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अंधड़ !

जब मालूम हुआ तो कुछ ऐसे करवट बदली, जिंदगी उबाऊ ने,शुरू किया नश्वर में स्वर भरना, सभी ब्लॉगर बहिण, भाऊ ने, निष्क्रिय,सक्रिय सब प्रयास करते, रसहीन ब्लॉग में रस भरने की,      १ जुलाई, ब्लॉगिंग दिवस घोषित किया है, रामपुरिया ताऊ ने। :-)...
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  July 1, 2017, 2:16 pm
 एक वक्त था जब अमेरिका को  दुनिया का  सबसे सभ्य और उन्नत देश माना जाता था।  शायद, वह भी इंसानी सोच और कृत्यों का ही परिणाम था, और आज वही अमेरिकी देश है जिसके जॉर्जिया प्रांत के  सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने एक अविवाहित दंपत्ति, एलिजावेथ हैण्डी और विलाल असीम वाक क...
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  March 29, 2017, 11:03 am
आप सभी को नए साल की हार्दिक शुभकामनाएं !...
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  December 31, 2016, 10:00 am
दिन-दोपहर मे नजर आ रहे इनको तारे हैं,इस पार भी, उस पार भी,सब 'फेंकू'की सर्जिकळ स्ट्राइक के मारे हैं,इस पार भी, उस पार भी।तंग-ए-हाल, छटपटा रहे आज हर तरफ,जीव चोडे जबडों और मोटी चमडी वाले,खारे जल में घड़ियाली आंसू बहाने को जहाँ -तहाँ ,मगरमच्छ भी बहुत सारे हैं,इस पार भी, उस ...
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  November 15, 2016, 10:07 am
८ नवम्बर, 2016 की देर शाम को जब थका हारा  दिल्ली के दमघोटू यातायात से जूझता हुआ दफ्तर से घर पंहुचा तो बैठक मे मेज पर तुडे-मुडे ५०० और १००० रुपये के नोटों का अम्बार देख  एक पल को चौंक सा गया। लगा कि दुनियां का सबसे ईमानदार कहा जाने वाला तबका यानि आयकर विभाग के हरीशचन्दो...
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  November 9, 2016, 9:28 am
पैदाइशी गूंगों को भी भरी महफ़िल में मुह खोलते देखा है,  गम से भरे गिलासों में ख़ुशी को इंच-इंच तोलते देखा है,कौन कहता है कि हरतरफ सिर्फ झूठ का ही बोलबाला है, हमने मयकदे में बैठे हुए हर शख्स को सच बोलते देखा है। फुटपाथ पर सोया हुआ एक मजदूर अचानक हड़बड़ाते हुए जागा,पास से ...
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  October 31, 2016, 3:04 pm
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  October 25, 2016, 3:45 pm
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  October 21, 2016, 4:19 pm
वक्त के थपेड़ों संग,न जाने कहाँ खो गया,बचपन में मिला था जो खजाना मुझको।   नन्हें हाथों कोचारपाई के पायों पर मारकरबजाया करता था जिन्हें शौक से ,चांदी की वो एक जोड़ी धागुली,मेरे नामकरण पर, जो दे गए थे,मेरे नाना मुझको।वक्त के थपेड़ों संग,न जाने कहाँ खो गया,बचपन में मिला था ...
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  September 16, 2016, 10:04 am
अमानत में खयानत की पगार पाकर खुश है जहां सिरफिरा, यूं कि बदस्तूर जिंदगी का बस यही मजा,बाकी सब किरकिरा, ज़रा पता तो करो यारों, ये बंदे कश्मीरी सब खैरियत से तो हैं,बड़े दिनों से घर-आँगन हमारे, कोई पत्थर नहीं आकर गिरा।कुछ उदास-उदास सा नजर आया इसबार, मेरे मोहल्ले की गली मे भ...
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  August 3, 2016, 10:32 am
आजकल यदा-कदा  छिटपुट  दो चार लाइने शोसल मीडिया पर ही पोस्ट कर संतुष्ट हो जाते है।  अपनी उन कुछ काव्यपंक्तियों , शेरो इत्यादि  को यहाँ  ब्लॉग पर बटोर रहा हूँ ;  उपस्थित मित्रगण हमारी बेसब्री औरझुँझलाहट का मजा लिए जा रहे थे,हमारी नजर उनके अंदाज पर थीऔर वो ह...
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  July 1, 2016, 5:41 pm
सुभग, सौम्य  मेहरबाँ  रब था,  चरम पे अपने यौवन जब था। जब होता मन चपल-चलवित, पुलकित होता हर इक लब था, जब बह जाते कभी जज्बातों में, अश्रु  बूँदों से भर जाता टब  था। चरम पे अपने यौवन जब था।     प्रफुल्लित, उल्लसित आह्लादित,गिला न शिकवा, सब ...
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  June 15, 2016, 9:18 am
है अनुयुग समक्ष, सकल संतापी,त्रस्त सदाशय, जीवन आपाधापी,  बेदर्द जहां, है अस्तित्व नाकाफी,  मुक्त हस्त जिंदगी, भोगता पापी।   दिन आभामय बीते, रात अँधेरी,लक्ष्य है जिनका, सिर्फ हेराफेरी, कर्म कलुषित, भुज माला जापी, मुक्त हस्त जिंदगी, भोगता पापी।  कृत्य फरेब, कृत्र...
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  April 29, 2016, 7:52 pm
मय-साकी-रिन्द-मयखाने में,आधी भी तुम, पूरी भी हो,  हो ऐसी तुम सुरा खुमारी,'मधु'मुस्कान सुरूरी भी हो। मंथर गति से हलक उतरती,नरम स्वभाव, गुरूरी भी हो.     आब-ए-तल्ख़ होती है हाला,तुम मद्य सरस अंगूरी भी हो।   जोश नजर शबाब दमकता,  देह-निखर, धतूरी भी हो,   खान हो जैसे ...
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  April 28, 2016, 3:04 pm
    बेशक, तब जा के आया, यह ख़याल हमको,   जब दिल मायूस पूछ बैठा, ये सवाल हमको।      हम हैं कौन सी आखिर, वो काबिल बात ऐसी,    करता ही गया  ज़माना जो इस्तेमाल हमको।     लाये हम थे किनारे तो ,पतवार आँधियों से ,        किन्तु सेहरा सिर उनके ...
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  April 15, 2016, 8:06 pm
एक १० वी  की छात्रा, १५ साल की बच्ची ने क्या ललकारा, उसे गरियाने  और गालियां देने पर उतर आये ?? वाह-वाह ... आप लोग वाकई किसी बड़े संस्थान जैसे अफजल प्रेमी विश्वविद्द्यालय के ही पढ़े लिखे लगते हो।    ...
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  March 8, 2016, 11:17 am
कश्मीर का मुद्दा उलझाया परनाना की 'ना'ने ही था,लाहौर को लौटाया भी तो तेरी दादी की 'हां 'ने ही था,यार पप्पू,किसे बेवकूफ बनाने की कोशिश कर रहा,अफजल को लटकाया भी तेरी अपनी 'मां 'ने ही था।  ...
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  March 6, 2016, 7:46 pm
जहां आज भी ज़िंदा हैं गुरुकुल, उसे अवध की सरजमीं कहते है,जोखिम उठा, मेहनत से कमाकर जो खाए उसे उद्यमी कहते हैं,किन्तु बदलती इस सभ्यता के दौर का एक सच यह भी है कि  जो गद्दार व मुफ्तखोर है वो आजकल अपने को 'कमी'कहते हैं।बागों के बंदोबस्ती दरख़्त हमारे भी सारे फलदार होते,लॉकर, बो...
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  March 5, 2016, 9:50 am
अभी हाल ही में एक अखबार की आरटीआई के उत्तर में रिजर्वबैंक  के जबाब से यह  खुलासा हुआ था कि सरकारी क्षेत्र के  बैंकों ने पिछले ३ सालों में १.१४ लाख करोड़ की डुबन्तु ऋण ( Bad Debts) की रकम बट्टे खाते में डाली है। इसे लुप्त भार (Charge Off ) के नाम से भी जाना जाता है,  जिसका वार्षिक विवर...
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  February 27, 2016, 4:42 pm
इस मुल्क की तहज़ीब-ए-वीआईपी  - १ यह एक सर्वविदित सत्य है कि  तीन लम्बी गुलामियत का दंश झेल चुका इस मुल्क का वह प्राणी जो सुबह से शाम तक का  अपना वक्त सिर्फ अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के जुगाड़ में ही व्यतीत कर देता है, उसके दिल में जाति, धर्म और सम्प्रदाय से परे, एक ख़...
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  January 7, 2016, 11:52 am
बेकसूरों के नरसंहार की आग सुलगी है जहान में,  और असहिष्णुता का ढोल पिट रहा, हिंदुस्तान में। यहां पिटता हुआ ढोल तो सुनाई दे रहा है यूरोप में,किन्तु,ये कोई नहीं पूछता कि पोप क्यों है कोप में।  भड़की हुई है आग तो सीरिया, अफगानिस्तान में, और असहिष्णुता का ढोल पिट रहा, हि...
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  December 2, 2015, 6:34 pm
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  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
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