POPULAR ENGLISH+ SIGNUP LOGIN

Blog: Arvind Jangid

Blogger: arvind jangid
बलात्कारियों के लिए कौनसी सजा उचित है या होनी चाहिए ये तो देश के बुद्धिजीवी और प्रबुद्ध व्यक्ति तय कर ही लेंगे मगर मैं कुछ और भी सोचता हूँ, जो कुछ इस तरह से हैं-१. कोई भी व्यक्ति इस ओर ध्यान क्यूँ नहीं दे रहा कि चाहे वो आदमी हो या फिर औरत उस पर समाज का सीधा सीधा असर पड़ता है. ... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   2:03am 23 Dec 2012 #लेख
Blogger: arvind jangid
क्या कहना था,बदलते मौसम से,यादों में भीगी नम हवाओं से,उस दोपहर से,जिसने बहुत भिगोया,फिर उसी खारी बूँद ने,चुप कर दिया सदियों के लिए....***जब भी खुद से मिला,वक्त को रुकते हुए देखा,फिर सब धुंधला,वक्त में ही कहीं,कुछ मिटता जाए,जब भी खुद से मिला***किसी से चुराए थे,कुछ अधूरे ख्वाब..वो ... Read more
clicks 71 View   Vote 0 Like   4:06am 14 Oct 2012 #कुछ बातें हैं दिल की
Blogger: arvind jangid
जनाब सच्चाई तो ये ही है अच्छी लगे या या बुरी,हम जब सो रहे थे तब विदेशी सांड चर रहे थे.यहाँ खुद की गलती तो  कोई मानने से रहा,टीवी पर नेता एक दूसरे पर कालिख मल रहे थे.तुम जब उसके गुनाहों के सबूत जमा कर रहे थे,हम उसका नाम 'नोबेल शान्ति' के लिए भिजवा रहे थे.बुद्धिजीवी माथा पच्ची प... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   3:09am 11 Oct 2012 #कविता
Blogger: arvind jangid
कहते हैं वक्त में बहुत बड़ी ताकत होती है, वो बहुत कुछ मिटा देता है और बहुत कुछ बना भी मगर कुछ यादें दिल की गहराइयों में समा जाती हैं जो उमर भर पीछा करती हैं, उन्हें कोई चाहकर भी मिटा नहीं सकता। रामप्रसाद अपने पिताजी के साथ पंजाब के एक छोटे से कस्बे में रहता था। रामप्रसाद क... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   9:13am 6 Oct 2012 #लघु कथा
Blogger: arvind jangid
रेखा कई दिनों से महसूस कर रही थी कि विपिन के साथ सब कुछ ठीक नहीं था। पूछने पर विपिन उसे बातों ही बातों में टाल देता। आज जब विपिन ऑफिस से लौटा तो रेखा ने फिर पूछा " क्या बात है विपिन, कुछ दिनों से तुम नोर्मल नहीं हो, अगर कोई बात है तो बताओ...हो सकता है मैं तुम्हारी कुछ मदद कर सकू... Read more
clicks 78 View   Vote 0 Like   12:28pm 28 Sep 2012 #लघु कथा
Blogger: arvind jangid
"सच" कुछ बाते हैं दिल की,एक एक करके कहता हूँ,एक एक करके समेट लूँगा ।"सच" यकी रख कोई आने से रहा,चल आज घर को फिर से सजाते हैं।"सच" मुझे अब समझाना नहीं,अँधेरे जहाँ ले चले मुझे जाने दे।"सच" कभी वक्त निकाल कर आना,क्या क्या जला है आग में बताउंगा।"सच" जाने जमाने को क्या हुआ,देख आदमी बरस... Read more
clicks 93 View   Vote 0 Like   3:26am 3 Jul 2012 #कुछ बातें हैं दिल की
Blogger: arvind jangid
जब कभी मन नहीं लगता,तो मैं बाहर निकल पड़ता हूँ,मगर सच कहूँ तो,एक अजीब से फासले के साथ,ये मैंने नहीं बनाया,तो फिर किसने बनाया, मुझे कुछ पता नहीं,हाँ, मगर कोई बात तो है,जब भी मैं बोलता हूँ, कुछ डरा सा रहता हूँ,हाँ, ज्यादातर चुप ही रहता हूँ,इसमे मेरी कोई गलती नहीं,लोग सोच कर बोलत... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   2:33pm 27 Jun 2012 #कबिता
Blogger: arvind jangid
शिकायत  तुझसे अब रही तो नहीं,तेरी लकीर हाथों से गुजरी तो नहीं।तेरे नाम के दो आंसू तो संभाले  हूँ,आज  मेरे घर  कोई कमी तो नहीं।आँखों  में है तेरे भी ये घुटन कैसी,कुछ तो है बात  जो कही तो नहीं।"सच" कैसे पहचाने कोई नसीब को,चेहरों की उसके यहाँ कमी तो नहीं।... Read more
clicks 110 View   Vote 0 Like   1:58am 19 Apr 2012 #कविता
Blogger: arvind jangid
ऑफिस से लौटने पर विपिन ने देखा कि सविता कमरे में नहीं थी।"माँ.....सविता कहा है? ""बेटा अब तुम्हे क्या बताऊ.....मैंने तुम्हे बहुत समझाया.....मगर तुम नहीं माने। रोज-रोज गड़े मुर्दे उखाडने में लगे रहते थे.....ये सही नहीं था। सविता तो पाँच बजे वाली बस से अपने पिताजी के साथ गाँव चली गय... Read more
clicks 89 View   Vote 0 Like   8:41am 18 Apr 2012 #लघु कथा
Blogger: arvind jangid
लिखा लकीरों का कभी मिटना नहीं,है वो पत्थर जो कभी पिघलना नहीं,क्या क्या  खोना है और क्या पाना है, पत्थर कोई दर्द बनकर रह जाना है।रूठे को मनाये  जमाने में रीत नहीं,खुद से बढ़कर तेरा कोई मीत नहीं,मिलना कुछ तो कुछ  छूट जाना  है,बड़ा नाजुक है दिल कहीं टूट जाना है।कुछ रिश्ते तो ... Read more
clicks 68 View   Vote 0 Like   2:42am 13 Apr 2012 #कविता
Blogger: arvind jangid
रामप्रसाद सरकारी दफ्तर में लिपिक था। उसे नौकरी लगे कुछ ज्यादा वक्त हुआ नहीं था। वो नौकरी के दाव पेंच, उतार चढ़ाव से कुछ कम ही वाकिफ़ था। मगर थोड़े ही समय में उसने इतना तो जरूर समझ लिया कि नौकरी चाहे सरकारी हो या निजी, वो भी समाज के बुरे और अच्छे प्रभावों से प्रभावित होगी ... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   3:34am 28 Nov 2011 #लघु कथा
Blogger: arvind jangid
नीरज और सुधा शहर के पास वाले गाँव के प्राथमिक विद्यालय में अध्यापक थे। नीरज पिछले कुछ सालों से उसी विद्यालय में कार्यरत था मगर सुधा को अभी कुछ ही समय हुआ था सरकारी नौकरी लगे। अध्यापन का सपना, सुधा ने बचपन से ही संजो रखा था। परिवार की कमजोर आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद ... Read more
clicks 70 View   Vote 0 Like   3:18am 24 Nov 2011 #लघु कथा
Blogger: arvind jangid
किसको "आप"  लगाकर संबोधित करें और किसे "तू"  यह तो व्यक्ति विशेष पर निर्भर करता है। हिंदी भाषा में "आप" सम्माननीय व्यक्तियों के लगाया जाता है और "तू" को हम उस व्यक्ति को संबोधित करने के लिए लगाते हैं जो या तो सम्मान का हकदार नहीं है या फिर जिसे सम्मान देना ही न... Read more
clicks 74 View   Vote 0 Like   3:35pm 18 Oct 2011 #लेख
Blogger: arvind jangid
आज आईने में  खुद को न देख,जिंदगी को आईने से भी न देख।रहने  दे उसको वक्त में ही छिपा,बेवजह परदों को हटाकर न देख।वही  कुछ चेहरे हैं जाने पहचाने,इनको यूँ आजमाकर तो न देख।है  फासला कितना तेरा मुझसे,परछाइयों  को मिटाकर न देख।क्या खो गया था तेरा उस शहर में,हाथों की लकीरों पर नि... Read more
clicks 89 View   Vote 0 Like   5:25am 18 Sep 2011 #कविता
Blogger: arvind jangid
इक रोज ये नीरस जिंदगी बीत जायेगी,सूनी रातों की तन्हा चाँदनी रीत जायेगी।***कोई बात न कर उसकी बेवफाई की यहाँ,है वो मेरी कहानी साथ मेरे बीत जायेगी।***इक  दिल ही तो था टूट कर बिखर गया,जोड़ने में इसको उमर सारी बीत जायेगी।***लगता है  आज वो  गरीबी मेरे  नसीब की, दुश्मनी  नसीब की देखू... Read more
clicks 71 View   Vote 0 Like   8:48am 16 Aug 2011 #कविता
Blogger: arvind jangid
किसी का दिल तोड़ना यहाँ कोई जुर्म नहीं,हाँ इस गुनाह की यहाँ कोई सजा भी नहीं। जज़्बातों के सहारे क्या कोई जिंदगी नहीं,रो लें मगर आसुओं  की  कीमत भी नहीं।उमर रह जाती है बस एक तलाश बनकर,कुछ सवालों के यहाँ क्यों जवाब भी नहीं।ज़िंदगी है ना जाने किस भरम के सहारे,टूट जाये तो जी... Read more
clicks 85 View   Vote 0 Like   3:39pm 21 Jun 2011 #कविता
Blogger: arvind jangid
आपने सदैव ही मार्गदर्शन देकर हौंसला बढ़ाया है, आपका शुक्रिया।  "कहानी घर" में आपका हार्दिक स्वागत है। (यहाँ लघु कथाओं के माध्यम से मैंने कुछ घुटन कम करने की कोशिश की है )शांति बाई कहानी "कहानी घर" में पूर्व में Post कर चुका हूँ। शांति बाई का पति अब इस दुनिया में नहीं था। वो ट... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   2:51am 1 Jun 2011 #लघु कथा
Blogger: arvind jangid
एक बार एक किसान भरी दोपहर में खेत में काम कर रहा था। किसान को गुमान था तो इतना की 'मन जो घड़गी वो बाड़ में बड़गी' अर्थात विधाता ने उस जैसा बुद्धिमान किसी दूसरे को नहीं बनाया है। वो था गाँव का ठेठ ठोठ। किसान ने एक आदमी को सूट बूट लगा कर रास्ते से जाते देखा। किसान ने उसे आव... Read more
clicks 83 View   Vote 0 Like   4:18pm 19 May 2011 #लोक कथा
Blogger: arvind jangid
पत्ते-पत्ते में  किसने  फूँकी जान है रे,साँसों का खजाना जिसके हाथ है रे। करने लगा मनमानी जग में आकर,भूला की होना एक दिन हिसाब है रे। किसको ढूँढता हैं मंदिर मस्जिद में,कण  कण में  उसका तो वास है रे। नेकी के  सिवाय क्या है साथ जाना,किस  पर तुझको यूं अभिमान है रे। हरी को सुमर ... Read more
clicks 100 View   Vote 0 Like   1:40pm 4 May 2011 #भजन
Blogger: arvind jangid
आज रामप्रसाद कार्यालय से जल्दी लौट आया था। उसने उसकी पत्नी सरोज से कहा की वो अपना सारा सामान सूटकेस में रख ले क्यों की वो कहीं जा रहे हैं। सूटकेस लेकर रामप्रसाद बगैर माँ को कुछ बताए सरोज के साथ घर से निकल पड़ा। बस में बैठने के बाद रामप्रसाद ने सरोज से कहा "देखो सरोज, मैं... Read more
clicks 98 View   Vote 0 Like   9:29am 28 Apr 2011 #लघु कथा
[ Prev Page ] [ Next Page ]


Members Login

Email ID:
Password:
        New User? SIGN UP
  Forget Password? Click here!
Share:
  • Latest
  • Week
  • Month
  • Year
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3941) कुल पोस्ट (195176)