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कविता

माँ मुझको तुम अंक में ले लोस्नेह फुहार से मुझे भिंगो दोजब भी मुझको भूख लगे माँसीने से मुझको लगा लो सीने को निचोड़ के तुमनेजो मुझको अमृत है पिलायाउस अमृत का स्वाद आज भीकिसी भोजन में मैंने नहीं पायामेरे अंक में मेरा बच्चातेरी याद दिलाता है माँमुझको फिर से अंक में भर लोते...
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Tag :
  February 18, 2017, 8:49 am
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Tag :
  February 12, 2017, 9:49 pm
पिघलते क़तरों में जो लम्हा है जीयाउन लम्हों की क़सम मैंने ज़हर है पीया -कोई वादा नहीं था इक़रार-ए-बयाँ  काकानों से उतर के वो दिल में बसा था ॥अश्क़ों से लबालब ये वीरान सी आँखेंग़म की ख़ुमारी और बोझल सी रातें -दीदार-ए-यार कभी सुकूँ-ए-दिल थादेके दर्दे इश्क़ तेरे साथ ही चला था ॥नालिश ...
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Tag :नज़्म
  August 23, 2016, 8:33 am
माथे की लकीरों में बसा है तज़ुर्बा - ए -ज़िन्दग़ी यूं ही नहीं बने हैं ज़ुल्फ़-ए-सादगी ॥ ख़्वाहिशों से भरा घर मुक़म्मल हो नहीं सकता बहुत सी ठोकरें खाकर सम्भला है ज़िन्दगी ॥ अरमान अपने भुलाकर ही पाया है अपनों का प्यार हसरतें अपनी छुपाकर ही मिली है खुशियां हज़ार ...
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Tag :कविता
  July 2, 2016, 9:24 am
याद है वो दिन बारिश के ?जब भी निकले- छाते को बंद कर  -लटकाए से घूमा करते थे -भींगना था पर पानी में ही नही ,तुम्हारे साथ बीते हुए पलों के बौछारों में -सनसनाती हवाएं , सोंधी सी मिटटी की खुशबू , बताये देती थी ,मौसम भींगा है -बहुत देर तक - चुपचाप-जाते हुए लम्हों को देखा करते थे...
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Tag :VARSHA
  April 6, 2016, 9:44 pm
छुईमुई सी लम्हें खुश्बू से भरी वो यादें तेरे आने की आहट वो झूठ मूठ के वादे छुप-छुपके पीछे आना हाथों से आँखें ढकना पकडे जाने के डर  से दीवारों में छुप जाना वो आँखें ढूंढती सी जो मुझपे ही फ़िदा थी पर तुम न जान पायी मुझे जान  से वो प्यारी थी धीरे स...
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Tag :
  March 30, 2016, 11:30 pm
नन्हें पाँव रात आई आँखों में उतरी वो ऐसे मानो  कोई सपना है वो नींदे भर लायी हो जैसे पल-पल सपना हर पल अपना क्या है हकीक़त क्या है अपना सब कुछ जैसे छुई -मुई रात ढल न जाए ऐसे जब भी मैंने आँखें मूंदे चाँद की आह्ट सी आई मंथर गति समय ये गुजरे दिन के जैसे रात भी ...
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Tag :raat
  January 31, 2016, 4:35 pm
भींगी हुई आँखों से जाती हुई रातों ने ,जाने क्या-क्या कह गयी उसने बातों बातों में ॥ बातें जो कह गयी चुपके से रातों ने , अश्कों ने लिख दिए लम्हों की ज़ुबानी ये ॥ अश्कों के बूंदों में डूबी हुई ज़िन्दगी , जाने कब सुबह हो और ये आँखें खुलें ॥ न रहे हम होश में ख़ामोश है ज़िन्दग...
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  August 6, 2015, 9:18 pm
हंसती हुई आँखों में जो प्यार का पहरा रहता है-असल में उन आँखों के ज़ख्म गहरे होते है ||जलती हुई लौ भी जो उजारा करे मजारों को-सुना है उन मजारों को बड़ी तकलीफ होती है ||दिल जो किसी के प्यार का जूनून लिए चलता है-उन्हीं दिलों में धोखों के अफ़साने छुपे रहते है ||रात जो लेकर आती ...
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  July 25, 2015, 9:01 pm
सौ साल पहले भी मैंने तुम पर कविता रचा थासौ साल बाद आज तुम पढ़ने आई IIआँखों की भाषा जो मैंने उस समय पढ़ लिया थासौ साल बाद आज तुम कहने आई IIजिन आँखों को आंसुओं से  धोया था हमनेउस वक़्त को इशारों से रोका था जो हमनेधूप छाँव सी ज़िन्दगी में अब बचा ही क्या है ?सौ साल बाद आज तुम रंग भरने ...
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  April 11, 2015, 10:12 pm
           लम्हा जब लकीरों में बंटा तो उस पार मैं खड़ा था इस पार   तुम थी-शायद मैं इस इंतज़ार में था कि ये दाग मिट जाए पर हो न सका !!शायद तुम इस फ़िराक में थी कि  ये दाग पट जाए तो लांघने की नौबत न आये पर लम्हों को इन हरकतों का इल्म पहले से था शायद दाग गहराते च...
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  March 28, 2015, 9:39 pm
वो शख्स नहीँ मिलाजो आईना सा मुझे अक्स दिखाएआंखोँ के कोरो में छुपी लालिमा मेदिल का छुपा जख्म दिखायेवो खुद्दारी ही थीजो तेरी यादों से हमेशा जूझता रहाअपने घर के दरो दीवार मेँ हींअपने साये को टटोलता रहावो मैं ही थाजो वफा पे वफा किए जा रहा थाबिना कसूर के  बरसों से ये दिलज...
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  March 16, 2015, 8:33 pm
रेत  से घर नहीं बनता पानी में ख्वाव नहीं बहते मन के अन्तर्निहित गहराई किसी पैमाने से नहीं नपते नए कोपलों में दिखता है पौधों की हरियाली की चाहत फूलों से भरी है गुलशन पर कलिओं को खिलने से नहीं राहत देह के नियम है अजीब थकता नहीं है सांस लेने में नींद म...
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  October 5, 2014, 10:02 pm
सांस जब तक चल रही है तुम भी  ज़िंदा हो पथिकतुम अकेले ही नहीं हो -चॉंद  तारे भी सहितपाँव के नीचे जो धरती है वो राह दिखलायेमोह माया त्याग दे कहीं ये न तुझे भरमायेदंश भूखे पेट की तुझको समझना है अभीबेघरों का आशियाना तुझको बनना है अभीशून्य में ही भ्रमण करना नही...
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  June 27, 2014, 7:45 pm
झरनों सा गीत गाता ये मन सरिता की कलकल मधुगान सृष्टि है.... अनादि-अनंत भावनाओं से भरा है ये प्राण वरदान है कण-कण में छुपा दुःख-वेदना से जग है भरा पर स्वर्ण जीवन से भरा है नदी-सागर और ये धरा गूंजता स्वर नील-नभ में मोरनी … नाचे वन  में गा  रहा है गीत ये म...
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  June 13, 2014, 9:15 pm
जिस्मों से परे दो रूहों को-मिलाता है इश्क़ जीते है साथ और जीने की ख़ुशी -दिलाता है इश्क़ प्रेम दरिया में डूबकर भी प्यासा रह जाता है इश्क़ समंदर सी गहराई औ नदी सा-मीठा पानी है इश्क़ बादल गरजे तो बूँद बन जिस्म भिगोती है इश्क़ प्रेम-ज्वार परवान तो चढ़े पर भाटा न आने ...
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Tag :प्रेम
  June 6, 2014, 7:44 pm
पत्तों के हिलने मे तेरे आने की आहट सुनूँ तुम मेरे शहर मे आये तुमसे मिलने का ख्वाब बुनूं ||शाम ढलने लगी  चिरागों से बात करने लगी तुम्हारे आने की इंतज़ार मे लम्हा-लम्हा पिघलती रही  ||वफ़ा-ए -इश्क़ की कौन सी तस्वीर है ये तेरे पाँव के निशाँ  मे ही अपना वज़ूद ढूंढ़ती ...
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Tag :कविता
  April 27, 2014, 4:34 pm

 ये लोकतंत्र है  या वोटतन्त्र !!है त्रस्त  जनता और भ्रष्ट मंत्री नहीं देश प्रेम है  गुंडों का राज जनता के हाथ  कब आये राज II प्रशासन है यूं… मौन क्यों हत्याएं और लूटपाट यूं क्यों हो रहे यूं सरे आम अधीन मंत्री हो ,राजा अवाम II शायद फिर हो सुशासन  की आस...
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  April 10, 2014, 6:05 pm
 ये लोकतंत्र है  या वोटतन्त्र !!है त्रस्त  जनता और भ्रष्ट मंत्री नहीं देश प्रेम है  गुंडों का राज जनता के हाथ  कब आये राज II प्रशासन है यूं… मौन क्यों हत्याएं और लूटपाट यूं क्यों हो रहे यूं सरे आम अधीन मंत्री हो ,राजा अवाम II शायद फिर हो सुशासन  की आस...
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  April 10, 2014, 6:05 pm
तुम अनन्या तुम लावण्यातुम नारी सुलभ लज्जा से आभरणातुम सहधर्मिनी तुम अर्पितातुम पूर्ण नारीश्वर गर्विताउत्तरदायित्वों की तुम निर्वाहिनीतुम ही पुरुष की चिरसंगिनीतुम सौन्दर्य बोध से परिपूर्णातुम से ही धरित्री आभरणातुम ही स्वप्न की कोमल कामिनीतुमसे सजी है दिवा औ'य...
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Tag :कविता
  April 8, 2014, 1:45 pm
आसमान का रंग हो आज चाहे  फीका आज बारिश भी न कर पाये तन को गीला फूल चाहे आज खिले अधखिले से पर आज तुम मिले आज ही वसंत !! चाहे मैं बस न पाऊँ तुम्हारी यादों में मेरा पूर्ण प्रेम न मिले इतिहासों में मेरा तुम्हारा प्रणय है समय से परे नयन भर देखा तुम्हे आज ही आ...
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  April 4, 2014, 9:45 pm
पाखी उड़ जा रे बहती हवा में महकी फ़िज़ा में, कल-कल बहती सरित-झरनों में, शीत का अंत है ये !!!पीले हरे फूलों के रंग- पलाश-ढाक के पत्तों के संग,भ्रमर गुंजायमान,वसंत के ढंग,फागुन का रंग है ये !!!!प्रेम-प्लावित ह्रदय अनुराग; आह्लादित मन  गाये विहाग; ऋतुराज ने छेड़ा वसं...
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Tag :कविता
  March 30, 2014, 9:16 pm
अकेला ये मन सोचे हरदमसुख-दुख का झमेला जीवनमारे दंश फिर भी सहे जायेयह ही हृदय का दमखम ।।नहीं कोई मरहम समय अति निर्ममखारे आँसू भी न करे दर्द कम मन बहलाने को जीते है हमदेख कर ये धरा-प्रकृति का संगम ।।आह! मुख से न निकले है कभीमनुष्य है...ऐसे ही जीते है सभीदुःख-सुख है पहिया जी...
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Tag :जीवन
  March 22, 2014, 11:27 pm
स्याही सी है ज़िन्दगीलिखती मिटाती उकेरतीकुछ भी ये कह जातीकागज़ों पर बसती ज़िन्दगीरंगीन सपनों को कहतीसुख-दिख में है उलझातीपाती या फिर हो फ़सानासुलझाती है ये ज़िन्दगीसादा कागज़ सा ये मनउस पर यर रंगीन आखरजाने क्यों नहीं छिपता हैबयाँ हो जाती ज़िंदगीअफ़साने कितने अधूरेअनसुने...
कविता...
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  March 12, 2014, 9:30 pm
ईश्वरीय प्रेम। …।जग में है सब अपनेमुक्ताकाश , पंछी , सपनेसुगन्धित धरती ,निर्झर झरनेआह्लादित तन मनप्रेमदान का स्वर्गीय आनंद।।प्रकृति चित्रण। ………धरा,सरिता,औ' नील गगनप्रस्फुटित पुष्प,वसंत आवागमन,दारुण ग्रीष्म,शीत,और हेमंतखग कलरव - गुंजायमान दिक्-दिगंत,प्रकृति से प...
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Tag :कविता
  February 27, 2014, 9:54 am
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