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शाश्वत शिल्प

सूरज सोया रात भर, सुबह गया वह जाग,बस्ती-बस्ती घूमकर, घर-घर बाँटे आग।भरी दुपहरी सूर्य ने, खेला ऐसा दाँव,पानी प्यासा हो गया, बरगद माँगे छाँव। सूरज बोला  सुन जरा, धरती मेरी बात,मैं ना उगलूँ आग तो, ना होगी बरसात।सूरज है मुखिया भला, वही कमाता रोज,जल-थल-नभचर पालता, देता उनको ओज...
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Tag :धरती
  April 30, 2017, 6:36 pm
स्व. भवानी प्रसाद मिश्र................एक छोटा-सा किस्सा सुनाता हूँ,  आज के माता-पिता के लिए वो ज़रा चौंकाने वाला होगा । आज हम यह देखते हैं कि बच्चे कैसे अच्छे-से पढ़ें और पढ़-लिख कर कैसे अच्छी नौकरियों में चले जाएँ , कितना बड़ा उनको पैकेज मिले । पिताजी का दौर उस समय के माता-पिता जैसा र...
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Tag :बेमेतरा
  March 29, 2017, 12:19 am
तूफ़ाँ बनकर वक़्त उमड़ उठता है अक्सर,खोना ही है जो कुछ भी मिलता है अक्सर ।उसके माथे पर कुछ शिकनें-सी दिखती हैं,मेरी  साँसों  का  हिसाब रखता है अक्सर ।वक़्त ने गहरे हर्फ़ उकेरे जिस किताब पर,उस के सफ़्हे वो छू कर पढ़ता है अक्सर ।सहरा  हो  या  शहर  तपन  है  राहों में...
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Tag :दरिया
  February 28, 2017, 8:12 pm
सुरभित मंद समीर ले                                                  आया है मधुमास।पुष्प रँगीले हो गएकिसलय करें किलोल,माघ करे जादूगरीअपनी गठरी खोल।गंध पचीसों तिर रहेपवन हुए उनचास ।अमराई में कूकतीकोयल मी...
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Tag :बसंत
  January 31, 2017, 9:05 pm
कुछ दाने, कुछ मिट्टी किंचितसावन शेष रहे ।सूरज अवसादित हो बैठाऋतुओं में अनबन,नदिया-पर्वत-सागर रूठेपवनों में जकड़न,जो हो, बस आशा-ऊर्जा कादामन शेष रहे ।मौन हुए सब पंख-पखेरूझरनों का कलकल,नीरवता को भंग कर रहाकोई कोलाहल,जो हो, संवादी सुर में अबगायन शेष रहे ।-महेन्द्र वर्मा...
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Tag :दामन
  November 26, 2016, 9:59 pm
कुछ दाने, कुछ मिट्टी किंचितसावन शेष रहे ।सूरज अवसादित हो बैठाऋतुओं में अनबन,नदिया-पर्वत-सागर रूठेपवनों में जकड़न,जो हो, बस आशा-ऊर्जा कादामन शेष रहे ।मौन हुए सब पंख-पखेरूझरनों का कलकल,नीरवता को भंग कर रहाकोई कोलाहल,जो हो, संवादी सुर में अबगायन शेष रहे ।-महेन्द्र वर्मा...
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Tag :दामन
  November 26, 2016, 9:59 pm
तिमिर तिरोहित होगा निश्चितदीये का संकल्प अटल है।सत् के सम्मुख कब टिक पायाघोर तमस की कुत्सित चाल,ज्ञान रश्मियों से बिंध कर हीहत होता अज्ञान कराल,झंझावातों के झोंकों से लौ का ऊर्ध्वगतित्व अचल है।कितनी विपदाओं से निखरादीपक बन मिट्टी का कण-कण,महत् सृष्टि का उत्स यही है...
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Tag :geet
  October 28, 2016, 9:15 am
 मुश्किलों को क्यों हवा दी बेवजह,इल्म की क्यों बंदगी की बेवजह ।हाथ   में   गहरी  लकीरें  दर्ज  थीं,छल किया तक़़दीर ने ही बेवजह ।सुबह ही थी शाम कैसे यक-ब-यक,वक़्त  ने   की  दुश्मनी-सी बेवजह ।वो  नहीं  पीछे   कभी  भी  देखता,आपने  आवाज़  क्यों  दी बेवजह ।ध...
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Tag :किताबें
  September 27, 2016, 6:25 pm
                               ज़रा-ज़रा इंसाँ होने से मन को सुकून मिलना तय है,  अगर देवता बन बैठे तो हरदम दोष निकलना तय है ।सूरज गिरा क्षितिज के नीचे   सुबह सबेरे फिर चमकेगा,चलने वालों का ही गिरना उठना फिर से चलना तय है ।जब अतीत क...
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Tag :इंसाँ
  August 28, 2016, 8:32 pm
दिन ढला तो साँझ का उजला सितारा मिल गया,रात की अब फ़िक्र किसको जब दियारामिल गया ।ज़िंदगी   की  डायरी   में    बस   लकीरें  थीं  मगर,कुछ लिखा था जिस सफ़्हे पर वो दुबारा मिल गया ।तेज़ लहरों ने गिराया फिर उठाया और तब,उम्र के गहरे समंदर का किनारा मिल गया ।वो  जिसे...
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Tag :पिटारा
  July 27, 2016, 3:49 pm
सहमी-सी है झील शिकारे बहुत हुए,और उधर तट पर मछुवारे बहुत हुए ।चाँद सरीखा कुछ तो टाँगो टहनी पर,जलते-बुझते जुगनू तारे बहुत हुए ।चींटी के पग नेउर को भी सुनता हूँ,,ढोल मँजीरे औ’जयकारे बहुत हुए ।आओ अब मतलब की बातें भी  कर लें,जुमले वादे भाषण नारे बहुत हुए ।कुदरत यूँ ही ख़फ़ा न...
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Tag :चाँद
  June 21, 2016, 9:38 pm
मन के नयन खुले हैं जब तक,सीखोगे तुम जीना तब तक ।दीये को कुछ ऊपर रख दो,पहुँचेगा उजियारा सब तक ।शोर नहीं बस अनहद से ही,सदा पहुँच जाएगी रब तक।दिल दरिया तो छलकेगा ही,तट भावों को रोके कब तक।जान नहीं पाया हूँ  कुछ भी,जान यही पाया हूँ अब तक।-महेन्द्र वर्मा...
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Tag :दिल दरिया
  May 25, 2016, 1:31 pm
   (चित्र-महेन्द्र वर्मा)सच को कारावास अभी भी,भ्रम पर है विश्वास अभी भी ।पानी  ही   पानी   दिखता  पर, मृग आँखों में प्यास अभी भी ।  मन का मनका फेर कह रहा,खड़ा कबीरा पास अभी भी ।                                     ...
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Tag :उल्लास
  April 26, 2016, 2:58 am
यादों के कुछ ताने-बाने और अकेलापन,यूँ ही बीत रहीं दिन-रातें और अकेलापन।ख़ुद से ख़ुद की बातें शायदख़त्म कभी न हों,कुछ कड़वी कुछ मीठी यादें और अकेलापन।जीवन डगर कठिन है कितनी समझ न पाया मैं,दिन पहाड़ खाई सी रातें और अकेलापन।किसने कहा अकेला हूँ मैंदेख ज़रा मुझको,घेरे रहते...
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Tag :जीवन
  March 31, 2016, 12:30 am
सबने उतना पाया जिनका हिस्सा जितना, क्या मालूम,मेरे भीतर सब मेरा है या कुछ उसका, क्या मालूम ।कि़स्मत का आईना बेशक होता है बेहद नाज़ुक,शायद यूँ सब करते हैं पत्थर का सिजदा क्या मालूम ।जीवन के उलझे-से ताने-बाने बिखरे इधर-उधर,बुन पाउंगा शायद चादर एक खुरदरा क्या मालूम ।झूठ हम...
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Tag :देशभक्त
  February 23, 2016, 6:35 pm
वक़्त घूम कर चला गया है मेरे चारों ओर,बस उन क़दमों का नक़्शा है मेरे चारों ओर ।सदियों का कोलाहल मन में गूँज रहा लेकिन,कितना सन्नाटा पसरा है मेरे चारों ओर ।तेरे पास अभाव अगर है ले जा गठरी बाँध,नभ जल पावक मरुत धरा है मेरे चारों ओर ।मंदिर मस्जिद क्यूँ भटकूँ जब मेरा तीरथ नेक,...
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Tag :मंदिर
  January 30, 2016, 3:30 pm
धूप गरीबी झेलती, बढ़ा ताप का भाव,ठिठुर रहा आकाश है,ढूँढ़े सूर्य अलाव ।रात रो रही रात भर, अपनी आंखें मूँद,पीर सहेजा फूल ने, बूँद-बूँद फिर बूँद ।सूरज हमने क्या किया, क्यों करता परिहास,धुआँ-धुआँ सी जि़ंदगी, धुंध-धुंध विश्वास ।मानसून की मृत्यु से, पर्वत है हैरान,दुखी घाटियाँ ...
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Tag :अलाव
  December 26, 2015, 7:33 pm
धूप गरीबी झेलती, बढ़ा ताप का भाव,ठिठुर रहा आकाश है,ढूँढ़े सूर्य अलाव ।रात रो रही रात भर, अपनी आंखें मूँद,पीर सहेजा फूल ने, बूँद-बूँद फिर बूँद ।सूरज हमने क्या किया, क्यों करता परिहास,धुआँ-धुआँ सी जि़ंदगी, धुंध-धुंध विश्वास ।मानसून की मृत्यु से, पर्वत है हैरान,दुखी घाटियाँ ...
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Tag :अलाव
  December 26, 2015, 7:33 pm
सदियों से‘अँधेरे’ में रहने के कारण‘वे’अँधेरी गुफाओं में रहने वाली मछलियों की तरहअपनी ‘दृष्टि’ खो चुके हैं ।उनकी देह में अँधेरे से ग्रसितमन-बुद्धि तो हैकिंतु आत्मा नहींक्योंकि आत्माअँधेरे में नहीं रहतीवह तो स्वयं ‘उजाले का स्रोत’ होती है ।          &nbs...
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Tag :आत्मा
  November 23, 2015, 12:02 pm
छंदों के तेवर बिगड़े हैं,गीत-ग़ज़ल में भी झगड़े हैं।राजनीति हो या मज़हब हो,झूठ के झंडे लिए खड़े हैं ।सबसे बड़ी पहेली बूझो,वे अगड़े हैं या पिछड़े हैं ।बड़े लोग हैं ठीक है लेकिन,जि़ंदा हैं तो क्यूँ अकड़े हैं।घर-घर दस्तक देने वालो,देखा है, कितने उजड़े हैं ।जुगनू की औकात न प...
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Tag :मज़हब
  October 26, 2015, 10:00 pm
हरियाली ने कहा देख लो  मेरी यारी कुछ दिन और,फिर सहना होगा उस मौसम की मक्कारी कुछ दिन और ।बाँस थामकर  नाच रहा था  छोटा बच्चा रस्सी पर,दिखलाएगा वही तमाशा वही मदारी कुछ दिन और ।हर मंजि़ल का सीधा-सादा रस्ता नहीं हुआ करता,टेढ़ी-मेढ़ी पगडंडी से कर लो यारी कुछ दिन और ।अंधी श...
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Tag :कीर्तन
  September 28, 2015, 2:31 am
कभी छलकती रहती थीं  बूँदें अमृत की धरती पर,दहशत का जंगल उग आया कैसे अपनी धरती पर ।सभी मुसाफिर  इस सराय के  आते-जाते रहते हैं,आस नहीं मरती लोगों की जीने की इस धरती पर ।ममतामयी प्रकृति को चिंता है अपनी संततियों की,सबके लिए जुटा कर रक्खा दाना -पानी धरती पर ।पूछ  रहे  ह...
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Tag :धरती
  August 23, 2015, 10:10 pm
श्रेष्ठ विचारक से अगर, करना हो संवाद,उनकी पुस्तक बांचिए, भीतर हो अनुनाद।जिनकी सोच अशक्त है, वे होते वाचाल,उत्तम जिनकी सोच है, नहीं बजाते गाल।सुनना पहले सीखिए, फिर देखें हालात,बुरे वचन में भी दिखे, कोई अच्छी बात।स्वविश्वास सहेजिए, कभी न होती हार,तुष्टि विजय यश आत्मबल, अन...
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Tag :औषधि
  July 22, 2015, 8:09 pm
अगर मैं ये कहूँकिधर्म से हटा दो आडम्बर पूरी तरह तोक्या तुम मुझेजीने नहीं दोगेऔर अगर मैं ये कहूँकि मैं धर्म मेंमिला सकता हूंकुछ और सम्मोहनकारी आडम्बर तोक्या तुम मुझेमहामंडलाधिपति बना दोगे !                                              &...
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Tag :धर्म
  June 25, 2015, 5:54 pm
कुछ भी नहीं थापर शून्य भी नहीं थाचीख रहे उद्गाता ।जगती का रंगमंचउर्जा का है प्रपंच,अकुलाए-से लगतेआज महाभूत पंच,दिक् ने ज्यों काल से तोड़ लिया नाता।न कोई तल होगा न ही कोई शिखर,अस्ति और नास्ति कोनिगलेगा कृष्ण विवर,तुम्ही जानते हो न जानते विधाता।           ...
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Tag :दिक्-काल
  May 21, 2015, 11:23 am
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