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Blog: पढ़ते-पढ़ते

Blogger: मनोज पटेल
जार्ज कार्लिन (12 मई, 1937 -- 22 जून 2008) अमेरिकी हास्य अभिनेता और व्यंग्यकार थे. अपने कामेडी एल्बमों के लिए उन्होंने पांच ग्रैमी अवार्ड जीते थे. 2008 में उन्हें मार्क ट्वेन पुरस्कार से नवाजा गया. उसने कहा था : जार्ज कार्लिन (प्रस्तुति/अनुवाद : मनोज पटेल)  कुल मिलाकर साहित्य सच को ... Read more
clicks 220 View   Vote 0 Like   5:54am 27 Jun 2013 #उसने कहा था
Blogger: मनोज पटेल
हाल सिरोविट्ज़ की एक और कविता...   एक असंतुलन को सही करना : हाल सिरोविट्ज़ (अनुवाद : मनोज पटेल)  मैं विज्ञापनों की कभी नहीं सुनता, पिता जी ने कहा. उनका इरादा मुझे ऐसा कुछ बेचने की कोशिश करना होता है जिसकी मुझे जरूरत नहीं होती. अगर मुझे उसकी जरूरत हो तो मैं जानना चाहूँगा क... Read more
clicks 193 View   Vote 0 Like   4:51am 25 Jun 2013 #हाल सिरोविट्ज़
Blogger: मनोज पटेल
एन पोर्टर (Anne Porter) की एक कविता...   जाड़े की सांझ : एन पोर्टर (अनुवाद : मनोज पटेल)  जाड़े की किसी साफ़ सांझ दूज का चाँद और बलूत के ठूँठ पर लगा गिलहरी का गोल घोंसला बराबर के ग्रह होते हैं.           :: :: ::... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   4:41am 18 Jun 2013 #अन्य
Blogger: मनोज पटेल
अफ़ज़ाल अहमद सैयद की एक और कविता...   सुर्ख़ पत्तों का एक दरख़्त : अफ़ज़ाल अहमद सैयद (लिप्यंतरण : मनोज पटेल)  नहीं देखा होगा तुमने अपने आपको छत से लगे हुए आईने में सुर्ख़ पत्तों से भरे एक दरख़्त के नीचे नहीं बढ़ाई होंगी तुमने अपनी उंगलियाँ दरख़्त से पत्ते और अपने बदन से ... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   4:30am 16 Jun 2013 #अफजाल अहमद सैयद
Blogger: मनोज पटेल
अफ़ज़ाल अहमद सैयद की एक और कविता...   मेरे पार्लर में क़दम रखो : अफ़ज़ाल अहमद सैयद (लिप्यंतरण : मनोज पटेल)  मेरे पार्लर में क़दम रखो मौत मुझे कहती है उसके बदन में मैं अपनी महबूबाओं को बरहना देखता हूँ उसकी रान पर बहते हुए अपने इंज़ाल को पहचान लेता हूँ उसको मेरी उस नज्म क... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   5:15am 12 Jun 2013 #अफजाल अहमद सैयद
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शान हिल की कुछ और ट्विटर कहानियां... शान हिल की ट्विटर कहानियाँ  (अनुवाद : मनोज पटेल) मेरे मम्मी-डैडी ने मुझे नाक से कीबोर्ड खटखटाते देख लिया. मम्मी रोने लगीं. डैडी ने यह महसूस कर मेरे हाथों की हथकड़ियाँ खोल दीं कि लेखक होने का कोई इलाज नहीं है. :: :: :: मुझे गुस्से को काबू करन... Read more
clicks 199 View   Vote 0 Like   3:46am 6 Jun 2013 #लघुकथा
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अफ़ज़ाल अहमद सैयद की एक और कविता...   बर्फ़ानी चिड़ियों का क़त्ल : अफ़ज़ाल अहमद सैयद (लिप्यंतरण : मनोज पटेल)  यह बर्फ़ानी चिड़ियों के क़त्ल की कहानी है मगर मैं इसे तुम्हारे जिस्म से शुरू करूँगा तुम्हारा जिस्म जंगली जौ था जो फ़रोख्त हो गया, चुरा लिया गया या तबाह हो गया प... Read more
clicks 201 View   Vote 0 Like   3:24am 5 Jun 2013 #अफजाल अहमद सैयद
Blogger: मनोज पटेल
अफ़ज़ाल अहमद सैयद की एक और कविता...   ज़िंदा रहना एक मिकानिकी अजीयत है : अफ़ज़ाल अहमद सैयद (लिप्यन्तरण : मनोज पटेल)  ज़िंदा रहना एक मिकानिकी अजीयत है हम समझ सकते हैं अपनी शर्मगाहों को गहरा काटकर मर जाने वाली लड़कियाँ  क्यों कोई अलविदाई ख़त नहीं छोड़तीं और बच्चों की हड... Read more
clicks 200 View   Vote 0 Like   12:40pm 1 Jun 2013 #अफजाल अहमद सैयद
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हंगरी की कवयित्री मोनिका मेस्टरहाज़ी की एक कविता... देश और काल : मोनिका मेस्टरहाज़ी  (अनुवाद : मनोज पटेल)           एफ. ए. के प्रति उन्हें नहीं पता कैसे पढ़ी जाती हैं कविताएँ: वे पढ़ नहीं पाते जो लिखा होता है दो पंक्तियों के बीच.              :: :: :: ... Read more
clicks 187 View   Vote 0 Like   3:01am 31 May 2013 #मोनिका मेस्टरहाज़ी
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अफ़ज़ाल अहमद सैयद की एक और कविता...   मेरा दिल चाहता है : अफ़ज़ाल अहमद सैयद (लिप्यन्तरण : मनोज पटेल) मौत फ़रोख्त नहीं होती यह खुद को सिपुर्द कर देती है ज़हर की एक बूँद और स्याह सीढ़ियों के नीचे मौत की तलाश में हम उनके साथ भटक जाते हैं जिनके फांसीघरों में हमारे लिए कोई गि... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   4:19am 24 May 2013 #अफजाल अहमद सैयद
Blogger: मनोज पटेल
डोरोथिया ग्रासमैन की एक कविता... मैं समझ गई कुछ गड़बड़ है  :  डोरोथिया ग्रासमैन (अनुवाद : मनोज पटेल) मैं समझ गई कुछ गड़बड़ है जिस दिन मैंने कोशिश की धूप का एक छोटा सा टुकड़ा उठाने की और कोई आकार लेने का अनिच्छुक, वह फिसल गया मेरी उँगलियों से. बाकी सारी चीजें पूर्ववत ही रह... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   4:22am 18 May 2013 #डोरोथिया ग्रासमैन
Blogger: मनोज पटेल
डोरोथिया ग्रासमैन की एक कविता... तुम्हें बताना है  :  डोरोथिया ग्रासमैन (अनुवाद : मनोज पटेल) तुम्हें बताना है कभी-कभी होता है यूँ भी कि सूरज बजा देता है मुझे किसी घंटे की तरह,  और मुझे याद आ जाता है सब कुछ, तुम्हारे कान भी.             :: :: :: ... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   4:50am 15 May 2013 #डोरोथिया ग्रासमैन
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लिओनेल रुगामाका जन्म 1949 में निकारागुआ में हुआ था. 1967 में वे, वहां के तानाशाह सोमोज़ा के विरुद्ध भूमिगत संघर्ष चला रही सांदिनीस्ता नेशनल लिबरेशन फ्रंट में शामिल हो गए और 15 जनवरी 1970 को बीस वर्ष की अल्पायु में सोमोज़ा की फौज से लड़ते हुए उनकी मृत्यु हो गई. यहाँ प्रस्तुत है उ... Read more
clicks 212 View   Vote 0 Like   4:10am 13 May 2013 #अन्य
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रोमानियाई भाषा के कवि डान सोशिउ की एक कविता... चीन जितनी बड़ी  : डान सोशिउ (अनुवाद : मनोज पटेल) और हम बैठ गए पत्थर की गीली बेंचों पर पुराने अखबार दबाए अपने चूतड़ों के नीचे हम में से एक ने कहा सुनो मेरी सचमुच बड़ी इच्छा है सिगरेट की ठूँठों से अपने लिए एक माला बनाने की वह '95 ... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   6:20am 10 May 2013 #अन्य
Blogger: मनोज पटेल
उलाव हाउगे की एक और कविता... रोड रोलर  : ऊलाव हाउगे (अनुवाद : मनोज पटेल) मोड़ पर वह मुनासिब चेतावनी देता है तुम्हें, नीम रौशनी में आता है तुम्हारी ओर, सुलगते सींग उसके माथे से झिलमिलाते हुए -- आता है बोझिल, साधिकार आता है लुढ़कते हुए उस डामर पट्टी को बराबर करते जिस पर चलना ... Read more
clicks 192 View   Vote 0 Like   3:46am 5 May 2013 #ऊलाव एच. हाउगे
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यहूदा आमिखाई की एक और कविता... किसी जगह  : येहूदा आमिखाई  (अनुवाद : मनोज पटेल) किसी जगह ख़त्म हो चुकी है बारिश, मगर मैं कभी नहीं खड़ा हुआ सीमा पर, जहाँ कि अभी सूखा ही हो एक पैर और दूसरा भीग जाए बारिश में. या किसी ऐसे देश में जहाँ लोगों ने बंद कर दिया हो झुकना अगर गिर जाए कोई च... Read more
clicks 189 View   Vote 0 Like   6:18am 3 May 2013 #येहूदा आमिखाई
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उसने कहा था के क्रम में आज फ्रेडरिक नीत्शेके कुछ कोट्स... उसने कहा था  : फ्रेडरिक नीत्शे  (अनुवाद : मनोज पटेल) मेरा अकेलापन लोगों की उपस्थिति या अनुपस्थिति पर निर्भर नहीं करता; बल्कि मैं तो ऐसे लोगों को नापसंद करता हूँ जो मुझे सच्ची सोहबत दिए बिना मेरा अकेलापन हर लेते हैं.... Read more
clicks 226 View   Vote 0 Like   5:01am 1 May 2013 #उसने कहा था
Blogger: मनोज पटेल
अफ़ज़ाल अहमद सैयद की एक और कविता...   नज्म : अफ़ज़ाल अहमद सैयद (लिप्यन्तरण : मनोज पटेल) जो बातें मैं उससे कहना चाहता हूँ वह कहती है अपनी नज्म से कह दो मेरी नज्म उसका इंतज़ार कर सकती है उसे चूम सकती है और अगर वह तनहा हो तो उसके साथ चल सकती है मुझे अपनी नज्म पर गुस्सा आता है... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   4:06am 24 Apr 2013 #अफजाल अहमद सैयद
Blogger: मनोज पटेल
यहूदा आमीखाई की एक और कविता... उन दिनों, इस समय  : येहूदा आमिखाई  (अनुवाद : मनोज पटेल) धीरे-धीरे अलग होते हैं वे दिन इस समय  से, जैसे कोई संतरी लौट रहा हो अपने घर, जैसे मातमपुर्सी करने वाले लौट रहे हों किसी क्रियाकर्म से दूरदराज के अपने घरों को. याद है? "मैं तुम्हें जाने नह... Read more
clicks 200 View   Vote 0 Like   4:42am 22 Apr 2013 #येहूदा आमिखाई
Blogger: मनोज पटेल
लैंग्स्टन ह्यूज की एक और कविता... आत्महत्या की वजह : लैंग्स्टन ह्यूज (अनुवाद : मनोज पटेल) नदी के शांत, शीतल मुख ने एक चुंबन मांग लिया था मुझसे.              :: :: :: ... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   4:50am 19 Apr 2013 #लैंग्स्टन ह्यूज
Blogger: मनोज पटेल
अमेरिका में रह रहे इराकी कवि सिनान अन्तून की एक और कविता... न्यूयार्क में एक तितली : सिनान अन्तून (अनुवाद : मनोज पटेल) बग़दाद के अपने बगीचे में मैं अक्सर भागा करता था उसके पीछे मगर वह उड़ कर दूर चली जाती थी हमेशा आज तीन दशकों बाद एक दूसरे महाद्वीप में वह आकर बैठ गई मेरे ... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   4:12am 15 Apr 2013 #सिनान अन्तून
Blogger: मनोज पटेल
डेनमार्क के कवि हेनरिक डोपट (Henrik Nordbrandt) की एक कविता... ढलते मार्च के दिन : हेनरिक डोपट (अनुवाद : मनोज पटेल) दिन एक दिशा में चलते हैं और चेहरे उल्टी दिशा में. बराबर वे उधार लिया करते हैं एक-दूसरे की रोशनी. कई सालों बाद मुश्किल हो जाता है पहचानना कि दिन कौन से थे और कौन से चेहरे.... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   5:04am 5 Apr 2013 #अन्य
Blogger: मनोज पटेल
ज़िबिग्न्यू हर्बर्ट की एक और कविता... स्वर्ग से रपट : ज़िबिग्न्यू हर्बर्ट (अनुवाद : मनोज पटेल) स्वर्ग में हफ्ते में तीस घंटे निर्धारित हैं काम के तनख्वाहें ऊँची हैं और कीमतें गिरती जाती हैं लगातार शारीरिक श्रम थकाऊ नहीं होता (गुरुत्वाकर्षण कम होने की वजह से) टाइपिंग ... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   4:48am 2 Apr 2013 #जिबिग्न्यु हर्बर्ट
Blogger: मनोज पटेल
कहानी लिखने की कला पर रॉबर्तो बोलान्यो की सलाह... "अब चूंकि मैं चौवालिस साल का हो चुका हूँ, इसलिए कहानी लिखने की कला पर कुछ सलाह दूँगा. (1) एक बार में एक ही कहानी पर मत काम करो. अगर तुम एक समय में एक ही कहानी पर काम करोगे तो ईमानदारी से मरने के दिन तक एक ही कहानी लिखते रह जाओग... Read more
clicks 198 View   Vote 0 Like   9:35am 1 Apr 2013 #रॉबर्तो बोलान्यो
Blogger: मनोज पटेल
नोबेल पुरस्कार से सम्मानित जापान के लेखक यासूनारी कावाबाता की यह कहानी मुझे बहुत पसंद है. 'नई बात' ब्लॉग पर पूर्व-प्रकाशित यह कहानी आज यहाँ साझा कर रहा हूँ... छाता : यासूनारी कावाबाता (अनुवाद : मनोज पटेल) बसंत ऋतु की बारिश चीजों को भिगोने के लिए काफी नहीं थी. झीसी इतनी ... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   5:58am 31 Mar 2013 #कहानी
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