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Blog: मीमांषा- Meemaansha

Blogger: Rashmi Savita
यही सुकून है मेरे लिए, यही तलाश और तलाश की मंजिल भी।लिखने के लिए सबसे पहली शर्त है आलोचना से बचने की कोशिश से मुक्त होना।  ये मुक्ति ही लिखने की दुनिया का पहला सबक है। इस सबक के साथ एक शुरुआत है ऑनलाइन डायरीज।मुझे नहीं पता कि मुझे क्या लिखना है।  कौन सा दिन कौन ... Read more
clicks 198 View   Vote 0 Like   6:03pm 10 Jul 2018 #
Blogger: Rashmi Savita
सागर पर पहरे हैं,सरिताएं आएंगीं अबकहाँ जायेंगीं,हर एक मुहाने परडेल्टा कुछ ठहरे हैं,किससे मांगेंगी मदद अपने में सभी व्यस्त किस पर भरोसा करें चेहरे पर चेहरे हैं,न गर्वित,न कम्पित हैं शांत मंद मंथर ये, पत्थरों से जूझने केजख्म बड़े गहरे हैं,जीवन की संध्या परआश्... Read more
clicks 187 View   Vote 0 Like   4:11am 10 Jul 2018 #
Blogger: Rashmi Savita
तुम नहीं थे, मैं नहीं जानती थी ख़ुशी,पर कभी, तुम्हारे न होने से,जानती हूँ 'ख़ुशी के बिना'कुछ लम्हें;तुम्हारे बिना मैं नहीं जानती थी 'अकेलापन' पर तुम्हारे संग,जानती हूँ कि इसका होना भी है;रोती थी मैं जब कभी,चुपके से, किसी तकिये पररख लेती थी सर,  तुम नहीं थे जब,... Read more
clicks 287 View   Vote 0 Like   7:21am 27 Dec 2015 #hindi poems
Blogger: Rashmi Savita
    'ब्याहता'मेरे लिए, फूल फूल नहीं है,एक सपनीली लड़की कीनिर्भार हँसी है,  और... इसी तरहजलता हुआ चूल्हा,उठता हुआ धुँआ,केवल धुआँ नहीं है, एक ब्याहता लड़की के,सपनों का अलाव और जिंदगी का  हश्र है। **********************    'दहेज़' गाँठ भर गहनों, मांग भर सिन्दूर ,हा... Read more
clicks 268 View   Vote 0 Like   9:37am 20 Dec 2015 #hindi blogs
Blogger: Rashmi Savita
ये पूरे की मांग नहीं है,   न ही अधूरेपन की खलिश है, न ही प्रार्थना, न ही विनय है, ये स्वाभाविक,लेने देने की रस्में हैं, होती ही हैं,प्रीत अगर हो,रीत नहीं फिर, कभी बांधती,ये बंधन फिर बंधते नहीं हैं, ले लेते हैं अंकपाश में,बड़े प्यार से,मानोगे तो,एक विश्वास भर... Read more
clicks 275 View   Vote 0 Like   8:24am 13 Dec 2015 #love poems
Blogger: Rashmi Savita
सपनों की क्या बात करें...जो मिला नियति से,उसको लें हथियार बना, अवनति से,दो दो हाथ करें, सपनों की क्या बात करें...जो चलते है तलवारों पर, उनको असिधारों से क्या डर, कर्मप्राँगण में आओ,ना रहो,हाथ पर हाथ धरे,सपनों की क्या बात करें...विगतागत को साथ लिए सब, किसी शत्रु से नही... Read more
clicks 268 View   Vote 0 Like   6:02am 6 Dec 2015 #najm
Blogger: Rashmi Savita
इतना क्या उदास होना;ये लम्बे रास्ते  हैं, हैं मगर कुछ दूर तक ही, उम्र को यूँ अज़ल तक ढोना नहीं है, हर कुछ, तपे जो आग में, सोना नहीं है।  यूँ पूरी किसी की होती नहीं हैं तमन्नायें,इत्तिफ़ाक़न नहीं है ये ज़िन्दगी में काश होना; इतना क्या उदास होना; समझ के इन रास्... Read more
clicks 233 View   Vote 0 Like   1:53am 7 Nov 2015 #hindi poems
Blogger: Rashmi Savita
मेरे पास, तेरे आने से,दिन ज्यादा हुआ, हुई रात कम,इतना अतिरेक हुआ कहने को,क़ि हुए लब चुप,और हुई बात काम;तू मुझमें अमानत-ए-जिंदगी की  आशा  प्रिय !तू मुझमें प्रेम की परिभाषा प्रिय! जो कितनी बारमुझमे ढूंढ़ा था,वो तुझमें शिद्दतों से पाया है,तेरे होने में,मेरे होने की... Read more
clicks 243 View   Vote 0 Like   6:33pm 25 Jun 2015 #delhi
Blogger: Rashmi Savita
*************************कोई भी मंजिल मेरी मंज़िल न थी हर मंज़िल के करीब यही जाकर जाना,अफ़साना-ए-जिंदगी बस एकरास्ता लगती है मुझे। ************************ जब लगता था कि कुछ नहीं है पास बहुत पाना था, आज सब पाने के बाद, याद बहुत आती है उसकी, जो खो बैठा हूँ।  ************************जो अमूर्त ह... Read more
clicks 204 View   Vote 0 Like   4:10am 2 Jun 2015 #hindi blogs
Blogger: Rashmi Savita
तुम्हारेमात्र होने से ही मन परितृप्त है, तबसे मगर, तुम तक राह कोईहै जो, फिरदिखती रही, तुम्हारी अछूती, अदृश्य, अंजानी  तरंगों में, महसूस करती हूँकि तुम हो और तुमसे, जागृत है मुझमें गुनगुनी धूप जाड़ों की शीतलता पहाड़ों की,ये तुम में चाह  ऐसी ह... Read more
clicks 249 View   Vote 0 Like   1:52am 31 Oct 2014 #delhi
Blogger: Rashmi Savita
कुछ अटकाव,कुछ भटकाव पल -पल की किस्सागोई से दिन बनते हैं और अहर्निश हम जलते हैं अग्निशिखा में अपने मन कीकिसी सपन कीराह जो पकड़ी कहीं अटकते कहीं भटकते फिर से शुरू शुरू करते से एक शून्य में लगा है चक्कर भरते गए बही खाते पर चक्र चलाकर धुरी जो ... Read more
clicks 225 View   Vote 0 Like   1:52pm 1 Jun 2014 #hindi poems
Blogger: Rashmi Savita
तुम  थे मेरे स्वप्नों के सोपानों की मंज़िल मेरी अनंत आकांक्षाओं का समाधान मेरी संवेदनाओं की मंथर सरितातुम्हारे होने से होकर, हो जाती थीएक उत्फुल 'पहाड़ी नदी'और मेरा होना हो जाता थाकोई नाचता 'निर्झर';हिमाचली 'हवाओं' सा ही था नेह बस तिरने कोतुम्हारे आ... Read more
clicks 187 View   Vote 0 Like   7:08am 30 May 2014 #hindi blogs
Blogger: Rashmi Savita
 सुनकर रुकना कहाँ आया है मुझे; तुम्हारे आवाह्न  परठहर तो जाती हूँ सहसापर चलने लगती हूँ फिर फिरउन्हीं राहों पर.… पर मुझे कहो,कितना भी चलती हूँ ये रास्ते  मुझे यूँ अनजाने क्यों ? एक- एक लम्हे का अहसान मुझ पर है मैनें उस से बातें की  हैं समझा है ... Read more
clicks 231 View   Vote 0 Like   4:55pm 14 Feb 2014 #
Blogger: Rashmi Savita
"जीवन में जो खिल उठा है फूल की तरहउसके लिए प्रकट आभार तो कर लूं ,जिसके परिमल की पवन में उड़ती हूँ फिरतीउससे आज प्यार का इज़हार तो कर लूं ,उसके दिए हुए 'रौशनी के दिए'में सकूं चलऔर मोहब्बत का नज़राना भी क्या दूं मैं उसे,हाँ, चलूंगी तो द्वार उसके पर जरा ठहरकुछ होश के कणों का श्रृंग... Read more
clicks 194 View   Vote 0 Like   3:15am 11 Dec 2013 #
Blogger: Rashmi Savita
कहीं शून्य में मेरी दुनिया , कहीं दूर मेरा संसार;मन जब अपनी गति से भटका राहों के आसूचक खोये, गहन अकेले होकर आज प्राण गहराई से रोये, भीतर दरकी हैं दीवारें शेष स्वप्न भी हारे-हारे जीवन की  मधुरिम मञ्जूषा, में किसने रखे अंगार, कहीं शून्य में मेरी दुनिया , कहीं... Read more
clicks 305 View   Vote 0 Like   7:19am 20 Nov 2013 #hindi poems
Blogger: Rashmi Savita
तू अगर प्यास को कोई सागर दे दे तटों पर जाने  की किसकी मनुहार,तू अगर मंदिर में पिला दे साकी तो जाना ही किसे है बाज़ार,हम तो खुमारी के लम्बे दिन चाहें होश के अंतरालों के बिन चाहें,तेरे दर पर इस आशा से निगाहें हैं रखीं     शायद मिट सके आज,सदियों का इंतज़ार,तुझसे... Read more
clicks 242 View   Vote 0 Like   4:34pm 10 Nov 2013 #delhi
Blogger: Rashmi Savita
हंसती हूँ कभी रोती  हूँ अपने में खुश होती हूँ, मैं तितली हूँ प्रभु तेरी, जीवन का रस ढोती हूँ; जो दूर खड़ा है मुझसे उससे क्यों जोडूं नाता मेरा हमदम है मुझमें जो दूर न मुझसे जाता, ओ प्रिय! तू उस माला का धागा जिसकी कि  मै एक मोती हूँ, मैं तितली हूँ प्रभु ... Read more
clicks 252 View   Vote 0 Like   3:50am 29 Aug 2013 #life
Blogger: Rashmi Savita
साँझ के झुटपुटे की पंक्तियों में, शब्द सवेरे के,अब तक ताज़े हैं चलो, गुलदस्ता बना लेते हैं एक और,जिंदगी के लिए; किसी झिडकन के साथ, बरसी हैबारिश ये अभी,कुछ बूंदे हथेली पर, कुछ माथे पर हैं, अथक श्रम कर रही है जिंदगी ये जिंदगी के लिए; जो है लुटाने को उसे है ... Read more
clicks 264 View   Vote 0 Like   4:06pm 21 Aug 2013 #jindagi
Blogger: Rashmi Savita
जानती हूँ,वापस नहीं लौटता समय पर दिल, फिर भी चाहता है लौट जाना, उसी नदी के आँचल में जिसके निश्छल किनारों से कुछ आड़े- तिरछे कुछ रंग -बिरंगे पत्थर, भरे थे अपनी जेबों में और छुपाकर रखा था घर के किसी कोने में अनमोल खजाने की तरह; जानती हूँ, एक बार गर सपन... Read more
clicks 207 View   Vote 0 Like   5:26am 10 Aug 2013 #life
Blogger: Rashmi Savita
'यहाँ' सब कुछ,जो पाया जा सकता है पलक झपकते ही खो जाता है, इतनी जल्दी कि तुम उसकी एक रेखा भी ढूढ़ पाने में रह जाते हो असमर्थ; 'जीवन' सात साल या सौ साल एक बहुत छोटा सा है 'समय बिंदु'नामालूम सा, जिसमे तुम जिंदगी भर बिठाते रहते हो 'जिंदगी के गणित', जिनका सब तरह से एक ही हल 'शू... Read more
clicks 191 View   Vote 0 Like   3:31pm 23 Apr 2013 #
Blogger: Rashmi Savita
'यहाँ' सब कुछ,जो पाया जा सकता है पलक झपकते ही खो जाता है, इतनी जल्दी कि तुम उसकी एक रेखा भी ढूढ़ पाने में रह जाते हो असमर्थ; 'जीवन' साठ  साल या सौ साल एक बहुत छोटा सा है 'समय बिंदु'नामालूम सा, जिसमे तुम जिंदगी भर बिठाते रहते हो 'जिंदगी के गणित', जिनका सब तरह... Read more
clicks 170 View   Vote 0 Like   3:31pm 23 Apr 2013 #
Blogger: Rashmi Savita
चाहती  हूँ आज, मेरे अंजुमन में, जो भी हो मुझे सबसे प्रिय, दे सकू तुम्हें;तुम्हारी ख्वाहिशों को लग जाएँ पंख मेरी शफ्कतों के, तुम्हारे सपनों के इन्द्रधनुष जगमगाते रहें;तुम्हारी राह के कांटे ईश्वर फूल कर दे, और जिंदगी की तपती दुपहरों में तुम्हारे लिए सदा जुटी रहें कुछ... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   6:54pm 8 Mar 2013 #
Blogger: Rashmi Savita
चाहती  हूँ आज, मेरे अंजुमन में, जो भी हो मुझे सबसे प्रिय, दे सकू तुम्हें;तुम्हारी ख्वाहिशों को लग जाएँ पंख मेरी शफ्कतों के, तुम्हारे सपनों के इन्द्रधनुष जगमगाते रहें;तुम्हारी राह के कांटे ईश्वर फूल कर दे, और जिंदगी की तपती दुपहरों में तुम्हारे लिए सदा जुटी रहें कुछ बदल... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   6:54pm 8 Mar 2013 #
Blogger: Rashmi Savita
निरंतर ये बुने जाते स्वप्न भी हैं श्रंखलायें कैद इनमे स्वयं  को तू क्यूँ करेचल,  धार में इकबार खुलकर बहा जाये। जन्मते ही खो गए हम स्वयम को अब कहाँ ढूढे, कहाँ पायें पर अंधेरों को, पार  ही करना हमें हैचल,  बुझ गए इस अप्पदीपो को जलाएं।भार  कन्धों पर बहुत अब हो चला है व्यर्थ क... Read more
clicks 230 View   Vote 1 Like   10:55am 28 Jan 2013 #poetry blogs
Blogger: Rashmi Savita
तुम्हारे जाने के बाद भी निकले हैं सूरज,खिली है धूप, आया है वसंत, मुस्कुराएँ हैं फूल, और गुनगुनाते रहें हैं भौरें, पर तुम नहीं हो तो चटख नहीं है धूप, उदास है  वसंत, थोडा रुआंसे हैं फूल, और  भवरें गुनगुनाते हैं कभी-कभी किन्हीं नामालुम उदासियों के गीत;तुम चले गए  हो तो भीराहे... Read more
clicks 252 View   Vote 0 Like   1:54am 21 Oct 2012 #फूल
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