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गीत.......मेरी अनुभूतियाँ

मैंने खींच रखा  है अपने चारों ओर एक वृत और सजा रखा है चाँद सूरज को सितारे भी टिमटिमा रहे हैं अपनी मध्यम  रोशनी मेंफिर भी सारे ग्रह ग्रसित हैं अंधेरी सी स्याही से इन ग्रहों की दशा और ब्रह्मांड  का चक्कर कब मनोकूल होगा कर रही हूँ बस इसका इंतज़ार अपने खींचे वृत में बस ...
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संगीता स्वरुप ( गीत )
Tag :कविता ( सर्वाधिकार सुरक्षित )
  June 17, 2013, 6:32 pm
 सुनीता शानू ब्लॉग जगत में  कोई  अनचीन्हा  नाम नहीं है । कल उनकी पुस्तक " मन पखेरू उड़ चला फिर " काव्य संग्रह का विमोचन  दिल्ली में हुआ । सुनीता जी का यह पहला काव्य संग्रह है , उनके मन पखेरू का एक पंख जिसने बहुत संतुलित अंदाज़ में उड़ान लगाई है  और यह उड़ान मात्र कल्पना क...
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संगीता स्वरुप ( गीत )
Tag :पुस्तक परिचय / मन पखेरू उड़ चला फिर / सुनीता शानू
  May 19, 2013, 7:00 am
माँ शब्द में ---  मात्र  एक वर्ण और एक मात्रा जिससे शुरू होती है सबकी जीवन यात्रा माँ ब्रह्मा  की तरह सृष्टि  रचती है धरा की तरह हर बोझ सहती है धरणि बन  हर पुष्प पल्लवित  करती है सरस्वति बन संस्कार गढ़ती है भले ही खुद हो अनपढ़ पर ज़िंदगी की किताब को खुद  रचती है माँ हर ब...
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संगीता स्वरुप ( गीत )
Tag :कविता ( सर्वाधिकार सुरक्षित )
  May 11, 2013, 11:06 am
आठ - नौ साल की बच्ची माँ की उंगली थाम आती है जब मेरे घर और उसकी माँ उसके हाथों में किताब की जगह पकड़ा देती है झाड़ू तब दिखती है मुझे कविता ।अंधेरी रात के गहन सन्नाटे को चीरती हुई किसी नवजात बच्ची की आवाज़ टकराती है कानो से जिसे उसकी माँ छोड़ गयी थी फुटपाथ पर वहाँ मुझे...
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संगीता स्वरुप ( गीत )
Tag :कविता ( सर्वाधिकार सुरक्षित )
  April 26, 2013, 3:37 pm
परम्पराओं के नाम पर देखते हैं हम नयी पीढ़ी को ,एक आलोचक की दृष्टि से ,और भरते रहते हैं थोड़ा थोड़ा बारूद उनके मन आँगन में,नहीं देना चाहते आज़ादी यह समझने की ,कि इनसे होती हैं अपनी जड़ें मजबूत ,बिना जाने बूझे बस निबाहते हैं जब परम्पराओं को ,तो आस्था का तत्व नहीं होता उसम...
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संगीता स्वरुप ( गीत )
Tag :कविता ( सर्वाधिकार सुरक्षित )
  April 16, 2013, 3:21 pm
प्रेम में पगीहिरनी सी आँखें ,ठिठक जाती हैं देख कर ,उसकी आँखों में एक हिंसक पशु , वासना की देहरी पर ,दम तोड़ देती है उसकी चाहत  ,आभास होते ही हकीकत का,जुटाती है भर पूर  शक्ति ,लेकिन काली बनते बनते भी ,रह जाती है ,मात्र एक ठंडी औरत । ...
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संगीता स्वरुप ( गीत )
Tag :कविता ( सर्वाधिकार सुरक्षित )
  April 3, 2013, 4:40 pm
मेरे इस शहर में बसंत नहीं आता , न गमकती बयार चलती है और न ही महकते फूल खिलते हैं कंकरीट  के उद्यानों सेछनती हुई विषैली हवा घोट  देती है दमहर शख्स  का । मेरे इस शहर मेंबसंत नहीं आता ...एक खौफ है जो घेरे रहता है मन को कब  , कहाँ कोई भेड़िया दबोच लेगा अपने शिकार को और वह तोड़ ...
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संगीता स्वरुप ( गीत )
Tag :कविता ( सर्वाधिकार सुरक्षित )
  February 18, 2013, 3:24 pm
दो कच्चे  धागों  को जोड़ कर आपस में दिया जाता है जब  वटतो हो जाते हैं मजबूत , हल्के से तनाव से नहीं जाते वे टूट ,वैसे ही तुम और मैं साल दर साल वक़्त के साथ वट लगाते लगाते जुड़ चुके हैं इस कदर कि आसान नहीं है कोई भी  परिस्थिति तोड़ सके हमें  ।कुछ बात तो है --कि एक दूसरे से है...
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संगीता स्वरुप ( गीत )
Tag :कविता ( सर्वाधिकार सुरक्षित )
  February 5, 2013, 12:00 am
मैंने मैंने रख दिया था हर रिश्ता अलग अलग कोष्ठ में और सोचा था किहल कर लूँगी रिश्तों के सवाल  गणित की तरह पर रिश्ते कोई गणित तो नहीं निश्चित नहीं होता कि कौन सा  कोष्ठ कब खोलना है किसे गुणा करना है और किसे जोड़ना है बस करती रहती हूँ कोशिश कि रिश्तों के कोष्ठकों के म...
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संगीता स्वरुप ( गीत )
Tag :कविता (सर्वाधिकार सुरक्षित )
  January 15, 2013, 10:38 am
आज उतार लायी हूँ अपनी भावनाओं की पोटली मन की दुछत्ती से बहुत दिन हुये जिन्हें बेकार समझ पोटली बना कर डाल दिया था किसी कोने में ,आज थोड़ी फुर्सत थी तो खंगाल रही थी ,कुछ संवेदनाओं का कूड़ा - कचरा ,एक तरफ पड़ा था मोह - माया का जाल , इन्हीं  सबमें  खुद को , हलकान करती हुई ज़िं...
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संगीता स्वरुप ( गीत )
Tag :कविता (सर्वाधिकार सुरक्षित )
  December 3, 2012, 3:29 pm
नारी और पुरुष को एक  ही सिक्के के दो पहलू  माना है पुरुष को हैड और स्त्री को टेल  जाना है पुरुष के दंभ ने कब नारी का मौन स्वीकारा  है उसके अहं के आगे नारी का अहं हारा है ।पुरुष ने हर रिश्ते को अपने ही तराजू पर तोला  है , जबकि नारी ने हर रिश्ता मिश्री सा घोला है । पुरुष  अ...
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संगीता स्वरुप ( गीत )
Tag :कविता (सर्वाधिकार सुरक्षित )
  November 8, 2012, 11:18 am
वाणी गीत    की दो रचनाएँ पढ़ीं थीं झीलें हैं कि गाती मुसकुराती स्त्रियाँ   और झील होना भी एक त्रासदी है ... और यह झील मन को बहुत भायी ....... झील का ही उपमान ले कर एक रचना यहाँ भी पढ़िये ....झील सी होती हैं स्त्रियाँ लबालब  भरी हुई संवेदनाओं से चारों ओर के किनारों से बंधक सी बनी ...
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संगीता स्वरुप ( गीत )
Tag :झील / वाणी / कविता / सर्वाधिकार सुरक्शित
  October 23, 2012, 4:30 pm
मन के आँगन मेंतुमने अपनी ही परिभाषाओं के खींच दिये हैं कंटीले तारऔर फिर करते हो इंतज़ार कि , भर जाये आँगन फूलों से .हाँ , होती है हरियाली पनपती है वल्लरी पत्ते भी सघन होते हैं पर फूल नहीं खिलते हैं । क्या तुमको ऐसा नहीं लगता किमन का उपवन अधूरा  रह जाता है और खुशियों ...
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संगीता स्वरुप ( गीत )
Tag :कविता ( सर्वाधिकार सुरक्षित )
  October 10, 2012, 4:30 pm
शब्दों का अकूत भंडार न जाने कहाँ तिरोहित हो गया नन्हें से अक्षत के शब्दों पर मेरा मन तो मोहित हो गया । बस  को केवल " ब "  बोलता साथ बोलता कूल कहना चाहता है  जैसे बस से जाएगा स्कूल । मार्केट  जाने को गर कह दो पाकेट - पाकेट कह शोर मचाता झट दौड़ कर कमरे से फिर अपनी  सैंडिल ...
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संगीता स्वरुप ( गीत )
Tag :अक्षत / कविता / सर्वाधिकार सुरक्षित/
  September 21, 2012, 1:32 pm
पैसे की चमक ने चौंधिया दी हैं सबकी आँखें और हो गए हैं लोंग अंधे अंधे - आँख से नहीं दिमाग से पैसे की अथाह चाह ही राहें खोलती है भ्रष्टाचार  की काले बाज़ार की अपराध की पर क्या एक पल भी उनका बीतता है सुकूं से जो पैसे को भगवान बनाये बैठे हैं ? जितना कमाते हैं उससे ज्यादा प...
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संगीता स्वरुप ( गीत )
Tag :कविता ( सर्वाधिकार सुरक्षित )
  September 13, 2012, 7:00 am
विलुप्त  हैं कहीं मेरी सारी भावनाएं ,न किसी बात से मिलती है खुशी और न ही होता है गम ,मन के समंदर मेंन कोई लहर उठती है ,और न ही होती हैं  आँखें नम ,लगता तो है किपलकों पर बादलों ने डाला है डेरा गहन ,लेकिन न जाने क्यों महसूस होती है बेहद थकन ,शिथिल  सी ज़िंदगी जैसे जीती चली जा...
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संगीता स्वरुप ( गीत )
Tag :कविता ( सर्वाधिकार सुरक्षित )
  August 27, 2012, 4:00 pm
तम हो घनेरा और जाना हो मंज़िल तक तो जुगनू  का एक दिया ही काफी है मंज़िल पाने को तपिश हो मन की और चाहते हो ठंडक तो अश्क  का एक कतरा ही काफी है अदना सा झोंका ही भर देता है प्राणवायु जीवित रहने के लिए एक सांस ही काफी है , भले ही हो अस्फुट सा स्वर पर है वो प्रेमसिक्त मन में...
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संगीता स्वरुप ( गीत )
Tag :कविता ( सर्वाधिकार सुरक्षित )
  August 4, 2012, 8:00 am
गर्भनाल पत्रिका के अगस्त  अंक में  प्रकाशित  पुस्तक परिचय  --- खिल उठे पलाश " खिल उठे  पलाश "   काव्य संग्रह है  कवयित्रि सारिका मुकेश जी का जो इस समय वी॰ आई॰ टी॰ यूनिवर्सिटी  वैल्लोर ( तमिलनाडु) में अँग्रेजी  की असिस्टेंट प्रोफेसर ( सीनियर ) के रूप में कार्य रात हैं . इसस...
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संगीता स्वरुप ( गीत )
Tag :पुस्तक परिचय / खिल उठे पलाश / सारिका मुकेश
  August 2, 2012, 4:00 pm
तम  के  गहन  बादलों के बीचआज निकली है हल्की सी उल्लसित धूप और मैंने  अपनी सारी ख्वाहिशें डाल  दी हैं  मन की अलगनी पर इन सीली सीली सी ख़्वाहिशों को कुछ हवा लगे और कुछ धूपऔर  सीलन की महक हो सके दूर  साँझ  होने से पहले ही सहेज लूँगी  इनको और डाल  दूँगी इनके साथ वक़्त के ने...
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संगीता स्वरुप ( गीत )
Tag :कविता (सर्वाधिकार सुरक्षित )
  July 16, 2012, 6:35 pm
ज़िंदगी की उलझने जब बन जाती हैं सवाल तो उत्तर की प्रतीक्षा मेंअल्फ़ाज़ों में  ढला करती हैं उतर आती हैं अक्सर मन के कागज पर जो अश्कों  की स्याही से रचा करती हैं पढ़ने वाले  भी बस पढ़ते हैं शब्दों को उनको भी पड़ी लकीरें नहीं दिखती हैं लकीरों की भाषा भी समझना आसान नहीं...
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संगीता स्वरुप ( गीत )
Tag :कविता ( सर्वाधिकार सुरक्षित )
  July 11, 2012, 3:57 pm
मन की चादर पर वक़्त ने डाली हैं न जाने कितनी सिलवटें उनको सीधा करते - करते अनुभवों का पानी भी सूख गया है प्रयास की इस्तरी  ( प्रेस )  करने से भी नहीं निकलतीं ये और कुछ  अजीब से दाग  रह जाते हैं पानी के कितना ही धोना चाहो धब्बे हैं कि बेरंग हो कर भी छूटते नहीं काश --मन की चा...
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संगीता स्वरुप ( गीत )
Tag :कविता ( सर्वाधिकार सुरक्षित )
  June 27, 2012, 7:46 pm
कुछ समय पूर्व  मुंबई प्रवास के दौरान अनुपमा त्रिपाठी जी से मिलने का मौका मिला ।उन्होने मुझे अपनी दो पुस्तकें  प्रेम सहित भेंट कीं । जिसमें से एक तो साझा काव्य संग्रह है –“ एक सांस मेरी “ जिसका  सम्पादन सुश्री  रश्मि प्रभा  और श्री  यशवंत माथुर ने किया है ...इस पुस्तक के ...
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संगीता स्वरुप ( गीत )
Tag :पुस्तक परिचय
  June 25, 2012, 7:30 am
नि: शब्द हूँ मैं तुम्हारे मौन को पालती हूँ पोसती हूँ और जब होता है मौन मुखरित तो हतप्रभ सी रह जाती हूँ ,हमारी सोचें कितनी भी हों विरोधाभासी फिर भी कभी "हम" के वजूद से नहीं टकरातीं जब तुम्हारा "मैं "आता है सामने तो मैं ---हम बन जाती हूँ और जब मेरा "मैं "दिखता है तुम्हें...
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संगीता स्वरुप ( गीत )
Tag :कविता ( सर्वाधिकार सुरक्षित )
  June 18, 2012, 4:09 pm
कुछ दिन पूर्व  सतीश सक्सेना जीके सौजन्य से मुझे उनकी पुस्तक  " मेरे गीत "  मिली  और मुझे उसे गहनता से पढ़ने का अवसर भी मिल गया । सतीश जी ब्लॉग जगत की ऐसी शख्सियत हैं जो परिचय की मोहताज नहीं है ।  आज  अधिकांश  रूप से जब छंदमुक्त रचनाएँ लिखी जा रही हैं उस समय उनके लिखे भावप...
गीत.......मेरी अनुभूतियाँ...
संगीता स्वरुप ( गीत )
Tag :पुस्तक परिचय / मेरे गीत / सर्वाधिकार सुरक्षित
  June 14, 2012, 1:30 pm
उपालम्भों से आती है हर रिश्ते में खटास शिकवे नहीं रख पाते मन में मिठास टूट जाए जब एक बार विश्वास कैसे करे कोई फिर प्रेम की आस ? होता है हर बात से मन पर वज्राघात तो वाणी भी हो जाती है कर्कश और हर बात से होता है जैसे कुठाराघात .प्रेम में विश्वास का होना ज़रुरी है वि...
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संगीता स्वरुप ( गीत )
Tag :कविता (साहित्य) सर्वाधिकार सुरक्षित
  May 31, 2012, 4:00 pm
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