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कविता

सारे किस्से बयाँ न हो पाता कभीदिल के कब्र में हजार किस्से दफ़्न हैंइतने करीब भी न थे कि बुला पाऊँ तुम्हेंइतने दूर भी न थे कि भुला पाऊँ तुम्हेंपुराने जख्मों से मिल गयी वाहवाही इतनीकि अब उसे नये जख्मों की तलाश हैमेरी चाहत है मैं रातों को  रोया न करूंया रब मेरी इस चाहत को ...
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Tag :जख्म
  September 18, 2017, 9:40 am
ख़्वाब तेरी किरचियाँ बन आँखों को अब चुभने लगीगम की आँधियाँ इस तरह ख्वाबों के धूल उड़ा गएमंज़िल पास थी रास्ता साफ था दो कदम डग भरने थेगलतफहमी की ऐसी हवा चली सारे रास्ते धुंधला गएबड़े शिद्दत से फूलों में बहार-ए-जोबन आयी थीवक्त के साथ मिरे गजरे के सारे फूल मुरझा गएमुहब्बत ...
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Tag :मुहब्बत
  September 13, 2017, 8:30 am
मेरी  धड़कनों से वो ज़िंदा ...  जो हुईज़िंदा हुई क्या मुझ पे ही वो बरस पड़ी!!देख लिया इस शहर को  जो करीब सेबोल दिया असलियत तो भीड़ उबल पड़ी !!सम्भाला ही था आईने को सौ जतन सेकाफ़िये में तंग हुई उलझन में हूँ पड़ी !!ख़ुदाया तूने मुझको जो काबिल न बनायाकर आसाँ फ़िलवक्त इम्तिह...
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Tag :गुनाह
  September 10, 2017, 7:50 pm
ज़िन्दगी से कुछ इतने क़रीब हुएकि आईने से भी  हम अजनबी हुएरोशनी जो आँखों की नजर थीदिखाया नहीं कुछ जो बत्ती गुल हुएआ पँहुचे है ऐसी जहाँ में हमना ख़ुशी से ख़ुश औ' ना ग़म से ग़मसभी रास्तें  मिल जाते है जहाँउस जगह से रास्तों सा अलग हुएअच्छे-बुरे,सही-गलत पहचान न सके मिले सबसे इस कद...
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Tag :मशहूर
  September 4, 2017, 8:02 pm
हर दर के दरवाज़ों की भी अपनी कहानी होती हैकहीं बूढ़े सिसकते मिलते है और कहीँ जवानी रोती हैआंगन-खिड़की है फिर भी दरवाज़ों का अपना खम हैकोई हाथ पसारे बाहर है कोई बाँह फैलाये अंदर हैहर दरवाजे के अंदर जाने कितनी जानें बसतीं हैंबच्चे बूढ़े और जवानों की खूब रवानी रहती  हैसूरत...
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Tag :kavita
  July 22, 2017, 8:27 pm
गद्दारों सम्भल जाओ तुम न अब चल पाओगे जुल्म तुम्हारा खत्म हुआ अब पब्लिक से पिट जाओगे चाहे जितने पत्थर फेंको चला लो गोली सीने पे मर मिटेंगे अपने मुल्क परया शत्रुओं को छलनी कर देंगे भ्र्ष्ट राजनेताओं को जड़ से हम उखाड़ेंगे दहशतगर्दों को सरेआम पेड़ों ...
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Tag :कफ़न
  July 12, 2017, 9:50 pm
प्रिये अब तुम दूर न जाना        आँखें पथ है निहार रही        वो दिन न रहा वो रात न रही        उलझी कब से है लटें सारी        सुलझाओ आकर ओ सजनासच सारे तो तुम साथ लिएचल दिये ,मैं मिथ्या एक भरमतुम हो यथार्थ- मैं  स्वप्न लिएतथ्यों से परे हूँ खड़ी चिर-दिन       ...
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Tag :
  July 5, 2017, 8:33 pm
हाथों में मेहंदी जो लगा लीअब पल्लू को सँभालूँ कैसेभारी-भरकम पाजेब पहनेचुपके से मिलने आऊँ कैसेअजीब है इश्क़ की फितरतकरने को है हजार बातेंसामने तुम और ये लब ख़ामोशज़ुबाँ पे ताला पड़ा हो जैसेरात बेरात आँखे जगती हैसमां बांधती है तुम्हारा ख़यालगुफ्तगू एक तुम्हीं से है तुम्...
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Tag :
  June 16, 2017, 9:22 pm
ऐ ज़िन्दगी मुझे जीना सिखा देअपनों से बिछड़ कर भी खुश होना सिखा दे आइने में बसा है जो यादों का डेरा उस आईने से अपनों का चेहरा मिटा  देहर शख्स खुदगर्ज़  है हर चेहरा नकलीउन चेहरों को ढूंढ़ रही हूँ जो बनते थे असलीबन जाऊँ  मैं  उन जैसा ये चाहत तो नहीं इनके साथ जीने...
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Tag :कविता
  May 6, 2017, 11:20 pm
याद आता है ख़ूब वो गांव का मकानवो खुली सी ज़मीन वो खुला आसमानवो बड़ा सा आंगन और ऊंचा रोशनदानवो ईंटों का छत और पतंगों की उड़ानवो बचपन की शरारत नानी बाबा का दुलारउस आंगन में मनता था छोटे बड़े त्योहारबच्चों की किलकारियां और खुशियां हजारकई रिश्तों का घर था वो था रिश्तों में प्य...
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Tag :जीवन
  May 2, 2017, 10:52 pm
अवध के शाम का गवाह बन के जियो    नवाबों के शहर में नवाब बन के जियो                        भूलभुलैया में  तुम ढूँढ लो ये ज़िन्दगी                      या तो 'पहले आप' के रिवाज़ में ही जियो                      दोआब का शहर गोमती के गोद मे    &n...
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Tag :
  April 20, 2017, 6:23 pm
माँ मुझको तुम अंक में ले लोस्नेह फुहार से मुझे भिंगो दोजब भी मुझको भूख लगे माँसीने से मुझको लगा लो सीने को निचोड़ के तुमनेजो मुझको अमृत है पिलायाउस अमृत का स्वाद आज भीकिसी भोजन में मैंने नहीं पायामेरे अंक में मेरा बच्चातेरी याद दिलाता है माँमुझको फिर से अंक में भर लोते...
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Tag :
  February 18, 2017, 8:49 am
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Tag :
  February 12, 2017, 9:49 pm
पिघलते क़तरों में जो लम्हा है जीयाउन लम्हों की क़सम मैंने ज़हर है पीया -कोई वादा नहीं था इक़रार-ए-बयाँ  काकानों से उतर के वो दिल में बसा था ॥अश्क़ों से लबालब ये वीरान सी आँखेंग़म की ख़ुमारी और बोझल सी रातें -दीदार-ए-यार कभी सुकूँ-ए-दिल थादेके दर्दे इश्क़ तेरे साथ ही चला था ॥नालिश ...
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Tag :नज़्म
  August 23, 2016, 8:33 am
माथे की लकीरों में बसा है तज़ुर्बा - ए -ज़िन्दग़ी यूं ही नहीं बने हैं ज़ुल्फ़-ए-सादगी ॥ ख़्वाहिशों से भरा घर मुक़म्मल हो नहीं सकता बहुत सी ठोकरें खाकर सम्भला है ज़िन्दगी ॥ अरमान अपने भुलाकर ही पाया है अपनों का प्यार हसरतें अपनी छुपाकर ही मिली है खुशियां हज़ार ...
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Tag :कविता
  July 2, 2016, 9:24 am
याद है वो दिन बारिश के ?जब भी निकले- छाते को बंद कर  -लटकाए से घूमा करते थे -भींगना था पर पानी में ही नही ,तुम्हारे साथ बीते हुए पलों के बौछारों में -सनसनाती हवाएं , सोंधी सी मिटटी की खुशबू , बताये देती थी ,मौसम भींगा है -बहुत देर तक - चुपचाप-जाते हुए लम्हों को देखा करते थे...
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Tag :VARSHA
  April 6, 2016, 9:44 pm
छुईमुई सी लम्हें खुश्बू से भरी वो यादें तेरे आने की आहट वो झूठ मूठ के वादे छुप-छुपके पीछे आना हाथों से आँखें ढकना पकडे जाने के डर  से दीवारों में छुप जाना वो आँखें ढूंढती सी जो मुझपे ही फ़िदा थी पर तुम न जान पायी मुझे जान  से वो प्यारी थी धीरे स...
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Tag :
  March 30, 2016, 11:30 pm
नन्हें पाँव रात आई आँखों में उतरी वो ऐसे मानो  कोई सपना है वो नींदे भर लायी हो जैसे पल-पल सपना हर पल अपना क्या है हकीक़त क्या है अपना सब कुछ जैसे छुई -मुई रात ढल न जाए ऐसे जब भी मैंने आँखें मूंदे चाँद की आह्ट सी आई मंथर गति समय ये गुजरे दिन के जैसे रात भी ...
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Tag :raat
  January 31, 2016, 4:35 pm
भींगी हुई आँखों से जाती हुई रातों ने ,जाने क्या-क्या कह गयी उसने बातों बातों में ॥ बातें जो कह गयी चुपके से रातों ने , अश्कों ने लिख दिए लम्हों की ज़ुबानी ये ॥ अश्कों के बूंदों में डूबी हुई ज़िन्दगी , जाने कब सुबह हो और ये आँखें खुलें ॥ न रहे हम होश में ख़ामोश है ज़िन्दग...
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Tag :
  August 6, 2015, 9:18 pm
हंसती हुई आँखों में जो प्यार का पहरा रहता है-असल में उन आँखों के ज़ख्म गहरे होते है ||जलती हुई लौ भी जो उजारा करे मजारों को-सुना है उन मजारों को बड़ी तकलीफ होती है ||दिल जो किसी के प्यार का जूनून लिए चलता है-उन्हीं दिलों में धोखों के अफ़साने छुपे रहते है ||रात जो लेकर आती ...
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  July 25, 2015, 9:01 pm
सौ साल पहले भी मैंने तुम पर कविता रचा थासौ साल बाद आज तुम पढ़ने आई IIआँखों की भाषा जो मैंने उस समय पढ़ लिया थासौ साल बाद आज तुम कहने आई IIजिन आँखों को आंसुओं से  धोया था हमनेउस वक़्त को इशारों से रोका था जो हमनेधूप छाँव सी ज़िन्दगी में अब बचा ही क्या है ?सौ साल बाद आज तुम रंग भरने ...
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  April 11, 2015, 10:12 pm
           लम्हा जब लकीरों में बंटा तो उस पार मैं खड़ा था इस पार   तुम थी-शायद मैं इस इंतज़ार में था कि ये दाग मिट जाए पर हो न सका !!शायद तुम इस फ़िराक में थी कि  ये दाग पट जाए तो लांघने की नौबत न आये पर लम्हों को इन हरकतों का इल्म पहले से था शायद दाग गहराते च...
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Tag :
  March 28, 2015, 9:39 pm
वो शख्स नहीँ मिलाजो आईना सा मुझे अक्स दिखाएआंखोँ के कोरो में छुपी लालिमा मेदिल का छुपा जख्म दिखायेवो खुद्दारी ही थीजो तेरी यादों से हमेशा जूझता रहाअपने घर के दरो दीवार मेँ हींअपने साये को टटोलता रहावो मैं ही थाजो वफा पे वफा किए जा रहा थाबिना कसूर के  बरसों से ये दिलज...
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Tag :
  March 16, 2015, 8:33 pm
रेत  से घर नहीं बनता पानी में ख्वाव नहीं बहते मन के अन्तर्निहित गहराई किसी पैमाने से नहीं नपते नए कोपलों में दिखता है पौधों की हरियाली की चाहत फूलों से भरी है गुलशन पर कलिओं को खिलने से नहीं राहत देह के नियम है अजीब थकता नहीं है सांस लेने में नींद म...
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Tag :
  October 5, 2014, 10:02 pm
सांस जब तक चल रही है तुम भी  ज़िंदा हो पथिकतुम अकेले ही नहीं हो -चॉंद  तारे भी सहितपाँव के नीचे जो धरती है वो राह दिखलायेमोह माया त्याग दे कहीं ये न तुझे भरमायेदंश भूखे पेट की तुझको समझना है अभीबेघरों का आशियाना तुझको बनना है अभीशून्य में ही भ्रमण करना नही...
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Tag :
  June 27, 2014, 7:45 pm
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