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आखर कलश

 रोज गढती हूं एक ख्वाब सहेजती हूं उसे श्रम से क्लांत हथेलियों के बीच आपके दिए अपमान के नश्तर अपने सीने में झेलती हूं सह जाती हूं तिल-तिल हंसती हूं खिल-खिल... -      देवयानी भारद्वाजमैं अपना चश्मा बदलना चाहती हूँ मेरे पास भरोसे की आँख थी मैंने पाया कि चीज़ें वैसी नहीं थीं जै...
आखर कलश...
Tag :कविताएँ
  June 28, 2013, 1:05 pm
अबकि बार तू सीता बनके मत आनास्त्री तेरे हज़ारों रूप,तू हर रूप में पावन,सुन्दर और मधुर।पर अबकि बार तू सीता या राधा बनके मत आना,द्रोपदी और दामिनी बनके भी मत आना,तू जौहर में जलती वीरांगना और,प्रेम के गीत गाती मीरा बनके भी मत आना,मेरी तरह चुप्प,बेबस और मूर्ख बनके भी मत आना। अब...
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Tag :कविताएँ
  June 21, 2013, 9:58 pm
सवालों के खोटे सिक्‍केआंख का यह आसमानक्‍यों इस तरह पिघलता है किख्‍वाबों के खूंटों सेसरक-सरक करगिर जाती है नींद?सदियों के इंतजार के बाद भीक्‍यों तेरे मिलन की बेलाजमाने से उलझती हुईसब्‍ज परबत की अलगनी पेटंगी रह जाती है?क्‍यों इंतजार की बास मारतीकिसी कलुटा की तरहअरमा...
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Tag :कविताएँ
  June 19, 2013, 10:30 pm
पता नहीं...माँ समझौतों में पूरी हुईपिता संघर्षों मेंदोनों ही का दिया कुछ-कुछ है मेरे पासपूरा किस में हूँगा पता नहीं...*****अनिवार्यताजानते हुए तुम्हारा चरित्रमैं विवश हूंअपने चरित्र प्रमाण-पत्र पर कराने के लिए तुम्हारे हस्ताक्षरयह मेरी इच्छा नहींमजबूरी हैएक अदद सरकार...
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Tag :कविताएँ
  June 17, 2013, 1:10 pm
नज़रें करती रहीं कुछ बयां देर तकहम भी पढ़ते रहे सुर्खियां देर तकआओ उल्फ़त की ऐसी कहानी लिखेंज़िक्र करता रहे ये जहां देर तकबज़्म ने लब तो खुलने की मोहलत न दीएक खमोशी रही दरमियां देर तकमैं तो करके सवाल अपना खामोश थातारे गिनता रहा आसमां देर तकदेखकर चाक दामन रफ़ूगर सभीबस उड़ाते ...
आखर कलश...
Tag :गजलें
  June 7, 2013, 9:29 pm
"पहले पहल सूखी थी, /कुछ पीली मुरझाई पत्तियां / फिर सूख गई पूरी की पूरी डाल / और तब से बदस्‍तूर जारी है / तने के भीतर से आती हुई /धमनियों का धीरे-धीरे सूखना" नन्द भारद्वाज की कविता- "बस्ती का पेड़"बाहर से आने वाले आघात काउलटकर कोई उत्तर नहीं दे पातापेड़वह चलकर जा नहीं जा सकताकिस...
आखर कलश...
Tag :कविताएँ
  May 30, 2013, 8:07 pm
"पहले पहल सूखी थी, /कुछ पीली मुरझाई पत्तियां / फिर सूख गई पूरी की पूरी डाल / और तब से बदस्‍तूर जारी है / तने के भीतर से आती हुई /धमनियों का धीरे-धीरे सूखना" नन्द भारद्वाज की कविता- "बस्ती का पेड़"बाहर से आने वाले आघात काउलटकर कोई उत्तर नहीं दे पातापेड़वह चलकर जा नहीं जा सकताकिस...
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Tag :कविताएँ
  May 30, 2013, 8:07 pm
दीर्घ विराम के पश्चात् आखर कलश एक बार फिर आपसे मुख़ातिब है जनाब अशोक मिज़ाज 'बद्र' साहब की दो बेहतरीन ग़ज़लों के साथ। उम्मीद है आपको इनकी शायरी का अंदाज़ पसंद आएगा।।(१)ज़रा सा नाम पा जाएँ उसे, मंज़िल समझते हैंबड़े नादान हैं मझधार को साहिल समझते हैं।अगर वो होश में रहते तो दरि...
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Tag :गजलें
  May 25, 2013, 7:04 pm
(1)जब कुरेदोगे उसे तुम, फिर हरा हो जाएगाज़ख्म अपनों का दिया,मुमकिन नहीं भर पायेगावक्त को पहचान कर जो शख्स चलता है नहींवक्त ठोकर की जुबां में ही उसे समझायेगा शहर अंधों का अगर हो तो भला बतलाइयेचाँद की बातें करो तो, कौन सुनने आयेगाजिस्म की पुरपेच गलियों में, भटकना छोड़ दोप्या...
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Tag :गजलें
  September 8, 2012, 6:43 pm
मोहम्‍मद शाहिद अख्‍तर बीआईटी, सिंदरी, धनबाद से केमिकल इं‍जीनियरिंग में बी. ई. मोहम्‍मद शाहिद अख्‍तरछात्र जीवन से ही वामपंथी राजनीति से जुड़ गए। अपने छात्र जीवन के समपनोपरांत आप इंजीनियर को बतौर कैरियरशुरू करने की जगह एक पूर्णकालिक कार्यकर्ता बन गए। पूर्णकालिक का...
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Tag :कविताएँ
  August 31, 2012, 1:49 pm
मालिनी गौतम                                                                    मालिनी गौतम प्रिंट मीडिया में एक सुपरिचित नाम है। देश की लगभग सभी प्रतिष्ठित हिन्दी पत्रिकाओं में उनकी रचनाएँ प्रकाशित होती रहती हैं। डॉ. मालिनी गौतम की रचनाओं का धरातल नितांत मौलिक और नवता लिये हुए है। ...
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Tag :कविताएँ
  August 29, 2012, 12:13 am
हेमंत शेषगद्य और पद्य में समानरूप से अपनी खास पहचान रखने वाले, बिहारी पुरस्कार से सम्मानित, ख्यात कवि, कथाकार, संपादक, आलोचक और कला-समीक्षक हेमंत शेष समकालीन हिंदी साहित्य के एक सशक्त हस्ताक्षर हैं. उनकी कविताएँ सिर्फ कविताएँ नहीं बल्कि एक चिलचिलाता यथार्थ है जिसकी च...
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Tag :कविताएँ
  August 24, 2012, 11:13 am
प्राण शर्माजन्म : १३ जून १९३७ को वजीराबाद (अब पाकिस्तान) में।शिक्षा :दिल्ली विश्वविद्यालय से एम ए बी एडकार्यक्षेत्र :प्राण शर्मा जी १९६५ से लंदन-प्रवास कर रहे हैं। वे यू.के. के लोकप्रिय शायर और लेखक है। यू.के. से निकलने वाली हिन्दी की एकमात्र पत्रिका 'पुरवाई' में गज़ल के ...
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Tag :गजलें
  August 21, 2012, 8:07 pm
अज़ीज़ आज़ादतुम हो खंज़र भी तो सीने में समा लेंगे तुम्हेंतुम ज़रा प्यार से बाहों में तो भर कर देखो।मेरा दावा है सब ज़हर उतर जाएगातुम मेरे शहर में दो दिन तो ठहर कर देखो।आज जो देश के हालत हैं उनमे अज़ीज़ आज़ाद साहब की शायरी की सियाही कभी ना मिटने वाला अमनपसन्दगी का पैग़ाम है जो स...
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Tag :गजलें
  August 19, 2012, 2:43 pm
ताकि मेरे नाम की धज्जियां उड़ जाएँबापू प्रश्न कर रहे-कहाँ गयी वह आजादी जिसके लिए हम भूखे रहे, वार सहे सड़कों पर लहुलुहान गिरते रहे कई बार जेल गए कटघरे में अड़े रहे, डटे रहे... सब गडमड करके अब ये गडमड करनेवाले मेरे निजित्व को उछाल रहे! क्या फर्क पड़ता है कि मैं प्रेमी था या... खुफ...
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Tag :कविताएँ
  August 17, 2012, 1:59 pm
१. तुम्हे बुला रहा हैशोरगुल मचाने वालों- तुम जाओकुछ करके दिखाने वालों- तुम आओलुट रहे हैं का रोना- बहुत हुआवो रहा चोर! कहना- बहुत हुआख़बर सुनना-सुनाना बहुत हुआबहुत गलत हुआ, बताना- बहुत हुआवक्त कैसा है बताना है? तुम जाओवक्त बदलना है तुम्हे- तुम आओज़िंदगी चार दिन की है- बहुत हु...
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Tag :कविताएँ
  August 15, 2012, 7:16 pm
शब्द यात्रा करते हैं और वे इस यात्रा में संवेदना अंवेरते अपना अर्थ पाते हैं । मैं तो बस उन शब्दों का पीछा करता हूँ .... अक्षरों के बीज जाने किसने बो दिए पानी देते-देते हमने जिंदगी गुजार दी । कोरा कागद है मन मेरा और ज़िंदगी तलाश है कुछ शब्दों की...-ओम पुरोहित 'कागद'सपनों की उधेड़...
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Tag :कविताएँ
  July 16, 2012, 12:59 pm
जन्म : २८ नवंबर १९६५ को झुँझनू, राजस्थान मेंसुशीला शिवराण (श्योराण)शिक्षा : बी.कॉम. (दिल्ली विश्वविद्यालय), बी.एड.- (मुम्बई विश्वविद्यालय), एम.ए. (राजस्थान विश्वविद्यालय)।कार्यक्षेत्र- अध्यापन एवं हिन्दी साहित्य, कविता पठन एवं लेखन। पिछ्ले २० वर्षों से अध्यापन के क्षेत्र ...
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Tag :हाइकू
  July 11, 2012, 11:41 am
प्रताप सहगलमित्रो, साहित्य के सहयात्रियों और प्रबुद्ध रचना धर्मियों को हमारा सादर नमन ! विगत कई माह से किन्ही कारणों से 'आखर कलश' आपकी सेवार्थ साहित्यिक गतिविधियों से लगभग विलग रहा. अब पुनः आप ही की प्रेरणा, मार्गदर्शन और साहचर्य से पुनः अपने पथ पर अग्रसर होने को आतुर औ...
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Tag :यात्रा वृत्तांत
  July 2, 2012, 8:55 am
                   सांवर दइयाजब देखता हूंजब देखता हूंधरती कोइसी तरह रौंदी-कुचलीदेखता हूँजव देखता हूँ आकाश कोइसी तरह अकड़े-ऎंठेदेखता हूँअब मैंकिस-किस से कहता फिरूँअपना दुख -यह धरती : मेरी माँ !यह आकाश : मेरा पिता !***बीजूका : एक अनुभूतिसिर नहींहै सिर की जगहऔंधी रखी हंडियादेह -...
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Tag :कविताएँ
  December 30, 2011, 5:17 pm
                    औरत सड़क किनारे खड़ी औरतकभी अकेले नहीं होतीउसका साया होती है मजबूरीआंचल के दुखमन में छिपे बहुत से रहस्यऔरत अकेली होकर भीकहीं अकेली नहीं होतीसींचे हुए परिवार की यादेंसूखे बहुत से पत्तेछीने गए सुखछीली गई आत्मासब कुछ होता हैठगी गई औरत के साथऔरत के पासअ...
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Tag :कविताएँ
  December 6, 2011, 10:34 pm
विजेन्द्र श्री विजेन्द्र निराला की काव्य परम्परा के प्रतिनिधि कवि हैं होने के साथ ही साथ एक प्रतिष्ठित चित्रकार भी हैं। विजेन्द्र जी चित्रकला को कविता का पूरक मानते हैं। यही कारण है कि उनके काव्य सृजन के भाव उनकी कृतियों में लय होते नजर आते हैं।उनके काव्य-चित्र संग...
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Tag :कविताएँ
  November 27, 2011, 7:25 pm
समकालीन कवि सतीश छिम्पा के काव्य संसार में प्रेमानुभूति की गहराइयाँ हैं और इन गहराइयों में डूबी प्रेम की कथा लहर दर लहर उठकर अथाह से अनंत तक का सफ़र करती हुई अनकहे, अनछुवे और अलौकिक प्रेम की कथा का अनंत सागर बन जाती हैं. मुलाहिजा फरमाईयेगा....१. एक लडकीएक लड़कीसो रही है मे...
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Tag :कविताएँ
  October 9, 2011, 10:01 pm
१. जल के लिएजितना भी जला दे               सूरजसुखा दे पवनसूखी-फटी पपड़ियों में         झलक आता हैधरती का प्यारजल के लिए-गहरे कहीं जज़्ब है जो।२. मेरी अँधेरी रातअँधेरा घना हो कितनादेख सकता हूँ मैं           उसकोकभी अन्धा लेकिन कर देता है                            सूरजकभी पाँखें जला द...
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Tag :कविताएँ
  October 3, 2011, 12:40 pm
समीक्षा दिनेश कुमार मालीजाने माने प्रकाशक "राज पाल एंड संज "द्वारा प्रकाशित पुस्तक "रेप तथा अन्य कहानियाँ "दिनेश कुमार मालीद्वारा  हिंदी भाषा में अनूदित प्रसिद्द उड़िया लेखिकासरोजिनी साहूका कहानी संग्रह है . दिनेश जी के हिंदी अनुवाद की ख़ास बात ये है कि किसी भी कहान...
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Tag :पुस्तक समीक्षा
  September 14, 2011, 2:19 pm
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  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
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