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Kalam Ka Sipahi / a blog by Rajesh Tripathi कलम का सिपाही/ राजेश त्रिपाठी का ब्लाग

क्या सचमुच भारत महाशक्ति है?हालांकि यह आतंकवादियों से भी नहीं जीत पायावे आते हैं और निर्दोषों का शिकार कर चले जाते हैंकश्मीर में रह कर महीनों रेकी करते हैंस्थानीय लोगों की मदद के बिना ऐसा मुमकिन है क्या?इजरायल जैसा छोटा देश आतंकवाद को कुचलने में सक्षमहम सिर्फ ‘बख्शे...
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  July 11, 2017, 10:53 am
सुनिए मेरा गीत- प्यारा सा वह गांव                     ...
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  June 21, 2017, 12:19 pm
तत्कालीन ग्रह स्थितियों से हुआ प्रमाणितराजेश त्रिपाठीकुछ लोग ऐसे हैं जो हर उस चीज को सिरे से नकारते हैं जिसे इतिहास की कसौटी पर खरा न पाया जाये। इसमें कुछ भी अनुचित नहीं लेकिन मेरे विचार से ऐसे भावों का स्तर व्यापक होना चाहिए और किसी काल विशेष या धर्म या पात्र विशेष क...
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  April 10, 2017, 8:48 pm
  पत्नी नीरू को खोने के बाद वे हमेशा उदास रहने लगे थे भाभी के निधन के बाद से भैया पहले जैसे नहीं रहे। रोतों को हंसानेवाला आदमी हमेशा खोया-खोया और उदास लगने लगा। हमारी हमेशा कोशिश होती कि उनको ढांढस बंधायें और उन्हें गम के उस दर्द से बाहर लायें जिसमें शायद वे तिल-तिल ...
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  January 28, 2017, 9:37 pm
कितने आंसू पिये अभी तक, कितनी बार पड़ा था रोना।कितने दिन तक फांका काटे, बिन खाये पड़ा था सोना।।कितने अधिकार गये हैं छीने, कब-कब खायी थी मात।राजनीति के छल-प्रपंच में, कितने ठगे गये हो तात।।           मत की कीमत को पहचानो, मत देने अवश्य ही जाना।       &...
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  January 13, 2017, 12:09 pm
सीरत कुछ की काली देखी           राजेश त्रिपाठीहमने  इस जग की हरदम रीत निराली देखी।सूरत देखी साफ, मगर सीरत* कुछ की काली देखी।।     कुछ खाये-अघाये इतने  खा-खा कर  जो बने हैं रोगी।     शील, सौम्यता खो  गयी  बने आज ज्यादातर भोगी।।     परम...
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  December 17, 2016, 11:15 am
बस, अब और नहींकुर्बानीराजेश त्रिपाठी·       हम अपने वीर जवानों को इस तरह कुरबान नहीं कर सकते·       सशक्त राष्ट्र इस तरह लुंज-पुंज, असहाय नहीं हुआ करते·       दंभ और हुंकार बहुत देखी, अब कुछ कर दिखाने की बारी ·       देश आक्रोश में है, देश के...
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  September 19, 2016, 7:13 pm
वह रात हम सब पर पहाड़-सी बीतीराजेश त्रिपाठी हम सबका भरा-पूरा परिवार सुख-शांति से चल रहा था। बेटी अनामिका की शादी हो गयी थी। मझला बेटा अनुराग और छोटा बेटा अवधेश भी ब्याह गये थे और अच्छी जगह नौकरी करने लगे थे। छोटे बेटे अवधेश के एक बेटी हुई जिसका नाम लोगों ने बड़े प्यार स...
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  September 12, 2016, 11:52 pm
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  September 5, 2016, 11:37 am
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  September 5, 2016, 11:35 am
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  August 25, 2016, 11:05 am
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  August 18, 2016, 11:35 am
राजेश त्रिपाठीनहीं झुके हैं नहीं झुकेंगे हम वीर बलिदानीहम हिंदुस्तानी, हम हिंदुस्तानी, हम हिंदुस्तानी।।   वीर शहीदों के बलिदानों से हमने पायी थी आजादी।  दिल बोझिल है, आंखें नम, देश की लख बरबादी।।   केसर क्यारी सिसक रही धधक रहा कश्मीर है।   भू-स्वर्ग दोजख बन ...
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  August 16, 2016, 10:32 am
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  August 15, 2016, 11:31 am
धरा धाम में अपनी भूमिका संपन्न कर चली गयीं महाश्वेता देवीइस अदने-से कलम के सिपाही का साहित्य की इस यथार्थ योद्धा को प्रणामराजेश त्रिपाठीमहाश्वेता देवी साहित्य की दुनिया का ऐसा नाम जिसके साथ जुड़े हैं ना जाने कितने कीर्तिमान, कितने सम्मान और कितने ही आख्यान। सच और सा...
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  July 29, 2016, 12:34 pm
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  July 19, 2016, 11:34 am
नीरू भाभी को बहुत चाहते थे भैयाराजेश त्रिपाठी इस जीवनगाथा को एक बार फिर बांदा वापस ले चलते हैं। वहीं मेरी भाभी निरुपमा देवी त्रिपाठी से भैया रुक्म की भेंट हुई। परिचय बढ़ा जो बाद में प्रेम में बदल गया। भैया उन दिनों बांदा शहर की प्रसिद्ध रामलीला में लक्ष्मण की भूमिक...
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  June 27, 2016, 8:55 pm
वेकभीपुरस्कारोंकेपीछेनहींभागेसम्मानउनतकचलकरआयेराजेशत्रिपाठी डॉ. रुक्मत्रिपाठीकट्टरसिद्धांतवादीथे।उन्हेंकोईकिसीप्रलोभनयाकिसीभीकीमतपरउनकेसिद्धांतऔरउद्देश्यसेडिगानहींसकताथा।जोबातउन्हेंपसंदनहींवेकिसीसेभीबेधड़ककहनेमेंनझिझकतेथेनासकुचातेथे।...
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  June 8, 2016, 12:00 pm
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  May 8, 2016, 10:59 am
संस्कारराजेश त्रिपाठी    रात के दो बज चुके थे। सुधाकर बाबू देर से कंप्यूटर से जूझ रहे थे। उन्हें नेट पर किसी का इंतजार था। किसी की खैरियत जानना उनके लिए किसी भी काम से ज्यादा जरूरी था। रोज का यही वक्त होता था जब वे घंटों आभासी दुनिया (वर्चुअल वर्ल्ड) के माध्यम से किसी ...
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  May 5, 2016, 10:50 am
दुश्मन को भी अस्पताल न जाना पड़ेराजेश त्रिपाठीजिस अस्पताल का जिक्र पिछली किस्त में किया था उससे मेरा घर टैक्सी से मुश्किल से 10 मिनट का रास्ता था। मैंने जब डाक्टरों से भाई को टैक्सी से ले जाने की बात कही तो उनमें से एक बोला-‘ नहीं, नहीं! बहुत बड़ा खतरा मोल ले रहे हैं आप। र...
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  May 2, 2016, 10:52 pm
 एक दुर्घटना ने बदल दी जिंदगी‘‘महानगर न्युमैंस गार्जियन’  में रुक्म जी का कार्य सुचारु रूप से चल रहा था। लेकिन भाग्य में कुछ और ही लिखा था। उनकी उम्र को देखते हुए हम लोगो ने कह रखा था कि वे बस स्टाप तक रिक्शे से जाया करें फिर वहां टैक्सी या बस जो मिले उससे दफ्तर चले जा...
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  April 25, 2016, 9:23 pm
आप ही बतलाइएराजेश त्रिपाठीकिस कदर तब रिश्ते निभेंगे आप ही बतालाइए। जब स्वार्थ दिल में पलेंगे आप ही बतलाइए।।जिंदगी में दिल से बढ़ कर  हो गयी  दौलत अभी।नाते-रिश्ते इस जहां के जब इसी पर टिके हैं अभी।।होठों पर नकली मुसकानें,  दिल में नकली प्रीति ।नकली चेहरा सामने रखत...
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  April 17, 2016, 12:38 pm
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  November 19, 2015, 11:34 am
    हारे सारे कुप्रचार     बिहार में नीतीश सरकार‘फूट डालो राज करो’का फार्मूला हुआ फेल, मैथ, केमिस्ट्री दोनो चुस्त जम गया नीतीश-लालू का खेल‘ डीएनए’की गाली का जनता ने दे दिया जवाब, टूटे कितने दिग्गजों के ख्वाबबड़बोलों की बकबास ने कर दिया सत्यानाश, जनता ने दिखा ...
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  November 9, 2015, 12:06 pm
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