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Blog: निज़ता

Blogger: धीरेन्द्र सिंह
एक बार मेरे -ख़यालों के दरमियाँतेरे हुस्न का नशा एहसास नर्मियाँदेता है मुझे बांध ऐसी नाज़ुक डोर से छा जातीं हैं दिल पर अनजान बदलियाँ मेरी परिधि की सीमा छोटी या बड़ीमिलती हो तुम खड़ी उढ़की ले खिड़कियाँगलियों से गुजरना आसान ना लगे नज़रों से लोग देते हैं बेखौफ घुड़किय... Read more
clicks 232 View   Vote 0 Like   4:45pm 8 Jun 2013 #खयाल
Blogger: धीरेन्द्र सिंह
मेरी व्यथा,मात्र वेदना नहीं है सत्य यह कि,कहीं चेतना नहीं है संघर्ष के जहां में,बस कमान लिए  लक्ष्य की प्रतीति,पर भेदना नहीं है तंत्र ज़िंदगी के सब,स्वतंत्र लगे हम क्या लगे कि,बस यंत्र लगे मंत्र कोई अपना असर भूल जाये नियंत्रण कहीं और देखना कहीं है क्षुब्ध है वही,जो यहाँ ... Read more
clicks 212 View   Vote 0 Like   7:06am 25 Dec 2012 #(सर्वाधिकार सुरक्षित )
Blogger: धीरेन्द्र सिंह
जीवन, जगत, जश्न भरी किलकारीसंभव वहीं जहां पुलकित है नारीव्योम सी विशालता धारा सा सहनसूरी सी प्रखरता चन्दा सी शीतल न्यारीसृष्टि की रचयिता समाज की सशक्तताप्रखरता, प्रांजलता,प्रस्फुटन की क्यारीएक गहन वृक्ष है और सघन छांवसंरक्षण, सुरक्षा, संरक्षा, सुधि सारीपरिवार, स... Read more
clicks 216 View   Vote 0 Like   4:38am 25 Dec 2012 #सुकुमारी
Blogger: धीरेन्द्र सिंह
आर्य भूमि का क्यों भूले सदाचारकुंठित कायरता और बलात्कारइंडिया गेट पर आक्रोशित युवा वर्गलड़कियों ने दिखलाया शक्ति व प्रतिकारदर्द लिए हमदर्द मौसम बड़ा सर्दमशाल सा प्रज्वलित अपना अधिकारलाठी चार्ज, आँसू गैस से दमन क्योंप्रजातन्त्र देश है सुनिए यह पुकारबस के नीचे ले... Read more
clicks 211 View   Vote 0 Like   1:44pm 23 Dec 2012 #(सर्वाधिकार सुरक्षित )
Blogger: धीरेन्द्र सिंह
शब्दों की पुड़िया में एहसासों की मिठाई जब मिलती दिल खिलता आसमान अंगनायी इस धरती पर कितने हैं खुशियाँ देने वाले ऐसे इन्सानों को शत-शत है बधाई शब्दों में जब दिल मुस्काकर मिलते हैं नयन भींग जाते और मिल जाती नयी रुबाई कितना सुंदर जीवन है अच्छे लोगों संग बड़े नसीब से मिलती ह... Read more
clicks 243 View   Vote 0 Like   10:18am 23 Oct 2012 #रुबाई
Blogger: धीरेन्द्र सिंह
अनहद अद्भुत अकस्मात होता है तुम हो पास तो सबकुछ होता हैवलय भावनाओं की मरीचिका बन दहन को शमित कर सघन बन मन के सीपी का, मोती सोता हैसानिध्य में, सुगंध नयी बोता है अल्प नहीं, पूर्ण नहीं बल्कि अविरामराधा के कृष्ण जैसे सीता के राम स्पंदित, आनंदित आह्लादित सोता है लगन में मन मग... Read more
clicks 197 View   Vote 0 Like   8:11am 29 Aug 2012 #राधा
Blogger: धीरेन्द्र सिंह
आप से प्यार ना हुआ है चुपके से एहसासों ने छुआ है सोचिये समझिए ना सकुचाईएसावनी घटा सी बरस जाईये प्यार होता तो होती एक पुकारमेरे एहसासों का आप हैं आधार दिग-दिगंत अपरिमित अनंत अगणित अद्भुदता आप दर्शाईएसोचिए समझिए ना सकुचाईएसावनी घटा सी बरस जाईएसृष्टि को समझने की बड़ी ... Read more
clicks 220 View   Vote 0 Like   5:23am 4 Jul 2012 #प्यार
Blogger: धीरेन्द्र सिंह
स्वप्न नयनों से छलक पड़ते हैं बातें इरादों में दबजाती हैंअधूरी चाहतों की सूची है बड़ी चाहत संपूर्णता में कब आती है चुग रहे हैं हम चाहत की नमी यह नमी भी कहाँ अब्र लाती है सब्र से अब प्यार मिले ना मिले ज़िंदगी सोच यही हकलाती है इतने अरमान कि सब बेईमान लगें एहसान में भी स्व... Read more
clicks 218 View   Vote 0 Like   4:51am 23 Jun 2012 #प्यार
Blogger: धीरेन्द्र सिंह
कब सुन्दर लग जाता कोई कब दिल को छू जाता है एक पल का केवल मिलना लगता जन्मों का नाता हैकहते हैं कि दृष्टि हो सुन्दर सब सुन्दर लग जाता है यदि ऐसा कहना सच है तो दिल को हर क्यों ना भाता हैदिनों साथ रहता संग कोई प्रीति अधजगी रहती सोई दिल दृष्टि ना अकुलाता है उठती कोई ना जिज्ञासा ... Read more
clicks 210 View   Vote 0 Like   4:37am 14 Jun 2012 #जिज्ञासा
Blogger: धीरेन्द्र सिंह
बरखा रानी बूँद भर पानी भर देती प्रकृति में रवानी कोयल कूके,पत्ते सब गायेंधरा को मानो मिली जवानी बादल नभ में दौड़े धायें मेढक गली-गली टर्राएँचारों तरफ पानी ही पानी बरखा बरसे लगे सयानीपक्षी दुबके देख ठिकाना हरियाली का गूंजे गाना बरखा की चलती मनमानी चिड़िया ढूंढे दाना-... Read more
clicks 267 View   Vote 1 Like   9:42am 12 Jun 2012 #(सर्वाधिकार सुरक्षित )
Blogger: धीरेन्द्र सिंह
किसी उम्मीद में शब् भर रहा, जलता दिया भोर की किरणों ने, आकर जो हंगामा किया तपिश से भर गया एहसास, एक खुशबू लिएसुबह की लालिमा ने, ओ़स को जी भर पियायह क्यों होता है कैसे, लगे मौसम हो जैसे अभी बदली,अभी धूप, लुकाछिपी सी झलकियाँ इक आभा को लिए, शब् भर खिले चन्दा ना जाने क्यों छुपा... Read more
clicks 203 View   Vote 0 Like   10:29am 8 Jun 2012 #मोबाइल
Blogger: धीरेन्द्र सिंह
अब मेरी उम्मीद के जलते दिएबोलकर मुझसे यह चल दिएऔर ना प्रतीक्षा अब हो पाएगी जिंदगी भ्रष्टाचार में समा जायेगी  हर तरफ अवसर के झमेले हैं हाँथ कंधे पर अजीब यह रेले हैंघात और प्रतिघात बात बनाएगी उम्मीद की लौ जल ना पाएगी कर्म यदि प्रधान है तो विवश क्यों भाग्य यदि विधान है तो ... Read more
clicks 215 View   Vote 0 Like   6:28am 29 May 2012 #लौ
Blogger: धीरेन्द्र सिंह
आज पलटकर जीवन ने,दिया मुझे धिक्कार है भारत भूमि भयभीत है,कितना भ्रष्टाचार हैजीवन के हर पग पर,पक रहा निरंतर निठुरसत्कर्मों की सादगी,सजल,अचल,बेकार है हर विरोध के स्वर को,लें दबोच पल भर में  निचुड़-निचुड़ कर निचुड़े,कहें यही व्यवहार हैहो विनीत सह लेने की,आदत या मजबूरी है स... Read more
clicks 217 View   Vote 1 Like   6:21am 28 Apr 2012 #मज़बूरी
Blogger: धीरेन्द्र सिंह
आज तमस में फिर सुगंधित अमराई है सितारों ने जमघट आज फिर लगाई है चाँदनी ने हौले से जो छूआ चौखट आँगन तब से सिमटी, लजाई है झूम रही शाखें, पत्तियाँ करें बातें झींगुर झनक उठे, चाँद से दमक उठे हवाओं की ठंडक में निशा लिपट धाई हैआँगन के कोनों से गीत दी सुनाई है कहने को रात है पर प्... Read more
clicks 230 View   Vote 0 Like   6:50pm 24 Apr 2012 #चाँदनी
Blogger: धीरेन्द्र सिंह
  शब्द जब भावनाओं में ढलता है ख़्वाहिशों संग मन पिघलता है एक मिलन की ओर बढ़ता प्रवाह ज़िंदगी तो फकत समरसता हैजी भी लेने के हैं जुगत कईपसीने से ना फूल खिलता है कर्म और भाग्य की लुकाछिपी हैज़िंदगी भी लिए कई आतुरता हैशब्द ही तो समय को रंगता है शब्द में एकरसता तो विषमता है शब्द क... Read more
clicks 223 View   Vote 0 Like   1:01am 20 Apr 2012 #जीवन
Blogger: धीरेन्द्र सिंह
  फिर हवाओं ने छुआ नवपल्लवित पंखुड़ियाँ नव सुगंध ने सुरभि शृंखला संव्यवहार किया अभिनव रंग में हुआ प्रतिबिम्बित प्यारफिर चाहत ने राहों से प्रीतजनक तकरार किया लगन लगी की हो रही चारों ओर बतकही प्रीत की रीत यह बेढंगी सबने तो स्वीकार कियाअलख जगी तो लगी समाधि समर्पण की दिल ... Read more
Blogger: धीरेन्द्र सिंह
मेरी मजबूरी है कि तुमसे बड़ी दूरी है सोचता हूँ कि दिल कैसे करीब आयें मुझे तुम याद करो इश्क़ आबाद करो और हम चाहतों का नित सलीब पाएँ किसी से जुड़ जाना ज़िंदगी का तराना मन यह मस्ताना भी नया नसीब पाये कितने हैं रंग, अनेकों हैं तरंग-उमंग आशिक़ी हो दबंग अनुभव अजीब पाएँ तुम में चतुरा... Read more
clicks 205 View   Vote 0 Like   3:35am 11 Apr 2012 #
Blogger: धीरेन्द्र सिंह
मार्ग है प्रशस्त कदम सभी व्यस्त मंजिल को छूने की सब में खुमारी है सत्य और असत्य का संघर्ष चहुंओर निर्णय ना हो पाए कैसी लाचारी है सत्य को असत्य बनाने की कोशिशें असत्य की विजय रथ पर सवारी है ताम-झाम लाग-लश्कर असत्य संग फिर भी ना कैसे सत्य लगे भारी है एक तरफ हैं खड़े असत्य से ... Read more
Blogger: धीरेन्द्र सिंह
एक युद्ध ज़िंदगी है, चहुं ओर है लड़ाई तुम ढाल भी हो और हो भाल के सौदाई समर की ना बेला कोई और ना विश्राम समझौता कहीं हो रहा कहीं विजय तो दुहाई स्वेद मिश्रित लहू है या लहू संग स्वेदज़िंदगी को भेद रहा फिर आत्मीय संवेद अथक परिश्रम निनाद किन्तु वही चौपाई भाग्य की विडम्बना में ... Read more
clicks 191 View   Vote 0 Like   8:23am 26 Mar 2012 #
Blogger: धीरेन्द्र सिंह
शक्ति,सामर्थ्य मिले शौर्य स्वतः आएश्रेष्ठता स्वमेव कीर्ति पताका पा जायेभस्मासुर मानिंद जब करे वह परीक्षण कारवां में अबोला हताशा छा जाये व्यक्ति की ओजस्विता सिमटी सीमित परिधि समूह की तेजस्विता बनकर हर्षाए निजता की भँवर में परिवेश को समेटनास्वयं की गति में गति हो ज... Read more
clicks 204 View   Vote 0 Like   9:41am 29 Feb 2012 #
Blogger: धीरेन्द्र सिंह
झुक गयी साँझ एक जुल्फ तलेचाँद हो मनचला इठलाने लगासितारों की महफ़िलें सजने लगी आसमान बदलियाँ बहकाने लगानीड़ के निर्वाह में जीव-जन्तु व्यस्तचूल्हों में अभाव अकुलाने लगामान-मर्यादा के उलझन में उलझमकड़जाल फिर वही सुलझाने लगा शाम का सिंदूरी आमंत्रण तमस मेंराग संग रागिनी ... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   6:53am 25 Nov 2011 #साँझ
Blogger: धीरेन्द्र सिंह
स्वप्न नयनों से छलक पड़ते हैं बातें ख्वाबों में अक्सर दबजाती हैंअधूरी चाहतों की सूची है बड़ी चाहत संपूर्णता में कब आती है चुग रहे हैं हम चाहत की नमी यह नमी भी कहाँ अब्र लाती है सब्र से अब प्यार भी मिले ना मिले ज़िंदगी सोच यही हकलाती है इतने अरमान कि सब बेईमान लगें एहसान ... Read more
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