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'पंकज-पत्र'पर पंकज की कुछ कविताएँ : View Blog Posts
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'पंकज-पत्र'पर पंकज की कुछ कविताएँ

सूखी रोटी, पवन हिलोरे,नभ चादर, थल शैय्या।मेरे दरिद्र नारायण भईया।टूटी झोपड़, फूस की नथिया,बाबा की टूटी नईया ।मेरे दरिद्र नारायण भईया।बाल जटीला, खाल मटीला,न बकरी न गैया।मेरे दरिद्र नारायण भईया।हल न कुदाली, पतोह रुदाली,साहू माँगे रूपैया।कहे दरिद्र नारायण भईया।खाली खजा...
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Tag :कविता
  February 20, 2015, 5:29 pm
रतियाँ कुहके कोयलिया, दिन मा उल्लू जागे,नीति-रीति सब बिसराए दुनिया भागे आगे।भागे देखो ऐसा की मन मा शैतनवा जागे,देह-नेह दरकार रे भैया, मन अनुराग न जागे।अनुराग जे बाप-माए के अब त विषैला लागे,घर में अकेला बुढ्ढा-बुढ्ढी राह देखे टघुराये।रतियाँ कुहके कोयलिया, दिन मा उल्लू ...
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Tag :लोक-भाषा
  June 2, 2013, 6:09 pm
एक बार जो जरा देख मुझे मुस्कुरा दिया होता, कसम खुदा की, कलेजे को समन्दर किया होता !अरे! कभी जो सपनों से मुझे झाँक ही लिया होता,मजाल! जो उसे बटोर के न हकीकत किया होता?बस एक कदम खुद धरती पे हमारी जो तुम रखते,कहते गर उसे नींव से न ईमारत किया होता !अगले तिराहे से मिल चलने का गर भरो...
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Tag :पंकजपत्र
  September 28, 2012, 10:43 pm
एक बार जो जरा देख मुझे मुस्कुरा दिया होता,...
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Tag :
  September 27, 2012, 2:15 am
भारत डूबा भ्रष्टाचार में कौन बचाए रे? दो पाटन के बीच है जनता कोई बचाए रे!एक तरफ महँगाई, भारी कर भी देते हैं,कर कर करते भारत में घुट-घुट कर जीते हैं।घूसखोरी के करतब हर अफसर दिखलाता है,जनता का सेवक अब पद का धौंस जमाता है।आकण्ठ डूबे भारत ने कुछ लिया हिचकोले रे,जनाक्रोश भी उमड...
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Tag :पंकज-पत्र
  August 5, 2011, 6:04 pm
http://www.indiaagainstcorruption.org/एक चतुर नाग,करे शत-प्रहार,मुँह फाड़-फाड़,डँसे बार-बार।जन चीत्कार करे बार-बार,मचे हाहाकार,आह! अत्याचार।ये दण्डप्रहार के बहाने हजार,ये लोकाचार का बलात्कार,यहाँ भ्रष्टाचार! वहाँ भ्रष्टाचार!अँधी सरकार! चहुँ अँधकार!भारत बीमार, रोग दुर्निवार।जन अब हमारी सुन ...
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Tag :भारत बनाम भ्रष्टाचार
  June 19, 2011, 10:27 pm
झिझक रहे थे कर ये कभी से 'प्रलय-पत्रिका' लिखने को,आज वदन से सहसा निकला - "अब धरती रही न बसने को"।रोक न शिव तू कंठ हलाहल, विकल रहे सब जलने को,दसमुख कहो या कहो दुश्शासन, तरस रहे हम तरने को ।।शिव देख मनुज ललकार रहा, शिव देख मनुज ललकार रहा,अस्तित्व ही तेरा नकार रहा , शिव जाग मन...
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Tag :पंकज-पत्र
  December 19, 2010, 12:11 pm
राजा सशंकित, प्रजा सशंकित और यह ध्वजा सशंकित, चव्हाण-कलमाड़ी सोंचता हूँ देश की धरती, तुझे त्याग ही दूँ ।पर, तज नहीं सकता जो प्राणों से भी प्यारा हो,वो जिसने गोद में पाला, जो सर्वस्व हमारा हो।उनके रक्त की उष्ण धार को फिर से बहा देंगे, जो इस धरा पर लूट का व्यापार रचते हैं।वे ...
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Tag :India Against Corruption
  November 9, 2010, 5:58 pm
राजा सशंकित, प्रजा सशंकित और यह ध्वजा सशंकित,चव्हाण-कलमाड़ीसोंचता हूँ देश की धरती, तुझे त्याग ही दूँ ।पर, तज नहीं सकता जो प्राणों से भी प्यारा हो,वो जिसने गोद में पाला, जो सर्वस्व हमारा हो।उनके रक्त की उष्ण धार को फिर से बहा देंगे, जो इस धरा पर लूट का व्यापार रचते हैं।वे उ...
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Tag :गिलानी-अरुंधती
  November 9, 2010, 5:58 pm
राजा सशंकित, प्रजा सशंकित और यह ध्वजा सशंकित, चव्हाण-कलमाड़ी सोंचता हूँ देश की धरती, तुझे त्याग ही दूँ ।पर, तज नहीं सकता जो प्राणों से भी प्यारा हो,वो जिसने गोद में पाला, जो सर्वस्व हमारा हो।उनके रक्त की उष्ण धार को फिर से बहा देंगे, जो इस धरा पर लूट का व्यापार रचते हैं।वे ...
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Tag :कलमाड़ी-चव्हाण
  November 9, 2010, 5:58 pm
ईश्वर तो प्यासा केवल प्रेम का , प्रेम में परित्याग का , चरित्र में सदभाव का , सदभाव के संचार का , मूढ़ता में ज्ञान का , ज्ञान के विस्तार का , निर्जिवितों में प्राण का, रक्त के प्रवाह का , प्रफुल्लितों से मेघ का , सुयश समृद्धि का , सुखद चंद्रवृष्टि का , सम्यक सुदृष्टि का , सजगता क...
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Tag :कविता
  November 6, 2010, 12:24 am
जठराग्नि तुम्हें सारे अधिकार देती है। भूखे हो? हाथ खाली हैं? जिनके हाथ भरे हैं उनसे लो, छीनो, खाओ, कोई पाप न लगेगा। घबराओ मत, भूख तुम्हें सारे अधिकार देती है ।जीने का अधिकार सबको है, प्राकृतिक सम्पत्ति और उनसे जनित सारी सम्पत्तियों पर सबका बराबर अधिकार है । भूखों! उठ्ठो! ख...
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Tag :भूख
  October 24, 2010, 3:14 pm
राष्ट्रकवि श्री रामधारी सिंह 'दिनकर' जी के जन्म दिवस के शुभ अवसर पर मेरी और से एक कवितांजलि :               "ईश्वर के काव्यदूत "ओ ईश्वर के काव्यदूत तुम फिर से मही पर आओ,मानवता फिर सुप्त हो चली आकार उसे जगाओ।जननी के माथे पर अब भी लटक रही तलवारें,रोज रोज सुनते रहते हम शत्...
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Tag :rashtrakavi
  September 23, 2010, 12:55 pm
मैं हिन्दी का पिछला प्यादा, शपथ आज लेता हूँ,आजीवन हिन्दी लिखने का दायित्व वहन करता हूँ।रस घोलूँगा इसमें इतने, रस के प्यासे आयेंगे,वे भी डूब इस रम्य सुरा मे मेरे साकी बन जायेंगे।कलम बाँटूंगा उन हाथों को जो हाथें खाली होंगी,वाणी दूंगा मातृभाषा की जो जिह्वा नंगी होगी।कल-...
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Tag :राष्ट्रभाषा
  September 13, 2010, 5:36 pm
जो मेरी वाणी छीन रहे हैं, मार डालूं उन लुटेरों को।मेरा सर फिर गया,आंखें लाल,शरीर गुस्से से काँप रहा है,सांसों का तीव्र आवागमन ।मार डालूं उन लुटेरों को जो छीन रहे हैं मुझसे मेरी वाणी।हमें गूंगा कर रहे हैं,हमारा सबसे समृद्ध उपहार छीन रहे हैं हमसे,पाई है जो हमने अपने पूर्व...
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Tag :prakash pankaj
  September 13, 2010, 3:25 pm
 मानव धर्म पराकाष्ठा...........भगत गुरु सुखदेव !राष्ट्र धर्म पराकाष्ठा...........भगत गुरु सुखदेव !पुत्र धर्म पराकाष्ठा...........भगत गुरु सुखदेव !बन्धु धर्म पराकाष्ठा...........भगत गुरु सुखदेव !भगत गुरु सुखदेव भजो तुम...........भगत गुरु सुखदेव !परिभाषा है जागृति की...........भगत गुरु सुखदेव !परिभाषा है क...
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Tag :भगत गुरु सुखदेव भजो तुम
  March 15, 2010, 6:37 pm
मंदिर-मस्जिद मिट जाने दो, मरघट उनको हो जाने दो , तुम न रोपो आज शिवालय, शिव को धरती पर आने दो , फिर तांडव जग में मच जाने दो, चिर वसुधा को धँस जाने दो ।- प्रकाश 'पंकज'...
'पंकज-पत्र'पर पंकज की कुछ कविता...
Tag :मंदिर
  February 24, 2010, 2:36 pm
सारे शिवालय मिट जाने दो, मरघट उनको हो जाने दो , तुम न रोपो आज शिवालय, शिव को धरती पर आने दो , फिर तांडव जग में मच जाने दो, चिर वसुधा को मर जाने दो । - 'पंकज'...
'पंकज-पत्र'पर पंकज की कुछ कविता...
Tag :
  February 24, 2010, 2:35 pm
 शुभान्त !   - एक शुभारंभ कामनाएँ, मधुर कामनाएँ, शुभ कामनाएँ,कामनाएँ आपके उज्जवल भविष्य की,कामनाएँ हर संघर्ष की, संघर्ष में विजय की,सविश्वास डटे रहने की, ज्ञान से झुके रहने की ।कामनाएँ अविरत ज्ञानोपार्जन की,कामनाएँ ज्ञान बांटने की, भटकों को मार्ग बताने की,मंगल कामनाएँ आ...
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Tag :debanjan de
  February 19, 2010, 8:50 pm
अमन-अमन हम रटते आये, घाव पुराने भरते आये , झूठी पेश दलीलों पर , शत्रु को मित्र समझते आये । झूठी है यह "अमन की आशा",  फिर काँटों भरी एक चमन की आशा, अमन-चैन के मिथ्या-भ्रम में , शीश के मोल चुकाते आये ।  - पंकज ...
'पंकज-पत्र'पर पंकज की कुछ कविता...
Tag :
  February 15, 2010, 2:56 pm
अमन-अमन हम रटते आये, घाव पुराने भरते आये ,झूठी पेश दलीलों पर , शत्रु को मित्र समझते आये ।झूठी है यह "अमन की आशा",  फिर काँटों भरी एक चमन की आशा,अमन-चैन के मिथ्या-भ्रम में , शीश के मोल चुकाते आये ।  - पंकज...
'पंकज-पत्र'पर पंकज की कुछ कविता...
Tag :झूठी है यह "अमन की आशा"
  February 15, 2010, 2:56 pm
 ( मेरी नयी कविता 'प्रलय-पत्रिका'की कुछ पंक्तियाँ ) शशिधर  नृत्य करो ऐसा की नवयुग का फिर नव-सृजन हो,पाप-मुक्त होवे यह जगती, धरती फिर से निर्जन हो,दसो दिशायें शान्त हो, पुनः वही जन-एकांत हो,संसकृतियां फिर से बसें, न कोई भय-आक्रांत हो,और शक्ति तुम्हे अब शिव की शपथ- "फिर शक्ति दुर...
'पंकज-पत्र'पर पंकज की कुछ कविता...
Tag :Pralay Patrika
  February 12, 2010, 3:50 pm
 ( मेरी नयी कविता 'प्रलय-पत्रिका' की कुछ पंक्तियाँ )शशिधर  नृत्य करो ऐसा की नवयुग का फिर नव-सृजन हो,पाप-मुक्त होवे यह जगती, धरती फिर से निर्जन हो,दसो दिशायें शान्त हो, पुनः वही जन-एकांत हो,संसकृतियां फिर से बसें, न कोई भय-आक्रांत हो,और शक्ति तुम्हे अब शिव की शपथ- "फिर शक्त...
'पंकज-पत्र'पर पंकज की कुछ कविता...
Tag :prakash pankaj
  February 12, 2010, 3:50 pm
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'पंकज-पत्र'पर पंकज की कुछ कविता...
Tag :पंकज-पत्र
  February 12, 2010, 3:33 pm
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'पंकज-पत्र'पर पंकज की कुछ कविता...
Tag :पंकज
  February 12, 2010, 3:33 pm
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