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Blog: पूरबिया

clicks 136 View   Vote 0 Like   10:59am 27 Jun 2013 #
clicks 104 View   Vote 0 Like   10:55am 27 Jun 2013 #
Blogger: Prem Prakash
यह एक अजीब बात है कि महात्मा गांधी कभी अमेरिका नहीं गए। यही नहीं अपने वहां कभी न जाने के फैसले को लेकर उन्होंने अमेरिका को लेकर काफी तल्ख टिप्पणी भी की था। अमेरिका ने जब दूसरे विश्व युद्ध के दौरान 1945 में जापान पर एटम बम बरसाया तो मानवता के खिलाफ इस क्रूरतम कार्रवाई को ले... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   9:02am 17 Jun 2013 #गांधी
Blogger: Prem Prakash
1999 में पीयूष झा की एक फिल्म आई थी चलो अमेरिका। इसमें वह पूरी मानसिकता चित्रित की गई थी कि आज के भारतीय युवाओं के लिए अमेरिका और वहां जाने का मतलब क्या है। यही नहीं अगर वह अमेरिका की धरती पर पैर नहीं रखता है तो कैसे उसके जीवन के सारे अरमान बिखर जाते हैं। जिंदगी की बड़ी से ब... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   8:57am 17 Jun 2013 #समय
Blogger: Prem Prakash
अभी यासीन मलिक चर्चा में थे। उन्होंने घाटी की स्थिति को लेकर अपने विवादास्पद से ज्यादा संदेहास्पद स्टैंड को दुनिया के सामने रखने के लिए 'पाक धरती' चुनी। इस पाक सरजमीं पर उन्हें हाफिज सइद तक की मौजूदगी नागवार न गुजरी। भारत सरकार इस सबके बावजूद थोड़ी इत्मिनान में है ... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   9:12am 3 Mar 2013 #पंचायत
Blogger: Prem Prakash
ज्यादा दिन नहीं हुए हैं, जब चीन खुली नसीहत दे रहा था कि आर्थिक और सामाजिक क्षेत्र में उसके विकास के डग भारत से काफी आगे हैं। एक सरकारी चीनी अखबार ने ये बातें नई दिल्ली में गैंगरेप की घटना के संदर्भ में कही थी। चीन की इस समझ पर सोशल मीडिया में इतना बवाल मचा कि वहां की सरकार ... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   8:30am 20 Jan 2013 #सेंसरशिप
Blogger: Prem Prakash
चंद्रकांत देवताले देवताले पचास के दशक के आखिर में हिंदी कविता जगत में एक हस्तक्षेप के रूप में उभरते हैं और उनका यह हस्तक्षेप आगे चलकर भी न तो कभी स्थगित हुआ और न ही कमजोर पड़ा। देवताले की काव्य संवेदना पर वीरेन डंगवाल की चर्चित टिप्पणी है, कि वे 'हाशिए' के नहीं बल्कि &... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   8:01am 10 Jan 2013 #प्रतिभा राय
Blogger: Prem Prakash
चंद्रकांत देवताले देवताले पचास के दशक के आखिर में हिंदी कविता जगत में एक हस्तक्षेप के रूप में उभरते हैं और उनका यह हस्तक्षेप आगे चलकर भी न तो कभी स्थगित हुआ और न ही कमजोर पड़ा। देवताले की काव्य संवेदना पर वीरेन डंगवाल की चर्चित टिप्पणी है, कि वे 'हाशिए' के नहीं बल्कि &... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   10:32am 31 Dec 2012 #प्रतिभा राय
Blogger: Prem Prakash
चेतना और स्वतंत्रता की जो नई जमीन तैयार दुनिया में 50-60 के दशक में हो रही थी, उसमें राजनीतिक-सामाजिक विचारधारा ही नहीं संस्कृति भी एक बड़े औज़ार के रूप में काम कर रही थी। पंडित रविशंकर की नब्बे साला जिंदगी पर नजर डालें तो यह बात ज्यादा समझ में आती है। रविशंकर से पहले उनके अ... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   11:40am 30 Dec 2012 #पंडित रविशंकर
Blogger: Prem Prakash
मौजूदा दौर की एकिक और सामूहिक मानवीय प्रवृतियों पर गौर करें तो कहना पड़ेगा कि यह दौर कड़वाहट और फूहड़ता के साझे का है। साझे के इस मांझे में ही निजी से लेकर सार्वजनिक जिंदगी उलझी हुई है। सुलझाव की कोशिशें इतनी सतही और बेइमान हैं कि उलझन में और नई गांठ ही पड़ती जा रही हैं। ... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   11:20am 4 Nov 2012 #समय
Blogger: Prem Prakash
एक दशक पूर्व जब अफागानिस्तान में तालिबानियों ने बामियान की बुद्ध प्रतिमाओं को नष्ट कर अपनी बर्बरता दिखाई थी तब इसकी चौतरफा आलोचना हुई थी। यहां तक कि इस्लाम के नाम पर आतंकी गतिविधियां चलाने वाले समूहों में भी इस कार्रवाई को लेकर मतभेद उभरे थे। एक दशक बाद एक बार फिर पूर... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   8:36am 21 Oct 2012 #इन्नोसेंस ऑफ मुस्लिम्स
Blogger: Prem Prakash
सुधींद्र कुलकर्णी महज एक भाजपा कार्यकर्ता भर नहीं हैं। उनकी पहचान पार्टी की विचारधारा और रणनीति बनाने वाले की रही है। यह भूमिका वह पिछले कई सालों से निभा रहे हैं। एनडीए सरकार के दौरान उनकी यह भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो गई थी। पिछली बार उनका नाम तब जोर-शोर से सामने आया ... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   7:35am 30 Sep 2012 #सैम पित्रोदा
Blogger: Prem Prakash
विपक्ष को अपने मौजूदा प्रधानमंत्री से अन्य शिकायतों के साथ एक बड़ा शिकायतयह है कि वे मुखर नहीं हैं। पिछले दिनों अपनी खामोशी पर मनमोहन  सिंह ने एक शायराना जवाब भी दिया था। प्रधानमंत्री चूंकि बोलते ही बहुत कम हैं इसलिए जब वे कुछ कहते भी हैं तो लोग उसके निहितार्थ को बहुत ... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   9:14am 16 Sep 2012 #मीडिया
Blogger: Prem Prakash
सरकार ने एकाधिक मौकों पर यह चिंता जाहिर की है कि सोशल मीडिया का अराजक इस्तेमाल खतरनाक है और इस पर निश्चित रूप से रोक लगनी चाहिए। हाल में असम हिंसा में अफवाह और भ्रामक सूचना फैलाने के पीछे भी बड़ा हाथ सोशल मीडिया का रहा है, यह बात अब विभिन्न स्तरों पर पड़ताल के बाद सामने आ... Read more
clicks 184 View   Vote 0 Like   9:15am 9 Sep 2012 #सोशल मीडिया
Blogger: Prem Prakash
अगर देश में महज दो सालों के भीतर एक लाख से ज्यादा बच्चे लापता हुए हैं, तो यह सचमुच एक बड़े खतरे का संकेत है। बच्चों को लेकर परिवार और समाज में बढ़ी असंवेदनशीलता का यह एक क्रूर पक्ष है। भूले नहीं होंगे लोग कि देश में 42 फीसद बच्चों के कुपोषित होने की सचाई का खुलासा करने वाल... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   12:33pm 19 Aug 2012 #बचपन
Blogger: Prem Prakash
 अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव में सौ से भी कम दिन रह गए हैं। जो हालिया सर्वे वहां हुए हैं, उसमें बराक ओबामा अपने प्रतिद्वंद्वी मिट रोमनी पर बढ़त बनाए हुए हैं। आज की तारीख में अमेरिका में अन्य किसी मुद्दे से बड़ा मुद्दा है आर्थिक संकट। तकरीबन 36 फीसद अमेरिकियों को भरोसा ... Read more
clicks 117 View   Vote 0 Like   11:54am 13 Aug 2012 #नस्लवाद
Blogger: Prem Prakash
अपने यहां चुनाव का सीजन कभी खत्म नहीं होता। ग्राम पंचायत और निकाय चुनाव से लेकर आम चुनाव तक कुछ न कुछ हमेशा चलते रहता है। नहीं कुछ तो बीच में सीट खाली होने के कारण उपचुनाव ही हो जाते हैं। यह मांग पुरानी है कि एक समन्वित व्यवस्था बने ताकि कम से कम सारे स्थानीय चुनाव के एक ... Read more
clicks 121 View   Vote 0 Like   12:06pm 5 Aug 2012 #राजनीति
Blogger: Prem Prakash
                         28 जून 2012 को दैनिक छत्तीसगढ़ के संपादकीय पृष्ठ पर पूरबियाका संदेह ... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   11:51am 22 Jul 2012 #पूरबिया
Blogger: Prem Prakash
हिंदी सिनेमा के एक स्टार का कद वास्तविकता से कितना बड़ा हो सकता है, यह सवाल जब भी पूछा जाएगा तो जिक्र सबसे पहले बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना उर्फ काका का ही होगा। काका से पहले फिल्मी स्टारडम की ऐसी दीवानगी अगर किसी कलाकार को लेकर पैदा हुई तो वह केएल सहगल थे। र... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   4:01pm 21 Jul 2012 #राजेश खन्ना
Blogger: Prem Prakash
हिंदी की आलोचकीय बहस में अकसर दो बातों की चर्चा होती है- लोक और परंपरा। हिंदी के निर्माण और इसकी रचना प्रक्रिया में ऐतिहासिक-सामाजिक संदर्भ देखने की तार्किक दरकार पर जोर देने वाले डॉ. रामविलास शर्मा ने जरूर इससे आगे बढ़कर कुछ जातीय तत्वों और सरोकारों पर ध्यान खींचा है... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   10:32am 15 Jul 2012 #सुरेंद्र प्रताप सिंह
Blogger: Prem Prakash
 हिंदी की आलोचकीय बहस में अकसर दो बातों की चर्चा होती है- लोक और परंपरा। हिंदी के निर्माण और इसकी रचना प्रक्रिया में ऐतिहासिक-सामाजिक संदर्भ देखने की तार्किक दरकार पर जोर देने वाले डॉ. रामविलास शर्मा ने जरूर इससे आगे बढ़कर कुछ जातीय तत्वों और सरोकारों पर ध्यान खींचा ह... Read more
clicks 139 View   Vote 0 Like   10:16am 15 Jul 2012 #सुरेंद्र प्रताप सिंह
Blogger: Prem Prakash
रंजिश ही सही दिल को दुखाने के लिए आ, आ फिर मुझे छोड़के जाने के लिए आ'- मेहदी हसन की गाई यह मशहूर गजल उनके इंतकाल के बाद बरबस ही उनके चाहने वालों को याद हो आती है। उनका जन्म 1927 में हुआ तो था भारत में, राजस्थान के लूणा गांव में। पर 1947 में मुल्क के बंटवारे के वक्त वे पाकिस्तान चले ... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   12:13pm 8 Jul 2012 #प्रेम
Blogger: Prem Prakash
रंजिश ही सही दिल को दुखाने के लिए आ, आ फिर मुझे छोड़के जाने के लिए आ'- मेहदी हसन की गाई यह मशहूर गजल उनके इंतकाल के बाद बरबस ही उनके चाहने वालों को याद हो आती है। उनका जन्म 1927 में हुआ तो था भारत में, राजस्थान के लूणा गांव में। पर 1947 में मुल्क के बंटवारे के वक्त वे पाकिस्तान चले ... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   9:37am 8 Jul 2012 #प्रेम
Blogger: Prem Prakash
2009 के मई-जून में जब सफर शुरू किया था 'पूरबिया' का तो अंदाजा नहीं था कि सफर इतना रोचक होगा और समय के साथ यह मेरी पहचान बन जाएगा अब जबकि पूरबिया कोबीस हजार से ज्यादा हिटहासिल हो चुके हैं लोगों की इस सफलता पर शुभकामनाएं मिल रही हैं तो अभिभूत हूं यह देखकर कि लोग एक अक्षर यात्रा... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   7:45am 8 Jul 2012 #प्रकृति
Blogger: Prem Prakash
किसी को अगर यह शिकायत है कि परंपरा, परिवार, संबंध और संवेदना के लिए मौजूदा दौर में स्पेस लगातार कम होते जा रहे हैं, तो उसे नए बाजार बोध और प्रचलन के बारे में जानकारी बढ़ा लेनी चाहिए। जो सालभर हमें याद दिलाते चलते हैं कि हमें कब किसके लिए ग्रीटिंग कार्ड खरीदना है और कब किस... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   9:20am 1 Jul 2012 #मां
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