"अभिनन्दन "

चाहे कोई नाम लेकर न पुकारे साथ अपने अपनी ही आवाज़ हैखुश न हो ऐ वक्त मेरे पर क़तर करहौसलों की बाकी अभी परवाज़ हैफ़लक पे दिल के टाँके हैं पुराने ख्वाब सारेचला हूँ नज़रों में भरकर नए लाखों सितारेज़माने का था गुज़रा कल मेरे संग आज हैसाथ अपने अपनी ही आवाज़ हैहै च...
"अभिनन्दन "...
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  August 1, 2014, 2:42 pm
हैं हमसफ़र कहाँ हम बस रास्ते दिखाएंफितरत नहीं हैं उनकी चिराग़ों से दिल लगाएंमहफूज़ यूँ बहुत हैं तेरा सर पे हाथ पाकरतेरी आस्तीं के हमको कहीं सांप डस न जाएँज़्यादा ग़िला नहीं है हमें उनकी रहबरी से कोशिश मगर रहेगी कि वो भी लुट के जाएँहमने खिज़ा के...
"अभिनन्दन "...
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  May 15, 2014, 4:07 pm
हैं हमसफ़र कहाँ हम बस रास्ते दिखाएंफितरत नहीं हैं उनकी चिराग़ों से दिल लगाएंमहफूज़ यूँ बहुत हैं तेरा सर पे हाथ पाकरतेरी आस्तीं के हमको कहीं सांप डस न जाएँज़्यादा ग़िला नहीं है हमें उनकी रहबरी से कोशिश मगर रहेगी कि वो भी लुट के जाएँहमने खिज़ा के...
"अभिनन्दन "...
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  May 15, 2014, 4:07 pm
 कुछ नए दोस्त कुछ रिश्ते पुराने आयेख्वाब में छुप के जीने के बहाने आयेआँख खुलने पे मालूम चलेगा ये तोदर्द देने या साथ निभाने आयेअपनी हाथों की लकीरें वहीं आवारा हुईंजहां तकदीर में रहने के ठिकाने आयेबोझ उतरा हो कोई दिल से या एहसान लगाजब भी रूठा ह...
"अभिनन्दन "...
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  April 13, 2014, 1:51 pm
कई बार यूं भी होता हैआये नज़र न हमसफ़रपर साथ कोई होता हैकई बार यूं भी होता है सोते हुए भी यूं लगेशब् कट रही हो जगे जगेतन्हाई हो, पहलू में परएहसास एक सोता हैकई बार यूं भी होता हैहो अजनबी कितना सफ़रअपनी लगे हर रहगुज़र* कभी छाँव है तो धूप काकभी हाथ सर पे ...
"अभिनन्दन "...
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  February 28, 2014, 6:26 pm
 कई बार यूं भी होता हैकोई हमसफ़र नहीं दिखतापर साथ कोई होता हैकई बार यूं भी होता हैसोते हुए भी कभी लगेशब् कट रही है जगे जगेतन्हाई हो पर संग मेंएहसास एक सोता हैकई बार यूं भी होता हैइस सफ़र के सारे रास्तेबने जैसे अपने ही वास्तेकभी छाँव हो तो धूप काकभी हाथ&...
"अभिनन्दन "...
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  February 27, 2014, 4:30 pm
 मांग ली तन्हाई थोड़ी शोर से घबरा केकर दिया बिलकुल अकेला ख़ुदा ने तरस खा के ढूंढ़ता हूँ रोज़ छत पर उन सितारों के निशाँजो शहर की रौशनी से छुप गए घबरा के वक्त जो बस रेत होता झाड़ कर उठ जाता मैंरूह तक को है भिगोया मौज ने टकरा के कान आहट पर लगे...
"अभिनन्दन "...
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  February 17, 2014, 1:27 pm
 यादों का उड़ता एक पंछीबीज गिरा कर चला गय़ाकाँटों की बस्ती में नन्हाफूल खिला कर चला गयाबरसों तक मैंने हर उगतीहरियाली को कुचला थामन में जगती हर चाहत को चुन चुन कर के मसला थाचोंच में भर के बादलबंजर को नहला कर चला गयायादों का उड़ता एक पंछीबीज गिरा कर चला गय़ा स...
"अभिनन्दन "...
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  February 12, 2014, 7:33 pm
 अँधियारा पिंजरे में घुप हैमन का पंछी आज भी चुप हैफ़ैले हैं यादों के दाने वो भी चुगे नहीं, क्यों जाने शक्लें ,बातें वक्त के साएकोई भी न आये जायेन तो पिछला न ही अगलाकुछ भी याद करे न पगला पंख समेटे हुये पड़ा हैजाने कब से नहीं उड़ा  ह...
"अभिनन्दन "...
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  October 9, 2013, 11:55 am
 पुनः सम्पादित एवं प्रकाशित _______________  मेरेजहाँकीहदसेकुछदूरएकछोटासा जहांऔरभीहैमेरेमकांसेआगेकुछदूरमिलतेजुलतेसे मकां औरभीहैंवोदिखतेतो हैंकरीबमगरपहुंचना उनतकबहुत मुश्किलहैएकखाईहैदिलोंकीगहरीगुज़रना जिससेबहुत मुश्किलहैतहकोपानाउसकीनामुमकिनभराहैकितन...
"अभिनन्दन "...
Tag :'1947 की विरासत'
  April 13, 2013, 8:52 am
 पुनः सम्पादित एवं प्रकाशित _______________  मेरेजहाँकीहदसेकुछदूरएकछोटासा जहांऔरभीहैमेरेमकांसेआगेकुछदूरमिलतेजुलतेसे मकां औरभीहैंवोदिखतेतो हैंकरीबमगरपहुंचना उनतकबहुत मुश्किलहैएकखाईहैदिलोंकीगहरीगुज़रना जिससेबहुत मुश्किलहैतहकोपानाउसकीन...
"अभिनन्दन "...
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  April 13, 2013, 8:52 am
 मुट्ठियों में जाने क्या दर्द कस रहा हैकुछ बोलता नहीं है आँखों से हंस रहा है हंसी के साथ बहती नमी छलक गयी कुछ  मुस्कुराहटों में, कोशिश झलक गयी कुछउसकी वो मुस्कराहट चुगली सी कर थीकहने लगी जो कहते ज़बान डर रही थीहंसी की झिर्रियों से कुछ राज़ झाँक बैठे दिल की हाल कहने हमर...
"अभिनन्दन "...
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  April 4, 2013, 3:42 pm
 मुट्ठियों में जाने क्या दर्द कस रहा हैकुछ बोलता नहीं है आँखों से हंस रहा है हंसी के साथ बहती नमी छलक गयी कुछ  मुस्कुराहटों में, कोशिश झलक गयी कुछउसकी वो मुस्कराहट चुगली सी कर थीकहने लगी जो कहते ज़बान डर रही थीहंसी की झिर्रियों से कुछ राज़ झाँक बैठे ...
"अभिनन्दन "...
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  April 4, 2013, 3:42 pm
  बादल का अम्बर से बूँद बूँद रिश्ता हैबाती का दीपक से बूँद बूँद रिश्ता है पल भर के सुख को भी सांसें तरसती हैं खुशियों की झड़ीयाँ सदा झोली न भरती हैं सीपी का मोती से बूँद बूँद रिश्ता है मन की गहराई से भावों को खेना हैउनको कहाँ दुःख सुख से कुछ लेना देना हैनयनों का आंसू ...
"अभिनन्दन "...
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  March 6, 2013, 5:49 pm
  बादल का अम्बर से बूँद बूँद रिश्ता हैबाती का दीपक से बूँद बूँद रिश्ता है पल भर के सुख को भी सांसें तरसती हैं झड़ी खुशियों की सदा झोली न भरती हैसीपी का मोती से बूँद बूँद रिश्ता है  धूप में छाया सी आँचल में रहती हैजीवन भर वो अनथक धारा सी ...
"अभिनन्दन "...
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  March 6, 2013, 5:49 pm
 सीने से जो लगाया वो वक्त जा रहा हैजिंदगी से रिस कर  ये लख्त जा रहा है कुछ शक्लें मेरा रोज़ चेहरा टटोलती हैंजुबां तो बंद हैं पर नज़रें बोलती हैंआँखों से कह रही हैं कि वक्त जा रहा हैसीने से जो लगाया वो वक्त जा रहा है ऐसा नहीं है मैंने कोई कसर है छोड़ीमिन्नत से बाँधा उसको,...
"अभिनन्दन "...
Tag :सीने से जो लगाया
  January 16, 2013, 1:16 pm
पुनः सम्पादित एवं प्रकाशित ________________________कभी इन की दूरी कभी इनका मेलये जीवन सुना, है लकीरों का खेलये तकदीर बन हथेली पे चढ़ती शिकन बन कभी माथे पे जड़ती  सरहदें बन के अपनों को पड़ोसी बनाएंलकीरें तो रोज़ नए गुल खिलायेंकभी चेहरे पे छा, आइनें में डराएँकलम वक्त की इन्हें जिस...
"अभिनन्दन "...
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  December 1, 2012, 4:16 pm
ज़मीं को सजदा करो आसमां मिल जाएगाख़ुद को ढूंढोगे अगर शायद ख़ुदा मिल जाएगाहाथ चाहे छूट जाएँ राहें गुम हों जाए सबदौर- ऐ-गर्दिश में मगर अपना पता मिल जाएगाबैठे बैठे बस दिखेंगे रेत के उड़ते निशाँ चलते क़दमों को कहीं तो कारवां मिल जाएगाकोशिशें करते हो इतनी घर दिलों में ...
"अभिनन्दन "...
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  October 16, 2012, 12:22 pm
ज़मीं को सजदा करो आसमां मिल जाएगाख़ुद को ढूंढोगे अगर शायद ख़ुदा मिल जाएगाहाथ चाहे छूट जाएँ राहें गुम हों जाए सबदौर- ऐ-गर्दिश में मगर अपना पता मिल जाएगाबैठे बैठे बस दिखेंगे रेत के उड़ते निशाँ चलते क़दमों को कहीं तो कारवां मिल जाएगाकोशिशें करते हो इत...
"अभिनन्दन "...
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  October 16, 2012, 12:22 pm
कल की रात कोई आया थामुट्ठी में एक तोहफ़ा लाया थाचेहरे पर कुछ फूल खिले थेचाँद चमकता था माथे पेसाँसों में खुशबू संदल सीआँख में तारे भर लाया थाकल की रात कोई आया थामैं आँखों को मूँद पड़ा थावो मेरे सिरहाने खड़ा थाउसकी नज़रों की ठंडक कोअपनी पलकों पर पाया थाकल की रात कोई आ...
"अभिनन्दन "...
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  October 14, 2012, 5:13 pm
कल की रात कोई आया थामुट्ठी में तोहफ़ा लाया थाचेहरे पर कुछ फूल खिले थेचाँद चमकता था माथे पेसाँसों में खुशबू संदल सीआँख में तारे भर लाया थाकल की रात कोई आया थावो मेरे सिरहाने खड़ा थाऔर मैं आँखें मूँद पड़ा थाउसकी नज़रों की ठंडक कोअपनी पलकों पर पाया थाकल की ...
"अभिनन्दन "...
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  October 14, 2012, 5:13 pm
मेरे अन्दर काफी दिनों से भावनाओं और यादों की गुत्थम्गुत्थी हो रही है ।मेरे लिए समझना मुश्किल है की ये भावनाएं यादों का साइड इफ्फेक्ट है या यादें इन भावनाओं का आफ्टर इफ्फेक्ट हैं ।मैंने इन्हें रोकने की पुरज़ोर कोशिश पुरानी फिल्मों की उन हीरोइनों  की तरह कर रहा हूँ,...
"अभिनन्दन "...
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  September 27, 2012, 4:36 pm
आज फिर ख़ुद को बहलायापैबंदो में कमीज़ को पायाछत के छेदों से छिड़क कर तारेचाँद रोटी की जगह खायाआज फिर ख़ुद को बहलायामिजाज़ मौसम का रहा रूखा नल गली का फिर रहा सूखाप्यास की नर्म लोरियां सुनते नींद आयी दर्द सब गिनतेगले के कांटे गि...
"अभिनन्दन "...
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  September 14, 2012, 9:52 am
आज फिर ख़ुद को बहलायापैबंदो में कमीज़ को पायाछत के छेदों से छिड़क कर तारेचाँद रोटी की जगह खायाआज फिर ख़ुद को बहलायानल गली का फिर रहा सूखाऔर बारिश ने भी दिया धोखाप्यास की लोरियां सुनते नींद आयी दर्द सब गिनतेगले के कांटे गिन नहीं पायाआज फिर ख़ुद को बहलायादेर स...
"अभिनन्दन "...
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  September 14, 2012, 9:52 am
' Sardarji ke 12 baj gaye' . This caption suddenly caught my attention while scrolling down my Facebook page today. It was pasted on a photo which showed a Sardarji standing on a railway track, with a train in the background. The photo also contained a small paragraph narrating few details and sentiments about Sikhism , Sardarji jokes and the origin of the above mentioned famous sentence. In the comments section there were responses from all corners in the shape of views, praises, theories, counter theories, criticism and some counter criticism translating into nasty personal remarks.I went through the story and all the responses with a mixed bag of emotions. There was an occasion...
"अभिनन्दन "...
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  September 12, 2012, 6:44 pm
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  गूगल के द्वारा अपनी रीडर सेवा बंद करने के कारण हमारीवाणी की सभी कोडिंग दुबारा की गई है। हमारीवाणी "क्...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
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