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"अभिनन्दन "

पते बस मज़ारों के पुराने नहीं होतेआवारा हवाओं के ठिकाने नहीं होतेथम जायेगी जब थक के तो अपना बयाँ देगीचलती हुयी धड़कन के फ़साने नहीं होतेउसके मशवरे पर जो ख़ार उगा लेताक़िस्मत में मेरी तब ये वीराने नहीं होतेअपनी ज़मीं से थोड़ा हम और जुड़े होतेरिश्ते जो आसमां...
"अभिनन्दन "...
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  February 6, 2016, 5:37 pm
आवारा हवाओं के ठिकाने नहीं होतेपते बस मज़ारों के पुराने नहीं होतेवो आज भी लोगों से गले लग के मिलता हैकुछ लोग उम्र भर तक सयाने नहीं होतेकहने पे जो उसके कुछ  ख़ार उगा लेताकिस्मत में फ़िर मेरी वीराने नहीं होतेअपनों से कहीं थोड़ा और जुड़ा होतेगैरों से अगर र...
"अभिनन्दन "...
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  January 21, 2016, 11:29 am
मन के घोड़े कभी न थकते,न बोझिल होते, न हाँफते,नहीं झुलसते किसी धूप में,किसी ठंड से नहीं कांपते, यादों की इन पर कसे लगाम,अपनी आँखों को बंद किये,कितने जाने अनजाने सपनेउड़ता हूँ मैं संग लिए,न वक्त की कोई हद रहती,न, उम्र का ही होता एहसास,जितना ही ऊपर जात...
"अभिनन्दन "...
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  December 22, 2015, 12:38 pm
कई बार ये भी होता हैआये नज़र न हमसफ़रपर साथ कोई होता हैकई बार ये भी होता हैसोते हुए भी यूं लगेशब् कट रही है जगे जगेतन्हाई हो पर पहलू मेंएहसास एक सोता हैकई बार ये भी होता हैहो अजनबी कितना सफ़रअपनी लगे हर रहगुज़र*कभी छाँव साथ कभी धूप काकंधे पे हाथ ह...
"अभिनन्दन "...
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  October 17, 2015, 9:04 pm
कुछ तंज सुने होंगे कुछ रंज बहे होंगेकुछ तीर चले होंगे कुछ संग* सहे होंगेकुछ लफ्ज़ डरे होंगे पर्दों से निकलने में नज़रों से रुक रुक कर ज़ाहिर तो हुए होंगेसीने के तूफाँ  को मुट्ठी में कसा होगासैलाब ने माथे पर कुछ हर्फ़ जड़े होंगेसमझाया तो होगा ही हालात ने ज़ेहन को ...
"अभिनन्दन "...
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  August 9, 2015, 3:41 pm
बर्फ हुए शोलों में तपिश ढूंढ ही लेंगेहैं चलती हुयी धड़कन हम दिल ढूँढ ही लेंगेमिट्टी की महक अपनी  साँसों में बसाई हैपरदेस में भी अपना वतन ढूँढ ही लेंगेहसरत के सफीने को तूफां में उतारा हैनाकाम दुआओं में असर ढूँढ ही लेंगेतन्हाई की बस्ती है खामोश हैं बाश...
"अभिनन्दन "...
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  August 2, 2015, 9:20 pm
मैं झाँकूँ कैसे तेरी रूह की गहराईओं मेंउलझ जाती है नज़रें जिस्म की परछाईओं मेंडगर दिल तक पहुँचने की नज़र आती नहीं है बदन के पार आँखें देख कुछ पाती नहीं है करी कोशिश है लाखों बार मोहब्बत ही दिखाने की नज़र छलकाती है लेकिन तमन्ना तुझको पाने की हवस को ...
"अभिनन्दन "...
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  April 2, 2015, 9:01 pm
मैं कैसे झाँकू तेरी रूह की गहराई मेंनज़रें उलझ जाती हैं तेरे जिस्म की परछाई मेंडगर दिल तक पहुँचने की नज़र आती नहीं हैनिगाहें इस बदन के बाद कुछ पाती नहीं हैकरी कोशिश है कितनी बार मोहब्बत ही दिखाने कीनज़र छलकाती है लेकिन तमन्ना तुझको पाने कीह...
"अभिनन्दन "...
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  April 2, 2015, 9:01 pm
ऐ ज़िन्दगीक़दमों में साँसे डालती रहनागिरने दे अभी फिर कभी संभालती रहनाराहों में लड़खड़ाने कादे लाख मुझे खौफ्उठने का जिगरमुझमे बस पालती रहनाज़मीं की हकीकतें कभीदामन जो पकड़ लेंसपनों की तरफ फिर मुझे उछालती  रहनाज़ख्मों पे ख़ुद के अश्क भले बर्फ ...
"अभिनन्दन "...
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  March 14, 2015, 8:38 pm

ऐ ज़िन्दगी क़दमों में साँसेडालती रहनागिरने दे कभी,और कभी संभालती रहनाराहों में लड़खड़ाने का दे लाख मुझे खौफ्उठने का जिगर मुझमे बस पालती रहनाज़ख्मों पे ख़ुद के अश्क भले सर्द अँगारे बनेंग़म - ए- जहाँ पे दोस्त लहू उबालती रहनाऐ ज़िन्दगी क़दमों में साँस...
"अभिनन्दन "...
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  March 14, 2015, 8:38 pm
संपादित एवं पुनः प्रकाशित हूँ गुनाहगार  तो क्यों  न  संगसार  करो ,उठाओ पत्थर और कस के मुझपे वार करोतुम्हें कहना हैं दलीलें मेरी सब बेबुनियादमैं कर रहा हूँ कबसे तुम्हारा वक्त बर्बादइनकी बेबाकी से अंदर तक डर चुके हो तुमकहना बाकी है मग़र ...
"अभिनन्दन "...
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  December 2, 2014, 4:18 pm
चाहे कोई नाम लेकर न पुकारे साथ अपने अपनी ही आवाज़ हैखुश न हो ऐ वक्त मेरे पर क़तर करहौसलों की बाकी अभी परवाज़ हैफ़लक पे दिल के टाँके हैं पुराने ख्वाब सारेचला हूँ नज़रों में भरकर नए लाखों सितारेज़माने का था गुज़रा कल मेरे संग आज हैसाथ अपने अपनी ही आवाज़ हैहै च...
"अभिनन्दन "...
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  August 1, 2014, 2:42 pm
हैं हमसफ़र कहाँ हम बस रास्ते दिखाएंफितरत नहीं हैं उनकी चिराग़ों से दिल लगाएंमहफूज़ यूँ बहुत हैं तेरा सर पे हाथ पाकरतेरी आस्तीं के हमको कहीं सांप डस न जाएँज़्यादा ग़िला नहीं है हमें उनकी रहबरी से कोशिश मगर रहेगी कि वो भी लुट के जाएँहमने खिज़ा के...
"अभिनन्दन "...
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  May 15, 2014, 4:07 pm
हैं हमसफ़र कहाँ हम बस रास्ते दिखाएंफितरत नहीं हैं उनकी चिराग़ों से दिल लगाएंमहफूज़ यूँ बहुत हैं तेरा सर पे हाथ पाकरतेरी आस्तीं के हमको कहीं सांप डस न जाएँज़्यादा ग़िला नहीं है हमें उनकी रहबरी से कोशिश मगर रहेगी कि वो भी लुट के जाएँहमने खिज़ा के...
"अभिनन्दन "...
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  May 15, 2014, 4:07 pm
 कुछ नए दोस्त कुछ रिश्ते पुराने आयेख्वाब में छुप के जीने के बहाने आयेआँख खुलने पे मालूम चलेगा ये तोदर्द देने या साथ निभाने आयेअपनी हाथों की लकीरें वहीं आवारा हुईंजहां तकदीर में रहने के ठिकाने आयेबोझ उतरा हो कोई दिल से या एहसान लगाजब भी रूठा ह...
"अभिनन्दन "...
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  April 13, 2014, 1:51 pm
कई बार यूं भी होता हैआये नज़र न हमसफ़रपर साथ कोई होता हैकई बार यूं भी होता है सोते हुए भी यूं लगेशब् कट रही हो जगे जगेतन्हाई हो, पहलू में परएहसास एक सोता हैकई बार यूं भी होता हैहो अजनबी कितना सफ़रअपनी लगे हर रहगुज़र* कभी छाँव है तो धूप काकभी हाथ सर पे ...
"अभिनन्दन "...
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  February 28, 2014, 6:26 pm
 कई बार यूं भी होता हैकोई हमसफ़र नहीं दिखतापर साथ कोई होता हैकई बार यूं भी होता हैसोते हुए भी कभी लगेशब् कट रही है जगे जगेतन्हाई हो पर संग मेंएहसास एक सोता हैकई बार यूं भी होता हैइस सफ़र के सारे रास्तेबने जैसे अपने ही वास्तेकभी छाँव हो तो धूप काकभी हाथ&...
"अभिनन्दन "...
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  February 27, 2014, 4:30 pm
 मांग ली तन्हाई थोड़ी शोर से घबरा केकर दिया बिलकुल अकेला ख़ुदा ने तरस खा के ढूंढ़ता हूँ रोज़ छत पर उन सितारों के निशाँजो शहर की रौशनी से छुप गए घबरा के वक्त जो बस रेत होता झाड़ कर उठ जाता मैंरूह तक को है भिगोया मौज ने टकरा के कान आहट पर लगे...
"अभिनन्दन "...
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  February 17, 2014, 1:27 pm
 यादों का उड़ता एक पंछीबीज गिरा कर चला गय़ाकाँटों की बस्ती में नन्हाफूल खिला कर चला गयाबरसों तक मैंने हर उगतीहरियाली को कुचला थामन में जगती हर चाहत को चुन चुन कर के मसला थाचोंच में भर के बादलबंजर को नहला कर चला गयायादों का उड़ता एक पंछीबीज गिरा कर चला गय़ा स...
"अभिनन्दन "...
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  February 12, 2014, 7:33 pm
 अँधियारा पिंजरे में घुप हैमन का पंछी आज भी चुप हैफ़ैले हैं यादों के दाने वो भी चुगे नहीं, क्यों जाने शक्लें ,बातें वक्त के साएकोई भी न आये जायेन तो पिछला न ही अगलाकुछ भी याद करे न पगला पंख समेटे हुये पड़ा हैजाने कब से नहीं उड़ा  ह...
"अभिनन्दन "...
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  October 9, 2013, 11:55 am
 पुनः सम्पादित एवं प्रकाशित _______________  मेरेजहाँकीहदसेकुछदूरएकछोटासा जहांऔरभीहैमेरेमकांसेआगेकुछदूरमिलतेजुलतेसे मकां औरभीहैंवोदिखतेतो हैंकरीबमगरपहुंचना उनतकबहुत मुश्किलहैएकखाईहैदिलोंकीगहरीगुज़रना जिससेबहुत मुश्किलहैतहकोपानाउसकीनामुमकिनभराहैकितन...
"अभिनन्दन "...
Tag :'1947 की विरासत'
  April 13, 2013, 8:52 am
 पुनः सम्पादित एवं प्रकाशित _______________  मेरेजहाँकीहदसेकुछदूरएकछोटासा जहांऔरभीहैमेरेमकांसेआगेकुछदूरमिलतेजुलतेसे मकां औरभीहैंवोदिखतेतो हैंकरीबमगरपहुंचना उनतकबहुत मुश्किलहैएकखाईहैदिलोंकीगहरीगुज़रना जिससेबहुत मुश्किलहैतहकोपानाउसकीन...
"अभिनन्दन "...
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  April 13, 2013, 8:52 am
 मुट्ठियों में जाने क्या दर्द कस रहा हैकुछ बोलता नहीं है आँखों से हंस रहा है हंसी के साथ बहती नमी छलक गयी कुछ  मुस्कुराहटों में, कोशिश झलक गयी कुछउसकी वो मुस्कराहट चुगली सी कर थीकहने लगी जो कहते ज़बान डर रही थीहंसी की झिर्रियों से कुछ राज़ झाँक बैठे दिल की हाल कहने हमर...
"अभिनन्दन "...
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  April 4, 2013, 3:42 pm
 मुट्ठियों में जाने क्या दर्द कस रहा हैकुछ बोलता नहीं है आँखों से हंस रहा है हंसी के साथ बहती नमी छलक गयी कुछ  मुस्कुराहटों में, कोशिश झलक गयी कुछउसकी वो मुस्कराहट चुगली सी कर थीकहने लगी जो कहते ज़बान डर रही थीहंसी की झिर्रियों से कुछ राज़ झाँक बैठे ...
"अभिनन्दन "...
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  April 4, 2013, 3:42 pm
  बादल का अम्बर से बूँद बूँद रिश्ता हैबाती का दीपक से बूँद बूँद रिश्ता है पल भर के सुख को भी सांसें तरसती हैं खुशियों की झड़ीयाँ सदा झोली न भरती हैं सीपी का मोती से बूँद बूँद रिश्ता है मन की गहराई से भावों को खेना हैउनको कहाँ दुःख सुख से कुछ लेना देना हैनयनों का आंसू ...
"अभिनन्दन "...
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  March 6, 2013, 5:49 pm
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