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Blog: "अभिनन्दन "

Blogger: योगेश शर्मा
तेरे फ़लक से दोस्त मेरा आस्मां जुदा है तेरा अलग है मालिक मेरा अलग ख़ुदा है मेरे फ़लक में तारों के रंग दूसरे हैं सूरज के चमकने के ढंग दूसरे हैं ज़मीन एक ही है लेकिन हवा जुदा है तेरा अलग है मालिक मेरा अलग ख़ुदा है ग़लती से अपना चेहरा है बहुत मिलता जुलता दोनों की रग़ों में है लाल रंग पलता पँख एक से हैं परवाज़ अलग अपनी... Read more
clicks 63 View   Vote 0 Like   11:12am 12 Jan 2020 #Social
Blogger: योगेश शर्मा
कानों में चीख़ती है करती है सांय सांय बग़ावत सी कर रही है ग़ुलाम  ये हवाएं घुटनों  पे कल तलक  ये झुक झुक के रेंगती थीसर तो उठा लिया है आज़ाद हो न जाएं झोपड़े तो गिर कर सौ बार फिर उठे हैं ये महल रेत  का हैं कहीं वो बिखर न जाएआंच में लहू की कब से पिघल रहा है खामोशियो... Read more
clicks 97 View   Vote 0 Like   6:07pm 2 May 2019 #
Blogger: योगेश शर्मा
नींदें तो ली हैं काफ़ी सोया नहीं कभीआँखें रही हैं नम नम  रोया नहीं कभीढूंढा बहुत है ख़ुद को लोगों में हर तरफ़पाया न हो भले पर खोया नहीं कभीआबादियों के सेहरा में रिश्ते हैं खुश्क जैसे जज़्बात की घटा ने भिगोया नहीं कभीउम्मीद की सुई से जीवन सियोगे कैसेभरम का धागा ह... Read more
clicks 218 View   Vote 0 Like   4:40pm 30 Jul 2018 #
Blogger: योगेश शर्मा
                                                     ज़रूरतों की भीड़ में हसरत नहीं मिलतीफ़ुर्सत  ढूंढ़ने की भी फ़ुर्सत नहीं मिलतीदोस्त जैसे लोग कितने राह में टकराते हैंहाथ मिल जाते हैं पर फ़ितरत नहीं मिलतीसोचता हूँ चेहरे को अब ढांक कर भी देख लूँग़... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   3:43pm 4 Jun 2018 #
Blogger: योगेश शर्मा
हूँ गुनाहगार तो क्यों न संगसार करो ,उठाओ पत्थर और कस के मुझपे वार करोकहा तुमने हैं दलीलें मेरी सब बेबुनियादमैं कर रहा हूँ कबसे तुम्हारा वक्त बर्बादइनकी बेबाकी से लेकिन डर चुके हो तुमकहना बाकी है मग़र फैसला कर चुके हो तुमलहू निकालो,चलो कपड़े तार तार क... Read more
clicks 101 View   Vote 0 Like   11:48am 8 Oct 2017 #
Blogger: योगेश शर्मा
पते बस मज़ारों के पुराने नहीं होतेआवारा हवाओं के ठिकाने नहीं होतेथम जायेगी जब थक के तो अपना बयाँ देगीचलती हुयी धड़कन के फ़साने नहीं होतेउसके मशवरे पर जो ख़ार उगा लेताक़िस्मत में मेरी तब ये वीराने नहीं होतेअपनी ज़मीं से थोड़ा हम और जुड़े होतेरिश्ते जो आसमां... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   12:07pm 6 Feb 2016 #
Blogger: योगेश शर्मा
आवारा हवाओं के ठिकाने नहीं होतेपते बस मज़ारों के पुराने नहीं होतेवो आज भी लोगों से गले लग के मिलता हैकुछ लोग उम्र भर तक सयाने नहीं होतेकहने पे जो उसके कुछ  ख़ार उगा लेताकिस्मत में फ़िर मेरी वीराने नहीं होतेअपनों से कहीं थोड़ा और जुड़ा होतेगैरों से अगर र... Read more
clicks 192 View   Vote 0 Like   5:59am 21 Jan 2016 #
Blogger: योगेश शर्मा
मन के घोड़े कभी न थकते,न बोझिल होते, न हाँफते,नहीं झुलसते किसी धूप में,किसी ठंड से नहीं कांपते, यादों की इन पर कसे लगाम,अपनी आँखों को बंद किये,कितने जाने अनजाने सपनेउड़ता हूँ मैं संग लिए,न वक्त की कोई हद रहती,न, उम्र का ही होता एहसास,जितना ही ऊपर जात... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   7:08am 22 Dec 2015 #
Blogger: योगेश शर्मा
कई बार ये भी होता हैआये नज़र न हमसफ़रपर साथ कोई होता हैकई बार ये भी होता हैसोते हुए भी यूं लगेशब् कट रही है जगे जगेतन्हाई हो पर पहलू मेंएहसास एक सोता हैकई बार ये भी होता हैहो अजनबी कितना सफ़रअपनी लगे हर रहगुज़र*कभी छाँव साथ कभी धूप काकंधे पे हाथ ह... Read more
clicks 110 View   Vote 0 Like   3:34pm 17 Oct 2015 #
Blogger: योगेश शर्मा
कुछ तंज सुने होंगे कुछ रंज बहे होंगेकुछ तीर चले होंगे कुछ संग* सहे होंगेकुछ लफ्ज़ डरे होंगे पर्दों से निकलने में नज़रों से रुक रुक कर ज़ाहिर तो हुए होंगेसीने के तूफाँ  को मुट्ठी में कसा होगासैलाब ने माथे पर कुछ हर्फ़ जड़े होंगेसमझाया तो होगा ही हालात ने ज़ेहन को ... Read more
clicks 188 View   Vote 0 Like   10:11am 9 Aug 2015 #
Blogger: योगेश शर्मा
बर्फ हुए शोलों में तपिश ढूंढ ही लेंगेहैं चलती हुयी धड़कन हम दिल ढूँढ ही लेंगेमिट्टी की महक अपनी  साँसों में बसाई हैपरदेस में भी अपना वतन ढूँढ ही लेंगेहसरत के सफीने को तूफां में उतारा हैनाकाम दुआओं में असर ढूँढ ही लेंगेतन्हाई की बस्ती है खामोश हैं बाश... Read more
clicks 129 View   Vote 0 Like   3:50pm 2 Aug 2015 #
Blogger: योगेश शर्मा
मैं झाँकूँ कैसे तेरी रूह की गहराईओं मेंउलझ जाती है नज़रें जिस्म की परछाईओं मेंडगर दिल तक पहुँचने की नज़र आती नहीं है बदन के पार आँखें देख कुछ पाती नहीं है करी कोशिश है लाखों बार मोहब्बत ही दिखाने की नज़र छलकाती है लेकिन तमन्ना तुझको पाने की हवस को ... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   3:31pm 2 Apr 2015 #
Blogger: योगेश शर्मा
मैं कैसे झाँकू तेरी रूह की गहराई मेंनज़रें उलझ जाती हैं तेरे जिस्म की परछाई मेंडगर दिल तक पहुँचने की नज़र आती नहीं हैनिगाहें इस बदन के बाद कुछ पाती नहीं हैकरी कोशिश है कितनी बार मोहब्बत ही दिखाने कीनज़र छलकाती है लेकिन तमन्ना तुझको पाने कीह... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   3:31pm 2 Apr 2015 #
Blogger: योगेश शर्मा
ऐ ज़िन्दगीक़दमों में साँसे डालती रहनागिरने दे अभी फिर कभी संभालती रहनाराहों में लड़खड़ाने कादे लाख मुझे खौफ्उठने का जिगरमुझमे बस पालती रहनाज़मीं की हकीकतें कभीदामन जो पकड़ लेंसपनों की तरफ फिर मुझे उछालती  रहनाज़ख्मों पे ख़ुद के अश्क भले बर्फ ... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   3:08pm 14 Mar 2015 #
Blogger: योगेश शर्मा
ऐ ज़िन्दगी क़दमों में साँसेडालती रहनागिरने दे कभी,और कभी संभालती रहनाराहों में लड़खड़ाने का दे लाख मुझे खौफ्उठने का जिगर मुझमे बस पालती रहनाज़ख्मों पे ख़ुद के अश्क भले सर्द अँगारे बनेंग़म - ए- जहाँ पे दोस्त लहू उबालती रहनाऐ ज़िन्दगी क़दमों में साँस... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   3:08pm 14 Mar 2015 #
Blogger: योगेश शर्मा
संपादित एवं पुनः प्रकाशित हूँ गुनाहगार  तो क्यों  न  संगसार  करो ,उठाओ पत्थर और कस के मुझपे वार करोतुम्हें कहना हैं दलीलें मेरी सब बेबुनियादमैं कर रहा हूँ कबसे तुम्हारा वक्त बर्बादइनकी बेबाकी से अंदर तक डर चुके हो तुमकहना बाकी है मग़र ... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   10:48am 2 Dec 2014 #
Blogger: योगेश शर्मा
चाहे कोई नाम लेकर न पुकारे साथ अपने अपनी ही आवाज़ हैखुश न हो ऐ वक्त मेरे पर क़तर करहौसलों की बाकी अभी परवाज़ हैफ़लक पे दिल के टाँके हैं पुराने ख्वाब सारेचला हूँ नज़रों में भरकर नए लाखों सितारेज़माने का था गुज़रा कल मेरे संग आज हैसाथ अपने अपनी ही आवाज़ हैहै च... Read more
clicks 165 View   Vote 0 Like   9:12am 1 Aug 2014 #
Blogger: योगेश शर्मा
हैं हमसफ़र कहाँ हम बस रास्ते दिखाएंफितरत नहीं हैं उनकी चिराग़ों से दिल लगाएंमहफूज़ यूँ बहुत हैं तेरा सर पे हाथ पाकरतेरी आस्तीं के हमको कहीं सांप डस न जाएँज़्यादा ग़िला नहीं है हमें उनकी रहबरी से कोशिश मगर रहेगी कि वो भी लुट के जाएँहमने खिज़ा के... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   10:37am 15 May 2014 #
Blogger: योगेश शर्मा
हैं हमसफ़र कहाँ हम बस रास्ते दिखाएंफितरत नहीं हैं उनकी चिराग़ों से दिल लगाएंमहफूज़ यूँ बहुत हैं तेरा सर पे हाथ पाकरतेरी आस्तीं के हमको कहीं सांप डस न जाएँज़्यादा ग़िला नहीं है हमें उनकी रहबरी से कोशिश मगर रहेगी कि वो भी लुट के जाएँहमने खिज़ा के... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   10:37am 15 May 2014 #
Blogger: योगेश शर्मा
 कुछ नए दोस्त कुछ रिश्ते पुराने आयेख्वाब में छुप के जीने के बहाने आयेआँख खुलने पे मालूम चलेगा ये तोदर्द देने या साथ निभाने आयेअपनी हाथों की लकीरें वहीं आवारा हुईंजहां तकदीर में रहने के ठिकाने आयेबोझ उतरा हो कोई दिल से या एहसान लगाजब भी रूठा ह... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   8:21am 13 Apr 2014 #
Blogger: योगेश शर्मा
कई बार यूं भी होता हैआये नज़र न हमसफ़रपर साथ कोई होता हैकई बार यूं भी होता है सोते हुए भी यूं लगेशब् कट रही हो जगे जगेतन्हाई हो, पहलू में परएहसास एक सोता हैकई बार यूं भी होता हैहो अजनबी कितना सफ़रअपनी लगे हर रहगुज़र* कभी छाँव है तो धूप काकभी हाथ सर पे ... Read more
clicks 194 View   Vote 0 Like   12:56pm 28 Feb 2014 #
Blogger: योगेश शर्मा
 कई बार यूं भी होता हैकोई हमसफ़र नहीं दिखतापर साथ कोई होता हैकई बार यूं भी होता हैसोते हुए भी कभी लगेशब् कट रही है जगे जगेतन्हाई हो पर संग मेंएहसास एक सोता हैकई बार यूं भी होता हैइस सफ़र के सारे रास्तेबने जैसे अपने ही वास्तेकभी छाँव हो तो धूप काकभी हाथ&... Read more
clicks 194 View   Vote 0 Like   11:00am 27 Feb 2014 #
Blogger: योगेश शर्मा
 मांग ली तन्हाई थोड़ी शोर से घबरा केकर दिया बिलकुल अकेला ख़ुदा ने तरस खा के ढूंढ़ता हूँ रोज़ छत पर उन सितारों के निशाँजो शहर की रौशनी से छुप गए घबरा के वक्त जो बस रेत होता झाड़ कर उठ जाता मैंरूह तक को है भिगोया मौज ने टकरा के कान आहट पर लगे... Read more
clicks 200 View   Vote 0 Like   7:57am 17 Feb 2014 #
Blogger: योगेश शर्मा
 यादों का उड़ता एक पंछीबीज गिरा कर चला गय़ाकाँटों की बस्ती में नन्हाफूल खिला कर चला गयाबरसों तक मैंने हर उगतीहरियाली को कुचला थामन में जगती हर चाहत को चुन चुन कर के मसला थाचोंच में भर के बादलबंजर को नहला कर चला गयायादों का उड़ता एक पंछीबीज गिरा कर चला गय़ा स... Read more
clicks 165 View   Vote 0 Like   2:03pm 12 Feb 2014 #
Blogger: योगेश शर्मा
 अँधियारा पिंजरे में घुप हैमन का पंछी आज भी चुप हैफ़ैले हैं यादों के दाने वो भी चुगे नहीं, क्यों जाने शक्लें ,बातें वक्त के साएकोई भी न आये जायेन तो पिछला न ही अगलाकुछ भी याद करे न पगला पंख समेटे हुये पड़ा हैजाने कब से नहीं उड़ा  ह... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   6:25am 9 Oct 2013 #
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