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व्यंग्यलोक

//व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट// मानव सभ्यता के इतिहास में मनुष्य की जो सबसे बड़ी उपलब्धि है वह है आधुनिक चिकित्सा विज्ञान। पश्चिमी चिकित्सा विज्ञानियों ने यदि घर के सारे काम छोड़कर शोध एवं अनुसंधान नहीं किया होता, नए-नए आधुनिक चिकित्सकीय उपकरण, पैथोलॉजिकल टेस्ट प्रणालियाँ,...
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  May 31, 2016, 9:47 am
//व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट// चैन से सोना हो तो जाग जाओ। जाग गए हो तो सुनो। पेश-ए-खिदमत है आज की सनसनी। आज दिनदहाड़े राजधानी में एक बेहद सनसनीखेज़ घटना दरपेश आई है, जिसकी वजह से समूची राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में दहशत का माहौल बना रहा। खबर है कि राजधानी की एक पॉश कॉलोनी मे...
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  February 15, 2016, 10:55 am
//व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट// वे हर वक्त आभारी होने को तत्पर रहते हैं। अल्ल सुबह से लेकर देर रात तक वे आभार से इस कदर लद-फद जाते हैं कि उनकी थुल-थुल काया देखकर भ्रम होता है कि वे चर्बी से लदे हुए हैं या आभार से।रोज़ सबुह उठते ही वे ईश्वर के आभारी होते है कि उसने उन्हें नींद में ह...
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  February 11, 2016, 1:56 pm
//व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट//मैंने बाज़ार के अन्दर कदम रखा ही था कि अचानक आठ-दस मोटे-मोटे पेट वाले तंदरुस्त मुस्टंडों ने मुझे चारों ओर से घेर लिया। मगर मेरे आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा जब पीटने की बजाय मुस्टंडों ने घंटा-घडियाल, शंख, झाँझ-मजीरे, फूल-मालाएँ, नारियल, अगरबत्ती निका...
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  October 26, 2015, 5:25 pm
//व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट//सिलेक्शन कमेटी के चेयरमेन टेबल के नीचे छुपे हुए हैं और सदस्यगण मुँह छुपाए इधर-उधर देख रहे हैं। चुन्नू बाबू का विधवा विलाप सप्तम सुर में चल रहा है-‘‘भ्याSSSSभ्याSSSSभौंSSSS ! अरेरेरेरेरे! ठठरी बंध गई मेरी तो। मखाने फिक गए रे। अरे मैं तो जीते जी मर गया। इन ...
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  September 26, 2015, 9:10 am
//व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट//            विशेषज्ञता और शोध-अनुसंधान के मामले में हम चाहे कितने भी पिछड़े हुए हों, मगर ढाँचागत विकास में कोई माई का लाल हमारा सानी नहीं है। इन दिनों हमारी तकनीकी कुशाग्रता का जो नमूना हमारी ‘सड़कों’ पर नज़र आ रहा है, उसे देखकर दुनिया...
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  August 17, 2015, 6:23 pm
//व्‍यंग्‍य-प्रमोद ताम्बट// स्मार्ट गजेट युग के स्मार्ट बच्चे इन दिनों अपने माँ-बाप को तिर्यक दृष्टि से तो दादा-दादी को खा जाने वाले दृष्टि से देख रहे हैं, क्योंकि टी.वी पर गा-गा कर उन्हें समझाया जा रहा है -‘‘नो चिपकोइंग, बेच दे बेच दे। पुराना जाएगा तब नया आएगा।’’ मगर मैयो-...
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  July 20, 2015, 10:53 am
//व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट//बन्‍नेखाँ का लड़का फन्‍नेखाँ सुबह से बस एक ही रट लगाए हंगामा मचाए हुए है – मैगी दे दो, मैगी दे दो। फ्‍न्‍ने की अम्‍मा उसे समझाने की कोशिश कर रही है- “मान जा बेटा मान जा, कुछ और खा ले, मैगी में जाने क्‍या ‘बला’मिली है, मर जाएगा तू मेरे लाल।”फन्‍ने सुन...
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  June 18, 2015, 9:43 am
//व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट//दुनिया के तमाम मुल्‍कों ने तमाम क्षेञों में तरक्‍की की है, हमने शिक्षा के क्षेञ में झंडे गाड़े हैं। अंग्रेजों के ज़माने में जब लॉर्ड मैकाले ने भारतीय शिक्षा पद्धति को बनाने के लिए अपना सिर खपाया तब उसने ख्‍याब में भी नहीं सोचा होगा कि कालान्‍तर म...
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  June 17, 2015, 10:17 am
//व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट// मैं ‘मैगी’ हूँ। दुनिया भर में मुझे बेहद चाव से खाया जाता है। मगर आज मेरे अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। मुझे अखाद्य करार दिया जाकर मार्केट से बाहर करने का षड़यंत्र चल रहा है। मुझे ताज्जुब है, जब भारत की गली-गली में सैकड़ों अखाद्य पदार्थ...
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  June 14, 2015, 8:14 am
 व्यंग्य-प्रमोद ताम्बटतम्‍बाकू की वकालत करने वालों के हौसले देखकर कई सौदाइयों की हौसला अफजाई हुई है और अब वे भी अपना-अपना धंधा चमकाने के लिए अपनी क्रांतिकारी दलीलों के साथ मैदान में कूँदने की तैयारी कर रहे हैं। सबसे पहले सीना फूलाने वालों में शराब लॉबी के सज्‍जन लो...
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  April 10, 2015, 10:35 am
//व्‍यंग्‍य-प्रमोद ताम्बट//कुछ ही घंटों में ‘आम’ बजट आने वाला है। इससे पहले कि टी.वी. वाले बजट पूर्व अनुमानों का कलरव शुरू करें, पेश-ए-खिदमत है आने वाले बजट की कुछ ऐतिहासिक घोषणाओं का पूर्व अनुमान। समझा जाता है कि इस बार ‘आम-बजट’ में सचमुच ‘आम’ लोगों के लिए ही सब कुछ होगा औ...
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  February 28, 2015, 8:49 am
//व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट//दिल्ली की जनता को ‘फैक्चर्ड मैनडेट’ देने की सज़ा मिली है-दोबारा चुनाव! इसके बाद भी यदि जनता न मानी तो दोबारा, तिबारा फिर चौबारा और पाँचवी बार भी हो सकते हैं चुनाव। जब तक किलियर कट मैजोरिटी नहीं दोगे बेटों, झेलते रहो चुनाव। सही हों-गलत हों, चोर हों-ल...
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  November 7, 2014, 7:28 pm
//व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट// इनदिनों बाज़ार में डरते-डरते घुसना पड़ता है। कोई सोच सकता है हमारा अपना बाज़ार है, ‘भारतीय बाज़ार’, उसमें डरते हुए घुसने की क्या ज़रूरत है, आराम से सीना फुलाकर घुसना चाहिए! मगर नहीं साहब, मेरे हिसाब से तो बिल्कुल डरते हुए ही घुसने की ज़रुरत है, क्योंक...
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  October 19, 2014, 9:19 am
//व्‍यंग्‍य-प्रमोद ताम्बट//                      आजकल देश में इन्वेस्टर मीट का सीज़न चल रहा है। देश-विदेश से बड़े-बड़े इनवेस्टर झुंड के झुंड पधार रहे हैं। हाल ही में हुई एक इन्वेस्टर मीट में मैं भी पहुँच गया, देखा शोरगुलके ज़रिए ऊर्जा का इन्वेस्टमें...
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  October 16, 2014, 9:12 am
//व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट//कुछ समय पहले चीनी राष्ट्रपति के साथ आए महत्वाकांक्षी चीनी व्यापारियों और महत्वाकांक्षा में उनके भी बाप भारतीय व्यवसायियों के बीच व्यापार संतुलन कायम करने की दृष्टि से अहमदाबाद में एक व्यापार बैठक का आयोजन हुआ, जिसमें एक-दूसरे के बाज़ारों में ...
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  October 12, 2014, 9:56 am
//व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट//          उपासना देवी को जब से देखा है, मन ही मन आश्वस्त हो गया हूँ कि देश पर खाद्यान्न संकट कभी आ ही नहीं सकता, क्योंकि वे हफ्ते में पाँच दिन निराहारी उपवास करके देश के लिए काफी अनाज बचाती हैं। रोज़ाना कोई ना कोई व्रत-उपवास करना उनका प्र...
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  October 10, 2014, 7:06 pm
//व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट//पतिगण इन दिनों ज़बरदस्त रूप से भावुक चल रहे हैं। पत्नियाँ उन्हें ईश्वरीय मान-सम्मान जो दे रही हैं। कितनी भी खूँखार पत्नी हो इस सीज़न में पतियों के लिए भूखे रहने का पारम्परिक विधान अवश्य निपटाती है, ताकि पति परमेश्वर की सत्ता हमेशा सुरक्षित रहे। ...
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  September 22, 2014, 9:06 am
//व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट//दुनिया के सारे पतियों में भारतीय पति सबसे विशिष्ट होता है, क्योंकि वह राजाओं-महाराजाओं की तरह घोड़ी पर सवारी गाँठकर, बैंड-बाजों के साथ पति बना करता है। इस प्रक्रिया में किसी खुर्राट राजा-महाराजा की आत्मा उसमें घुस बैठती है और वह आजीवन ‘महाराजाध...
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  September 8, 2014, 9:29 am
//व्‍यंग्‍य-प्रमोद ताम्बट//पुराने ज़माने में लोग ऊँचे चरित्र वालों से अपने निकट रिश्तों का बखान कर-कर के अपना ‘सिक्का’ जमाते थे। अवश्य ही राजा हरीशचन्द्र के वंशजों ने कई पीढ़ियों तक यही किया होगा। अब माहौल बदल गया है। अब कुख्यात लोगों से निकटता होना ‘महानता’ की बात हो गई ...
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  August 30, 2014, 9:00 am
//व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट// लो, यूँ तो भारतीय पुलिस दुर्व्‍यवहार, गाली-गलौच, मारपीट-ठुकाई, डंडोपचार के लिए भारी बदनामी झेलती आई है, मगर अब जब वह अपने-आप में क्रांतिकारी सुधार के साथ अपराधियों का माथा चूम रही है, प्यार-मोहब्बत, पप्पी-झप्पी का लड़ियल आचरण अपना रही है, तब भी लोग...
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  August 8, 2014, 11:04 am
//व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट//सोचता हूँ जल्दी से जल्दी एक आधुनिक छापाखाना और प्रकाशन संस्थान खोल लूँ, इस धंधे का भविष्य उज्वल होता दिखाई दे रहा है। लोग मोटी-मोटी किताबों की शक्ल में ‘आरोप’ लगाने लगे हैं। और तो और इन आरोपों की किताब के प्रत्युत्तर में प्रत्यारोपों की किताब भ...
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  August 5, 2014, 9:38 am
//व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट//मरीज़ों के वृहद संसार में कुछ विशिष्ट किस्म के मरीज़ होते हैं जिनकी विद्वता के सामने पुश्तैनी मरीज़ तो क्या अच्छे-अच्छे अनुभवी डॉक्टर तक पानी भरते नज़र आते हैं। बीमारी के क्षेत्र में इन विद्वान मरीजों का बड़ा आतंक होता है। ये यदि किसी डॉक्टर को दिख...
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  June 13, 2014, 8:17 am
//व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट//वे ज़ार-ज़ार रोये जा रहे थे। मैंने पूछा-‘‘क्या हुआ मित्र, इस तरह मातम क्यों मना रहे हो?’’ वे चटके-‘‘तो क्या करूँ? और कोई होता तो घर पर पथराव कर आता उसके, मगर जब अपने ही भावनाओं को आहत करने पर उतर आएँ तो बैठकर मातम न मनाऊँ तो क्या करूँ?’’वे सिसकते हुए बोल...
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  June 12, 2014, 9:44 am
//व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट//बिना हार-फूल पुष्प-गुच्छों के पार्टी की ‘‘आभार एवं धन्यवाद सभा’’ ऐसी लग रही थी जैसे किसी की शोक सभा हो रही हो। अधिकांश सदस्य अपनी बाँछें घर पर ही रखकर आए थे।                 अध्यक्षीय भाषण शुरू हुआ। प्रिय साथियों, आप जानते ही ह...
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  May 24, 2014, 9:09 am
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