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Arvind Jangid

बलात्कारियों के लिए कौनसी सजा उचित है या होनी चाहिए ये तो देश के बुद्धिजीवी और प्रबुद्ध व्यक्ति तय कर ही लेंगे मगर मैं कुछ और भी सोचता हूँ, जो कुछ इस तरह से हैं-१. कोई भी व्यक्ति इस ओर ध्यान क्यूँ नहीं दे रहा कि चाहे वो आदमी हो या फिर औरत उस पर समाज का सीधा सीधा असर पड़ता है. ...
Arvind Jangid...
Tag :लेख
  December 23, 2012, 7:33 am
क्या कहना था,बदलते मौसम से,यादों में भीगी नम हवाओं से,उस दोपहर से,जिसने बहुत भिगोया,फिर उसी खारी बूँद ने,चुप कर दिया सदियों के लिए....***जब भी खुद से मिला,वक्त को रुकते हुए देखा,फिर सब धुंधला,वक्त में ही कहीं,कुछ मिटता जाए,जब भी खुद से मिला***किसी से चुराए थे,कुछ अधूरे ख्वाब..वो ...
Arvind Jangid...
Tag :कुछ बातें हैं दिल की
  October 14, 2012, 9:36 am
जनाब सच्चाई तो ये ही है अच्छी लगे या या बुरी,हम जब सो रहे थे तब विदेशी सांड चर रहे थे.यहाँ खुद की गलती तो  कोई मानने से रहा,टीवी पर नेता एक दूसरे पर कालिख मल रहे थे.तुम जब उसके गुनाहों के सबूत जमा कर रहे थे,हम उसका नाम 'नोबेल शान्ति' के लिए भिजवा रहे थे.बुद्धिजीवी माथा पच्ची प...
Arvind Jangid...
Tag :कविता
  October 11, 2012, 8:39 am
कहते हैं वक्त में बहुत बड़ी ताकत होती है, वो बहुत कुछ मिटा देता है और बहुत कुछ बना भी मगर कुछ यादें दिल की गहराइयों में समा जाती हैं जो उमर भर पीछा करती हैं, उन्हें कोई चाहकर भी मिटा नहीं सकता। रामप्रसाद अपने पिताजी के साथ पंजाब के एक छोटे से कस्बे में रहता था। रामप्रसाद क...
Arvind Jangid...
Tag :लघु कथा
  October 6, 2012, 2:43 pm
रेखा कई दिनों से महसूस कर रही थी कि विपिन के साथ सब कुछ ठीक नहीं था। पूछने पर विपिन उसे बातों ही बातों में टाल देता। आज जब विपिन ऑफिस से लौटा तो रेखा ने फिर पूछा " क्या बात है विपिन, कुछ दिनों से तुम नोर्मल नहीं हो, अगर कोई बात है तो बताओ...हो सकता है मैं तुम्हारी कुछ मदद कर सकू...
Arvind Jangid...
Tag :लघु कथा
  September 28, 2012, 5:58 pm
"सच" कुछ बाते हैं दिल की,एक एक करके कहता हूँ,एक एक करके समेट लूँगा ।"सच" यकी रख कोई आने से रहा,चल आज घर को फिर से सजाते हैं।"सच" मुझे अब समझाना नहीं,अँधेरे जहाँ ले चले मुझे जाने दे।"सच" कभी वक्त निकाल कर आना,क्या क्या जला है आग में बताउंगा।"सच" जाने जमाने को क्या हुआ,देख आदमी बरस...
Arvind Jangid...
Tag :कुछ बातें हैं दिल की
  July 3, 2012, 8:56 am
जब कभी मन नहीं लगता,तो मैं बाहर निकल पड़ता हूँ,मगर सच कहूँ तो,एक अजीब से फासले के साथ,ये मैंने नहीं बनाया,तो फिर किसने बनाया, मुझे कुछ पता नहीं,हाँ, मगर कोई बात तो है,जब भी मैं बोलता हूँ, कुछ डरा सा रहता हूँ,हाँ, ज्यादातर चुप ही रहता हूँ,इसमे मेरी कोई गलती नहीं,लोग सोच कर बोलत...
Arvind Jangid...
Tag :कबिता
  June 27, 2012, 8:03 pm
शिकायत  तुझसे अब रही तो नहीं,तेरी लकीर हाथों से गुजरी तो नहीं।तेरे नाम के दो आंसू तो संभाले  हूँ,आज  मेरे घर  कोई कमी तो नहीं।आँखों  में है तेरे भी ये घुटन कैसी,कुछ तो है बात  जो कही तो नहीं।"सच" कैसे पहचाने कोई नसीब को,चेहरों की उसके यहाँ कमी तो नहीं।...
Arvind Jangid...
Tag :कविता
  April 19, 2012, 7:28 am
ऑफिस से लौटने पर विपिन ने देखा कि सविता कमरे में नहीं थी।"माँ.....सविता कहा है? ""बेटा अब तुम्हे क्या बताऊ.....मैंने तुम्हे बहुत समझाया.....मगर तुम नहीं माने। रोज-रोज गड़े मुर्दे उखाडने में लगे रहते थे.....ये सही नहीं था। सविता तो पाँच बजे वाली बस से अपने पिताजी के साथ गाँव चली गय...
Arvind Jangid...
Tag :लघु कथा
  April 18, 2012, 2:11 pm
लिखा लकीरों का कभी मिटना नहीं,है वो पत्थर जो कभी पिघलना नहीं,क्या क्या  खोना है और क्या पाना है, पत्थर कोई दर्द बनकर रह जाना है।रूठे को मनाये  जमाने में रीत नहीं,खुद से बढ़कर तेरा कोई मीत नहीं,मिलना कुछ तो कुछ  छूट जाना  है,बड़ा नाजुक है दिल कहीं टूट जाना है।कुछ रिश्ते तो ...
Arvind Jangid...
Tag :कविता
  April 13, 2012, 8:12 am
रामप्रसाद सरकारी दफ्तर में लिपिक था। उसे नौकरी लगे कुछ ज्यादा वक्त हुआ नहीं था। वो नौकरी के दाव पेंच, उतार चढ़ाव से कुछ कम ही वाकिफ़ था। मगर थोड़े ही समय में उसने इतना तो जरूर समझ लिया कि नौकरी चाहे सरकारी हो या निजी, वो भी समाज के बुरे और अच्छे प्रभावों से प्रभावित होगी ...
Arvind Jangid...
Tag :लघु कथा
  November 28, 2011, 9:04 am
नीरज और सुधा शहर के पास वाले गाँव के प्राथमिक विद्यालय में अध्यापक थे। नीरज पिछले कुछ सालों से उसी विद्यालय में कार्यरत था मगर सुधा को अभी कुछ ही समय हुआ था सरकारी नौकरी लगे। अध्यापन का सपना, सुधा ने बचपन से ही संजो रखा था। परिवार की कमजोर आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद ...
Arvind Jangid...
Tag :लघु कथा
  November 24, 2011, 8:48 am
किसको "आप"  लगाकर संबोधित करें और किसे "तू"  यह तो व्यक्ति विशेष पर निर्भर करता है। हिंदी भाषा में "आप" सम्माननीय व्यक्तियों के लगाया जाता है और "तू" को हम उस व्यक्ति को संबोधित करने के लिए लगाते हैं जो या तो सम्मान का हकदार नहीं है या फिर जिसे सम्मान देना ही न...
Arvind Jangid...
Tag :लेख
  October 18, 2011, 9:05 pm
आज आईने में  खुद को न देख,जिंदगी को आईने से भी न देख।रहने  दे उसको वक्त में ही छिपा,बेवजह परदों को हटाकर न देख।वही  कुछ चेहरे हैं जाने पहचाने,इनको यूँ आजमाकर तो न देख।है  फासला कितना तेरा मुझसे,परछाइयों  को मिटाकर न देख।क्या खो गया था तेरा उस शहर में,हाथों की लकीरों पर नि...
Arvind Jangid...
Tag :कविता
  September 18, 2011, 10:55 am
इक रोज ये नीरस जिंदगी बीत जायेगी,सूनी रातों की तन्हा चाँदनी रीत जायेगी।***कोई बात न कर उसकी बेवफाई की यहाँ,है वो मेरी कहानी साथ मेरे बीत जायेगी।***इक  दिल ही तो था टूट कर बिखर गया,जोड़ने में इसको उमर सारी बीत जायेगी।***लगता है  आज वो  गरीबी मेरे  नसीब की, दुश्मनी  नसीब की देखू...
Arvind Jangid...
Tag :कविता
  August 16, 2011, 2:18 pm
किसी का दिल तोड़ना यहाँ कोई जुर्म नहीं,हाँ इस गुनाह की यहाँ कोई सजा भी नहीं। जज़्बातों के सहारे क्या कोई जिंदगी नहीं,रो लें मगर आसुओं  की  कीमत भी नहीं।उमर रह जाती है बस एक तलाश बनकर,कुछ सवालों के यहाँ क्यों जवाब भी नहीं।ज़िंदगी है ना जाने किस भरम के सहारे,टूट जाये तो जी...
Arvind Jangid...
Tag :कविता
  June 21, 2011, 9:09 pm
आपने सदैव ही मार्गदर्शन देकर हौंसला बढ़ाया है, आपका शुक्रिया।  "कहानी घर" में आपका हार्दिक स्वागत है। (यहाँ लघु कथाओं के माध्यम से मैंने कुछ घुटन कम करने की कोशिश की है )शांति बाई कहानी "कहानी घर" में पूर्व में Post कर चुका हूँ। शांति बाई का पति अब इस दुनिया में नहीं था। वो ट...
Arvind Jangid...
Tag :लघु कथा
  June 1, 2011, 8:21 am
एक बार एक किसान भरी दोपहर में खेत में काम कर रहा था। किसान को गुमान था तो इतना की 'मन जो घड़गी वो बाड़ में बड़गी' अर्थात विधाता ने उस जैसा बुद्धिमान किसी दूसरे को नहीं बनाया है। वो था गाँव का ठेठ ठोठ। किसान ने एक आदमी को सूट बूट लगा कर रास्ते से जाते देखा। किसान ने उसे आव...
Arvind Jangid...
Tag :लोक कथा
  May 19, 2011, 9:48 pm
पत्ते-पत्ते में  किसने  फूँकी जान है रे,साँसों का खजाना जिसके हाथ है रे। करने लगा मनमानी जग में आकर,भूला की होना एक दिन हिसाब है रे। किसको ढूँढता हैं मंदिर मस्जिद में,कण  कण में  उसका तो वास है रे। नेकी के  सिवाय क्या है साथ जाना,किस  पर तुझको यूं अभिमान है रे। हरी को सुमर ...
Arvind Jangid...
Tag :भजन
  May 4, 2011, 7:10 pm
आज रामप्रसाद कार्यालय से जल्दी लौट आया था। उसने उसकी पत्नी सरोज से कहा की वो अपना सारा सामान सूटकेस में रख ले क्यों की वो कहीं जा रहे हैं। सूटकेस लेकर रामप्रसाद बगैर माँ को कुछ बताए सरोज के साथ घर से निकल पड़ा। बस में बैठने के बाद रामप्रसाद ने सरोज से कहा "देखो सरोज, मैं...
Arvind Jangid...
Tag :लघु कथा
  April 28, 2011, 2:59 pm
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