लानें के लिए अधिक श्रम की जरूरत होती है और छुटि़टयों से शर्म करनी पड़ती है। शनिदेव को तेल लगाने और चढ़ाने का यह भी एक नायाब तरीका है। तभी शनि... Read more
clicks 196 View   Vote 0 Like   12:14pm 17 Jun 2014 #बॉलीवुड सिने रिपोर्टर
Blogger: अविनाश वाचस्पति
क्या "स्त्री"होना अपराध है ?दिन भर ताना सुनकर भी,कितनी खुश होती है वो...बिना 'खाने'के दिन गुजर जाता हैउसका...बिना 'शिकायत'के जिंदगी गुजार देती है 'वो'...फिर भी उस पर ये 'इन्सान' इतना 'शैतान'क्यों है ?हैवान क्यों है ?क्या अपराध किया जो वो "स्त्री"हुयी ?राते बिता देती है वो र... Read more
Blogger: अविनाश वाचस्पति
हाँ आज दिन तो आपका है, मगर उनकी वजह से...जिस "माँ"ने न जाने... न जाने... कौन से दर्द सहे हैकौन कौन सी बाते सही...मगर उसकी एक मुस्कान ने सब कुछ...सब कुछ... छिपा लिया मीलो पैदल चलती थी मुझे खड़ा करने के लिएमगर मै 'माँ'के साथ आज, चार कदम भी नहीं चलता...सुई-धागे से सींती थी वो मे... Read more
clicks 210 View   Vote 0 Like   8:59am 29 May 2014 #ankur mishra
Blogger: अविनाश वाचस्पति
आदरणीय श्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी जी,बधाई हो !! बधाई हो !! बधाई हो !!आप तो प्रधानमंत्री बन गए, आपके पास पूरा बहुमत है, आपने जेतली जी और गडकरी जी जैसे अच्छे-अच्छे मंत्री भी अपने मंत्रिमंडल में शामिल कर लिए है ! आपके पास विकास के लिए सारी अनुकूल चीजे उपलब्ध है और तो और आपके पा... Read more
clicks 197 View   Vote 0 Like   3:41pm 26 May 2014 #नरेन्द्र मोदी
Blogger: अविनाश वाचस्पति
अगर तुम आम के जेल जाने को टोपी की हार समझ रहे हो तो बिल्‍कुल ठीक पहचान रहे हो। सबने देखा है  कि विदेश में आम के जाने पर पासपोर्ट और वीजा होने के बावजूद रोक लगा दी गई है। पर इससे दुखी आम नहीं, आप हुए हैं। आप जो आम के रसीलेपन को दीवानगी की हद तक चाहने वाले हैं। उसके मिठास से ... Read more
clicks 209 View   Vote 0 Like   10:55pm 23 May 2014 #काला मन
Blogger: अविनाश वाचस्पति
अब दुःख दर्द में भी मैने मुस्कुराना सीख लिया जब से अज़ाब को छिपाने के सलीका सीख लिया। बेवफाओं से इतना पड़ा पाला कि अब इल्तिफ़ात से भी किनारा लेना सीख़ लिया। झूठे कसमें वादों से अब मैं कभी ना टूटूंगा ग़ार को पहचानने का हुनर जो सीख लिया। वो कत्लेआम के शौक़ीन हैं तो क्या हुआ मैंन... Read more
clicks 183 View   Vote 0 Like   9:13am 15 May 2014 #
Blogger: अविनाश वाचस्पति
‘क’ से कापी, किताब और कष्‍ट - इन तीनों में से काला कौन है जबकि तीनों की राशि एक है। अगर कयास लगाएंगे तो इस शब्‍द को भी इनके साथ घुलते-मिलते पायेंगे। हरेक प्रॉडक्‍ट का गुण और गति भिन्‍न तेवर संजोए होती है। पर इस शब्‍द के इस्‍तेमाल करने वाले पर निर्भर है कि वह इनमें स... Read more
clicks 212 View   Vote 0 Like   1:35pm 30 Apr 2014 #किताबें
Blogger: अविनाश वाचस्पति
वो बेचारे अधनंगे बच्चे रात में वहीँ भूखे सोते है, जहाँ नेता जी ने लाखो की होर्डिंग लगवाई है... #YugalVani— Ankur Mishra (@iAnkurMishra) April 18, 2014... Read more
clicks 186 View   Vote 0 Like   12:40pm 22 Apr 2014 #
Blogger: अविनाश वाचस्पति
उस कोने में कलम की हलचल आज भी है,कभी बाबा और कभी दादी,यहाँ खुद को कलम और किताबो की महफ़िल में बैठते थे,राम के साथ सीता और कृष्ण के साथ राधा,हमेशा उन्हें वक्त के तकाजे को बताते थे,कोना एक आधार था उस अधूरे पन का,जो कभी-कभी,खुद बाबा-दादी की इस महफ़िल में अपना अकेलापन बिताता था !उस ... Read more
clicks 203 View   Vote 0 Like   10:52am 21 Apr 2014 #अंकुर मिश्र
Blogger: अविनाश वाचस्पति
ये लोकसभा चुनाव है या कोई प्रदर्शनी...?सुबह सुबह सड़क में खड़े एक भूखे बच्चे को नजरंदाज करते हुए जब अक्षरधाम मेट्रो में प्रवेश किया तो सबसे पहले दृश्य था, भाजपा और मोदी जी के चुनाव प्रचार के एक पोस्टर का, वैसे तो यहाँ पोस्टर कई प्रकार के थे लेकिन सामने एक पोस्टर लगा था, जिसमे... Read more
clicks 241 View   Vote 0 Like   6:20pm 26 Mar 2014 #नरेन्द्र मोदी
Blogger: अविनाश वाचस्पति
कपकपाती ठण्ड मेंजो कभी ठहरा नहींचिलचिलाती धूप मेंजो कभी थमा नहींगोलियों की बौछार मेंजो कभी डरा नहींबारूदी धमाकों सेजो कभी दहला नहींअनगिनत लाशों मेंजो कभी सहमा नहींफर्ज के सामनेजो कभी डिगा नहींआंसुओं के सैलाब सेजो&n... Read more
clicks 213 View   Vote 0 Like   3:04pm 24 Mar 2014 #दुबे
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