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शेखचिल्ली का बाप

महिला ब्लागर को अपना फ़ोटू व नाम देना पसंद नहीं है। इस पोस्ट में उनका नाम था। इसे किसी ब्लाग वाले ने छाप दिया तो उन महिला ब्लागर ने कहा कि हमारा फ़ोटू निकालो। उन ब्लागर साहब ने तो निकाला नहीं पर हमने निकाल दिया।देखो फ़ोटू निकालना कितना आसान है ?पर कोई निकालना चाहे तब न .ब...
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  July 7, 2012, 8:07 pm
(स्पेशल अपील - बुरा न मानो होली है वाले जज़्बात लेकर मेरी यह रचना पढ़ी जाए, तभी आप इसका लुत्फ़ ले सकेंगे।)            ‘चल रचना, तुझे अलबेला जी बुला रहे हैं।‘ -मैंने बुक शेल्फ़ में टेक लगाए बैठी एक रचना से कहा।             ‘मेरी रचना‘ नाम से यह कि...
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Tag :रचना
  March 15, 2011, 10:23 pm
दुनियाआजदुखकाघरहैऔरइंसानकाघरभीयहीहै।दुनियाकोदुखसेभरनेवालाभीकोईऔरनहींहैबल्किखुदइंसानहीहै।हरइंसानकाकीआदतऔरउसकीसोचदूसरोंसेथोड़ीबहुतअलगज़रूरहै।इंसानकीयहएकऐसीख़ासियतहैजिसकीवजहसेदुनियामेंतरक्क़ीकेकामहुएऔरदुनियामेंजितनीबर्बादियांफैलीं, वेसबभीइसी...
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Tag :'शादी'
  January 28, 2011, 10:46 pm
शरीफ लोग तो शराफ़त से ही रहते आये हैं लेकिन शरारत करने वालों को जब तक सरकार दुलत्तियां खाने के लिये हमारे गधे के पीछे खड़ा न करेगी , अमन क़ायम नहीं हो सकता ।केवल राम को मासूम से कहां डर है और मासूम को रूपचंद शास्त्री का ख़ौफ़ कब है ?लेकिन इन दोनों के बच्चों का अपहरण करने वाले ग़ु...
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Tag :चिता
  December 26, 2010, 11:44 am
हमारे क़ारईन हज़रात उर्फ़ प्यारे पाठको , हम उर्दू लिखते हैं और वह भी गाढ़ी । हम ऐसा क्यों करते हैं ?हम बताएंगे बाद में पहले आप क़यास लगा लीजिए ख़ूब अच्छी तरह और तब तक आप हमारा यह कलाम देखिए जो हमने छोड़ा है "अमन के पैग़ाम" पर । @ MAsoom साहेब ! हम आज सलाम करने भी आए हैं और कलाम करने भी ।हुआ य...
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Tag :
  December 25, 2010, 4:39 pm
आज शेख़चिल्ली अपना मोबाइल चार्ज होने के लिए घर पर छोड़ कर कहीं चले गए। हम अस्तंजा फ़रमा रहे थे कि अचानक मोबाइल की बेल बजी। हम फ़ौरन साफ़ और पाक होकर मोबाइल की तरफ़ लपके कि शायद दूसरी तरफ़ से हमारी होने वाली बहू की आवाज़ ही सुनाई दे जाये लेकिन हाय रे क़िस्मत! पता चला कि दूसरी तरफ़ से ...
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Tag :सीएनजी बीड़ी
  December 22, 2010, 8:40 pm

जो उलझ कर रह गई है फ़ाइलों के जाल में गांव तक वो रौशनी आएगी कितने साल मेंबूढ़ा बरगद साक्षी है किस तरह से खो गईरमसुधी की झोंपड़ी सरपंच की चौपाल मेंखेत जो सीलिंग के थे सब चक में शामिल हो गए हमको पट्टे की सनद मिलती भी है तो ताल मेंजिसकी कीमत कुछ न हो इस भीड़ के माहौल मेंऐसा सिक्क...
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  December 10, 2010, 8:11 pm
आदमी हमने अपने जैसा देखा तो बस एक ही जगह देखा ।कहां देखा ?आईने मे देखा है बस ।लेकिन वक़्त की बात है कि हमारी शेख़ी यानि हमारी बीवी कम महबूबा तो मायके जा बैठी और चिठ्ठाजगत ने चारपाई पकड़ ली है । लिहाज़ा हम न तो अपने जौहर अपने घर मे दिखा पा रहे है और न घर के बाहर ।अपनी वाणी को ब्ला...
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  December 8, 2010, 5:21 pm
यह बताया जायेगा  आपको अमन के पैगाम पर जल्द  ही .तब तक इंतज़ार कीजिये .और  इंतज़ार का मज़ा लीजिये ....
शेखचिल्ली का बाप...
Tag :
  December 3, 2010, 9:14 pm
आदमी के बहुत से रूप हैं। जितने रूप असली दुनिया में हैं उतने ही इस छलावे की दुनिया में भी हैं। लोग दुखी हैं। वे दिल बहलाने की खातिर इस सच्ची झूठी दुनिया की सैर पर आते हैं और यहां भी उनकी मुठभेड़ असली दुनिया की परेशानियों से हो जाती है। झगड़े-टंटे उन्हें परेशान करते हैं, मुझ...
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Tag :
  November 27, 2010, 8:55 pm
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