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Blog: वीरांशवीरांश

Blogger: वीर
अब हमने धक्का देना छोड़ दिया है! रिश्तों को कांधों पर ढोना छोड़ दिया है | या हम दाना हुए या तुम में वो बात नहीं, या इश्क ने ही जादू टोना छोड़ दिया है | रिश्तों को कांधों पर ढोना छोड़ दिया है… कोई पूछे तो अब भी तेरा ही नाम लेते हैं, मुद्दत [...]... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   4:39am 4 Jun 2013 #ग़ज़ल
Blogger: वीर
मेरे लफ्ज़ मुझसे पराये तो नहीं, मेरी तरह वो तुम्हें पसंद आये तो नहीं | क्या लफ़्ज़ों को है गिला-शिकवा बहुत ? क्या कहीं वो भी मेरे सताये तो नहीं | मेरे लफ्ज़ मुझसे पराये तो नहीं… सहरा तक पहुँचती हर एक मौज से पूछो, क्या उसने कोई सफीने डुबाये तो नहीं | मेरे लफ्ज़ [...]... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   4:06am 4 Jun 2013 #ग़ज़ल
Blogger: वीर
आखरी वस्ल था लंबे फिराक से पहले, दोनों खामोश थे दिल-ए-बेबाक से पहले | अब के जो फूँक से उड़ा देते हो मुझे, मैं जो शोला था मुश्त-ए-ख़ाक से पहले | आखरी वस्ल था लंबे फिराक से पहले… पहचान नहीं पाता हूँ इस दिल को मैं, ये जो गुलिस्तां था हज़ारों चाक से पहले | [...]... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   11:58am 24 Apr 2013 #ग़ज़ल
Blogger: वीर
तेरी मामूली सी बातों में, न-मामूली सा प्यार छुपा है | खामोश गहरी आँखों में, मीठा सा इकरार छुपा है | न तुमने कोई कसमें दी, न मैंने कोई अहद किया | मगर दोनों के दरमियाँ, अनकहा सा ऐतबार छुपा है | तेरी मामूली सी बातों में, न-मामूली सा प्यार छुपा है… दो जिंदिगियाँ वैसे [...]... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   11:09am 24 Apr 2013 #ग़ज़ल
Blogger: वीर
क्या तुमसे बयां करूँ सबब-ए-हिज्र हमनफस, पैरों में तेरे बेडियाँ हैं और हाथ मेरे बंधे हुए | कहने को एक जिंदिगी दोनों के पास है मगर, इन मुस्कुराते चेहरों के पीछे हैं दिल जले हुए | पैरों में तेरे बेडियाँ हैं और हाथ मेरे बंधे हुए… एक आंधी चली और गुबार से उड़ गए हम, ज़माना [...]... Read more
clicks 165 View   Vote 0 Like   3:50pm 5 Apr 2013 #ग़ज़ल
Blogger: वीर
किसी को कुछ समझाया न करो, लोगों को ठोकर से बचाया न करो | वो अपनी गलती के मालिक हैं, बेवजह अपना खून जलाया न करो | किसी को कुछ समझाया न करो… तजुर्बे का निचोड़ अपनी हलक में रखो, अपना फ़साना जुबां तक लाया न करो | किसी को कुछ समझाया न करो… खाई [...]... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   2:00pm 25 Mar 2013 #ग़ज़ल
Blogger: वीर
कीमती जिंदिगी लुटाते फिर रहे हैं, हम खुद को बहलाते फिर रहे हैं | तुम्हारा होने की सज़ा मिली है हमें, ज़र्रा ज़र्रा खुद को मिटाते फिर रहे हैं | हम खुद को बहलाते फिर रहे हैं… मुझे ज़माने भर में बाट आया है वो, हर शख्स से खुद को बचाते फिर रहे हैं | [...]... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   11:39am 16 Mar 2013 #ग़ज़ल
Blogger: वीर
बस खामोश हूँ मगर बेज़ुबां नहीं हूँ, एक आग है मेरे अंदर सिर्फ धुआं नहीं हूँ | पत्थर की लकीर नहीं हैं उसूल मेरे, दिल रखता हूँ, गुलाम ए इमां नहीं हूँ | एक आग है मेरे अंदर सिर्फ धुआं नहीं हूँ… वक्त आने पर बता देंगे कूबत क्या है, काबलियत से वाकिफ हूँ, बदगुमां [...]... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   11:10am 16 Mar 2013 #ग़ज़ल
Blogger: वीर
सच, क्या तुझे भी सच सुनना पसंद है ? मैं झूठ हूँ, मुझे सच बुनना पसंद है | गाँठ जीस्त की खोल रहा है गुज़रता वक्त, मैं लम्हा हूँ, मुझे उलझना पसंद है | उम्मीद की डोर से पिरोई है आरजू मगर, मैं हसरत हूँ, मुझे बिखरना पसंद है | मेरे बाद तुझे तलब न [...]... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   10:53am 16 Mar 2013 #ग़ज़ल
Blogger: वीर
कहीं माँ का दुलार नहीं मिलता, कहीं बाप का प्यार नहीं मिलता | कुछ अभागि औलादें ऐसी भी हैं, जिन्हें अपना अधिकार नहीं मिलता | उम्र भर ढूंढते फिरते हैं बेगानों में, मगर कोई तलबगार नहीं मिलता | जैसे किसी वीरान पड़े मकां को, बरसों किरायेदार नहीं मिलता | मौत से एक लम्हें का भी, [...]... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   10:35am 16 Mar 2013 #कविता
Blogger: वीर
दुआ मांगते बहुत हैं पर इबादत चंद से होती है, इश्क बहुतों से हुआ पर मोहब्बत कम से होती है | तुम मेरी आवाज़ को यूँ नज़रंदाज़ मत किया करो, हर इंकलाब की आगाज़ ज़ुल्म ओ सितम से होती है | इश्क बहुतों से हुआ पर मोहब्बत कम से होती है… कभी मेरे इस ज़हन [...]... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   3:19pm 1 Mar 2013 #ग़ज़ल
Blogger: वीर
वक्त से पहले ही मिल गयी मंजिल मुझे, और फिर न हुआ ताउम्र कुछ हासिल मुझे | मैं पूरा समंदर पी गया था लड़कपन में, फिर कभी दोस्त सा न मिला साहिल मुझे | और फिर न हुआ ताउम्र कुछ हासिल मुझे… और कोई नहीं बस एक ही खता हुई तुझसे, क्यों दे दिया तुने [...]... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   2:44pm 1 Mar 2013 #ग़ज़ल
Blogger: वीर
निभा रहा था अब-तलक वो मेरा किरदार नहीं है, आईने में जो शख्स है वो मेरा वफादार नहीं है | उस तक पहुँचते-पहुँचते खो दिया है खुद को, अब उस तक पहुंचा हूँ जो मेरा तलबगार नहीं है | आईने में जो शख्स है वो मेरा वफादार नहीं है… सबका अलग रास्ता है और सबका अपना [...]... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   2:31pm 1 Mar 2013 #ग़ज़ल
Blogger: वीर
मिलता है मगर बिछड़ने की शर्त पर, जिंदा तो है मगर मरने की शर्त पर | जिंदिगी तेरी अदा है या बेबसी मेरी, होसला मिलता है मगर डरने की शर्त पर | जिंदा तो है मगर मरने की शर्त पर… पल दो पल से ज़्यादा कहीं भी रुकता नहीं, वक्त अच्छा आता है गुजरने की [...]... Read more
clicks 106 View   Vote 0 Like   2:05pm 1 Mar 2013 #ग़ज़ल
Blogger: वीर
शब्दों के वार से अभिमान मरोड़ा गया, फिर मेरे आत्मसम्मान को तोड़ा गया| टूट के जब में गिरा अपनी नज़रों से, फिर मुझे रिश्तों की गोंद से जोड़ा गया| शब्दों के वार से… यही क्रम चलता रहा सालों साल निरंतर, … Continue reading →... Read more
clicks 209 View   Vote 0 Like   6:00am 10 Jul 2012 #ग़ज़ल
Blogger: वीर
मुझ पर दावा-ए-हक का तलबगार न बन, ये शौक़ है ज़माने का, तुम पर जचता नहीं | रोज़ कमाते हैं तब ही रोज़ खाते हैं, महीने के आखरी में, जेब में कुछ बचता नहीं | ये शौक़ है ज़माने का, … Continue reading →... Read more
clicks 100 View   Vote 0 Like   6:12am 18 Jun 2012 #ग़ज़ल
Blogger: वीर
चल उठ के देर हो गयी है घर जाने में, तेरे सिवा अब कोई नहीं, इस मयखाने में | एक लम्हा था जो कमज़ोर कर गया मुझे, वरना एक उम्र छोटी थी, उसको भुलाने में | तेरे सिवा अब कोई नहीं, … Continue reading →... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   6:39am 15 Jun 2012 #ग़ज़ल
Blogger: वीर
अपना सर उठाने की, एक कीमत होती है, हर किसी को कहाँ नसीब, ये ज़ीनत होती है | ख्वाब तो हर आँख में होते हैं मगर, सब में कहाँ इन्हें जीने की नीयत होती है | अपना सर उठाने की, एक कीमत होती है … मुश्किल हालत से गुज़रते … Continue reading →... Read more
clicks 188 View   Vote 0 Like   2:53am 14 Jun 2012 #ग़ज़ल
Blogger: वीर
इस शहर की दुकानों में, मुझे बेंच रहा है हुनर मेरा| मैं खरीद रहा हूँ अपने रास्ते, और नीलाम हो रहा है सफ़र मेरा| एक शख्स मेरे अन्दर मुझे, जीस्त की मजबूरियां गिनाता है| मैं ढल रहा हूँ बदलते सांचों में, और बदनाम हो रहा है सफ़र मेरा| मैं खरीद रहा हूँ अपने रास्ते, … Continue reading →... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   5:24am 13 Jun 2012 #ग़ज़ल
Blogger: वीर
अंदाज़ मेरा मुझे बेगाना सा लगने लगा है, हर ख्याल कोई दुश्मन पुराना सा लगने लगा है| एक लम्हें में इतनी दूर चला आया हूँ सबसे, ये दिन भी गुजरा ज़माना सा लगने लगा है| अंदाज़ मेरा मुझे बेगाना सा … Continue reading →... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   5:25am 7 Jun 2012 #ग़ज़ल
Blogger: वीर
ख्वाब देखा न करो, खुली आँखों से, इसकी कीमत देनी होती है, अधूरी सांसों से| हकीकत बदलती नहीं बस धुंधला जाती है, लकीरें कहाँ मिटती हैं, किसी के हाथों से| ख्वाब देखा न  करो, खुली आँखों से… आदमी अकेला था और अकेला ही रहेगा, क्या उम्मीद लगाई है तुमने रिश्ते-नातों से| ख्वाब दे... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   4:59am 7 Jun 2012 #ख्याल
Blogger: वीर
न खैरात में मिला है, न वसीयत काम आई है, एक-एक रुपया मेरी जेब का, गाढ़े पसीने की कमाई है| न शागिर्दी है मिजाज़ में, न बेपनाह हुनर है कोई, मैंने ठोकरें खा-खा कर, अपनी रह बनाई है| एक-एक रुपया … Continue reading →... Read more
clicks 175 View   Vote 0 Like   10:03am 30 Apr 2012 #ग़ज़ल
Blogger: वीर
सब आसपास हैं तो फिर मुलाक़ात क्यों नहीं होती? अरसा गुज़र जाता है, दिल से दिल की बात नहीं होती| ये दुनिया भी अजीब शय है दोस्तों, साथ रहती है मगर साथ नहीं होती| दिल से दिल की बात नहीं होती… दिन मान भी जाता है लकीरों के लिखे को, तुम्हारे बिन मगर गुज़र ये रात [...]... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   12:51pm 24 Apr 2012 #ग़ज़ल
Blogger: वीर
मुझे ये कलाकारी, बर्दाश्त नहीं होती| ये नकाबों की बिमारी, बर्दाश्त नहीं होती| मैंने देखे हैं तुम्हारे कई सुन्दर रंग, मुझसे तुम्हारी अदाकारी, बर्दाश्त नहीं होती| मुझे ये कलाकारी, बर्दाश्त नहीं होती… हमने फूँका है खुद को वफ़ा में मगर, अब तंज की चिंगारी, बर्दाश्त नहीं होत... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   10:20am 24 Apr 2012 #ग़ज़ल
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