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Blog: 'पंकज-पत्र'पर पंकज की कुछ कविताएँ

Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
सूखी रोटी, पवन हिलोरे,नभ चादर, थल शैय्या।मेरे दरिद्र नारायण भईया।टूटी झोपड़, फूस की नथिया,बाबा की टूटी नईया ।मेरे दरिद्र नारायण भईया।बाल जटीला, खाल मटीला,न बकरी न गैया।मेरे दरिद्र नारायण भईया।हल न कुदाली, पतोह रुदाली,साहू माँगे रूपैया।कहे दरिद्र नारायण भईया।खाली खजा... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   11:59am 20 Feb 2015 #कविता
Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
रतियाँ कुहके कोयलिया, दिन मा उल्लू जागे,नीति-रीति सब बिसराए दुनिया भागे आगे।भागे देखो ऐसा की मन मा शैतनवा जागे,देह-नेह दरकार रे भैया, मन अनुराग न जागे।अनुराग जे बाप-माए के अब त विषैला लागे,घर में अकेला बुढ्ढा-बुढ्ढी राह देखे टघुराये।रतियाँ कुहके कोयलिया, दिन मा उल्लू ... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   12:39pm 2 Jun 2013 #लोक-भाषा
Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
एक बार जो जरा देख मुझे मुस्कुरा दिया होता, कसम खुदा की, कलेजे को समन्दर किया होता !अरे! कभी जो सपनों से मुझे झाँक ही लिया होता,मजाल! जो उसे बटोर के न हकीकत किया होता?बस एक कदम खुद धरती पे हमारी जो तुम रखते,कहते गर उसे नींव से न ईमारत किया होता !अगले तिराहे से मिल चलने का गर भरो... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   5:13pm 28 Sep 2012 #पंकजपत्र
Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
एक बार जो जरा देख मुझे मुस्कुरा दिया होता,... Read more
clicks 102 View   Vote 0 Like   8:45pm 26 Sep 2012 #
Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
भारत डूबा भ्रष्टाचार में कौन बचाए रे? दो पाटन के बीच है जनता कोई बचाए रे!एक तरफ महँगाई, भारी कर भी देते हैं,कर कर करते भारत में घुट-घुट कर जीते हैं।घूसखोरी के करतब हर अफसर दिखलाता है,जनता का सेवक अब पद का धौंस जमाता है।आकण्ठ डूबे भारत ने कुछ लिया हिचकोले रे,जनाक्रोश भी उमड... Read more
clicks 121 View   Vote 0 Like   12:34pm 5 Aug 2011 #पंकज-पत्र
Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
http://www.indiaagainstcorruption.org/एक चतुर नाग,करे शत-प्रहार,मुँह फाड़-फाड़,डँसे बार-बार।जन चीत्कार करे बार-बार,मचे हाहाकार,आह! अत्याचार।ये दण्डप्रहार के बहाने हजार,ये लोकाचार का बलात्कार,यहाँ भ्रष्टाचार! वहाँ भ्रष्टाचार!अँधी सरकार! चहुँ अँधकार!भारत बीमार, रोग दुर्निवार।जन अब हमारी सुन ... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   4:57pm 19 Jun 2011 #भारत बनाम भ्रष्टाचार
Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
झिझक रहे थे कर ये कभी से 'प्रलय-पत्रिका' लिखने को,आज वदन से सहसा निकला - "अब धरती रही न बसने को"।रोक न शिव तू कंठ हलाहल, विकल रहे सब जलने को,दसमुख कहो या कहो दुश्शासन, तरस रहे हम तरने को ।।शिव देख मनुज ललकार रहा, शिव देख मनुज ललकार रहा,अस्तित्व ही तेरा नकार रहा , शिव जाग मन... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   6:41am 19 Dec 2010 #पंकज-पत्र
Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
राजा सशंकित, प्रजा सशंकित और यह ध्वजा सशंकित, चव्हाण-कलमाड़ी सोंचता हूँ देश की धरती, तुझे त्याग ही दूँ ।पर, तज नहीं सकता जो प्राणों से भी प्यारा हो,वो जिसने गोद में पाला, जो सर्वस्व हमारा हो।उनके रक्त की उष्ण धार को फिर से बहा देंगे, जो इस धरा पर लूट का व्यापार रचते हैं।वे ... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   12:28pm 9 Nov 2010 #India Against Corruption
Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
राजा सशंकित, प्रजा सशंकित और यह ध्वजा सशंकित,चव्हाण-कलमाड़ीसोंचता हूँ देश की धरती, तुझे त्याग ही दूँ ।पर, तज नहीं सकता जो प्राणों से भी प्यारा हो,वो जिसने गोद में पाला, जो सर्वस्व हमारा हो।उनके रक्त की उष्ण धार को फिर से बहा देंगे, जो इस धरा पर लूट का व्यापार रचते हैं।वे उ... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   12:28pm 9 Nov 2010 #गिलानी-अरुंधती
Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
राजा सशंकित, प्रजा सशंकित और यह ध्वजा सशंकित, चव्हाण-कलमाड़ी सोंचता हूँ देश की धरती, तुझे त्याग ही दूँ ।पर, तज नहीं सकता जो प्राणों से भी प्यारा हो,वो जिसने गोद में पाला, जो सर्वस्व हमारा हो।उनके रक्त की उष्ण धार को फिर से बहा देंगे, जो इस धरा पर लूट का व्यापार रचते हैं।वे ... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   12:28pm 9 Nov 2010 #कलमाड़ी-चव्हाण
Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
ईश्वर तो प्यासा केवल प्रेम का , प्रेम में परित्याग का , चरित्र में सदभाव का , सदभाव के संचार का , मूढ़ता में ज्ञान का , ज्ञान के विस्तार का , निर्जिवितों में प्राण का, रक्त के प्रवाह का , प्रफुल्लितों से मेघ का , सुयश समृद्धि का , सुखद चंद्रवृष्टि का , सम्यक सुदृष्टि का , सजगता क... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   6:54pm 5 Nov 2010 #कविता
Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
जठराग्नि तुम्हें सारे अधिकार देती है। भूखे हो? हाथ खाली हैं? जिनके हाथ भरे हैं उनसे लो, छीनो, खाओ, कोई पाप न लगेगा। घबराओ मत, भूख तुम्हें सारे अधिकार देती है ।जीने का अधिकार सबको है, प्राकृतिक सम्पत्ति और उनसे जनित सारी सम्पत्तियों पर सबका बराबर अधिकार है । भूखों! उठ्ठो! ख... Read more
clicks 101 View   Vote 0 Like   9:44am 24 Oct 2010 #भूख
Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
राष्ट्रकवि श्री रामधारी सिंह 'दिनकर' जी के जन्म दिवस के शुभ अवसर पर मेरी और से एक कवितांजलि :               "ईश्वर के काव्यदूत "ओ ईश्वर के काव्यदूत तुम फिर से मही पर आओ,मानवता फिर सुप्त हो चली आकार उसे जगाओ।जननी के माथे पर अब भी लटक रही तलवारें,रोज रोज सुनते रहते हम शत्... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   7:25am 23 Sep 2010 #rashtrakavi
Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
मैं हिन्दी का पिछला प्यादा, शपथ आज लेता हूँ,आजीवन हिन्दी लिखने का दायित्व वहन करता हूँ।रस घोलूँगा इसमें इतने, रस के प्यासे आयेंगे,वे भी डूब इस रम्य सुरा मे मेरे साकी बन जायेंगे।कलम बाँटूंगा उन हाथों को जो हाथें खाली होंगी,वाणी दूंगा मातृभाषा की जो जिह्वा नंगी होगी।कल-... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   12:06pm 13 Sep 2010 #राष्ट्रभाषा
Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
जो मेरी वाणी छीन रहे हैं, मार डालूं उन लुटेरों को।मेरा सर फिर गया,आंखें लाल,शरीर गुस्से से काँप रहा है,सांसों का तीव्र आवागमन ।मार डालूं उन लुटेरों को जो छीन रहे हैं मुझसे मेरी वाणी।हमें गूंगा कर रहे हैं,हमारा सबसे समृद्ध उपहार छीन रहे हैं हमसे,पाई है जो हमने अपने पूर्व... Read more
clicks 117 View   Vote 0 Like   9:55am 13 Sep 2010 #prakash pankaj
Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
 मानव धर्म पराकाष्ठा...........भगत गुरु सुखदेव !राष्ट्र धर्म पराकाष्ठा...........भगत गुरु सुखदेव !पुत्र धर्म पराकाष्ठा...........भगत गुरु सुखदेव !बन्धु धर्म पराकाष्ठा...........भगत गुरु सुखदेव !भगत गुरु सुखदेव भजो तुम...........भगत गुरु सुखदेव !परिभाषा है जागृति की...........भगत गुरु सुखदेव !परिभाषा है क... Read more
clicks 110 View   Vote 0 Like   1:07pm 15 Mar 2010 #भगत गुरु सुखदेव भजो तुम
Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
मंदिर-मस्जिद मिट जाने दो, मरघट उनको हो जाने दो , तुम न रोपो आज शिवालय, शिव को धरती पर आने दो , फिर तांडव जग में मच जाने दो, चिर वसुधा को धँस जाने दो ।- प्रकाश 'पंकज'... Read more
clicks 99 View   Vote 0 Like   9:06am 24 Feb 2010 #मंदिर
Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
सारे शिवालय मिट जाने दो, मरघट उनको हो जाने दो , तुम न रोपो आज शिवालय, शिव को धरती पर आने दो , फिर तांडव जग में मच जाने दो, चिर वसुधा को मर जाने दो । - 'पंकज'... Read more
clicks 92 View   Vote 0 Like   9:05am 24 Feb 2010 #
Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
 शुभान्त !   - एक शुभारंभ कामनाएँ, मधुर कामनाएँ, शुभ कामनाएँ,कामनाएँ आपके उज्जवल भविष्य की,कामनाएँ हर संघर्ष की, संघर्ष में विजय की,सविश्वास डटे रहने की, ज्ञान से झुके रहने की ।कामनाएँ अविरत ज्ञानोपार्जन की,कामनाएँ ज्ञान बांटने की, भटकों को मार्ग बताने की,मंगल कामनाएँ आ... Read more
clicks 121 View   Vote 0 Like   3:20pm 19 Feb 2010 #debanjan de
Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
अमन-अमन हम रटते आये, घाव पुराने भरते आये , झूठी पेश दलीलों पर , शत्रु को मित्र समझते आये । झूठी है यह "अमन की आशा",  फिर काँटों भरी एक चमन की आशा, अमन-चैन के मिथ्या-भ्रम में , शीश के मोल चुकाते आये ।  - पंकज ... Read more
clicks 100 View   Vote 0 Like   9:26am 15 Feb 2010 #
Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
अमन-अमन हम रटते आये, घाव पुराने भरते आये ,झूठी पेश दलीलों पर , शत्रु को मित्र समझते आये ।झूठी है यह "अमन की आशा",  फिर काँटों भरी एक चमन की आशा,अमन-चैन के मिथ्या-भ्रम में , शीश के मोल चुकाते आये ।  - पंकज... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   9:26am 15 Feb 2010 #झूठी है यह "अमन की आशा"
Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
 ( मेरी नयी कविता 'प्रलय-पत्रिका'की कुछ पंक्तियाँ ) शशिधर  नृत्य करो ऐसा की नवयुग का फिर नव-सृजन हो,पाप-मुक्त होवे यह जगती, धरती फिर से निर्जन हो,दसो दिशायें शान्त हो, पुनः वही जन-एकांत हो,संसकृतियां फिर से बसें, न कोई भय-आक्रांत हो,और शक्ति तुम्हे अब शिव की शपथ- "फिर शक्ति दुर... Read more
clicks 89 View   Vote 0 Like   10:20am 12 Feb 2010 #Pralay Patrika
Blogger: प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj
 ( मेरी नयी कविता 'प्रलय-पत्रिका' की कुछ पंक्तियाँ )शशिधर  नृत्य करो ऐसा की नवयुग का फिर नव-सृजन हो,पाप-मुक्त होवे यह जगती, धरती फिर से निर्जन हो,दसो दिशायें शान्त हो, पुनः वही जन-एकांत हो,संसकृतियां फिर से बसें, न कोई भय-आक्रांत हो,और शक्ति तुम्हे अब शिव की शपथ- "फिर शक्त... Read more
clicks 96 View   Vote 0 Like   10:20am 12 Feb 2010 #prakash pankaj
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