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Blog: आखर कलश

Blogger: naredra vyas
 रोज गढती हूं एक ख्वाब सहेजती हूं उसे श्रम से क्लांत हथेलियों के बीच आपके दिए अपमान के नश्तर अपने सीने में झेलती हूं सह जाती हूं तिल-तिल हंसती हूं खिल-खिल... -      देवयानी भारद्वाजमैं अपना चश्मा बदलना चाहती हूँ मेरे पास भरोसे की आँख थी मैंने पाया कि चीज़ें वैसी नहीं थीं जै... Read more
clicks 229 View   Vote 0 Like   7:35am 28 Jun 2013 #कविताएँ
Blogger: naredra vyas
अबकि बार तू सीता बनके मत आनास्त्री तेरे हज़ारों रूप,तू हर रूप में पावन,सुन्दर और मधुर।पर अबकि बार तू सीता या राधा बनके मत आना,द्रोपदी और दामिनी बनके भी मत आना,तू जौहर में जलती वीरांगना और,प्रेम के गीत गाती मीरा बनके भी मत आना,मेरी तरह चुप्प,बेबस और मूर्ख बनके भी मत आना। अब... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   4:28pm 21 Jun 2013 #कविताएँ
Blogger: naredra vyas
सवालों के खोटे सिक्‍केआंख का यह आसमानक्‍यों इस तरह पिघलता है किख्‍वाबों के खूंटों सेसरक-सरक करगिर जाती है नींद?सदियों के इंतजार के बाद भीक्‍यों तेरे मिलन की बेलाजमाने से उलझती हुईसब्‍ज परबत की अलगनी पेटंगी रह जाती है?क्‍यों इंतजार की बास मारतीकिसी कलुटा की तरहअरमा... Read more
clicks 200 View   Vote 0 Like   5:00pm 19 Jun 2013 #कविताएँ
Blogger: naredra vyas
पता नहीं...माँ समझौतों में पूरी हुईपिता संघर्षों मेंदोनों ही का दिया कुछ-कुछ है मेरे पासपूरा किस में हूँगा पता नहीं...*****अनिवार्यताजानते हुए तुम्हारा चरित्रमैं विवश हूंअपने चरित्र प्रमाण-पत्र पर कराने के लिए तुम्हारे हस्ताक्षरयह मेरी इच्छा नहींमजबूरी हैएक अदद सरकार... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   7:40am 17 Jun 2013 #कविताएँ
Blogger: naredra vyas
नज़रें करती रहीं कुछ बयां देर तकहम भी पढ़ते रहे सुर्खियां देर तकआओ उल्फ़त की ऐसी कहानी लिखेंज़िक्र करता रहे ये जहां देर तकबज़्म ने लब तो खुलने की मोहलत न दीएक खमोशी रही दरमियां देर तकमैं तो करके सवाल अपना खामोश थातारे गिनता रहा आसमां देर तकदेखकर चाक दामन रफ़ूगर सभीबस उड़ाते ... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   3:59pm 7 Jun 2013 #गजलें
Blogger: naredra vyas
"पहले पहल सूखी थी, /कुछ पीली मुरझाई पत्तियां / फिर सूख गई पूरी की पूरी डाल / और तब से बदस्‍तूर जारी है / तने के भीतर से आती हुई /धमनियों का धीरे-धीरे सूखना" नन्द भारद्वाज की कविता- "बस्ती का पेड़"बाहर से आने वाले आघात काउलटकर कोई उत्तर नहीं दे पातापेड़वह चलकर जा नहीं जा सकताकिस... Read more
clicks 164 View   Vote 0 Like   2:37pm 30 May 2013 #कविताएँ
Blogger: naredra vyas
"पहले पहल सूखी थी, /कुछ पीली मुरझाई पत्तियां / फिर सूख गई पूरी की पूरी डाल / और तब से बदस्‍तूर जारी है / तने के भीतर से आती हुई /धमनियों का धीरे-धीरे सूखना" नन्द भारद्वाज की कविता- "बस्ती का पेड़"बाहर से आने वाले आघात काउलटकर कोई उत्तर नहीं दे पातापेड़वह चलकर जा नहीं जा सकताकिस... Read more
clicks 214 View   Vote 0 Like   2:37pm 30 May 2013 #कविताएँ
Blogger: naredra vyas
दीर्घ विराम के पश्चात् आखर कलश एक बार फिर आपसे मुख़ातिब है जनाब अशोक मिज़ाज 'बद्र' साहब की दो बेहतरीन ग़ज़लों के साथ। उम्मीद है आपको इनकी शायरी का अंदाज़ पसंद आएगा।।(१)ज़रा सा नाम पा जाएँ उसे, मंज़िल समझते हैंबड़े नादान हैं मझधार को साहिल समझते हैं।अगर वो होश में रहते तो दरि... Read more
clicks 180 View   Vote 0 Like   1:34pm 25 May 2013 #गजलें
Blogger: naredra vyas
(1)जब कुरेदोगे उसे तुम, फिर हरा हो जाएगाज़ख्म अपनों का दिया,मुमकिन नहीं भर पायेगावक्त को पहचान कर जो शख्स चलता है नहींवक्त ठोकर की जुबां में ही उसे समझायेगा शहर अंधों का अगर हो तो भला बतलाइयेचाँद की बातें करो तो, कौन सुनने आयेगाजिस्म की पुरपेच गलियों में, भटकना छोड़ दोप्या... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   1:13pm 8 Sep 2012 #गजलें
Blogger: naredra vyas
मोहम्‍मद शाहिद अख्‍तर बीआईटी, सिंदरी, धनबाद से केमिकल इं‍जीनियरिंग में बी. ई. मोहम्‍मद शाहिद अख्‍तरछात्र जीवन से ही वामपंथी राजनीति से जुड़ गए। अपने छात्र जीवन के समपनोपरांत आप इंजीनियर को बतौर कैरियरशुरू करने की जगह एक पूर्णकालिक कार्यकर्ता बन गए। पूर्णकालिक का... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   8:19am 31 Aug 2012 #कविताएँ
Blogger: naredra vyas
मालिनी गौतम                                                                    मालिनी गौतम प्रिंट मीडिया में एक सुपरिचित नाम है। देश की लगभग सभी प्रतिष्ठित हिन्दी पत्रिकाओं में उनकी रचनाएँ प्रकाशित होती रहती हैं। डॉ. मालिनी गौतम की रचनाओं का धरातल नितांत मौलिक और नवता लिये हुए है। ... Read more
clicks 170 View   Vote 0 Like   6:43pm 28 Aug 2012 #कविताएँ
Blogger: naredra vyas
हेमंत शेषगद्य और पद्य में समानरूप से अपनी खास पहचान रखने वाले, बिहारी पुरस्कार से सम्मानित, ख्यात कवि, कथाकार, संपादक, आलोचक और कला-समीक्षक हेमंत शेष समकालीन हिंदी साहित्य के एक सशक्त हस्ताक्षर हैं. उनकी कविताएँ सिर्फ कविताएँ नहीं बल्कि एक चिलचिलाता यथार्थ है जिसकी च... Read more
clicks 179 View   Vote 0 Like   5:43am 24 Aug 2012 #कविताएँ
Blogger: naredra vyas
प्राण शर्माजन्म : १३ जून १९३७ को वजीराबाद (अब पाकिस्तान) में।शिक्षा :दिल्ली विश्वविद्यालय से एम ए बी एडकार्यक्षेत्र :प्राण शर्मा जी १९६५ से लंदन-प्रवास कर रहे हैं। वे यू.के. के लोकप्रिय शायर और लेखक है। यू.के. से निकलने वाली हिन्दी की एकमात्र पत्रिका 'पुरवाई' में गज़ल के ... Read more
clicks 196 View   Vote 0 Like   2:37pm 21 Aug 2012 #गजलें
Blogger: naredra vyas
अज़ीज़ आज़ादतुम हो खंज़र भी तो सीने में समा लेंगे तुम्हेंतुम ज़रा प्यार से बाहों में तो भर कर देखो।मेरा दावा है सब ज़हर उतर जाएगातुम मेरे शहर में दो दिन तो ठहर कर देखो।आज जो देश के हालत हैं उनमे अज़ीज़ आज़ाद साहब की शायरी की सियाही कभी ना मिटने वाला अमनपसन्दगी का पैग़ाम है जो स... Read more
clicks 247 View   Vote 0 Like   9:13am 19 Aug 2012 #गजलें
Blogger: naredra vyas
ताकि मेरे नाम की धज्जियां उड़ जाएँबापू प्रश्न कर रहे-कहाँ गयी वह आजादी जिसके लिए हम भूखे रहे, वार सहे सड़कों पर लहुलुहान गिरते रहे कई बार जेल गए कटघरे में अड़े रहे, डटे रहे... सब गडमड करके अब ये गडमड करनेवाले मेरे निजित्व को उछाल रहे! क्या फर्क पड़ता है कि मैं प्रेमी था या... खुफ... Read more
clicks 200 View   Vote 0 Like   8:29am 17 Aug 2012 #कविताएँ
Blogger: naredra vyas
१. तुम्हे बुला रहा हैशोरगुल मचाने वालों- तुम जाओकुछ करके दिखाने वालों- तुम आओलुट रहे हैं का रोना- बहुत हुआवो रहा चोर! कहना- बहुत हुआख़बर सुनना-सुनाना बहुत हुआबहुत गलत हुआ, बताना- बहुत हुआवक्त कैसा है बताना है? तुम जाओवक्त बदलना है तुम्हे- तुम आओज़िंदगी चार दिन की है- बहुत हु... Read more
clicks 217 View   Vote 0 Like   1:46pm 15 Aug 2012 #कविताएँ
Blogger: naredra vyas
शब्द यात्रा करते हैं और वे इस यात्रा में संवेदना अंवेरते अपना अर्थ पाते हैं । मैं तो बस उन शब्दों का पीछा करता हूँ .... अक्षरों के बीज जाने किसने बो दिए पानी देते-देते हमने जिंदगी गुजार दी । कोरा कागद है मन मेरा और ज़िंदगी तलाश है कुछ शब्दों की...-ओम पुरोहित 'कागद'सपनों की उधेड़... Read more
clicks 226 View   Vote 0 Like   7:29am 16 Jul 2012 #कविताएँ
Blogger: naredra vyas
जन्म : २८ नवंबर १९६५ को झुँझनू, राजस्थान मेंसुशीला शिवराण (श्योराण)शिक्षा : बी.कॉम. (दिल्ली विश्वविद्यालय), बी.एड.- (मुम्बई विश्वविद्यालय), एम.ए. (राजस्थान विश्वविद्यालय)।कार्यक्षेत्र- अध्यापन एवं हिन्दी साहित्य, कविता पठन एवं लेखन। पिछ्ले २० वर्षों से अध्यापन के क्षेत्र ... Read more
clicks 239 View   Vote 0 Like   6:11am 11 Jul 2012 #हाइकू
Blogger: naredra vyas
प्रताप सहगलमित्रो, साहित्य के सहयात्रियों और प्रबुद्ध रचना धर्मियों को हमारा सादर नमन ! विगत कई माह से किन्ही कारणों से 'आखर कलश' आपकी सेवार्थ साहित्यिक गतिविधियों से लगभग विलग रहा. अब पुनः आप ही की प्रेरणा, मार्गदर्शन और साहचर्य से पुनः अपने पथ पर अग्रसर होने को आतुर औ... Read more
clicks 252 View   Vote 0 Like   3:25am 2 Jul 2012 #यात्रा वृत्तांत
Blogger: naredra vyas
विजेन्द्र श्री विजेन्द्र निराला की काव्य परम्परा के प्रतिनिधि कवि हैं होने के साथ ही साथ एक प्रतिष्ठित चित्रकार भी हैं। विजेन्द्र जी चित्रकला को कविता का पूरक मानते हैं। यही कारण है कि उनके काव्य सृजन के भाव उनकी कृतियों में लय होते नजर आते हैं।उनके काव्य-चित्र संग... Read more
clicks 181 View   Vote 0 Like   1:55pm 27 Nov 2011 #कविताएँ
Blogger: naredra vyas
समकालीन कवि सतीश छिम्पा के काव्य संसार में प्रेमानुभूति की गहराइयाँ हैं और इन गहराइयों में डूबी प्रेम की कथा लहर दर लहर उठकर अथाह से अनंत तक का सफ़र करती हुई अनकहे, अनछुवे और अलौकिक प्रेम की कथा का अनंत सागर बन जाती हैं. मुलाहिजा फरमाईयेगा....१. एक लडकीएक लड़कीसो रही है मे... Read more
clicks 184 View   Vote 0 Like   4:31pm 9 Oct 2011 #कविताएँ
Blogger: naredra vyas
१. जल के लिएजितना भी जला दे               सूरजसुखा दे पवनसूखी-फटी पपड़ियों में         झलक आता हैधरती का प्यारजल के लिए-गहरे कहीं जज़्ब है जो।२. मेरी अँधेरी रातअँधेरा घना हो कितनादेख सकता हूँ मैं           उसकोकभी अन्धा लेकिन कर देता है                            सूरजकभी पाँखें जला द... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   7:10am 3 Oct 2011 #कविताएँ
Blogger: naredra vyas
समीक्षा दिनेश कुमार मालीजाने माने प्रकाशक "राज पाल एंड संज "द्वारा प्रकाशित पुस्तक "रेप तथा अन्य कहानियाँ "दिनेश कुमार मालीद्वारा  हिंदी भाषा में अनूदित प्रसिद्द उड़िया लेखिकासरोजिनी साहूका कहानी संग्रह है . दिनेश जी के हिंदी अनुवाद की ख़ास बात ये है कि किसी भी कहान... Read more
clicks 235 View   Vote 0 Like   8:49am 14 Sep 2011 #पुस्तक समीक्षा
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