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Blog: Aarzoo

Blogger: deepak saini
प्रिय मित्रो, प्रणामआज बहुत दिनों के बाद कोई कविता बनी है कविता क्या दिल का दर्द बाहर आया है फीकी हो गयी मिठास शीर की चटपटी न लगी आज  फुलकियां हर निवाले के संग आँखों में आती, जलती दुकानो की झलकियाँ शर्मसार है आज  इंसानियत यहाँ क्या झांकते हो खोलके खिड़क... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   12:01pm 29 Jul 2014 #
Blogger: deepak saini
पैसा तो  हाथ  का मैल  है  (पुरानी कहावत ) बड़े वी आई पी मैल  हो ?दिखाई  ही  नहीं देते,किस  हाथ  पर  कितने चढ़े हो पता भी नहीं लग पाता जो दिन रात पसीना बहाता है दो रोटी के चक्कर में नहा भी नहीं पाता है हाथ धोना तो दूर मुंह भी बस इक बार धुल पाता है उसके साथ क्या  पंगा है तुम्हा... Read more
clicks 170 View   Vote 0 Like   3:50pm 4 May 2012 #
Blogger: deepak saini
एक ही प्रभू की पूजा हम अगर करते नहीं एक ही दरगाह पर सर आप भी रखते नहीं           अपना सजदागाह  अगर देवी का स्थान  है           आपके सजदो का मरकज भी तो कब्रिस्तान है हम अपने देवताओ की गिनती अगर रखते नहीं आप भी मुश्किल कुशाओ को तो गिन सकते नहीं           ज... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   7:17am 25 Mar 2012 #
Blogger: deepak saini
स्मृति के पन्नो परचित्र एक अंकित  है,कई रंगो से सजाप्रेम तुम्हारा संचित है,तरंगें उठती ज्यो गर्भ सागर से,तोड देती तटो का सीना,मन मे उठती भावनायें मेरे, भेद कर धर्य का सीना,तुम मिले मुझको ज्यों प्यासी धरा को जल की धार,निर्धन मन कुबेर हो गयादिया मोती सा प्रेम अपार,सुख के ... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   4:19pm 17 Jan 2012 #
Blogger: deepak saini
कितने ही रास्तो से,आती आज भी उड कर धूल,लग जाती मेरे सीने से,स्मॄत हो आते वो क्षण,जब चले थे उन पर थाम कर हाथ एक दूजे का,पूछ्ता है वो पेडपत्तियाँ हिलाकर,छाँव मे जिसकी कटती थीसारी दोपहरी," वो जो,पोछँती थी चुनरी से अपनी,तेरे माथे पे आयी बूंदों को,कहाँ है"ये फूल बसन्ती सरसो ... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   12:42pm 17 Nov 2011 #
Blogger: deepak saini
बहुत दिनों से ब्लाग से दूर हूँ , कारण मैं क्या बताऊ शायद ये कविता कुछ बता दे दो बैलो की गाड़ी दोनों ही अनाड़ीएक खीचे पूरब की ओर दूजा पच्छिम को लगाये जोर समझ दोनों की अलग फिर भी बंधी दोनों की डोर एक बिना हरे के भूखा एक को सब्र देता है भूसाएक नांद  से दोनों बं... Read more
clicks 183 View   Vote 0 Like   3:41pm 7 Nov 2011 #
Blogger: deepak saini
आतंकी  उवाच  कायर हो तुम, और सरकार  तुम्हारी निठल्ली है इसलिए बारूदो के ढेर पर बैठी दिल्ली है                              कभी कोर्ट में हम कभी संसद में बम बिछाते है                              और तुम्हारे जांबाजो के हाथो हम पकडे भी जाते है  &nb... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   2:43pm 28 Sep 2011 #
Blogger: deepak saini
बोल सखी मैं किस विधि जीऊँ जीवन हाला किस विधिपीऊँ प्रिय मेरे ने कदर न जानी पागल भई मैं हुई दीवानी किस विध मन के ज़ख्म को सीऊं बोल सखी मैं किस विधिजीऊँ                       मनमीत मेरे ओ प्राण प्यारे                      सपने तोड़ गए तुम सारे ... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   4:28am 3 Sep 2011 #
Blogger: deepak saini
जिंदगी खिलती है गुलज़ार बनके तुम देखो तो इसको  प्यार करकेतुम्हारे भी नाज़ उठाएगा कोई तुम देखो तो कभी इकरार करके मुंह मोडना जिंदगी से कोई बात नही खुश रहो हर गम से दो चार करकेअपनी जिंदगी को तुमने जाना ही कब है तुमने देखा ही कहाँ कभी प्यार करके कोई शख्स है तुम्ह... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   7:59am 27 Jul 2011 #
Blogger: deepak saini
उन की याद आने से होती है आँख नम, तो क्या करें चलते हुए उनकी गली में रुक जाते है कदम, तो क्या करें उन को भूल जाने की सलाहे तो बहुत मिली पर ये दिल न माना बेशरम, तो क्या करे यूं तो चाहने वाले हमारे भी बहुत हैपर उनके ही दीवाने हुए हम, तो क्या करेएक नज़र वो हमें देखते भी नही उनके दी... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   2:32pm 13 Jul 2011 #
Blogger: deepak saini
उन जख्मो को कुरेदने में मज़ा आता है जख्म जो भी तेरी याद दिला जाता है छेड़ता हूँ जख्मो को, तुम्हे भूल न जाऊ कहीं वक्त का मरहम हर जख्म सुखा जाता है बंध भी जाते किसी रिश्ते में तो क्या होता प्यार पे आ के ही हर रिश्ता टिक जाता है तुमसे अलग हो के मैं जी तो रहा हूँ नाम कृष्ण का अब भी ... Read more
clicks 139 View   Vote 0 Like   3:45am 28 Jun 2011 #
Blogger: deepak saini
लगभग १५ दिन से बिजली व् नेट की प्रोब्लम के कारण आप सब से न जुड पाने के लिए क्षमा के साथ एक पुरानी रचना प्रस्तुत है कब तक प्यासी धरती से, अब और हम तरसगे,जिन पर टिकी हुई हें आँखे  वो सावन कब बरसेगे,कब मिलोगे तुम हमे कब पास मेरे आओगे,कब बैठोगे संग मेरे कब मेरी प्यास बुझा... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   12:34pm 10 Jun 2011 #
Blogger: deepak saini
अन्न माँगा, दिया हमने आबरू ना  दे पाएंगे                       रक्षक ही  जब भक्षक बने                       अन्नदाता अब कहाँ जायेंगे महंगा बीज , महंगा खाद फिर भी सस्ता है अनाज ग़ुरबत में जी लेंगे लेकिन देश को न भूखा सुलायेंगे           ... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   4:45pm 24 May 2011 #
Blogger: deepak saini
कितना आसान है रिश्ते बनाना और तोड़ देना मन में बसना - बसाना  और  फिर छोड़ देना  तोड़ देना मन को या खिलोने को  सरल हैपरन्तु जोड़ना  ?क्या रिश्ते  सचमुच टूटते है ?क्या सचमुच दूर हो सकते है ?किसी अपने   से , क्या रिश्ते बनने-टूटने  के  बीच जो अंतराल है , ... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   7:36am 14 May 2011 #
Blogger: deepak saini
संग तुम्हारे है कितनी बहारे दिए तुमने  ही सपने प्यारे  मुस्कान बन छाये लबो पर आँखों में भर दिए हंसी नज़ारे साथ यूं ही तुम रहो हमेशा दूर हो के एक पल न गुजारे न किसी और की मैं आस करून कोई बसे मन में तुम्हारे तुम्हारे लिए ही धडके ये दिल हर धडकन तुमको ही पुकार... Read more
clicks 283 View   Vote 0 Like   6:30pm 1 May 2011 #
Blogger: deepak saini
हम तेरी यादों में इस कदर खो जाते है याद करते है तुमको और रो जाते है लोग कहते है प्यार में नींद नहीं आती सपने में तुझे मिलने को हम शाम से सो जाते है सुबह उठ के मुंह धोने की जरूरत किसे ?मेरे आंसू ही मेरा मुंह धो जाते है किस किस लम्हे की जड़ निकालू दिल सेवो जब भी  दीखते है न... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   10:43am 18 Apr 2011 #
Blogger: deepak saini
भगीरथ ने की थी तपस्या संभव करने असंभव  को उनके  पुरखो कीअतृप्त आत्माओ की  प्यास बुझाने उतर आना पड़ा था गंगा को झुक जाना पड़ा था भगवान्  को एक और भगीरथ लगा है  तपस्या में लाना चाहता है लोकपाल की गंगाकरोडो अतृप्त भारतीयों के लिए जिनकी आत्मा तड़प ... Read more
clicks 164 View   Vote 0 Like   10:57am 8 Apr 2011 #
Blogger: deepak saini
वो जब से पास आने लगे है मेरे जख्म मुस्कुराने लगे है जागने लगी सोई हसरते मेरी वो सपने नए दिखने लगे है भूल बैठे थे जिस मधुर गीत को गीत वो फिर हम गुनगुनाने लगे है  कभी अंधेरो कभी उजालों की तरह वो मुझसे नज़रें मिलाने लगे है होता नहीं यकीन अंपनी आँखों पे अचानक सामने वो मुस्क... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   1:07pm 31 Mar 2011 #
Blogger: deepak saini
बातो ही बातो में जब बात आयी तेरी यादों से तेरी महकी यार तन्हाई मेरी                  रंज नहीं दिल में तू पास नहीं मेरे                  लगने लगी है प्यारी अब जुदाई तेरी बड़े प्यारे लगते हो  मिलते हो ख्वाबो में नींद से हो गयी ज... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   10:34am 22 Mar 2011 #
Blogger: deepak saini
प्रेम की परिभाषान समझ सका आजतक ये तृप्ती है या पिपासाआशा है या निराशान समझ सका आजतक प्रेम वो है जो दिखता है प्रिया की आँखो मेकोई प्यारा सा उपहार पाकर या प्रेम वो है जो सुकून मिलता है आफिस से आकर तुम्हारी मुस्कान पाकर प्रेम वो है जो चाँद पर जाने की बात करता है केशो को घटा, ... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   4:28pm 6 Mar 2011 #
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