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Blog: 'परचेत'

Blogger: पी सी गोदियाल
सांसे जकडकर भी कह रहा कोविड-१९बेटा, जंग जारी रख, हिम्मत न हारना।मगर याद रहे, जिंदगी का ये फलसफा,खटिया से बाहर कभी पैर मत पसारना।।सहुलियत ही नहीं, हुनर से भी सीढियां चढ,सोच का दायरा बढा, 'मैं'से भी आगे बढ।आस़ां है कर्ज लेना, मुश्किल है उतारना,खटिया से बाहर कभी पैर मत पसारना।... Read more
clicks 2 View   Vote 0 Like   4:21pm 3 Jun 2020 #
Blogger: पी सी गोदियाल
30-32 साल पहले युवावस्था मे जब पहली झलक मे यमनोत्री धाम देखा था तो उस वक्त की उस जगह का आखों देखा चित्रण कुछ यूं था:दूर पहाड़ी ओठ से आती लकीराकार एक स्वच्छ निर्मल नीर धार...। नीचे पहाड़ी की ओठ मे बना एक प्राचीन मंदिर..। मंदिर के आसपास टिन की चादरों और तिरपाल की छत से ढके कुछ खपरैल,... Read more
clicks 8 View   Vote 0 Like   2:21am 3 Jun 2020 #
Blogger: पी सी गोदियाल
हौंसला बनाए रख, ऐ जिंदगी, 'कोरोना'की अवश्य हार होगी,सूखे दरिया, फिर बुलंदियां चूमेंगे और तू, फिर से गुलजार होगी।कौन जानता था कि किसी रोजरुग्णों की हरतरफ कतार होगी,स्व:जनों के बीच मे रहकर भी,मिल-जुल पाने से लाचार होगी।कभी सोचा न था कि जीवन नैया,डगमगाती यूं बंदी के मझधा... Read more
clicks 4 View   Vote 0 Like   3:54pm 28 May 2020 #
Blogger: पी सी गोदियाल
कलत्र अदभुत तुम हमारे ,सार ऐह, श्रीयांश तुम हो ।हम श्रमसाध्य वृहद निबंध,निबंध का सारांश तुम हो।।नव नर-नारायण चेतना के,दिव्य जग, दिव्यांश तुम हो।विशिष्टता के बाहुल्य भर्ता,शब्द-शब्द, शब्दांश तुम हो।।उपकृत सदा ही हम तुम्हारे,कृतज्ञता के प्रियांश तुम हो।दिप्तिमय क्षण ज... Read more
clicks 8 View   Vote 0 Like   1:56pm 24 May 2020 #
Blogger: पी सी गोदियाल
चुपचाप निकल पडे अकेले ही डगर अपनी,कलंकित न होने दी, देशभक्ति मगर अपनी।सब सहा, न किसी पर पत्थर फेंका,न थूका,न किसी की गाड़ी जलाई, ना ही घर फूका।कर सकते थे वो, जिद पे आते अगर अपनी,कलंकित होने न दी, देशभक्ति मगर अपनी।मैं न तो कमिनस्ट हूँ और न ही देश की विद्यामान तुच्छ राजनीति, व... Read more
clicks 5 View   Vote 0 Like   3:19pm 11 May 2020 #
Blogger: पी सी गोदियाल
गलियां सब वीरां-वीरां सी, उखड़े-उखड़े सभी खूंटे है,तमाशाई बने बैठे दो सितारे, सहमे-सहमे क्यों रूठे है। डरी सी सूरत बता रही,बिखरे महीन कांच के टुकडो की,कुपित सुरीले कंठ से कहीं कुछ, कड़क अल्फाज फूटे है। ताफर्श पर बिखरा चौका-बर्तन, आहते पडा चाक-बेलन,इन्हें ... Read more
clicks 8 View   Vote 0 Like   1:15pm 29 Apr 2020 #
Blogger: पी सी गोदियाल
अति सम्मोहित ख्वाबकैफियत तलब करनेआज भी गए थे वहां,उस जगह, जहां कलतकरंगविरंगे कुसुम लेकरवसंत आया करता था ।कुछ ख़याल यह देखकरअतिविस्मित थे कि उन्मत्त दरख्त की ख्वाईशें,उम्मीद की टहनियों सेझर-झर उद्वतहुए जा रही थी।क्या पतझड़ फिर से दस्तक दे गया है?  या फिर, वसंत क... Read more
clicks 6 View   Vote 0 Like   12:52pm 29 Apr 2020 #
Blogger: पी सी गोदियाल
ऐ प्रिय, नींद मेरी !बस, यूं ही मगर, पता नहीं क्यों,कुछ अनिश्चित ही लग रही है मुझे,आज भी मुलाकात तेरी।मस्तिष्क का मेरा सुक्ष्म 'उम्मीद रनवे'और उसपर एहसासों की गहरी धुंध,विचलित हो रहा है मन,वैसे ही वीजिब्लिटी बहुत कम है,ऊपर से पोर्ट पर ट्रैफिक कंजेशन।जिस फ्लाइट से तुम आ रही ... Read more
clicks 8 View   Vote 0 Like   3:14pm 19 Feb 2020 #
Blogger: पी सी गोदियाल
Everywhere,don't try to poke your nose,Let it go, the way it goes.Pain takes its time to moveso, avoid there to reach earlier.During the process ofmotivating people,sometimes, you have crossedall your limits,and it doesn't happenfor the first time ,you tried this to breach earlier.All your optimum ideas andopinions seem like frozen now,.Remembering, the way youused to be fiery in speech earlier.   You were not such ahorrible preacher,  dear 'Parchet',to heal the wounded hearts,you had intentionally lovedthe soothe preach earlier.                                     - 'परचेत... Read more
clicks 10 View   Vote 0 Like   4:19pm 10 Feb 2020 #
Blogger: पी सी गोदियाल
व्यथा असह्य अंत:करण की,की जाती अब बयां नहीं है,जैंसा है, सब वैसा ही रहे,करने कोई उद्दार न जाए,कोई भवसागर तरके पार न जाए।मैं शफरी, मन मेरा भवसागर,छलकत जाए, अधजल गागर,अव्यवस्थ नगरी, तरस्त नागर,चित रोए और चित्कार न जाए,वहां जैंसा है, सब वैसा ही रहे,कोई भवसागर तरके पार न जाए।विध... Read more
clicks 22 View   Vote 0 Like   3:51pm 8 Feb 2020 #
Blogger: पी सी गोदियाल
शीत-ऋतू, मुफ्त़ भेडों को कंबल देगा,कुछ ऐसे ही वादों से गिरगिट लुभाए,लालच के अंधे कोई यह भी न पूछे,कंबल बनाने को ऊन कहांं से आए।कुर्सी पाने को किसहद मुफ्त़मारी रहेगी,तहक़ीकात अभी जारी रहेगी।।कुछ तो उपचार की कमियां रही होगींविध्वंसता मे दुश्मन के मांद की,वरना आज दीवार यू... Read more
clicks 10 View   Vote 0 Like   3:17pm 5 Feb 2020 #
Blogger: पी सी गोदियाल
वो अपने मुंह मिंया मिठ्ठू , डींग हांकते फिरते थे किमुसलमानों के मुर्दे जला नहीं करते,कल तुम जब शमशान के करीब सेमटक-मटक कर गुजर रही थी,कई दफनमुरादोंं को जलते हुएमैंने खुद अपनी आ़ंखो से देखा।🤣🤣🤣                 ... Read more
clicks 13 View   Vote 0 Like   4:29am 22 Jan 2020 #
clicks 14 View   Vote 0 Like   10:12pm 16 Jan 2020 #
Blogger: पी सी गोदियाल
दर्द उनका, सिर्फ वहीं जान पायेंगेजिन्हें, तमाम रात नींद नहीं आती,खामोश निशा, आंखों ही आंखों मेघिसट-घिसट कर कैंसे गुजर जाती।ऐ गुलजार, ये तुम्हें है मालूम कि मुझे,सुबह होने मे कितने जमाने लगते हैं।।... Read more
clicks 41 View   Vote 0 Like   3:26pm 15 Jan 2020 #
Blogger: पी सी गोदियाल
तीन-तीन गुलामियों का यही तो सबसे बडा राज है जो देशभर की सडकों पर दिखाई दे रहा आज है। राष्ट्रहित मे खुद को, मिटा दिया था कुछ फौलदों ने, मगर, गुड-गोबर एक कर दिया, जयचंद की औलादों ने।। इसलिए, जागो सोने वालों, जागो!... Read more
clicks 10 View   Vote 0 Like   3:18pm 11 Jan 2020 #
Blogger: पी सी गोदियाल
मितरों,आज जो कुछ हमारे इस देश मे हो रहा है, उसे देखकर सिर्फ हैरानी और अफसोस होता है। भगवान को साक्ष्य मानकर आपको आज की एक सच्ची घटना, जो मेरे साथ हुई और जिसे मैंने हर कोण से नापना चाहा, आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ।मैं जानता हूँ कि इस बात को हमारे ही बीच के बहुत से ज्ञानी ... Read more
clicks 53 View   Vote 0 Like   3:37pm 7 Jan 2020 #
clicks 128 View   Vote 0 Like   12:18am 5 Jan 2020 #
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