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Blog: उर्दू से हिंदी

Blogger: आनन्द पाठक
बह्र  मुज़ारे’ मुसम्मन अख़रब मक्फ़ूफ़ महज़ूफ़मफ़ऊलु---फ़ाइलातु----मफ़ाईलु----फ़ाइलुन221   -----2121-------1221-------212------एक ग़ज़ल : दीदार-ए-हक़ में ---दीदार-ए-हक़ में दिल अभी बेदाग़दार करदिल-ए-नातवाँ को और ज़रा बेक़रार  करगुमराह हो रहा है भटक कर इधर उधरइक राह-ए-इश्क़ भी है वही इख़्तियार करकब तक छुपा के दर्द र... Read more
clicks 92 View   Vote 0 Like   4:03am 23 Jul 2020 #
Blogger: आनन्द पाठक
-------------------------------------------------उर्दू बह्र पर एक बातचीत :- क़िस्त 18 [ज़िहाफ़ात][Disclaimer Clause - वही जो क़िस्त -1 में है ]कुछ ज़िहाफ़ ऐसे हैं जो वतद-ए-मफ़रुक़ पर लगते हैंवतद-ए-मफ़रुक़ की परिभाषा पहले भी लिख चुका हूँ ।एक बार फिर लिख रहा हूंवतद-ए-मफ़रुक़ :- वो 3-हर्फ़ी कलमा जिस में पहला हर्फ़ हरकत ,दूसरा हर्फ़ साकिन औ... Read more
clicks 216 View   Vote 0 Like   3:28pm 5 Jan 2017 #
Blogger: आनन्द पाठक
उर्दू बह्र पर एक बातचीत : क़िस्त 17 [ज़िहाफ़ात][Disclaimer Clause  : वही जो क़िस्त 1 में है]{  अभी चर्चा  उन ज़िहाफ़ात के बारे में चल रही है जो उर्दू शायरी में सालिम रुक्न के टुकड़े/खण्ड  [ज़ुज]- वतद-मज्मुआ पर लगते हैं । पिछली क़िस्त [16] में हम ऐसे 5-ज़िहाफ़ का ज़िक़्र कर चुके है ,बाक़ी  5 ज़िहाफ़ पर बातची... Read more
clicks 197 View   Vote 0 Like   1:46pm 3 Jan 2017 #
Blogger: आनन्द पाठक
उर्दू बहर पर एक बातचीत : क़िस्त 16 [ज़िहाफ़ात][ Disclaimer clause ---- वही जो क़िस्त 1 में है ]पिछली क़िस्त में  सालिम अर्कान में ’सबब और उस  पर लगने वाले ज़िहाफ़ का ज़िक़्र कर चुके हैंअब हम ’वतद’ पर लगने वाले ज़िहाफ़ात का ज़िक़्र करेंगे। अगरचे सबब और वतद की परिभाषा लिख चुके हैं। आप की सुविधा के लिए... Read more
clicks 199 View   Vote 0 Like   1:57pm 30 Dec 2016 #
Blogger: आनन्द पाठक
उर्दू बह्र पर एक बातचीत :- क़िस्त 15 [ज़िहाफ़ात][Disclaimer Clause : -वही जो क़िस्त 1 में है-कुछ ज़िहाफ़ ऐसे हैं जो ’सबब-ए-सकील’  [हरकत+हरकत] पर ही लगते हैं  । [सबब-ए-सकील के बारे में पिछली क़िस्त 11 में लिखा  जा चुका है ।एक बार फिर लिख रहा हूं~आप जानते है सबब के 2-भेद होते हैसबब-ए-ख़फ़ीफ़  : वो 2  हर्फ़ी... Read more
clicks 187 View   Vote 0 Like   10:00am 29 Dec 2016 #
Blogger: आनन्द पाठक
------------------------------------------उर्दू बह्र पर एक बातचीत : क़िस्त 14 [ज़िहाफ़ात][Disclaimer Clause - वही जो क़िस्त -1 में है ]-कुछ ज़िहाफ़ ऐसे हैं जो ’सबब-ए-खफ़ीफ़’ [हरकत+साकिन] पर  लगते है ...पिछली कड़ी [क़िस्त 13] में उन ज़िहाफ़ात की चर्चा कर रहे थे जो ’सबब-ए-ख़फ़ीफ़  पर लगते हैं। और इस सिलसिले में हम 3-ज़िहाफ़ मसलन ज़िहाफ़ ’ख़ब... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   10:09am 28 Dec 2016 #
Blogger: आनन्द पाठक
----------उर्दू बह्र पर एक बातचीत : क़िस्त 13 [ज़िहाफ़ात][Disclaimer Clause - वही जो क़िस्त -1 में है ]-कुछ ज़िहाफ़ ऐसे हैं जो ’सबब-ए-खफ़ीफ़’ [हरकत+साकिन] पर  लगते है    फिछल कड़ी [क़िस्त 11 और 12] में ज़िहाफ़ात के बारे में कुछ चर्चा कर चुका हूँ कि ज़िहाफ़ क्या होते है उर्दू शायरी में इस की क्या अहमियत है ,ज़िहाफ़... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   9:30am 26 Dec 2016 #
Blogger: आनन्द पाठक
उर्दू बह्र पर एक बातचीत : क़िस्त 12 [ज़िहाफ़ात][Disclaimer Clause  : वही जो क़िस्त 1 में है]पिछली क़िस्त 11- में उर्दू शायरी में ज़िहाफ़ात की एक लम्बी सूची लगाई थी जिसमे 2 कम 50 ज़िहाफ़ के नाम थे। पर ज़िहाफ़ की लम्बी-चौड़ी सूची देख कर आप घबराइए नहीं- न इतने ज़िहाफ़ आप को याद करने हैं और न इतने ज़िहाफ़ के प्रयो... Read more
clicks 203 View   Vote 0 Like   10:12am 23 Dec 2016 #
Blogger: आनन्द पाठक
उर्दू बहर पर एक बातचीत : क़िस्त 11[ज़िहाफ़ात][नोट : मित्रों ,बहुत दिनों बाद इस मंच पर लौटा हूँ ,बिलम्ब के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ । कुछ तो दीगर काम में व्यस्तता , इसी बीच अपना  रिटायर्मेन्ट  फिर अमेरिका  व ब्राज़ील की यात्रा.... पिताश्री का स्वर्गवास आदि के कारण मंच पर न आ सका। ... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   11:50am 18 Dec 2016 #
Blogger: आनन्द पाठक
एक फ़र्द शे’रवो चराग़ ले के चला तो है, मगर आँधियों का ख़ौफ़ भीमैं सलामती की दुआ करूँ ,उसे हासिल-ए-महताब हो-आनन्द पाठक-... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   2:19pm 15 Nov 2016 #
Blogger: आनन्द पाठक
एक लघु व्यथा  : खाट...खटमल....खून...[व्यंग्य][नोट -आप ने ’बेताल-पच्चीसी’ की कहानियाँ ज़रूर पढ़ी होंगी जिसमें राजा विक्रमादित्य जंगल में , बेताल को डाल से उतार कर,और कंधे पर लाद कर  चलते हैं और बेताल रास्ते भर एक कहानी सुनाते रहता है ।बेताल  शर्त रखता है कि अगर राजा  ने रास्त... Read more
clicks 204 View   Vote 0 Like   9:44am 20 Oct 2016 #
Blogger: आनन्द पाठक
जो जागे हैं मगर उठते नहीं  उनको जगाना क्याखुदी को ख़ुद जगाना है किसी के पास जाना क्यानिज़ाम-ए-दौर-ए-हाज़िर का  बदलने को चले थे तुमबिके कुर्सी की खातिर तुम तो ,फिर झ्ण्डा उठाना क्याज़माने को ख़बर है सब  तुम्हारी लन्तरानी  कीदिखे मासूम से चेहरे ,असल चेहरा छुपाना क्यान चे... Read more
clicks 180 View   Vote 0 Like   1:08pm 14 Oct 2016 #
Blogger: आनन्द पाठक
नहीं उतरेगा अब कोई फ़रिश्ता आसमाँ सेउसे डर लग रहा होगा यहाँ अहल-ए-ज़हाँ सेन कोह-ए-तूर पे उतरेगी कोई रोशनी अबहमी को करनी होगी रोशनी सोज़-ए-निहाँ सेज़माना लद गया जब आदमी में आदमी थाअयाँ होने लगे हैं लोग अब आतिश-ज़ुबाँ सेअभी निकला नहीं है क़ाफ़िला बस्ती से आगेगिला करने लगे हैं लोग ... Read more
clicks 164 View   Vote 0 Like   5:21am 12 Oct 2016 #
Blogger: आनन्द पाठक
एक क़तानशा पैसे का हो या पद का, सर चढ़ बोलता हैबहक जाए कभी तो  राज़-ए-दिल भी खोलता हैबलन्दी आसमां  सी  है  मगर ईमान  बौनाजहाँ ज़र दिख गया  ईमान उसका डोलता हैज़ुबाँ शीरी ,नरम लहजा , हलावत गुफ़्तगू  मेंज़ुबाँ जब खोलता है  तो हलाहिल घोलता हैनशा इतना कि इन्सां को नहीं इन्स... Read more
clicks 203 View   Vote 0 Like   6:05am 6 Oct 2016 #
Blogger: आनन्द पाठक
निक़ाब-ए-रुख में शरमाना, निगाहों का झुकाना क्याख़बर हो जाती है दिल को, दबे पाँवों  से आना क्याअगर हो रूह में ख़ुशबू  तो ख़ुद ही फैल जाएगीज़माने से छुपाना क्या  ,तह-ए-दिल में  दबाना  क्याअगर दिल से नहीं मिलता है दिल तो बात क्या होगीदिखाने के लिए फिर हाथ का मिलना मिलाना क्... Read more
clicks 215 View   Vote 0 Like   8:24am 21 Sep 2016 #
Blogger: आनन्द पाठक
चन्द माहिया : क़िस्त 34 :1:पूछा तो कभी होतादिल से जो मेरेये, किस के लिए रोता ? :2:सोने भी नहीं देतींयादें अब तेरीरोने भी नहीं देतीं :3:क्यों मन से हारे हो ?जीते जी मर करअब किस के सहारे हो? :4:ग़ैरों की सुना करतेमेरी कब सुनतेजो तुम से गिला करते :5:मुश्किल की पहल आएसब्र न खो देनाइक राह निक... Read more
clicks 184 View   Vote 0 Like   2:46pm 17 Sep 2016 #
Blogger: आनन्द पाठक
एक ग़ैर रवायती ग़ज़ल    सपनों में ’लोकपाल’ था  मुठ्ठी में इन्क़लाब ’दिल्ली’ में जा के ’आप’ को क्या हो गया जनाब ! वादे किए थे आप ने ,जुमलों का क्या हुआ अपने का छोड़ और का लेने लगे हिसाब  ? कुछ आँकड़ों में ’आप’ को जन्नत दिखाई दी गुफ़्तार ’आप’ की हुआ करती  है लाजवाब&nb... Read more
clicks 160 View   Vote 0 Like   8:38am 10 Jun 2016 #
Blogger: आनन्द पाठक
:1:जब तुम ने नहीं मानाटूटे रिश्तों कोफिर क्या ढोते जाना:2:मुझ को न गवारा हैख़ामोशी तेरीआ, दिल ने पुकारा है:3:तुम तोड़ गए सपनेऐसा भी होगासोचा ही नहीं हमने :4:क्या वो भी ज़माना थाआँख मिचौली थीतुम से छुप जाना था:5:इक राह अनोखी हैजाना है सब कोपर किसने देखी है-आनन्द पाठक-09413395592... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   6:00am 28 May 2016 #
Blogger: आनन्द पाठक
अगर सोच में तेरी पाकीज़गी हैइबादत सी तेरी  मुहब्बत लगी हैमेरी बुतपरस्ती का जो नाम दे दोमैं क़ाफ़िर नहीं ,वो मेरी बन्दगी हैकई बार गुज़रा हूँ तेरी गली से हर इक बार बढ़ती गई तिश्नगी हैअभी नीमगुफ़्ता है रूदाद मेरीअभी से मुझे नींद आने लगी हैउतर आओ दिल में तो रोशन हो दुनियातुम्... Read more
clicks 187 View   Vote 0 Like   6:00am 28 May 2016 #
Blogger: आनन्द पाठक
:1:माना कि तमाशा हैकार-ए-जहाँ यूँ सबफिर भी इक आशा है:2:दरपन तो दरपन हैझूट नहीं बोलेक्या बोल रहा मन है ?:3:छाई जो घटाएं होंदिल क्यूँ ना बहकेसन्दल सी हवाएं हों:4:जितना देखा है फ़लकउतना ही होगाबातों में सच की झलक:5: कैसा ये नशा ,किसका ?कब देखा उस को ?एहसास है बस जिसका-आनन्द पाठक09413395592... Read more
clicks 197 View   Vote 0 Like   3:24pm 14 Apr 2016 #
Blogger: आनन्द पाठक
चन्द माहिया : क़िस्त 30:1:तुम से जो जुड़ना हैइस का मतलब तोअपने से बिछुड़ना है:2:आने को तो आ जाऊँरोक रहा कोईमैं कैसे ठुकराऊँ:3:इक लफ़्ज़ मुहब्बत हैजिसकी ख़ातिर मेंदुनिया से अदावत है:4;दीदार हुआ जब सेजो भी रहा बाक़ीईमान गया तब से:5:जब तू ही मिरे दिल मेंढूँढ रहा किस कोमैं महफ़िल महफ़िल में... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   3:21pm 10 Mar 2016 #
Blogger: आनन्द पाठक
यूँ तो तेरी गली से , मैं बार  बार गुज़रालेकिन हूँ जब भी गुज़रा ,मैं सोगवार गुज़रातुमको यकीं न होगा ,गर दाग़-ए-दिल दिखाऊँराहे-ए-तलब में कितना ,गर्द-ओ-गुबार गुज़राआते नहीं हो अब तुम ,क्या हो गया है तुमकोक्या कह गया हूँ ऐसा ,जो नागवार  गुज़रादामन बचा बचा कर ,मेरे मकां से बच करराह-ए-... Read more
clicks 191 View   Vote 0 Like   2:40pm 5 Mar 2016 #
Blogger: आनन्द पाठक
इलाही ! कैसा मंज़र है, हमें दिन रात छलता हैकहीं धरती रही प्यासी ,कहीं  बादल मचलता हैकभी जब सामने उस ने कहीं इक आइना देखान जाने देख कर क्यूँ रास्ता अपना  बदलता हैबुलन्दी आसमां की नाप कर भी आ गए ताईरइधर तू बैठ कर खाली ख़याली  चाल चलता हैहथेली की लकीरों पर तुम्हें इतना भरो... Read more
clicks 179 View   Vote 0 Like   6:08am 21 Feb 2016 #
Blogger: आनन्द पाठक
:1:दीवार उठाते होतनहा जब होतेफिर क्यूँ घबराते हो :2:इतना भी सताना क्यादम ही निकल जाएफिर बाद में आना क्या:3;ये हुस्न ये रानाईतड़पेगी यूं हीगर हो न पज़ीराई:4:दुनिया के जो हैं ग़मइश्क़ में ढल जाएबदलेगा तब मौसम;5;क्या हाल बताना हैतेरे फ़साने में मेरा भी फ़साना है -आनन्द.पाठक-09413395592... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   6:12am 18 Feb 2016 #
Blogger: आनन्द पाठक
एक ग़ैर रवायती ग़म-ए-दौरां की ग़ज़ल......कहाँ तक रोकता दिल को कि जब होता दिवाना हैज़माने  से    बगावत   है ,  नया आलम   बसाना हैमशालें   इल्म की  लेकर  चले थे  रोशनी करनेअरे ! क्या हो गया तुमको कि अपना घर जलाना है ?यूँ जिनके शह पे कल तुमने एलान-ए-जंग कर दी थीकि उनका एक ही मक़... Read more
clicks 165 View   Vote 0 Like   6:17am 16 Feb 2016 #
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