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Blog: 'भाव-तरंगिनी' - कुछ बिसरे कलम का मंथन

Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
रघुवर तुमको मेरी लाज । सदा सदा मैं शरण तिहारी, तुम हो ग़रीब निवाज ॥ पतित उधारन विरद तिहारो, श्रवन न सुनी आवाज । हूँ तो पतित पुरातन कहिये, पार उतारो जहाज ॥१॥ अघ खण्डन दुख भंजन जन के, यही तिहारो काज । तुलसीदास पर किरपा कीजे, भक्ति दान देहु आज॥२॥  – गोस्वामी  तुलसीदास स्वर: -... Read more
clicks 212 View   Vote 0 Like   9:40pm 17 Jan 2013 #अनकही
Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
दिनकर जी की कविता 'समर शेष है' की पंक्तियाँ आज के सन्दर्भ में जब अन्ना और उनके साथ पूरा भारत एक भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन में जुटा हुआ है .. इन पंक्तियों को आज के परिपेक्ष में समझिये, दिनकर जी ने आजादी के सात साल बाद ही भ्रष्टाचार से त्रस्त हो कर ये कविता लिखी थी, आज भी व... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   7:23pm 6 Aug 2011 #रामधारी सिंह 'दिनकर'
Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
दिनकर जी की कविता 'समर शेष है' की पंक्तियाँ आज के सन्दर्भ में जब अन्ना और उनके साथ पूरा भारत एक भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन में जुटा हुआ है .. इन पंक्तियों को आज के परिपेक्ष में समझिये, दिनकर जी ने आजादी के सात साल बाद ही भ्रष्टाचार से त्रस्त हो कर ये कविता लिखी थी, आज भी व... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   7:23pm 6 Aug 2011 #Ramdhari Singh 'Dinkar'
Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
इन्हीं तृण-फूस-छप्पर सेढंके ढुलमुल गँवारूझोंपड़ों में ही हमारा देश बसता हैइन्हीं के ढोल-मादल-बाँसुरी केउमगते सुर मेंहमारी साधना का रस बरसता हैइन्हीं के मर्म को अनजानशहरों की ढँकी लोलुपविषैली वासना का साँप डँसता हैइन्हीं में लहरती अल्हड़अयानी संस्कृति की दुर्दशा ... Read more
clicks 117 View   Vote 0 Like   1:33pm 27 Feb 2011 #Sachchidanand Vatsyayan 'Agyeya'
Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
इन्हीं तृण-फूस-छप्पर सेढंके ढुलमुल गँवारूझोंपड़ों में ही हमारा देश बसता हैइन्हीं के ढोल-मादल-बाँसुरी केउमगते सुर मेंहमारी साधना का रस बरसता हैइन्हीं के मर्म को अनजानशहरों की ढँकी लोलुपविषैली वासना का साँप डँसता हैइन्हीं में लहरती अल्हड़अयानी संस्कृति की दुर्दशा ... Read more
Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
साँप !तुम सभ्य तो हुए नहींनगर में बसनाभी तुम्हें नहीं आया।एक बात पूछूँ .. (उत्तर दोगे?)तब कैसे सीखा डँसना?        विष कहाँ पाया?       – सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय'... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   4:03am 11 Feb 2011 #Sachchidanand Vatsyayan 'Agyeya'
Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
साँप !तुम सभ्य तो हुए नहींनगर में बसनाभी तुम्हें नहीं आया।एक बात पूछूँ .. (उत्तर दोगे?)तब कैसे सीखा डँसना?        विष कहाँ पाया?       – सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय'... Read more
Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
अपनेपन का मतवाला था भीड़ों में भी मैंखो न सकाचाहे जिस दल में मिल जाऊँ इतना सस्तामैं हो न सकादेखा जग ने टोपी बदलीतो मन बदला, महिमा बदलीपर ध्वजा बदलने से न यहाँमन-मंदिर की प्रतिमा बदलीमेरे नयनों का श्याम रंग जीवन भर कोईधो न सकाचाहे जिस दल में मिल जाऊँ इतना सस्तामैं हो न स... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   1:54pm 5 Feb 2011 #गोपाल सिंह 'नेपाली'
Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
अपनेपन का मतवाला था भीड़ों में भी मैंखो न सकाचाहे जिस दल में मिल जाऊँ इतना सस्तामैं हो न सकादेखा जग ने टोपी बदलीतो मन बदला, महिमा बदलीपर ध्वजा बदलने से न यहाँमन-मंदिर की प्रतिमा बदलीमेरे नयनों का श्याम रंग जीवन भर कोईधो न सकाचाहे जिस दल में मिल जाऊँ इतना सस्तामैं हो न स... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   1:54pm 5 Feb 2011 #Gopal Singh 'Nepali'
Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
जग-जीवन में जो चिर महान,सौंदर्य-पूर्ण औ सत्‍य-प्राण,मैं उसका प्रेमी बनूँ, नाथ!जिसमें मानव-हित हो समान!जिससे जीवन में मिले शक्ति,छूटें भय, संशय, अंध-भक्ति;मैं वह प्रकाश बन सकूँ, नाथ!मिट जावें जिसमें अखिल व्‍यक्ति!दिशि-दिशि में प्रेम-प्रभा प्रसार,हर भेद-भाव का अंधकार,मैं खो... Read more
clicks 306 View   Vote 0 Like   5:37pm 29 Jan 2011 #Yugant
Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
खूनी हस्‍ताक्षरवह खून कहो किस मतलब काजिसमें उबाल का नाम नहीं।वह खून कहो किस मतलब काआ सके देश के काम नहीं।वह खून कहो किस मतलब काजिसमें जीवन, न रवानी है!जो परवश होकर बहता है,वह खून नहीं, पानी है!उस दिन लोगों ने सही-सहीखून की कीमत पहचानी थी।जिस दिन सुभाष ने बर्मा मेंमॉंगी उ... Read more
clicks 192 View   Vote 0 Like   8:10am 23 Jan 2011 #गोपालप्रसाद व्यास
Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
दीप मेरे जल अकम्पित,घुल अचंचल!सिन्धु का उच्छवास घन है,तड़ित, तम का विकल मन है,भीति क्या नभ है व्यथा काआंसुओं से सिक्त अंचल!स्वर-प्रकम्पित कर दिशायें,मीड़, सब भू की शिरायें,गा रहे आंधी-प्रलयतेरे लिये ही आज मंगलमोह क्या निशि के वरों का,शलभ के झुलसे परों कासाथ अक्षय ज्वाल क... Read more
clicks 212 View   Vote 0 Like   7:35am 15 Jan 2011 #महादेवी वर्मा
Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
पोस्ट पोस्ट पोस्ट पोस्ट पोस्ट पोस्ट पोस्ट पोस्ट पोस्ट पोस्ट पोस्ट पोस्ट पोस्ट पोस्ट पोस्ट पोस्ट पोस्ट पोस्ट पोस्ट पोस्ट पोस्ट पोस्ट पोस्ट पोस्ट पोस्ट पोस्ट पोस्ट पोस्ट पोस्ट पोस्ट पोस्ट पोस्ट पोस्ट पोस्ट पोस्ट पोस्ट पोस्ट पोस्ट पोस्ट पोस्ट पोस्ट पोस्ट पोस्ट पोस्... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   2:00pm 30 Dec 2010 #जयप्रकाश नारायण
Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या हैतुम्हीं कहो कि ये अंदाज़-ए-गुफ़्तगू क्या हैन शोले में ये करिश्मा न बर्क़ में ये अदाकोई बताओ कि वो शोखे-तुंदख़ू क्या हैये रश्क है कि वो होता है हमसुख़न हमसेवरना ख़ौफ़-ए-बदामोज़ी-ए-अदू क्या हैचिपक रहा है बदन पर लहू से पैराहनहमारी ज़ेब क... Read more
Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या हैतुम्हीं कहो कि ये अंदाज़-ए-गुफ़्तगू क्या हैन शोले में ये करिश्मा न बर्क़ में ये अदाकोई बताओ कि वो शोखे-तुंदख़ू क्या हैये रश्क है कि वो होता है हमसुख़न हमसेवरना ख़ौफ़-ए-बदामोज़ी-ए-अदू क्या हैचिपक रहा है बदन पर लहू से पैराहनहमारी ज़ेब क... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   6:34pm 27 Dec 2010 #'ग़ालिब'
Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
भाग – ५जिनकी भुजाओं की शिराएँ फड़की ही नहीं,जिनके लहू में नहीं वेग है अनल का;शिव का पदोदक ही पेय जिनका है रहा,चक्खा ही जिन्होनें नहीं स्वाद हलाहल का;जिनके हृदय में कभी आग सुलगी ही नहीं,ठेस लगते ही अहंकार नहीं छलका;जिनको सहारा नहीं भुज के प्रताप का है,बैठते भरोसा किए वे ही... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   5:14pm 27 Dec 2010 #रामधारी सिंह 'दिनकर'
Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
भाग – ५जिनकी भुजाओं की शिराएँ फड़की ही नहीं,जिनके लहू में नहीं वेग है अनल का;शिव का पदोदक ही पेय जिनका है रहा,चक्खा ही जिन्होनें नहीं स्वाद हलाहल का;जिनके हृदय में कभी आग सुलगी ही नहीं,ठेस लगते ही अहंकार नहीं छलका;जिनको सहारा नहीं भुज के प्रताप का है,बैठते भरोसा किए वे ही... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   5:14pm 27 Dec 2010 #Ramdhari Singh 'Dinkar'
Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
भाग – ३न्याय शान्ति का प्रथम न्यास है जब तक न्याय न आता,जैसा भी हो महल शान्ति का सुदृढ़ नहीं रह पाता।कृत्रिम शान्ति सशंक आप अपने से ही डरती है,खड्ग छोड़ विश्वास किसी का कभी नहीं करती है|और जिन्हें इस शान्ति-व्यवस्था में सुख-भोग सुलभ है,उनके लिये शान्ति ही जीवन - सार, सिद्... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   9:57am 7 Dec 2010 #रामधारी सिंह 'दिनकर'
Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
भाग – ३न्याय शान्ति का प्रथम न्यास है जब तक न्याय न आता,जैसा भी हो महल शान्ति का सुदृढ़ नहीं रह पाता।कृत्रिम शान्ति सशंक आप अपने से ही डरती है,खड्ग छोड़ विश्वास किसी का कभी नहीं करती है|और जिन्हें इस शान्ति-व्यवस्था में सुख-भोग सुलभ है,उनके लिये शान्ति ही जीवन - सार, सिद्... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   9:57am 7 Dec 2010 #Ramdhari Singh 'Dinkar'
Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
भाग – १समर निंद्य है धर्मराज, पर, कहो, शान्ति वह क्या है,जो अनीति पर स्थित होकर भी बनी हुई सरला है?सुख-समृद्धि का विपुल कोष संचित कर कल, बल, छल से,किसी क्षुधित का ग्रास छीन, धन लूट किसी निर्बल से।सब समेट, प्रहरी बिठला कर कहती कुछ मत बोलो,शान्ति-सुधा बह रही न इसमें गरल क्रान्त... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   11:17am 3 Dec 2010 #रामधारी सिंह 'दिनकर'
Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
भाग – १समर निंद्य है धर्मराज, पर, कहो, शान्ति वह क्या है,जो अनीति पर स्थित होकर भी बनी हुई सरला है?सुख-समृद्धि का विपुल कोष संचित कर कल, बल, छल से,किसी क्षुधित का ग्रास छीन, धन लूट किसी निर्बल से।सब समेट, प्रहरी बिठला कर कहती कुछ मत बोलो,शान्ति-सुधा बह रही न इसमें गरल क्रान्त... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   11:17am 3 Dec 2010 #Ramdhari Singh 'Dinkar'
Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
रात यों कहने लगा मुझसे गगन का चाँद,आदमी भी क्या अनोखा जीव होता है!उलझनें अपनी बनाकर आप ही फँसता,और फिर बेचैन हो जगता, न सोता है।जानता है तू कि मैं कितना पुराना हूँ?मैं चुका हूँ देख मनु को जनमते-मरते;और लाखों बार तुझ-से पागलों को भीचाँदनी में बैठ स्वप्नों पर सही करते।आदमी ... Read more
clicks 180 View   Vote 0 Like   6:34am 2 Dec 2010 #Ramdhari Singh 'Dinkar'
Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
रात यों कहने लगा मुझसे गगन का चाँद,आदमी भी क्या अनोखा जीव होता है!उलझनें अपनी बनाकर आप ही फँसता,और फिर बेचैन हो जगता, न सोता है।जानता है तू कि मैं कितना पुराना हूँ?मैं चुका हूँ देख मनु को जनमते-मरते;और लाखों बार तुझ-से पागलों को भीचाँदनी में बैठ स्वप्नों पर सही करते।आदमी ... Read more
clicks 208 View   Vote 0 Like   6:34am 2 Dec 2010 #सामधेनी
Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
धुँधली हुईं दिशाएँ, छाने लगा कुहासा,कुचली हुई शिखा से आने लगा धुआँ-सा।कोई मुझे बता दे, क्या आज हो रहा है;मुँह को छिपा तिमिर में क्यों तेज रो रहा है?दाता, पुकार मेरी, संदीप्ति को जिला दे,बुझती हुई शिखा को संजीवनी पिला दे।प्यारे स्वदेश के हित अंगार माँगता हूँ।चढ़ती जवानिय... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   5:27am 28 Nov 2010 #Ramdhari Singh 'Dinkar'
Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
धुँधली हुईं दिशाएँ, छाने लगा कुहासा,कुचली हुई शिखा से आने लगा धुआँ-सा।कोई मुझे बता दे, क्या आज हो रहा है;मुँह को छिपा तिमिर में क्यों तेज रो रहा है?दाता, पुकार मेरी, संदीप्ति को जिला दे,बुझती हुई शिखा को संजीवनी पिला दे।प्यारे स्वदेश के हित अंगार माँगता हूँ।चढ़ती जवानिय... Read more
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