POPULAR ENGLISH+ SIGNUP LOGIN

Blog: गीत ग़ज़ल और माहिया

Blogger: आनन्द पाठक
फ़’लुन--फ़े’लुन---फ़े’लुन --फ़े’लुन122---122------122----122बह्र-ए-मुतक़ारिब मुसम्मन सालिम-------------------ग़ज़ल 145 : लगे दाग़ दामन पे--लगे दाग़ दामन पे , जाओगी कैसे ?बहाने भी क्या क्या ,बनाओगी कैसे ?चिराग़-ए-मुहब्बत बुझा तो रही होमगर याद मेरी मिटाओगी  कैसे ?शराइत हज़ारों यहाँ ज़िन्दगी  केभला तुम अकेले निभाओ... Read more
clicks 126 View   Vote 0 Like   11:09am 11 Mar 2020 #कविता
Blogger: आनन्द पाठक
ग़ज़ल 142 : आप से क्या मिले---आप से क्या मिले ,फिर न ख़ुद से मिलेउम्र भर को मिले दर्द के  सिलसिलेवो निगाहे झुकीं, फिर उठीं. फिर झुकींख़्वाब दिल में न पूछो कि क्या क्या खिलेतुम गले से लगा लो अगर प्यार सेदूर हो जाएँगे सारे शिकवे  गिलेउसने नफ़रत से आगे पढ़ा ही नहींफिर दिलों के मिटें... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   6:56am 23 Jan 2020 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक
2122---1212--112/22एक ग़ज़ल : गर्द दिल से अगर--गर्द दिल से अगर उतर जाएज़िन्दगी और भी  निखर जाएकोई दिखता नहीं  सिवा तेरेदूर तक जब मेरी नज़र जाएतुम पुकारो अगर मुहब्बत सेदिल का क्या है ,यहीं ठहर जाएडूब जाऊँ तेरी निगाहों मेंयह भी चाहत कहीं न मर जाएएक हसरत तमाम उम्र रहीमेरी तुहमत न उसके सर ... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   6:59am 11 Jan 2020 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक
212---212---212---212फ़ाइलुन---फ़ाइलुन--फ़ाइलुन--फ़ाइलुनबह्र-ए-मुतदारिक मुसम्मन सालिम---------एक ग़ज़ल : आदमी का कोई अब---आदमी का कोई अब भरोसा नहींवह कहाँ तक गिरेगा ये सोचा नहीं’रामनामी’ भले ओढ़ कर घूमताकौन कहता है देगा  वो धोखा नहींप्यार की रोशनी से वो महरूम हैखोलता अपना दर या दरीचा नहींउनके व... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   5:39am 9 Jan 2020 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक
212---212---22फ़ाइलुन--फ़ाइलुन--फ़े’लुनबह्र-ए-मुतदारिक मुसद्दस मक़्तूअ’ अल आख़िर ---------------एक ग़ज़ल 139 : दिल में जो अक्स है उतरा--दिल में  इक अक्स जब उतरादूसरा  फिर कहाँ  उभराबारहा दिल मेरा  टूटाटूट कर भी नहीं बिखराकौन वादा निभाता  है कौन है क़ौल पर ठहरा ?शम्मअ’ हूँ ,जलना क़िस्मत में... Read more
clicks 119 View   Vote 0 Like   6:09am 26 Dec 2019 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक
मूल बहर  112---112---112---112-फ़अ’लुन ----फ़अ’लुन---फ़अ’लुन--फ़अ’लुनबहर-ए-मुतदारिक मुसम्मन मख़्बून -----एक ग़ज़ल 138 : दिल ख़ुद ही तुम्हारा आदिल है --दिल ख़ुद ही तुम्हारा आदिल हैसमझो क्या सच क्या बातिल हैउँगली तो उठाना  है   आसाँकब कौन यहाँ पर कामिल हैटूटी कश्ती, हस्ती मेरीदरिया है ,ग़म है, साहि... Read more
clicks 117 View   Vote 0 Like   5:46am 26 Dec 2019 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक
212---212----212----212- फ़ाइलुन--फ़ाइलुन--फ़ाइलुन--फ़ैलुन-------------क्या कहूँ मैने किस पे लिखी है ग़ज़लसोच जिसकी थी जैसी ,पढ़ी है ग़ज़लदौर-ए-हाज़िर की हो रोशनी या धुँआसामने आइना  रख गई है  ग़ज़ल  लोग ख़ामोश हैं खिड़कियाँ बन्द करराह-ए-हक़ मे खड़ी थी ,खड़ी है ग़ज़लवो तक़ारीर नफ़रत का करते रहेप्यार की लौ जगाती ... Read more
clicks 108 View   Vote 0 Like   6:18am 23 Dec 2019 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक
ग़ज़ल 1361222---1222---1222---1222तुम्हारे हुस्न का जल्वा ,  ख़ुदा रख्खे हिफ़ाज़त मेंये रश्क़-ए-माह-ए-कामिल है,क़मर जलता अदावत मेंतेरी उल्फ़त ज़ियादा तो मेरी उलफ़त है क्या कमतरज़ियादा कम का मसला तो नहीं होता है उल्फ़त मेंपहाडों से चली नदियाँ बना कर रास्ता अपनातो डरना क्या  ,फ़ना होना है जब राह-ए-मु... Read more
clicks 99 View   Vote 0 Like   11:46am 21 Dec 2019 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक
फ़ऊलुन---फ़ऊलुन---फ़ऊलुन--फ़ऊलुन122-------122------122-------122बह्र-ए-मुतक़ारिब मुसम्मन सालिम--------------ग़ज़ल  : तेरे हुस्न की सादगी---तेरे हुस्न की  सादगी  का असर हैन मैं होश में हूँ ,न दिल की ख़बर हैयूँ चेहरे से पर्दा   गिराना ,उठानाइसी दम से होता है शाम-ओ-सहर हैसवाब-ओ-गुनह का मै इक सिलसिला हूँअमलन... Read more
clicks 108 View   Vote 0 Like   5:52am 4 Dec 2019 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक
फ़ऊलुन--फ़ऊलुन--फ़ऊलुन--फ़ऊलुन122-------122------122------122बह्र-ए-मुतक़ारिब मुसम्मन सालिम ---------------एक ग़ज़ल : नहीं जानता हूँ कौन हूँ--नहीं जानता  कौन हूँ ,मैं कहाँ हूँउन्हें ढूँढता मैं  यहाँ   से वहाँ  हूँतुम्हारी ही  तख़्लीक़ का आइना बनअदम से हूँ निकला वो नाम-ओ-निशाँ हूँबहुत कुछ था कहना ,नह... Read more
clicks 102 View   Vote 0 Like   6:08am 2 Dec 2019 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक
2122--        -1212--     --22फ़ाइलातुन---मफ़ाइलुन---फ़े’लुनएक ग़ज़ल : मेरे जानाँ --मेरे जानाँ ! न आजमा  मुझकोजुर्म किसने किया ,सज़ा मुझकोजिन्दगी तू ख़फ़ा ख़फ़ा क्यूँ हैक्या है मेरी ख़ता ,बता  मुझकोयूँ तो कोई नज़र नहीं  आताकौन फिर दे रहा सदा मुझकोनासबूरी की इंतिहा क्या  हैज़िन्दगी तू ... Read more
clicks 102 View   Vote 0 Like   11:53am 28 Nov 2019 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक
122---122---122---122फ़ऊलुन---फ़ऊलुन--फ़ऊलुन--फ़ऊलुनबह्र-ए-मुतक़ारिब मुसम्मन सालिम---------एक ग़ज़ल : भले ज़िन्दगी से हज़ारों ---भले ज़िन्दगी से  हज़ारों शिकायतजो कुछ मिला है उसी की इनायतफ़ऊलुन---फ़ऊलुन--फ़ऊलुन--फ़ऊलुनबह्र-ए-मुतक़ारिब मुसम्मन सालिमये हस्ती न होती ,तो होते  कहाँ सबफ़राइज़ , शराइत ,ये रस्म-ओ-... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   5:10am 11 Nov 2019 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक
एक ग़ज़ल : झूठ इतना इस तरह ---2122---2122---212झूठ इतना इस तरह  बोला  गयासच के सर इलजाम सब थोपा गयाझूठ वाले जश्न में डूबे  रहे -और सच के नाम पर रोया गयावह तुम्हारी साज़िशें थी या वफ़ाराज़ यह अबतक नहीं खोला गयाआइना क्यों देख कर घबरा गएआप ही का अक्स था जो छा गयाकैसे कह दूँ तुम नहीं शामिल र... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   5:18am 9 Nov 2019 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक
दीपावली पर विशेष-------एक गीत : आओ कुछ दीप हम जलाएँ---एक अमा और हम मिटाएँआओ कुछ दीप हम जलाएँखुशियाँ उल्लास साथ लेकरयुग युग से आ रही दिवालीकितना है मिट सका अँधेराकितनी दीपावली  मना  लीअन्तस में हो घना अँधेरा ,आशा की किरण हम जगाएँ,आओ कुछ दीप हम जलाएँनफ़रत की हवा बह रही हैऔर इध... Read more
clicks 80 View   Vote 0 Like   6:38am 26 Oct 2019 #गीत
Blogger: आनन्द पाठक
221----2122---// 221--2122ग़ज़ल’क़ानून की नज़र में ,सब एक हैं ’-बता कररखते रसूख़वाले  , पाँवो  तले दबा करकल तक जहाँ खड़ा था ,"बुधना"वहीं खड़ा हैलूटा है रहबरों  ने,सपने  दिखा दिखा  करजब आम आदमी की आँखों में हों शरारेकर दे नया सवेरा ,सूरज नया  उगा करक्या सोच कर गए थे ,तुम आइना दिखानेअंधों की ... Read more
clicks 99 View   Vote 0 Like   6:09am 21 Oct 2019 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक
2122---2122---2122फ़ाइलातुन--फ़ाइलातुन--फ़ाइलातुनबह्र-ए-रमल मुसद्दस सालिम--------------------------एक ग़ज़ल : दुश्मनी कब तक-----दुश्मनी कब तक निभाओगे कहाँ तक  ?आग में खुद को जलाओगे  कहाँ  तक  ?है किसे फ़ुरसत  तुम्हारा ग़म सुने जोरंज-ओ-ग़म अपना सुनाओगे कहाँ तक ?नफ़रतों की आग से तुम खेलते होपैरहन अपना बचा... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   1:28pm 19 Oct 2019 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक
212---212---22फ़ाइलुन--फ़ाइलुन--फ़अ’लुनबह्र-ए-मुत्दारिक मुसद्दस सालिम मक़्तूअ’-----इश्क़ करना ख़ता क्यों है ?इश्क़ है तो छुपा  क्यों है ?जाविदाँ हुस्न है  उनकाइश्क़ फिर नारवा क्यों है?बाब-ए-दिल गर खुला है तोलौट आती सदा क्यों है ?ज़िन्दगी बस बता मुझकोबेसबब तू ख़फ़ा क्यों है ?आब-ओ-गिल से बने ह... Read more
clicks 85 View   Vote 0 Like   11:57am 17 Oct 2019 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक
21----121---121---122बह्र-ए-मुतक़ारिब असरम मक़्बूज़  मक़्बूज़ सालिम-----------एक ग़ज़लसब को अपनी अपनी पड़ी हैमन-आँगन  दीवार  खड़ी  हैअच्छे दिन कैसे आएँगे  ?सत्ता ही जब ख़ुद लँगड़ी  हैराह नुमाई  क्या करता ,वोनाक़ाबिल है ,सोच सड़ी  हैकैसे उतरे चाँद  गगन  से ?राहू-छाया द्वार  खड़ी   हैबिन ... Read more
clicks 89 View   Vote 0 Like   5:44am 14 Oct 2019 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक
1222---1222---1222---1222मुफ़ाईलुन--मुफ़ाईलुन---मुफ़ाईलुन---मुफ़ाईलुनबह्र-ए-हज़ज मुसम्मन सालिम-------------------------------एक ग़ज़लमैं अपना ग़म सुनाता हूँ ,वो सुन कर मुस्कराते हैंवो मेरी दास्तान-ए-ग़म को ही नाक़िस बताते हैंबड़े मासूम नादाँ हैं  ,खुदा कुछ अक़्ल दे उनकोकिसी ने कह दिया "लव यू" ,उसी पर जाँ लुटाते हैंख़... Read more
clicks 88 View   Vote 0 Like   6:20am 13 Sep 2019 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक
2122-----1222फ़ाअ’लातुन---मुफ़ाईलुनबह्र-ए-मुशाकिल मुरब्ब: सालिम-----------------------ग़ज़ल :  जान-ए-जानाँ से क्या माँगूजान-ए-जानां से  क्या  माँगूदर्द-ए-दिल की दवा माँगूहुस्न उनका क़यामत हैदाइमी की  दुआ  माँगूक़ैद हूँ जुर्म-ए-उल्फ़त मेंउम्र भर की सज़ा  माँगूज़िन्दगी भर नहीं  उतरेइश्क़ का व... Read more
clicks 63 View   Vote 0 Like   4:51am 11 Sep 2019 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक
              1ज़ह्र ही बस फ़िज़ा में घोलता  हैजब कभी हक़ में हमारे बोलता हैजो हरे थे जख़्म भरने लग गए थेहर चुनावी दौर में वो खोलता है          2दावा करते हैं वो सूरज नया निकलने कानई दिशा में ,नई राह पर लेकर चलने कालेकिन काली रात अभी तो ढली नहीं, साथी !थमा नहीं है अभी सि... Read more
clicks 62 View   Vote 0 Like   5:50am 4 Sep 2019 #
Blogger: आनन्द पाठक
चन्द माहिया : क़िस्त 61:1:गुलशन की हवाओं मेंज़ह्र भरा किसनेहर बार चुनावों में:2:दर्या ,परबत,झरनाचाँद सितारे सबये किसकी है रचना:3:कलियाँ सकुची सहमीचश्म-ए-बद किसकीआकर इन पर ठहरी:4:जितनी है तपिश बाहरप्रेम अगन मन कीउतनी ही तपिश अन्दर;5:दिल मेरा फ़क़ीरानाछोड़ तेरा अब दरजाना तो किधर जा... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   5:18am 28 Jun 2019 #
Blogger: आनन्द पाठक
चन्द माहिया : क़िस्त 60:1:हूरों की जीनत मेंडूबा है ज़ाहिदकुछ ख़्वाब-ए-जन्नत में:2:घिर घिर आए बदराबादल बरसा भीभींगा न मेरा अँचरा:3:ग़ैरों की बातों कोमान लिया तूनेसच,झूठी बातों को:4:इतना ही फ़साना हैफ़ानी दुनिया मेजाना और आना है:5:तुम कहती, हम सुनतेबीत गए वो दिनथे साथ सपन बुनते-आनन्द.प... Read more
clicks 67 View   Vote 0 Like   5:15am 28 Jun 2019 #
Blogger: आनन्द पाठक
ग़ज़ल 1241222---1222---1222---122मफ़ाईलुन---मफ़ाईलुन--मफ़ाईलुन---फ़ऊलुनसलामत पाँव है जिनके वो कन्धों पर टिके हैंजो चल सकते थे अपने दम ,अपाहिज से दिखे हैंकि जिनके कद से भी ऊँचे "कट-आउट’ हैं नगर मेंजो भीतर झाँक कर देखा बहुत नीचे गिरे हैंबुलन्दी आप की माना कि सर चढ़  बोलती  हैमगर ये क्या क... Read more
clicks 71 View   Vote 0 Like   12:33pm 26 Jun 2019 #संभावना
Blogger: आनन्द पाठक
मफ़ऊलु--मफ़ाईलुन  // मफ़ऊलु---मफ़ाईलुन221--1222  //  221---1222एक ग़ज़ल : साज़िश थी अमीरों की--साज़िश थी अमीरों की ,फाईल में दबी होगीदो-चार मरें होंगे  ,’कार ’ उनकी  चढ़ी  होगी’साहब’ की हवेली है ,सरकार भी ताबे’ मेंइक बार गई ’कम्मो’ लौटी न कभी  होगीआँखों का मरा पानी , तू भी तो मरा होगाआँगन म... Read more
clicks 83 View   Vote 0 Like   5:26am 25 Jun 2019 #संभावना
[ Prev Page ] [ Next Page ]

Share:

Members Login

    Forget Password? Click here!
  • Latest
  • Week
  • Month
  • Year
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3991) कुल पोस्ट (194981)