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Blog: ehsas

Blogger: amitchandra
चित्र गूगल साभारऐ खुदा, मुझे फिर से ये सजा न देकज़ा है मुकद्दर मेरा जिंदगी का पता न दे।अश्कों से भर गया है दरिया-ए-मोहब्बत मेराफिर से चाहुँ मैं किसी को ऐसी दुआ न दे।मुद्दतों बाद एक मुस्कान मेरे लबों पे आई हैदेखना, फिर से कोई ज़ख्म मुझे रूला न दे।ढुढँता रहा मैं तुझे दर-ब-दर इ... Read more
clicks 108 View   Vote 0 Like   2:10pm 18 Oct 2014 #
Blogger: amitchandra
चित्र गूगल साभारजिंदगी आऊगाँ मैं तुमसे कभी मिलने के लिएअभी उलझा हुँ मैं अपनी उलझनें सुलझानें में।मैं हिन्दु, तुम मुस्लिम, ये सिख वो ईसाई हैमिलना हो गर इसाँ से तो चलो मयखाने में।है कजा मंजिल तो है तु भी हमसफर मेराफिर क्यों अलग से रहते हैं हमलोग इस जमाने में।उठता नहीं ध... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   4:00pm 8 Oct 2014 #
Blogger: amitchandra
चित्र गूगल साभारइतने ही शरीफ है तो हम्माम में नंगे क्यों हैंइंसाँ बसते हैं इस बस्ती में तो फिर दंगे क्यों हैं।वो कहता था, चेहरा इंसान का आईना होता हैंफिर, इस महफिल में सबके चेहरे रंगे क्यों हैं।हक बराबर का है सबका तेरी दुनिया में ऐ खुदादैर ‘ओ‘ हरम की सीढ़ियों पर इतने भूख... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   1:54pm 27 Sep 2014 #
Blogger: amitchandra
चित्र गूगल साभारदे कोई दर्द मुझे के फिर कोई गजल लिखुँतेरी जुल्फ को घटा, तेरे हुस्न को कमल लिखुँ।लुट गए ना जाने कितने मेरी फिर औकात क्यातु बता, मैं नाम तेरे किसका-किसका कत्ल लिखुँ।हारता रहा मैं हर बाजी जुनुन-ए-इश्क मेंतुझको दाना समझुँ या खुद को मैं पागल लिखुँ।है खलिश से ... Read more
clicks 315 View   Vote 0 Like   12:48pm 25 Aug 2014 #
Blogger: amitchandra
इश्क में दूरियाँ एक पल को गवाँरा तो नहीइश्क है, एक बार होता है, दोबारा तो नही।तेरी गलियाँ लिपटी है खून से ऐ मेरे कातिलतड़प रहा है एक दिल तेरे दर पे, कहीं हमारा तो नही।जिंदगी हँसती है कभी मेरी नाकामियों परतुम जीत कैसे गए अभी मैं हारा तो नही।गुम था तेरे ख्यालों में तभी तेरा ... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   3:11pm 24 Jul 2014 #
Blogger: amitchandra
फागुन की बहाररंगों की बौछारभंग का खुमारगुझिया मजेदारथोड़ी सी तकरारढेर सारा प्यारप्रियतम का इंतजारदिल बेकरारआओ मनाएँ मिलकरहोली का त्योहार... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   1:17pm 16 Mar 2014 #
Blogger: amitchandra
 चित्र गूगल साभारदिल के जख्मों को मुस्कुराने तो दोयादों में इसे तेरी डूब जाने तो दो।लौटकर आएगा फिर से बहारों का हुजूममौसम-ए-खिंजा को एक बार गुजर जाने तो दो।चाहे जितना घना हो अंधेरा, मिट जाएगाशब-ए-चराग को रौशन हो जाने तो दो।होगें शामिल एकदिन वो भी हमारी महफिल मेंउनके ... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   3:23am 14 Feb 2014 #
Blogger: amitchandra
चित्र गूगल साभारजख्म का क्या है कभी तो ये भर जाएगातेरे सितम का ऐ सितमगर निशाँ छोड़ जाएगा।अश्क है, दर्द है और गम-ए-तन्हाई हैईश्क है, देख अभी क्या-क्या गुल खिलाएगा।अब्र का रिश्ता धरा से इस कदर है लिल्लाहदेखकर प्यासी उसे वो खुद ही बरस जाएगा।बिक गया इन्साँ यहाँ कौड़ियों के ... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   2:40pm 10 Nov 2013 #
Blogger: amitchandra
चित्र गूगल साभाररचयिता हुँ मैंतुम्हारी जिदंगी की।मेरी कोख में ही तुम्हारीनई कोपलें सृजित होती है।सींचती हुँ  उन्हेंमैं अपने रूधिर से।रंग भरती हुँ  मैंतुम्हारी बेरंग जिन्दगी में।कभी मॉं बनकरतुम्हें दुलारती हुँकभी बहन बनकरतुम्हें सवॉंरती हुँ ।तो ... Read more
clicks 287 View   Vote 0 Like   5:08am 26 Oct 2013 #
Blogger: amitchandra
कई कोशीशों के बाद जिंदगी को एक मकाम मिलता हैये कलियुग है दोस्त शायद ही यहाॅ कोई राम मिलता है। जज्ब-ए-दुआ-औ-खैर बन चुकी है किस्सा अतीत काजुल्म-ओ-नफरत से भरा दिल यहाॅ सरेआम मिलता है।ये कौन सा शहर है कोई बताए हमेंहर शख्स हमें यहाॅ बदनाम मिलता है।लगता है हवाओं ने बदल दिया ह... Read more
clicks 218 View   Vote 0 Like   5:12am 18 Sep 2013 #
Blogger: amitchandra
चित्र गूगल साभारसचिन के वनडे क्रिकेट से सन्यास लेने की घोषणा ने चौंका दिया। हॉंलाकि ये सभी जानते थे और शायद इस बात की आशा भी थी कि पाकिस्तान और अस्ट्रेलिया के भारत दौरे के बाद वो सन्यास ले सकते थे। जब सचिन ने ये पहले ही दर्शा दिया था कि वो पाकिस्तान और अस्ट्रेलिया के खि... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   2:06pm 24 Dec 2012 #
Blogger: amitchandra
चित्र गूगल साभारकातिलाना रूप इसका हुस्न लाजवाब हैदेख पैमाने में कैसे बलखाती ये शराब है।दौर-ए-महफिल हो या हो गमों की बारिशेंतश्नालब की तिश्नगी मिटाती ये शराब है।लगता है मयकदे में हुजूम शब-ओ-रोजमयकशों को उंगलियों पर नचाती ये शराब है।होश में रहने दे अब और न पिला साकीरा... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   4:28pm 15 Dec 2012 #
Blogger: amitchandra
चित्र गूगल साभारफिर तेरी कहानी याद आईबीते मौसम की रवानी याद आई।गुजारे थे हमने जो साथ मिलकरवो शाम सुहानी याद आई।तेरी ऑखों का सुरूर और वो मदहोश आलमटुटी हुई चुड़ीयों की कहानी याद आई।गुंजे थे कभी जो इन फिजाओं मेंवो नज्म पुरानी याद आई।लहरों के साथ जो बह गया ‘अमित’ रेत पर ... Read more
clicks 262 View   Vote 0 Like   1:50pm 4 Dec 2012 #
Blogger: amitchandra
अतीत के पन्नेपलटते पलटतेबहुत दूर तक निकल आया था मैं।तस्वीरेंअब धुधंली हो गई थी।वक्त की बारिश नेशब्दों से जैसेउसकी चमक छीन ली थी।परउन धुधंली तस्वीरों मेंएक तस्वीरतुम्हारी भी थी।वही मासुमियतसाँवलें चेहरे परसुबह की खिलतीकिरणों की तरह मुस्कान।तुम्हारे साथ गुजरा ह... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   2:20pm 17 Nov 2012 #
Blogger: amitchandra
चित्र गूगल साभारदिल में तेरी यादों का तुफान रह गयाबस्तियॉ लुट गई सारी खाली मकान रह गया।जुल्म और नफरत से भर गई दुनियाइन्सान अब कहॉ इन्सान रह गया।ताउम्र ख्वाहिशों को ही जीता रहा मगरदिल में बाकी फिर भी कुछ अरमान रह गया।इन्सान अब रहा नहीं तेरी दुनिया में ऐ खुदाकोई यहॉ हि... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   5:55am 9 Nov 2012 #
Blogger: amitchandra
चित्र गूगल साभारसुबह से ही घर में उधम मच रहा था। बच्चों ने मेला घूमने के लिए सारा घर सर पे उठा रखा था। मैं हैरान परेशान इधर-उधर घूम रहा था। सोच रहा था ‘‘इस महगॉई में ये पर्व त्योहार आखिर आते क्यों है? खैर, जैसे तैसे सबको विदा किया। शाम में अकेले-अकेले मैं भी टहलने निकल गया... Read more
clicks 194 View   Vote 0 Like   5:59am 23 Oct 2012 #
Blogger: amitchandra
चित्र गूगल साभारएक ही दुनिया एक है धरती एक ही है आकाशफिर क्यों आपस में लड़कर हम खो रहे विश्वास।मैं हिन्दु तुम मुस्लिम ये सिख वो ईसाई हैएक लहु बहता रगों में फिर कैसी जुदाई है।ये कैसा अधर्म मचा है देखो चारो ओरदौलत के पीछे सब अपना लगा रहे है जोर।कौड़ी कौड़ी जमा किया पर सबक... Read more
clicks 80 View   Vote 0 Like   7:23am 15 Oct 2012 #
Blogger: amitchandra
चित्र गूगल साभारएक ही दुनिया एक है धरती एक ही है आकाशफिर क्यों आपस में लड़कर हम खो रहे विश्वास।मैं हिन्दु तुम मुस्लिम ये सिख वो ईसाई हैएक लहु बहता रगों में फिर कैसी जुदाई है।ये कैसा अधर्म मचा है देखो चारो ओरदौलत के पीछे सब अपना लगा रहे है जोर।कौड़ी कौड़ी जमा किया पर सबक... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   7:23am 15 Oct 2012 #
Blogger: amitchandra
चित्र गूगल साभारसुबह सुबह अखबार पढ़ते हुए एक खबर पर नजर जा कर टिक गई। लिखा था- अब गैस कनेक्शन लेने के लिए उपभोक्ताओं को एजेंसियों के चक्कर नही लगाने पड़ेगें। उपभोक्ता कनेक्शन के लिए सीधे कंपनी के पास ऑनलाईन आवेदन कर सकते है। पढ़कर खुशी हुई। नीचे लिखा था - फार्म में एक क... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   5:01pm 25 Sep 2012 #
Blogger: amitchandra
चित्र गूगल साभारबरसात की एक खुशनुमा शाम। अभी थोड़ी देर पहले ही तेज बारीश हुई जिसकी वजह से हवा में नमी आ गई और पुरे दिन की उमस भरी गर्मी से छुटकारा मिला। अब ऐसे मौसम मे भला किसका दिल रूमानियत से नही भरेगा। इसलिए मैं भी चल दिया ऐसे मौसम का मजा लेने। तभी पीछे से अचानक एक आवा... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   1:29pm 14 Sep 2012 #
Blogger: amitchandra
चित्र गूगल साभारमैं उसको ढुढॅंता उम्र-ए-तमाम रह गयावो चला गया बस उसका नाम रह गया।सोचता हु समेट लु हर शै को बॉहों मेंकहीं अफसोस न हो बाकी कुछ काम रह गया।जिदंगी को दॉव पर लगाता रहा मगरहारता रहा मैं नाकाम रह गया।ऐसा हुआ हश्र मेरी शायरी का बसएक शायर इस जहॉं में गुमनाम रह गय... Read more
clicks 223 View   Vote 0 Like   9:02am 29 Aug 2012 #
Blogger: amitchandra
हमें मालुम न था लोग इतने बदल जाते हैदर्द देकर औरो को कुछ लोग मुस्कुराते है।ग़म-ए-जिन्दगानी का फ़लसफ़ा बहुत लबां हैथोड़ा सब्र करो हर्फ-दर-हर्फ सुनाते है।कैद कर लो ऑसुओं को अपनी ऑखों मेंबारीशों में नाले भी दरिया बन जाते हैं।दोस्ती के मायने अब बदल गए हैं यहॉंसाथ रहते भी ... Read more
clicks 175 View   Vote 0 Like   4:04pm 21 Aug 2012 #
Blogger: amitchandra
ये तस्वीर अपने आप में बहुत कुछ बयां करती है.  इसे मैंने फेसबुक से लिया है.... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   5:22pm 2 Apr 2012 #
Blogger: amitchandra
सुबह सुबह घर में कलह हो गई और इसका बहुत बड़ा खामियाजा मुझे भुगतना पड़ा। श्रीमति जी ने सबेरे-सबेरे चाय देने से मना कर दिया। अनमने ढंग से स्टेशन की ओर चल पड़ा। वहॉ चाय की चुस्कियों के साथ अखबार का जायका ले रहा था कि दूर से दुखिया आता दिखाई पड़ा। वो हमारे घर से थोड़ी ही दुरी ... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   4:25am 27 Mar 2012 #
Blogger: amitchandra
चित्र गूगल साभार नेता जी] नेता जी एक बात बताईयेये मामला क्या है जरा हमें भी समझाईये।मंत्री बनने से पहले आपके घर में फॉके बरसते थेधोती तो क्या आप लंगोट को भी तरसते थे।ये कैसी आपने जादू की छड़ी घुमाई हैहम सभी को छोड़ लक्ष्मी आपके द्वार आई है।हम तो अभी भी पैदल ही सफर करते ह... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   6:47am 14 Mar 2012 #
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