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पागलखाना PAAGAL-KHAANAA

ग़ज़लपहले सब माहौल बनाया जाता हैफिर दूल्हा, घोड़े को दिखाया जाता हैजिन्हें ज़बरदस्ती ही अच्छी लगती हैउनको घर पे जाके मनाया जाता हैझूठ को जब भी सर पे चढ़ाया जाता हैसच को उतनी बार दबाया जाता हैदो लोगों में इक सच्चा इक झूठा हैबार-बार यह भ्रम फैलाया जाता हैआपस में यूं मिलने-जुल...
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Tag :choosing
  May 9, 2018, 7:33 pm
बड़ों ने कहा कि अच्छे लोगों में उठो, बैठो।तभी से मैं अकेला रह रहा हूं।-संजय ग्रोवर 17-04-2018...
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Tag :elderly
  April 17, 2018, 6:11 pm
ग़ज़लPHOTO by Sanjay Groverविज्ञों को सम्मान चाहिएचमचों को विद्वान चाहिएजिनके अंदर शक्ति बहुत हैउनमें थोड़ी जान चाहिएबुद्वि थोड़ा कम भी चलेगीबड़े-बड़े बस कान चाहिएपीठ प चढ़के सर पे चढ़ गएसबको ही उत्थान चाहिएअंजुलि में श्रद्धा भर लाओहमको तो बस दान चाहिएइज़्ज़त, शोहरत, दौलत-वौलतसबको बड़ा ...
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Tag :lust of popularity
  March 21, 2018, 7:09 pm
ग़ज़लPHOTO by Sanjay Groverसच को ना औज़ार चाहिएकुछ पागल तैयार चाहिएसच क्यों जाए मंदिर-मस्ज़िदसच को सच्चे यार चाहिएसच क्यों करे भरोसा सबका !सच तुमको बीमार चाहिए ! (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({ google_ad_client: "ca-pub-9126168104576814", enable_page_level_ads: true }); सच ना पंजाबी, मद्रासीसच को सच्चा प्यार चा...
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Tag :love
  March 19, 2018, 8:05 pm
लोग ग़ौर से देख रहे थे।कौन किसका पंजा झुकाता है ? कौतुहल.....उत्तेजना......सनसनी....जोश.....उत्सुकता......संघर्ष....प्रतिस्पर्धा.....प्रतियोगिता.....ईर्ष्या......नफ़रत......जलन.....धुंधला ही सही, लोगों को कुछ-कुछ नज़र आ हा था क्यों कि हाथों में अलग-अलग रंगों के दस्ताने भी थे.....आखि़रकार एक हाथ ने दू...
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Tag :dishonesty
  March 3, 2018, 4:50 pm
झूठी कहानीएक दिन राक्षस मर गया। सब सुख चैन से रहने लगे।असली घटनाएक दिन ईमानदार आदमी मर गया।सभी बेईमानों ने राहत की सांस ली।-संजय ग्रोवर23-02-2018...
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Tag :fraudulent goodness
  February 23, 2018, 1:53 pm
PHOTO by Sanjay Groverवे अकेले पड़ गए थे।कोई समाज था जो उन्हें स्वीकार नहीं रहा था।कोई भीड़ थी जो उनके खि़लाफ़ थी।कोई समुदाय था जो उन्हें जीने नहीं दे रहा था।कोई व्यवस्था थी जो उनसे नफ़रत करती थी।कोई बेईमानी थी जिसने उनके खि़लाफ़ साजिश रची थी।मैंने बस थोड़ी-सी मदद कर दी थी, इतना भर कि वो स...
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Tag :experienced
  February 15, 2018, 4:03 pm
PHOTO by Sanjay Groverसुना है प्रायोजित मंथन से प्रायोजित अमृत और प्रायोजित ज़हर निकला।पहले तो प्रायोजितजन ने ख़ुदको देवताओं और राक्षसों में बांट लिया ( कहीं बाद में कोई झगड़ा न पड़ जाए)।तब काम आसान हो गया।और राक्षसों और देवताओं ने विष और अमृत आधा-आधा बांट लिया।तब विष और अमृत एक-दूसरे...
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Tag :god
  February 8, 2018, 4:28 pm
ग़ज़लहोगे तुम भगवान कि हम तो फ्रस्ट्रेशन में रहते हैंहम तो हैं इंसान कि हम तो डिप्रेशन में रहते हैंतुमने ही भगवान बनाया, तुम्ही खोलने पोल लगेआपकी हरक़त अपनी हैरत, डिप्रेशन में रहते हैं (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); हमने सच्ची कोशिश की पर मौक़े पर तुम ले गए श्रेयसच का यह अपमान हुआ ह...
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Tag :depression
  February 6, 2018, 5:45 pm
बे-ईमानदार-1बेईमानों की एक ही शर्त थी, बस, हमारे जैसे हो जाओ फिर हम तुम्हे सामाजिक कहेंगे, साहसी कहेंगे, मुक्ति का मसीहा कहेंगे, स्वतंत्र कहेंगे बल्कि, यहां तक कि ईमानदार भी कहेंगे-मैं हंसा।मैं जैसा रहूंगा ही नहीं वैसा कोई कहे भी तो ख़ुशी कैसे होगी, क्यों होगी !?लेकिन बेईम...
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Tag :deformity
  February 4, 2018, 3:12 pm
ग़ज़लइससे जो मिलके काम करता हैमाफ़िया एहतिराम करता हैतुम्हारा डर है माफ़िया की ख़ुशीमाफ़िया ऐसे काम करता हैपहले करता है ज़िक़्रे-आज़ादीमाफ़िया तब ग़ुलाम करता हैहिंदू, मुस्लिम हैं सब क़ुबूल इसेमाफ़िया आदमी से डरता हैनाम, पैसा, रुआब क्या चहिएमाफ़िया इंतज़ाम करता है (adsbygoogle = window.adsbygoogle...
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Tag :mafia
  January 20, 2018, 8:21 pm
एक समय की बात है एक अजीब-सी जगह पर, बलात्कार करनेवाले, बलात्कृत होनेवाले, बलात्कार देखनेवाले, बलात्कार का इरादा रखनेवाले सब मिल-जुलकर रहते थे। (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); बीच-बीच में वे न जाने किसका विरोध और शिक़ायत करते रहते थे।शायद कोई त्यौहार मनाते हों!-संजय ग्रोवर...
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Tag :mob
  November 27, 2017, 8:06 pm
हास्य-व्यंग्यपता नहीं कितने भाई-बहिन थे पर दो का मुझे पता है-हिटलर और बटलर....हिटलर ख़बरें बनाता था और बटलर उन्हें बताकर लोगों को डराता था...‘सारी टॉफ़ियां मुझे दे दो वरना मेरा बड़ा भाई हिटलर बहुत बदमाश है, वह आकर तुमसे छीन लेगा....’ बच्चों को समझाते हुए बटलर बिलकुल किसी-भी यून...
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Tag :democraciy election
  September 25, 2017, 4:34 pm
एक चैनल का यह विज्ञापन आपने देखा होगा। इसमें सर्वश्री/सुश्री अजय देवगन, धोनी, महिला खिलाड़ी आदि आती-जाते हैं।देखकर लगता है कि भारत में अजय देवगन, महेंद्र धोनी व महिला से पहले न तो कोई ऐक्टिंग करता था, न खेलता था, न ....एक दिन इन्होंने निर्णय लिया कि कुछ भी हो हम तो खेलेंगे, कै...
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Tag :actor
  September 25, 2017, 3:44 pm
लघुव्यंग्यभीड़-भरी बस में चढ़ते हुए लोग- ‘पहले चढ़ने दो भई, जानते नहीं चढ़ना कितना ज़रुरी है !?’भीड़-भरी बस से उतरते हुए लोग- ‘पहले उतरने दो भई, हम उतरेंगे नही तो आप चढ़ोगे कैसे !?’-संजय ग्रोवर22-07-2017...
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Tag :fiction
  July 22, 2017, 4:38 pm
लघुव्यंग्यभीड़-भरी बस में चढ़ते हुए लोग- ‘पहले चढ़ने दो भई, जानते नहीं चढ़ना कितना ज़रुरी है !?’भीड़-भरी बस से उतरते हुए लोग- ‘पहले उतरने दो भई, हम उतरेंगे नही तो आप चढ़ोगे कैसे !?’-संजय ग्रोवर22-07-2017...
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Tag :fiction
  July 22, 2017, 4:38 pm
व्यंग्यमैं सिद्धू को देखता हूं।पता नहीं वे कॉमेडी शो की वजह से ऐसे हैं या कॉमेडी शो उनकी वजह से ऐसे हो गए हैं!आजकल कॉमेडी शो में लोग हंसने के बजाय तालियां बजाने लगे हैं। हो सकता है हंसीं की शॉर्टेज हो, हो सकता है हंसने से थकान होती हो, गला दुखता हो ; और तालियों से आराम मिलत...
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Tag :comedy
  July 18, 2017, 3:38 pm
पैरोडीअफ़वाह की डगर पे चमचों दिखाओ चलकेहरदेस है तुम्हारा, डब्बे तुम्ही हो कल केअपने हों या पराए, किसको नज़र है आएये ज़िंदगी है अभिनय, करना भी क्या है न्यायरस्ते लगेंगे भारी, तुम हो ही इतने हलकेअफ़वाह की डगर पे.....(शेष थोड़ी देर में)-संजय ग्रोवर14-07-2017...
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Tag :false
  July 14, 2017, 11:26 am
उनके पास समाज है।उनके पास परिवार है। उनके पास धर्म है।उनके पास धर्मनिरपेक्षता है।उनके पास राजनीति है।उनके पास राजनीतिक पार्टियां हैं।उनके पास वाम है।उनके पास संघ है।उनके पास कवि हैं।उनके पास आलोचक हैं।उनके पास पक्ष है।उनके पास विपक्ष है।उनके पास निष्पक्ष है।उ...
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Tag :religious
  May 31, 2017, 11:31 am
‘मैं नहीं लूंगा’, एक ने कहा।दूसरों ने शुक्र मनाते हुए ठंडी सांस ली-‘हमपर है ही कहां जो देंगे’इसके साथ ही सब मिलजुलकर खीखी करते हुए मुर्दाघर में दफ़न हो गए।-संजय ग्रोवर10-03-2017...
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Tag :horror
  March 11, 2017, 6:33 pm
सभी नालायक एक-दूसरे को बहुत लाइक/पसंद करते हैं।एक जैसे जो होते हैं।वैसे वे किसी काम के हो न हों पर एक-दूसरे के बहुत काम आते हैं।मिलजुलकर भी अकेले सच से वे डरते हैं।अंततः एक दिन वे ख़ुदको श्रेष्ठ और अकेले सचको नालायक घोषित कर देते हैं।मज़े की बात यह है कि उसके बाद भी उनका ड...
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Tag :satire
  February 24, 2017, 11:11 am
लघुकथावह हमारे घरों, दुकानों, दिलों और दिमाग़ों में छुपी बैठी थी और हम उसे जंतर-मंतर और रामलीला ग्राउंड में ढूंढ रहे थे।-संजय ग्रोवर05-02-2017...
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Tag :deception
  February 5, 2017, 2:26 pm
सवा अरब लोग अगर एक हो जाएं तो क्या नहीं कर सकते ?और कुछ नही तो मिलजुलकर चुप तो रह ही सकते हैं।-संजय ग्रोवर14-01-2017...
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Tag :escape
  January 14, 2017, 4:35 pm
लघुकथा/व्यंग्य‘एक बात बताओ यार, गुरु और भगवान में कौन बड़ा है ?’‘तुम लोग हर वक़्त छोटा-बड़ा क्यों करते रहते हो.....!?’‘नहीं.....फिर भी .... बताओ तो ....?’‘गुरु बड़ा है कि छोटा यह बताने की ज़रुरत मैं नहीं समझता पर वह भगवान से ज़्यादा असली ज़रुर है क्यों कि वह वास्तविक है, हर किसीने उसे देखा ...
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Tag :disciple
  January 7, 2017, 4:48 pm
लघुव्यंग्यअपने यहां लोग अकसर अपने बारे में कुछ बातें बहुत अच्छे से जानते हैं। जैसे मैं देखता हूं कि कई लोग दूसरों से तो कहते ही हैं-‘बिज़ी रहो-बिज़ी रहो’, ख़ुद भी अकसर बिज़ी रहने की कोशिश करते पाए/पकड़े जाते हैं। वे कभी ख़ाली हों तो झट से टीवी चला देते हैं, एफ़एम सुनने लगते है...
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Tag :empty
  December 8, 2016, 5:04 pm
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