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Blog: अजित गुप्‍ता का कोना

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www.sahityakar.comहमारा जमाना भी क्या जमाना था! बचपन में पाँच साल तक घर में ही धमाचौकड़ी करो और फिर कहीं स्कूल की बात माता-पिता को याद आती थी। स्कूल भी सरकारी होते थे और बस घर में कोई भी जाकर प्रवेश करा देता था। हमारे साथ भी यही हुआ और हमारी उम्र के सभी लोगों के साथ कमोबेश यही हुआ है। ... Read more
clicks 35 View   Vote 0 Like   5:09am 29 Sep 2019 #
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www.sahityakar.comहमारे राजस्थान का बाड़मेर क्षेत्र बेटियों के लिये संवेदनशील नहीं रहा था, यहाँ रेगिस्तान में अनेक कहानियों ने जन्म लिया था। बेटियों को पैदा होते ही मार दिया गया, या फिर ढोर-डंगर की तरह ही पाला गया। जैसे-तैसे बड़े हो जाओ और शादी करके चूल्हे-चौके में घुस जाओ। ना कोई ... Read more
clicks 37 View   Vote 0 Like   4:51am 22 Sep 2019 #
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www.sahityakar.comमेरा मन करता है कि मैं दुनिया को पुरुषों की नजर से देखूं लेकिन देख नहीं पाती हूँ! क्यों नहीं देख पाती क्योंकि मेरे पास पुरुष की सोच नहीं है और ना ही पुरुष की सोच क्या है, यह किसा किताब से अनुभव मिला है! पुरुष स्वयं को कम ही अभिव्यक्त करते हैं, उनके दर्द क्या है, उनकी स... Read more
clicks 53 View   Vote 0 Like   4:48am 20 Sep 2019 #
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www.sahityakar.comकहावत है कि "डूबते को तिनके का सहारा", जीवन का भी यही सच है। हम दुनिया जहान का काम करते हैं लेकिन जीवन में तिनका भर सहारे से हम तिरते जाते हैं, तिरते जाते हैं। हमारे सामने यदि तिनके जितना भी सहारा नहीं होता तो हम बिखरने लगते हैं, इसलिये डूब से बचने के लिये और जिन्दगी ... Read more
clicks 41 View   Vote 0 Like   4:37am 14 Sep 2019 #
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www.sahityakar.comअहा! ये कॉपी-पेस्ट करने की छूट भी कितनों को ज्ञानी बना देती है! बिना शिक्षक के ही हम ज्ञानवान बनते जाते हैं, नहीं-नहीं, ज्ञानवान नहीं बनते अपितु दिखते ज्ञानवान जैसे ही हैं। लोग भ्रम में जीते हैं कि जो हम पढ़ रहे हैं, वह इसी ने लिखा है! विश्वास नहीं होता लेकिन रोज-रोज ... Read more
clicks 39 View   Vote 0 Like   5:25am 5 Sep 2019 #
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www.sahityakar.comबधाई! देश के उन सभी देशवासियों को बधाई जो स्वयं को किसी दायरे में बाँधने को कभी तैयार नहीं है। मोदीजी फ़िट मूवमेंट चलाते हैं और हम रस्सी तोड़कर भागने का जुगत बिठा लेते हैं। मोदीजी क़ानून बना देते है कि सड़क पर ग़ाडी दौड़ाने के लिये नियमों का पालन करना पड़ेगा ... Read more
clicks 51 View   Vote 0 Like   3:32am 3 Sep 2019 #
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www.sahityakar.comमेरा पैसा तेरे पास कैसे पहुँचे और लगातार पहुँचता ही रहे, इस चाल को कहते हैं आर्थिक आवागमन। जैसे ही मेरा पैसा मैंने अपने पास रोक लिया तो कहते  हैं कि मंदी आ गयी, मंदी आ गयी। जयपुर में एक बड़ा बाँध हुआ करता था – रामगढ़। सारे जयपुर की जीवनरेखा। जब रामगढ़ भरता था तो सा... Read more
clicks 45 View   Vote 0 Like   5:07am 2 Sep 2019 #
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www.sahityakar.comतुम्हारे पास क्या है? मोदी पूछ रहे थे! हमारे पास स्वर्ग जैसे देश हैं, हम पूर्ण विकसित हैं। अमेरिका, फ्रांस सरीखे विकसित देश बता रहे थे और फिर प्रतिप्रश्न करते हैं कि तुम्हारे  पास क्या है? भारत देश के लोग कहते हैं कि हमारे पास कृष्ण हैं! एक तरफ सात देश साथ खड़े थे, द... Read more
clicks 37 View   Vote 0 Like   4:53am 27 Aug 2019 #
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www.sahityakar.comयह जो डर होता है ना, वह हमें चैन से रहने नहीं देता। डर ही है जो हमें ऐसे-ऐसे काम कराता है जिसकी हम कल्पना तक नहीं करते। बच्चे को हम डराते हैं कि चुप हो जा, नहीं तो हव्वा आ जाएगा! हव्वे का डर बच्चे के दीमाग में बैठ जाता है और बड़ो को आराम हो जाता है। जब भी कोई समस्या आए तो ... Read more
clicks 46 View   Vote 0 Like   4:50am 26 Aug 2019 #
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www.sahityakar.comकल एक पुराने मित्र घर आए, ताज्जुब भी हुआ कि इतने दिनों बाद! लेकिन मित्र कब बिना बात नाराज हो जाते हैं और कब रास्ता भटककर वापस आ जाते हैं, कौन बता सकता है! खैर मेरी पोस्ट का तात्पर्य और कुछ है तो उसी बिन्दू पर चलते हैं। कहने लगे कि फला व्यक्ति पर मुझे तरस आता है। मैंने ... Read more
clicks 86 View   Vote 0 Like   3:36am 22 Aug 2019 #
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www.sahityakar.comएक झटके में देश कितना बदल गया है! अभी दस-बारह दिन भी नहीं बीते हैं जब देश में स्यापा हो रहा था। मोदीजी की डॉक्यूमेन्ट्री फिल्म - मेन्स / वाइल्ड का ट्रेलर आया था और चारों तरफ शोर मच गया था। गैर जिम्मेदार मीडिया और उनके समर्थक लगे पड़े थे मोदीजी के साहस को कम करने में। ... Read more
clicks 64 View   Vote 0 Like   4:30am 12 Aug 2019 #
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www.sahityakar.comहम डरे हुए लोग हैं! क्यों डर रहे हैं! यह बात किसी को नहीं पता, पर डर रहे हैं। कल जम्मू कश्मीर के राज्यपाल का डर निकलकर बाहर आया। हरियाणा के मुख्यमंत्री का बयान विवादित भी माना गया और धमकाने के लिये पर्याप्त भी बना। आखिर ऐसी क्या नौबत आ गयी कि बिना जाँचे-परखे, सीधे ही ... Read more
clicks 25 View   Vote 0 Like   3:23am 12 Aug 2019 #
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www.sahityakar.comधारा 370 क्या समाप्त हुई, कवि की कविता ही समाप्त हो गयी! कल एक चैनल पर हरिओम  पँवार ने कहा। वे बोले की मैं चालीस साल से कश्मीर पर कविता कह रहा था लेकिन आज मुझे खुशी है कि अब मेरी कविता भी समाप्त हो गयी है। न जाने कितने कवियों ने कश्मीर पर कविता लिखी, सारे देश में कविता-... Read more
clicks 40 View   Vote 0 Like   4:15am 10 Aug 2019 #
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www.sahityakar.comमैं एक बार महिलाओं के बीच बुलाई जाती हूँ, महिलाएं मुस्लिम थीं। वे अनपढ़ लेकिन कामगार भी थीं। महिलाएं कहने लगी कि हम तलाक-तलाक-तलाक से कब निजात पाएंगे? मेरे पास उत्तर नहीं था लेकिन समझ आने लगा था कि महिलाओं की यह तड़प एक दिन क्रान्ति का सूत्रपात अवश्य करेगी। मैं मू... Read more
clicks 43 View   Vote 0 Like   6:02am 31 Jul 2019 #
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www.sahityakar.comइस देश में सदा से ही बुद्धीजीवियों का बोलबाला रहा है, इस पर कुछ लोगों का कब्जा रहता है। हमने भी कभी नहीं सोचा कि हम बुद्धीजीवी हैं लेकिन कुछ संस्थाओं ने यहाँ अपनी नाक घुसड़ने की सोची और करने लगे गोष्ठियाँ। प्रबुद्ध सम्मेलन, बौद्धिक सम्मेलन आदि आदि। जब उसमें बुला... Read more
clicks 62 View   Vote 0 Like   5:03am 27 Jul 2019 #
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www.sahityakar.comएक फालतू पोस्टके  बाद इसे भी पढ़ ही लें।लोहे के पेड़ हरे होंगेतू गान प्रेम का गाता चलयह कविता दिनकर जी की है, मैंने जब  पहली बार पढ़ी थी तब मन को छू गयी थी, मैं  अक्सर इन दो लाइनों को गुनगुना लेती थी। लेकिन धीरे-धीरे सबकुछ बदलने लगा और लगा कि नहीं लोहे के पेड़ कभ... Read more
clicks 44 View   Vote 0 Like   6:23am 26 Jul 2019 #
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www.sahityakar.comजिन्दगी में आप कितना बदल जाते हैं, कभी गौर करके देखना। बचपन से लेकर जवानी तक और जवानी से लेकर बुढ़ापे तक हमारी सूरत ही नहीं बदलती अपितु हमारी सोच भी बदल जाती है। कई बार हम अधिक सहिष्णु बन जाते हैं और कई बार हम अधीर। बुढ़ापे के ऐप से तो अपनी फोटो मिलान करा ली लेकिन ह... Read more
clicks 54 View   Vote 0 Like   5:08am 21 Jul 2019 #
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www.sahityakar.comइतना सन्नाटा क्यों है भाई! आजकल  पूरे देश में यही सवाल पूछा जा रहा है। जिस देश को कॉमेडी शो देखने की लत लगी हो, भला उसके बिना वह कैसे जी पाएगा! हमारे लेखन के तो मानो ताले ही नहीं खुल रहे हैं, सुबह होती है और कोई सरसरी ही नहीं होती! हम ढूंढ रहे हैं, भाई राहुल गाँधी को, रा... Read more
clicks 37 View   Vote 0 Like   5:03am 19 Jul 2019 #
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www.sahityakar.comआज जो हो रहा है, वही कल भी हो रहा था, हर युग में हो रहा था। हम पढ़ते आए हैं कि राक्षस बच्चों को खा जाते थे, आज भी बच्चों को खाया ही जा रहा है। मनुष्य और दानवों का युद्ध सदैव से ही चला आ रहा है। समस्याएं गिनाने से समस्याओं का अन्त नहीं होता अपितु समाधान निकालने से अन्त ह... Read more
clicks 31 View   Vote 0 Like   5:05am 17 Jul 2019 #
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www.sahityakar.comहम बड़े हैं, हम बड़े हैं यही तो! फोर्ड गाडी का विज्ञापन देखा ही होगा। सदियों से हमारी रग-रग में बसा है कि हम बड़े हैं, कोई उम्र से बड़ा है, कोई ज्ञान से बड़ा है, कोई पैसे से बड़ा है और कोई जाति से बड़ा है। बड़े होने का बहाना हर किसी के पास है। इस दौर में राजनेता कहते हैं ... Read more
clicks 18 View   Vote 0 Like   4:42am 15 Jul 2019 #
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www.sahityakar.comघर में हम क्या करते हैं? या तो आपस में प्यार करते हैं या फिर लड़ते हैं। जब भी शान्त सा वातावरण होने लगता है, अजीब सी घुटन हो जाती है और हर व्यक्ति बोल उठता है कि बोर हो रहे हैं। हमारे देश का भी यही हाल है, कभी हम ईद-दीवाली मनाने लग जाते हैं और कभी हिन्दुस्थान-पाकिस्तान ... Read more
clicks 21 View   Vote 0 Like   5:13am 2 Jul 2019 #
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www.sahityakar.comआजकल अपने राहुल बाबा बड़े सकते में हैं, अकेले राहुल बाबा ही नहीं सारा परिवार ही सकते में आ गया है। पहले क्या था कि गांधी परिवार खेत में दो-चार दाने डालते थे और दानों की जगह तेजी से खरपतवार उग आती थी तो वे सोचते थे कि देखों हमारे खेत में कितना दम है! लेकिन इस बार क्या ... Read more
clicks 20 View   Vote 0 Like   3:51am 1 Jul 2019 #
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www.sahityakar.comकिताबों के पन्ने पलटने का खेल बहुत खतरनाक है, वह भी इतिहास की किताबें। अब इतिहास तो तुम्हारे पुरखे ही लिख गये थे, तुम्हारे अपने लोग ही बता गये कि उनके काल में क्या घटा था! बस तुमने कभी पढ़ा नहीं और आज ये पढ़कर आ गये। जैसे-जैसे इतिहास के पन्ने पलटते गये, संसद में मौन प... Read more
clicks 74 View   Vote 0 Like   3:46am 30 Jun 2019 #
Blogger: Ajit
www.sahityakar.comमिट्टी पलीद कराना किसे कहते हैं, यह देखना हो तो कल राज्यसभा में देखना चाहिये था। मोदीजी हेडमास्टर बने हुए थे और सामने फैल हो गयी कांग्रेस की क्लास थी। अब मोदीजी डाँट रहे थे कि तुमको इस आसान प्रश्न का भी उत्तर नहीं आया? सरदार वल्लभ भाई  पटेल भी याद नहीं रहे तुमको! ... Read more
clicks 26 View   Vote 0 Like   3:25am 29 Jun 2019 #
Blogger: Ajit
www.sahityakar.comआपको चेहरे पर यह मायूसी! आपका चेहरा गमगीन! आपका चेहरा मुरझाया हुआ! आप तो मक्कारी के लिये जाने जाते हैं, आप तो आँख मारने के लिये पहचाने जाते हैं, आप तो नुक्कड़ के लौण्ड़ों-लपाड़ों जैसी हरकत के लिये जाने जाते हैं! फिर भला यह मक्कारी कहाँ गायब है? आपके चारों तरफ जो घेरा ... Read more
clicks 22 View   Vote 0 Like   12:08pm 27 Jun 2019 #
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